कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
प्रथमकाण्डे अष्टमः प्रश्नः

कांड १ प्रश्न ८
राजसूयः

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
अनु॑मत्या॒ इत्यनु॑—म॒त्यै॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। धे॒नुः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ये⁠। प्र॒त्यञ्चः॑⁠। शम्या॑याः⁠। अ॒व॒शीय॑न्त॒ इत्य॑व—शीय॑न्ते⁠। तम्⁠। नै॒र्॒‌ऋ॒तमिति॑ नैः—ऋ॒तम्⁠। एक॑कपाल॒मित्येक॑—क॒पा॒ल॒म्⁠। कृ॒ष्णम्⁠। वासः॑⁠। कृ॒ष्णतू॑ष॒मिति॑ कृ॒ष्ण—तू॒ष॒म्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वीति॑⁠। इ॒हि॒⁠। स्वाहा᳚⁠। आहु॑ति॒मित्या—हु॒ति॒म्⁠। जु॒षा॒णः⁠। ए॒षः⁠। ते॒⁠। नि॒र्॒‌ऋ॒त॒ इति॑ निः—ऋ॒ते॒⁠। भा॒गः⁠। भूते᳚⁠। ह॒विष्म॑ती⁠। अ॒सि॒⁠। मु॒ञ्च⁠। इ॒मम्⁠। अꣳह॑सः⁠। स्वाहा᳚⁠। नमः॑⁠। यः⁠। इ॒दम्⁠। च॒कार॑⁠। आ॒दि॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। वरः॑⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒ग्ना॒वै॒ष्ण॒वमित्या᳚ग्ना—वै॒ष्ण॒वम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। वा॒म॒नः⁠। व॒ही⁠। दख्‍षि॑णा⁠। अ॒ग्नी॒षो॒मीय॒मित्य॑ग्नी—सो॒मीय᳚म्⁠। १ (५०) [१] एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। हिर॑ण्यम्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। ऋ॒ष॒भः⁠। व॒ही⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। दधि॑⁠। ऋ॒ष॒भः⁠। व॒ही⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ऐ॒न्द्रा॒ग्नमित्यै᳚न्द्र—अ॒ग्नम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। वै॒श्व॒दे॒वमिति॑ वैश्व—दे॒वम्⁠। च॒रुम्⁠। प्र॒थ॒म॒ज इति॑ प्रथम—जः⁠। व॒थ्सः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सौ॒म्यम्⁠। श्या॒मा॒कम्⁠। च॒रुम्⁠। वासः॑⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सर॑स्वत्यै⁠। च॒रुम्⁠। सर॑स्वते⁠। च॒रुम्⁠। मि॒थु॒नौ⁠। गावौ᳚⁠। दख्‍षि॑णा [२] (अ॒ग्नी॒षो॒मीयं॒चतु॑स्त्रिꣳशच्च) ॥१॥
आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सौ॒म्यम्⁠। च॒रुम्⁠। सा॒वि॒त्रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। सा॒र॒स्व॒तम्⁠। च॒रुम्⁠। पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। मा॒रु॒तम्⁠। स॒प्तक॑पाल॒मिति॑ स॒प्त—क॒पा॒ल॒म्⁠। वै॒श्व॒दे॒वीमिति॑ वैश्व—दे॒वीम्⁠। आ॒मिख्‍षा᳚म्⁠। द्या॒वा॒पृ॒थि॒व्य॑मिति॑ द्यावा—पृ॒थि॒व्य᳚म्⁠। एक॑कपाल॒मित्येक॑—क॒पा॒ल॒म्⁠॥ ३ (१८) (आ॒ग्ने॒यꣳ सौ॒म्यं मा॑रु॒त—म॒ष्टाद॑श) (आ२) [३]
ऐ॒न्द्रा॒ग्नमित्यै᳚न्द्र—अ॒ग्नम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। मा॒रु॒तीम्⁠। आ॒मिख्‍षा᳚म्⁠। वा॒रु॒णीम्⁠। आ॒मिख्‍षा᳚म्⁠। का॒यम्⁠। एक॑कपाल॒मित्येक॑—क॒पा॒लं॒⁠। प्र॒घा॒स्या॑निति॑ प्र—घा॒स्या॑न्⁠। ह॒वा॒म॒हे॒⁠। म॒रुतः॑⁠। य॒ज्ञवा॑हस॒ इति॑ य॒ज्ञ—वा॒ह॒सः॒⁠। क॒रं॒भेण॑⁠। स॒जोष॑स॒ इति॑ स—जोष॑सः⁠॥ मो इति॑⁠। स्विति॑⁠। नः॒⁠। इ॒न्द्र॒⁠। पृ॒थ्स्विति॑ पृत्—सु⁠। दे॒व॒⁠। अस्तु॑⁠। स्म॒⁠। ते॒⁠। शु॒ष्मि॒न्न्⁠। अ॒व॒या⁠॥ म॒ही⁠। हि⁠। अ॒स्य॒⁠। मी॒ढुषः॑⁠। य॒व्या⁠॥ ह॒विष्म॑तः⁠। म॒रुतः॑⁠। वन्द॑ते⁠। गीः⁠॥ यत्⁠। ग्रामे᳚⁠। यत्⁠। अर॑ण्ये⁠। यत्⁠। स॒भाया᳚म्⁠। यत्⁠। इ॒न्द्रि॒ये⁠॥ यत्⁠। शू॒द्रे⁠। यत्⁠। अ॒र्ये᳚⁠। एनः॑⁠। च॒कृ॒म⁠। व॒यम्⁠॥ यत्⁠। एक॑स्य⁠। अधीति॑⁠। धर्म॑णि⁠। तस्य॑⁠। अ॒व॒यज॑न॒मित्य॑व—यज॑नम्⁠। अ॒सि॒⁠। स्वाहा᳚⁠॥ अक्र॑न्न्⁠। कर्म॑⁠। क॒र्म॒कृत॒ इति॑ कर्म—कृतः॑⁠। स॒ह⁠। वा॒चा⁠। म॒यो॒भु॒वेति॑ मयः—भु॒वा⁠॥ दे॒वेभ्यः॑⁠। कर्म॑⁠। कृ॒त्वा⁠। अस्त᳚म्⁠। प्रेति॑⁠। इ॒त॒⁠। सु॒दा॒न॒व॒ इति॑ सु—दा॒न॒वः॒ [४] (व॒यय्ँयद्वि॑ꣳश॒तिश्च॑) ॥३॥
अ॒ग्नये᳚⁠। अनी॑कवत॒ इत्यनी॑क—व॒ते॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सा॒कम्⁠। सूर्ये॑ण⁠। उ॒द्य॒तेत्यु॑त्—य॒ता⁠। म॒रुद्भ्य॒ इति॑ म॒रुत्—भ्यः॒⁠। सा॒न्त॒प॒नेभ्य॒ इति॑ सां—त॒प॒नेभ्यः॑⁠। म॒द्ध्यन्दि॑ने⁠। च॒रुम्⁠। म॒रुद्भ्य॒ इति॑ म॒रुत्—भ्यः॒⁠। गृ॒ह॒मे॒धिभ्य॒ इति॑ गृहमे॒धि—भ्यः॒⁠। सर्वा॑साम्⁠। दु॒ग्धे⁠। सा॒यम्⁠। च॒रुम्⁠। पू॒र्णा⁠। द॒र्वि॒⁠। परेति॑⁠। प॒त॒⁠। सुपू॒र्णेति॒ सु—पू॒र्णा॒⁠। पुनः॑⁠। एति॑⁠। प॒त॒⁠॥ व॒स्ना⁠। इ॒व॒⁠। वीति॑⁠। क्री॒णा॒व॒है॒⁠। इष᳚म्⁠। ऊर्ज᳚म्⁠। श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शत—क्र॒तो॒⁠॥ दे॒हि⁠। मे॒⁠। ददा॑मि⁠। ते॒⁠। नीति॑⁠। मे॒⁠। धे॒हि॒⁠। नीति॑⁠। ते॒⁠। द॒धे॒⁠॥ नि॒हार॒मिति॑ नि—हार᳚म्⁠। इत्⁠। नीति॑⁠। मे॒⁠। ह॒र॒⁠। नि॒हार॒मिति॑ नि—हार᳚म्⁠। ५ (५०) [५] (ह॒रा॒ नि॒हारं॑त्रि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥४॥
नीति॑⁠। ह॒रा॒मि॒⁠। ते॒⁠॥ म॒रुद्भ्य॒ इति॑ म॒रुत्—भ्यः॒⁠। क्री॒डिभ्य॒ इति॑ क्री॒डि—भ्यः॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। स॒प्तक॑पाल॒मिति॑ स॒प्त—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सा॒कम्⁠। सूर्ये॑ण⁠। उ॒द्य॒तेत्यु॑त्—य॒ता⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सौ॒म्यम्⁠। च॒रुम्⁠। सा॒वि॒त्रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। सा॒र॒स्व॒तम्⁠। च॒रुम्⁠। पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। ऐ॒न्द्रा॒ग्नमित्यै᳚न्द्र—अ॒ग्नम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। च॒रुम्⁠। वै॒श्व॒क॒र्म॒णमिति॑ वैश्व—क॒म॒र्णम्⁠॥ एक॑कपाल॒मित्येक॑—क॒पा॒ल॒म्⁠। ६(३०) सोमा॑य⁠। पि॒तृ॒मत॒ इति॑ पितृ—मते᳚⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। षट्क॑पाल॒मिति॒ षट्—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। पि॒तृभ्य॒ इति॑ पि॒तृ—भ्यः॒⁠। ब॒र्॒‌हि॒षद्भ्य॒ इति॑ बर्‌हि॒षद्—भ्यः॒⁠। धा॒नाः⁠। पि॒तृभ्य॒ इति॑ पि॒तृ—भ्यः॒⁠। अ॒ग्नि॒ष्वा॒त्तेभ्य॒ इत्य॑ग्नि—स्वा॒त्तेभ्यः॑⁠। अ॒भि॒वा॒न्या॑या॒ इत्य॑भि—वा॒न्या॑यै⁠। दु॒ग्धे⁠। म॒न्थम्⁠। ए॒तत्⁠। ते॒⁠। त॒त॒⁠। ये⁠। च॒⁠। त्वाम्⁠। अन्विति॑⁠। ए॒तत्⁠। ते॒⁠। पि॒ता॒म॒ह॒⁠। प्र॒पि॒ता॒म॒हेति॑ प्र—पि॒ता॒म॒ह॒⁠। ये⁠। च॒⁠। त्वाम्⁠। अन्विति॑⁠। अत्र॑⁠। पि॒त॒रः॒⁠। य॒था॒भा॒गमिति॑ यथा—भा॒गम्⁠। म॒न्द॒द्ध्व॒म्⁠। सु॒स॒न्दृश॒मिति॑ सु—स॒न्दृश᳚म्⁠। त्वा॒⁠। व॒यम्⁠। मघ॑व॒न्निति॒ मघ॑—व॒न्न्⁠। म॒न्दि॒षी॒महि॑⁠॥ प्रेति॑⁠। नू॒नम्⁠। पू॒र्णव॑न्धुर॒ इति॑ पू॒र्ण—व॒न्धु॒रः॒⁠। स्तु॒तः⁠। या॒सि॒⁠। वशा॑न्⁠। अनु॑⁠॥ योजा᳚⁠। नु⁠। इ॒न्द्र॒⁠। ते॒⁠। हरी॒ इति॑ [७] अख्‍ष॑न्न्⁠। अमी॑मदन्त⁠। हि⁠। अवेति॑⁠। प्रि॒याः⁠। अ॒धू॒ष॒त॒⁠॥ अस्तो॑षत⁠। स्वभा॑नव॒ इति॒ स्व—भा॒न॒वः॒⁠। विप्राः᳚⁠। नवि॑ष्ठया⁠। म॒ती⁠॥ योजा᳚⁠। नु⁠। इ॒न्द्र॒⁠। ते॒⁠। हरी॒ इति॑⁠॥ अख्‍ष॑न्न्⁠। पि॒तरः॑⁠। अमी॑मदन्त⁠। पि॒तरः॑⁠॥ अती॑तृपन्त⁠। पि॒तरः॑⁠। अमी॑मृजन्त⁠। पि॒तरः॑⁠। परेति॑⁠। इ॒त॒⁠। पि॒त॒रः॒⁠। सो॒म्याः॒⁠। गं॒भी॒रैः⁠। प॒थिभि॒रिति॑ प॒थि—भिः॒⁠। पू॒र्व्यैः⁠॥ अथ॑⁠। पि॒तॄन्⁠। सु॒वि॒दत्रा॒निति॑ सु—वि॒दत्रा॑न्⁠। अपीति॑⁠। इ॒त॒⁠। य॒मेन॑⁠। ये⁠। स॒ध॒माद॒मिति॑ सध—माद᳚म्⁠। मद॑न्ति⁠॥ मनः॑⁠। नु⁠। एति॑⁠। हु॒वा॒म॒हे॒⁠। ना॒रा॒श॒ꣳ॒सेन॑⁠। स्तोमे॑न⁠। पि॒तृ॒णाम्⁠। च॒⁠। मन्म॑भि॒रिति॒ मन्म॑—भिः॒⁠॥ एति॑⁠। ८ (५०) [८] नः॒⁠। ए॒तु॒⁠। मनः॑⁠। पुनः॑⁠। क्रत्वे᳚⁠। दख्‍षा॑य⁠। जी॒वसे᳚⁠॥ ज्योक्⁠। च॒⁠। सूर्य᳚म्⁠। दृ॒शे⁠॥ पुनः॑⁠। नः॒⁠। पि॒तरः॑⁠। मनः॑⁠। ददा॑तु⁠। दैव्यः॑⁠। जनः॑⁠॥ जी॒वम्⁠। व्रात᳚म्⁠। स॒चे॒म॒हि॒⁠॥ यत्⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। उ॒त⁠। द्याम्⁠। यत्⁠। मा॒तर᳚म्⁠। पि॒तर᳚म्⁠। वा॒⁠। जि॒हि॒ꣳ॒सि॒म⁠॥ अ॒ग्निः⁠। मा॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। एन॑सः⁠। गार्‌ह॑पत्य॒ इति॒ गार्‌ह॑—प॒त्यः॒⁠। प्रेति॑⁠। मु॒ञ्च॒तु॒⁠। दु॒रि॒तेति॑ दुः—इ॒ता⁠। यानि॑⁠। च॒कृ॒म⁠। क॒रोतु॑⁠। माम्⁠। अ॒ने॒नस᳚म् [९] (हरी॒मन्म॑भि॒राचतु॑श्चत्वारिꣳशच्च) ॥५॥
प्र॒ति॒पू॒रु॒षमिति॑ प्रति—पू॒रु॒षम्⁠। एक॑कपाला॒नित्येक॑—क॒पा॒ला॒न्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। एक᳚म्⁠। अति॑रिक्त॒मित्यति॑—रि॒क्त॒म्⁠। याव॑न्तः⁠। गृ॒ह्याः᳚⁠। स्मः⁠। तेभ्यः॑⁠। कम्⁠। अ॒क॒र॒म्⁠। प॒शू॒नाम्⁠। शर्म॑⁠। अ॒सि॒⁠। शर्म॑⁠। यज॑मानस्य⁠। शर्म॑⁠। मे॒⁠। य॒च्छ॒⁠। एकः॑⁠। ए॒व⁠। रु॒द्रः⁠। न⁠। द्वि॒तीया॑य⁠। त॒स्थे॒⁠। आ॒खुः⁠। ते॒⁠। रु॒द्र॒⁠। प॒शुः⁠। तम्⁠। जु॒ष॒स्व॒⁠। ए॒षः⁠। ते॒⁠। रु॒द्र॒⁠। भा॒गः⁠। स॒ह⁠। स्वस्रा᳚⁠। अंबि॑कया⁠। तम्⁠। जु॒ष॒स्व॒⁠। भे॒ष॒जम्⁠। गवे᳚⁠। अश्वा॑य⁠। पुरु॑षाय⁠। भे॒ष॒जम्⁠। अथो॒ इति॑⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। भे॒ष॒जम्⁠। सुभे॑षज॒मिति॒ सु—भे॒ष॒ज॒म्⁠। १० (५०) [१०] यथा᳚⁠। अस॑ति⁠॥ सु॒गमिति॑ सु—गम्⁠। मे॒षाय॑⁠। मे॒ष्यै᳚⁠। अवेति॑⁠। अं॒ब॒⁠। रु॒द्रम्⁠। अ॒दि॒म॒हि॒⁠। अवेति॑⁠। दे॒वम्⁠। त्र्यं॑बक॒मिति॒ त्रि—अं॒ब॒क॒म्⁠॥ यथा᳚⁠। नः॒⁠। श्रेय॑सः⁠। कर॑त्⁠। यथा᳚⁠। नः॒⁠। वस्य॑सः⁠। कर॑त्⁠। यथा᳚⁠। नः॒⁠। प॒शु॒मत॒ इति॑ पशु—मतः॑⁠। कर॑त्⁠। यथा᳚⁠। नः॒⁠। व्य॒व॒सा॒यया॒दिति॑ वि—अ॒व॒सा॒यया᳚त्⁠॥ त्र्यं॑बक॒मिति॒ त्रि—अं॒ब॒क॒म्⁠। य॒जा॒म॒हे॒⁠। सु॒ग॒न्धिमिति॑ सु—ग॒न्धिम्⁠। पु॒ष्टि॒वर्द्ध॑न॒मिति॑ पुष्टि—वर्द्ध॑नम्⁠॥ उ॒र्वा॒रु॒कम्⁠। इ॒व॒⁠। बन्ध॑नात्⁠। मृ॒त्योः⁠। मु॒ख्‍षी॒य॒⁠। मा⁠। अ॒मृता᳚त्⁠॥ ए॒षः⁠। ते॒⁠। रु॒द्र॒⁠। भा॒गः⁠। तम्⁠। जु॒ष॒स्व॒⁠। तेन॑⁠। अ॒व॒सेन॑⁠। प॒रः⁠। मूज॑वत॒ इति॒ मूज॑—व॒तः॒⁠। अतीति॑⁠। इ॒हि॒⁠। अव॑ततध॒न्वेत्यव॑तत—ध॒न्वा॒⁠। पिना॑कहस्त॒ इति॒ पिना॑क—ह॒स्तः॒⁠। कृत्ति॑वासा॒ इति॒ कृत्ति॑—वा॒साः॒ [११] (सुभे॑षजमिहि॒ त्रीणि॑ च) ॥६॥
ऐ॒न्द्रा॒ग्नमित्यै᳚न्द्र—अ॒ग्नम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। वै॒श्व॒दे॒वमिति॑ वैश्व—दे॒वम्⁠। च॒रुम्⁠। इन्द्रा॑य⁠। शुना॒सीरा॑य⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। वा॒य॒व्य᳚म्⁠। पयः॑⁠। सौ॒र्यम्⁠। एक॑कपाल॒मित्येक॑—क॒पा॒ल॒म्⁠। द्वा॒द॒श॒ग॒वमिति॑ द्वादश—ग॒वम्⁠। सीर᳚म्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। रौ॒द्रम्⁠। गा॒वी॒धु॒कम्⁠। च॒रुम्⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। दधि॑⁠। वा॒रु॒णम्⁠। य॒व॒मय॒मिति॑ यव—मय᳚म्⁠। च॒रुम्⁠। व॒हिनी᳚⁠। धे॒नुः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ये⁠। दे॒वाः⁠। पु॒र॒स्सद॒ इति॑ पुरः—सदः॑⁠। अ॒ग्निने᳚त्रा॒ इत्य॒ग्नि—ने॒त्राः॒⁠। द॒ख्‍षि॒ण॒सद॒ इति॑ दख्‍षिण—सदः॑⁠। य॒मने᳚त्रा॒ इति॑ य॒म—ने॒त्राः॒⁠। प॒श्चा॒थ्सद॒ इति॑ पश्चात्—सदः॑⁠। स॒वि॒तृने᳚त्रा॒ इति॑ सवि॒तृ—ने॒त्राः॒⁠। उ॒त्त॒र॒सद॒ इत्यु॑त्तर—सदः॑⁠। वरु॑णनेत्रा॒ इति॒ वरु॑ण—ने॒त्राः॒⁠। उ॒प॒रि॒षद॒ इत्यु॑परि—सदः॑⁠। बृह॒स्पति॑नेत्रा॒ इति॒ बृह॒स्पति॑—ने॒त्राः॒⁠। र॒ख्‍षो॒हण॒ इति॑ रख्‍षः—हनः॑⁠। ते⁠। नः॒⁠। पा॒न्तु॒⁠। ते⁠। नः॒⁠। अ॒व॒न्तु॒⁠। तेभ्यः॑⁠। १२ (५०) [१२] नमः॑⁠। तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। समू॑ढ॒मिति॒ सं—ऊ॒ढ॒म्⁠। रख्‍षः॑⁠। सन्द॑ग्ध॒मिति॒ सं—द॒ग्ध॒म्⁠। रख्‍षः॑⁠। इ॒दम्⁠। अ॒हम्⁠। रख्‍षः॑⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। द॒हा॒मि॒⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। र॒ख्‍षो॒घ्न इति॑ रख्‍षः—घ्ने⁠। स्वाहा᳚⁠। य॒माय॑⁠। स॒वि॒त्रे⁠। वरु॑णाय⁠। बृह॒स्पत॑ये⁠। दुव॑स्वते⁠। र॒ख्‍षो॒घ्न इति॑ रख्‍षः—घ्ने⁠। स्वाहा᳚⁠। प्र॒ष्टि॒वा॒हीति॑ प्रष्टि—वा॒ही⁠। रथः॑⁠। दख्‍षि॑णा⁠। दे॒वस्य॑⁠। त्वा॒⁠। स॒वि॒तुः⁠। प्र॒स॒व इति॑ प्र—स॒वे⁠। अ॒श्विनोः᳚⁠। बा॒हुभ्या॒मिति॑ बा॒हु—भ्या॒म्⁠। पू॒ष्णः⁠। हस्ता᳚भ्याम्⁠। रख्‍ष॑सः⁠। व॒धम्⁠। जु॒हो॒मि॒⁠। ह॒तम्⁠। रख्‍षः॑⁠। अव॑धिष्म⁠। रख्‍षः॑⁠। यत्⁠। वस्ते᳚⁠। तत्⁠। दख्‍षि॑णा [१३] (तेभ्यः॒पञ्च॑चत्वारिꣳशच्च) ॥७॥
धा॒त्रे⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। अनु॑मत्या॒ इत्यनु॑—म॒त्यै॒⁠। च॒रुम्⁠। रा॒कायै᳚⁠। च॒रुम्⁠। सि॒नी॒वा॒ल्यै⁠। च॒रुम्⁠। कु॒ह्वै᳚⁠। च॒रुम्⁠। मि॒थु॒नौ⁠। गावौ᳚⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒ग्ना॒वै॒ष्ण॒वमित्या᳚ग्ना—वै॒ष्ण॒वम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। ऐ॒न्द्रा॒वै॒ष्ण॒वमित्यै᳚न्द्रा—वै॒ष्ण॒वम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। वै॒ष्ण॒वम्⁠। त्रि॒क॒पा॒लमिति॑ त्रि—क॒पा॒लम्⁠। वा॒म॒नः⁠। व॒ही⁠। दख्‍षि॑णा⁠। अ॒ग्नी॒षो॒मीय॒मित्य॑ग्नी—सो॒मीय᳚म्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। इ॒न्द्रा॒सो॒मीय॒मिती᳚न्द्रा—सो॒मीय᳚म्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। सौ॒म्यम्⁠। च॒रुम्⁠। ब॒भ्रुः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सो॒मा॒पौ॒ष्णमिति॑ सोमा—पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। ऐ॒न्द्रा॒पौ॒ष्णमित्यै᳚न्द्रा—पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। श्या॒मः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वै॒श्वा॒न॒रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। हिर॑ण्यम्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वा॒रु॒णम्⁠। य॒व॒मय॒मिति॑ यव—मय᳚म्⁠। च॒रुम्⁠। अश्वः॑⁠। दख्‍षि॑णा [१४] (वै॒श्वा॒न॒रं द्वाद॑शकपालं॒ नि॒रष्टौ च॑) ॥८॥
बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। ब्र॒ह्मणः॑⁠। गृ॒हे⁠। शि॒ति॒पृ॒ष्ठ इति॑ शिति—पृ॒ष्ठः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। रा॒ज॒न्य॑स्य⁠। गृ॒हे⁠। ऋ॒ष॒भः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒दि॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। महि॑ष्यै⁠। गृ॒हे⁠। धे॒नुः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। नै॒र॒ऋ॒तमिति॑ नैः—ऋ॒तम्⁠। च॒रुम्⁠। प॒रि॒वृ॒क्त्या॑ इति॑ परि—वृ॒क्त्यै᳚⁠। गृ॒हे⁠। कृ॒ष्णाना᳚म्⁠। व्री॒ही॒णाम्⁠। न॒खनि॑र्भिन्न॒मिति॑ न॒ख—नि॒र्भि॒न्न॒म्⁠। कृ॒ष्णा⁠। कू॒टा⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। से॒ना॒न्य॑ इति॑ सेना—न्यः॑⁠। गृ॒हे⁠। हिर॑ण्यम्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वा॒रु॒णम्⁠। दश॑कपाल॒मिति॒ दश॑—क॒पा॒ल॒म्⁠। सू॒तस्य॑⁠। गृ॒हे⁠। म॒हानि॑रष्ट॒ इति॑ म॒हा—नि॒र॒ष्टः॒⁠। दख्‍षि॑णा⁠। मा॒रु॒तम्⁠। स॒प्तक॑पाल॒मिति॑ स॒प्त—क॒पा॒ल॒म्⁠। ग्रा॒म॒ण्य॑ इति॑ ग्राम—न्यः॑⁠। गृ॒हे⁠। पृश्ञिः॑⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सा॒वि॒त्रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। १५ (५०) [१५] ख्‍ष॒त्तुः⁠। गृ॒हे⁠। उ॒प॒द्ध्व॒स्त इत्यु॑प—ध्व॒स्तः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒श्वि॒नम्⁠। द्वि॒क॒पा॒लमिति॑ द्वि—क॒पा॒लम्⁠। स॒ङ्ग्र॒ही॒तुरिति॑ सं—ग्र॒ही॒तुः⁠। गृ॒हे⁠। स॒वा॒त्या॑विति॑ स—वा॒त्यौ᳚⁠। दख्‍षि॑णा⁠। पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। भा॒ग॒दु॒घस्येति॑ भाग—दु॒घस्य॑⁠। गृ॒हे⁠। श्या॒मः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। रौ॒द्रम्⁠। गा॒वी॒धु॒कम्⁠। च॒रुम्⁠। अ॒ख्‍षा॒वा॒पस्येत्य॑ख्‍ष—आ॒वा॒पस्य॑⁠। गृ॒हे⁠। श॒बलः॑⁠। उद्वा॑र॒ इत्युत्—वा॒रः॒⁠। दख्‍षि॑णा⁠। इन्द्रा॑य⁠। सु॒त्रांण॒ इति॑ सु—त्रांणे᳚⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। प्रति॑⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। इन्द्रा॑य⁠। अ॒ꣳ॒हो॒मुच॒ इत्य॑ꣳहः—मुचे᳚⁠। अ॒यम्⁠। नः॒⁠। राजा᳚⁠। वृ॒त्र॒हेति॑ वृत्र—हा⁠। राजा᳚⁠। भू॒त्वा⁠। वृ॒त्रम्⁠। व॒द्ध्या॒त्⁠। मै॒त्रा॒बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यमिति॑ मैत्रा—बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यम्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। श्वे॒तायै᳚⁠। श्वे॒तव॑थ्साया॒ इति॑ श्वे॒त—व॒थ्सा॒यै॒⁠। दु॒ग्धे⁠। स्व॒यं॒मू॒र्त इति॑ स्वयम्—मू॒र्ते⁠। स्व॒यं॒म॒थि॒त इति॑ स्वयं—म॒थि॒ते⁠। आज्ये᳚⁠। आश्व॑त्थे⁠। १६ (५०) [१६] पात्रे᳚⁠। चतु॑स्स्रक्ता॒विति॒ चतुः॑—स्र॒क्तौ॒⁠। स्व॒य॒म॒व॒प॒न्नाया॒ इति॑ स्वयं—अ॒व॒प॒न्नायै᳚⁠। शाखा॑यै⁠। क॒र्णान्⁠। च॒⁠। अक॑र्णान्⁠। च॒⁠। त॒ण्डु॒लान्⁠। वीति॑⁠। चि॒नु॒या॒त्⁠। ये⁠। क॒र्णाः⁠। सः⁠। पय॑सि⁠। बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यः⁠। ये⁠। अक॑र्णाः⁠। सः⁠। आज्ये᳚⁠। मै॒त्रः⁠। स्व॒यं॒कृ॒तेति॑ स्वयम्—कृ॒ता⁠। वेदिः॑⁠। भ॒व॒ति॒⁠। स्व॒य॒न्दि॒नमिति॑ स्वयं—दि॒नम्⁠। ब॒र्॒‌हिः⁠। स्व॒यं॒कृ॒त इति॑ स्वयं—कृ॒तः⁠। इ॒द्ध्मः⁠। सा⁠। ए॒व⁠। श्वे॒ता⁠। श्वे॒तव॒थ्सेति॑ श्वे॒त—व॒थ्सा॒⁠। दख्‍षि॑णा [१७] (सावि॒त्रं द्वाद॑शकपाल॒माश्व॑त्थे॒ त्रय॑स्त्रिꣳशच्च) ॥९॥
अ॒ग्नये᳚⁠। गृ॒हप॑तय॒ इति॑ गृ॒ह—प॒त॒ये॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। कृ॒ष्णाना᳚म्⁠। व्री॒ही॒णाम्⁠। सोमा॑य⁠। वन॒स्पत॑ये⁠। श्या॒मा॒कम्⁠। च॒रुम्⁠। स॒वि॒त्रे⁠। स॒त्यप्र॑सवा॒येति॑ स॒त्य—प्र॒स॒वा॒य॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। आ॒शू॒नाम्⁠। व्री॒ही॒णाम्⁠। रु॒द्राय॑⁠। प॒शु॒पत॑य॒ इति॑ पशु—पत॑ये⁠। गा॒वी॒धु॒कम्⁠। च॒रुम्⁠। बृह॒स्पत॑ये⁠। वा॒चः⁠। पत॑ये⁠। नै॒वा॒रम्⁠। च॒रुम्⁠। इन्द्रा॑य⁠। ज्ये॒ष्ठाय॑⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। म॒हाव्री॑हीणा॒मिति॑ म॒हा—व्री॒ही॒णा॒म्⁠। मि॒त्राय॑⁠। स॒त्याय॑⁠। आं॒बाना᳚म्⁠। च॒रुम्⁠। वरु॑णाय⁠। धर्म॑पतय॒ इति॒ धर्म॑—प॒त॒ये॒⁠। य॒व॒मय॒मिति॑ यव—मय᳚म्⁠। च॒रुम्⁠। स॒वि॒ता⁠। त्वा॒⁠। प्र॒स॒वाना॒मिति॑ प्र—स॒वाना᳚म्⁠। सु॒व॒ता॒म्⁠। अ॒ग्निः⁠। गृ॒हप॑तीना॒मिति॑ गृ॒ह—प॒ती॒ना॒म्⁠। सोमः॑⁠। वन॒स्पती॑नाम्⁠। रु॒द्रः⁠। प॒शू॒नाम्⁠। १८ (५०) [१८] बृह॒स्पतिः॑⁠। वा॒चाम्⁠। इन्द्रः॑⁠। ज्ये॒ष्ठाना᳚म्⁠। मि॒त्रः⁠। स॒त्याना᳚म्⁠। वरु॑णः⁠। धर्म॑पतीना॒मिति॒ धर्म॑—प॒ती॒ना॒म्⁠। ये⁠। दे॒वाः॒⁠। दे॒व॒सुव॒ इति॑ देव—सुवः॑⁠। स्थ⁠। ते⁠। इ॒मम्⁠। आ॒मु॒ष्या॒य॒णम्⁠। अ॒न॒मि॒त्राय॑⁠। सु॒व॒द्ध्व॒म्⁠। म॒ह॒ते⁠। ख्‍ष॒त्राय॑⁠। म॒ह॒ते⁠। आधि॑पत्या॒येत्याधि॑—प॒त्या॒य॒⁠। म॒ह॒ते⁠। जान॑राज्या॒येति॒ जान॑—रा॒ज्या॒य॒⁠। ए॒षः⁠। वः॒⁠। भ॒र॒ताः॒⁠। राजा᳚⁠। सोमः॑⁠। अ॒स्माक᳚म्⁠। ब्रा॒ह्म॒णाना᳚म्⁠। राजा᳚⁠। प्रतीति॑⁠। त्यत्⁠। नाम॑⁠। रा॒ज्यम्⁠। अ॒धा॒यि॒⁠। स्वाम्⁠। त॒नुव᳚म्⁠। वरु॑णः⁠। अ॒शि॒श्रे॒त्⁠। शुचेः᳚⁠। मि॒त्रस्य॑⁠। व्रत्याः᳚⁠। अ॒भू॒म॒⁠। अम॑न्महि⁠। म॒ह॒तः⁠। ऋ॒तस्य॑⁠। नाम॑⁠। सर्वे᳚⁠। व्राताः᳚⁠। वरु॑णस्य⁠। अ॒भू॒व॒न्न्⁠। वीति॑⁠। मि॒त्रः⁠। एवैः᳚⁠। अरा॑तिम्⁠। अ॒ता॒री॒त्⁠। असू॑षुदन्त⁠। य॒ज्ञियाः᳚⁠। ऋ॒तेन॑⁠। वीति॑⁠। उ॒⁠। त्रि॒तः⁠। ज॒रि॒माण᳚म्⁠। नः॒⁠। आ॒न॒ट्⁠। विष्णोः᳚⁠। क्रमः॑⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। क्रा॒न्तम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। विक्रा᳚न्त॒मिति॒ वि—क्रा॒न्त॒म्⁠। अ॒सि॒ [१९] (प॒शू॒नांव्राताः॒पञ्च॑विꣳशतिश्च) ॥१०॥
अ॒र्थेत॒ इत्य॑र्थ—इतः॑⁠। स्थ॒⁠। अ॒पाम्⁠। पतिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वृषा᳚⁠। अ॒सि॒⁠। ऊ॒र्मिः⁠। वृ॒ष॒से॒न इति॑ वृष—से॒नः⁠। अ॒सि॒⁠। व्र॒ज॒ख्‍षित॒ इति॑ व्रज—ख्‍षितः॑⁠। स्थ॒⁠। म॒रुता᳚म्⁠। ओजः॑⁠। स्थ॒⁠। सूर्य॑वर्चस॒ इति॒ सूर्य॑—व॒र्च॒सः॒⁠। स्थ॒⁠। सूर्य॑त्वचस॒ इति॒ सूर्य॑—त्व॒च॒सः॒⁠। स्थ॒⁠। मान्दाः᳚⁠। स्थ॒⁠। वाशाः᳚⁠। स्थ॒⁠। शक्व॑रीः⁠। स्थ॒⁠। वि॒श्व॒भृत॒ इति॑ विश्व—भृतः॑⁠। स्थ॒⁠। ज॒न॒भृत॒ इति॑ जन—भृतः॑⁠। स्थ॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। ते॒ज॒स्याः᳚⁠। स्थ॒⁠। अ॒पाम्⁠। ओष॑धीनाम्⁠। रसः॑⁠। स्थ॒⁠। अ॒पः⁠। दे॒वीः⁠। मधु॑मती॒रिति॒ मधु॑—म॒तीः॒⁠। अ॒गृ॒ह्ण॒न्न्⁠। ऊर्ज॑स्वतीः⁠। रा॒ज॒सूया॒येति॑ राज—सूया॑य⁠। चिता॑नाः⁠॥ याभिः॑⁠। मि॒त्रावरु॑णा॒विति॑ मि॒त्रा—वरु॑णौ⁠। अ॒भ्यषि॑ञ्च॒न्नित्य॑भि—असि॑ञ्चन्न्⁠। याभिः॑⁠। इन्द्र᳚म्⁠। अन॑यन्न्⁠। अतीति॑⁠। अरा॑तीः⁠॥ रा॒ष्ट्र॒दा इति॑ राष्ट्र—दाः⁠। स्थ॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। द॒त्त॒⁠। स्वाहा᳚⁠। रा॒ष्ट्र॒दा इति॑ राष्ट्र—दाः⁠। स्थ॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। अ॒मुष्मै᳚⁠। द॒त्त॒ [२०] (अत्येका॑दश च) ॥११॥
देवीः᳚⁠। आ॒पः॒⁠। समिति॑⁠। मधु॑मती॒रिति॒ मधु॑—म॒तीः॒⁠। मधु॑मतीभि॒रिति॒ मधु॑—म॒ती॒भिः॒⁠। सृ॒ज्य॒द्ध्व॒म्⁠। महि॑⁠। वर्चः॑⁠। ख्‍ष॒त्रिया॑य⁠। व॒न्वा॒नाः⁠। अना॑धृष्टा॒ इत्यना᳚—धृ॒ष्टाः॒⁠। सी॒द॒त॒⁠। ऊर्ज॑स्वतीः⁠। महि॑⁠। वर्चः॑⁠। ख्‍ष॒त्रिया॑य⁠। दध॑तीः⁠। अनि॑भृष्ट॒मित्यनि॑—भृ॒ष्ट॒म्⁠। अ॒सि॒⁠। वा॒चः⁠। बन्धुः॑⁠। त॒पो॒जा इति॑ तपः—जाः⁠। सोम॑स्य⁠। दा॒त्रम्⁠। अ॒सि॒⁠। शु॒क्राः⁠। वः॒⁠। शु॒क्रेण॑⁠। उदिति॑⁠। पु॒ना॒मि॒⁠। च॒न्द्राः⁠। च॒न्द्रेण॑⁠। अ॒मृताः᳚⁠। अ॒मृते॑न⁠। स्वाहा᳚⁠। रा॒ज॒सूया॒येति॑ राज—सूया॑य⁠। चिता॑नाः⁠॥ स॒ध॒माद॒ इति॑ सध—मादः॑⁠। द्यु॒म्निनीः᳚⁠। ऊर्जः॑⁠। ए॒ताः⁠। अनि॑भृष्टा॒ इत्यनि॑—भृ॒ष्टाः॒⁠। अ॒प॒स्युवः॑⁠। वसा॑नः⁠॥ प॒स्त्या॑सु⁠। च॒क्रे॒⁠। वरु॑णः⁠। स॒धस्थ॒मिति॑ स॒ध—स्थ॒म्⁠। अ॒पाम्⁠। शिशुः॑⁠। २१ (५०) [२१] मा॒तृत॑मा॒स्विति॑ मा॒तृ—त॒मा॒सु॒⁠। अ॒न्तः⁠॥ ख्‍ष॒त्रस्य॑⁠। उल्ब᳚म्⁠। अ॒सि॒⁠। ख्‍ष॒त्रस्य॑⁠। योनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। आवि॑न्नः⁠। अ॒ग्निः⁠। गृ॒हप॑ति॒रिति॑ गृ॒ह—प॒तिः॒⁠। आवि॑न्नः⁠। इन्द्रः॑⁠। वृ॒द्धश्र॑वा॒ इति॑ वृ॒द्ध—श्र॒वाः॒⁠। आवि॑न्नः⁠। पू॒षा⁠। वि॒श्ववे॑दा॒ इति॑ वि॒श्व—वे॒दाः॒⁠। आवि॑न्नौ⁠। मि॒त्रावरु॑णा॒विति॑ मि॒त्रा—वरु॑णौ⁠। ऋ॒ता॒वृधा॒वित्यृ॑त—वृधौ᳚⁠। आवि॑न्ने॒ इति॑⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। धृ॒तव्र॑ते॒ इति॑ धृ॒त—व्र॒ते॒⁠। आवि॑न्ना⁠। दे॒वी⁠। अदि॑तिः⁠। वि॒श्व॒रू॒पीति॑ विश्व—रू॒पी⁠। आवि॑न्नः⁠। अ॒यम्⁠। अ॒सौ⁠। आ॒मु॒ष्या॒य॒णः⁠। अ॒स्याम्⁠। वि॒शि⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। रा॒ष्ट्रे⁠। म॒ह॒ते⁠। ख्‍ष॒त्राय॑⁠। म॒ह॒ते⁠। आधि॑पत्या॒येत्याधि॑—प॒त्या॒य॒⁠। म॒ह॒ते⁠। जान॑राज्या॒येति॒ जान॑—रा॒ज्या॒य॒⁠। ए॒षः⁠। वः॒⁠। भ॒र॒ताः॒⁠। राजा᳚⁠। सोमः॑⁠। अ॒स्माक᳚म्⁠। ब्रा॒ह्म॒णाना᳚म्⁠। राजा᳚⁠। इन्द्र॑स्य⁠। २२ (५०) [२२] वज्रः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वार्त्र॑घ्न॒ इति॒ वार्त्र॑—घ्नः॒⁠। त्वया᳚⁠। अ॒यम्⁠। वृ॒त्रम्⁠। व॒द्ध्या॒त्⁠। श॒त्रु॒बाध॑ना॒ इति॑ शत्रु—बाध॑नाः⁠। स्थ॒⁠। पा॒त⁠। मा॒⁠। प्र॒त्यञ्च᳚म्⁠। पा॒त⁠। मा॒⁠। ति॒र्यञ्च᳚म्⁠। अ॒न्वञ्च᳚म्⁠। मा॒⁠। पा॒त॒⁠। दि॒ग्भ्य इति॑ दिक्—भ्यः⁠। मा॒⁠। पा॒त॒⁠। विश्वा᳚भ्यः⁠। मा॒⁠। ना॒ष्ट्राभ्यः॑⁠। पा॒त॒⁠। हिर॑ण्यवर्णा॒विति॒ हिर॑ण्य—व॒र्णौ॒⁠। उ॒षसा᳚म्⁠। वि॒रो॒क इति॑ वि—रो॒के⁠। अय॑स्स्थूणा॒वित्ययः॑—स्थू॒णौ॒⁠। उदि॑ता॒वित्युत्—इ॒तौ॒⁠। सूर्य॑स्य⁠। एति॑⁠। रो॒ह॒त॒म्⁠। व॒रु॒ण॒⁠। मि॒त्र॒⁠। गर्त᳚म्⁠। ततः॑⁠। च॒ख्‍षा॒था॒म्⁠। अदि॑तिम्⁠। दिति᳚म्⁠। च॒ [२३] (शिशु॒रिन्द्र॒स्यैक॑चत्वारिꣳशच्च) ॥१२॥
स॒मिध॒मिति॑ सं—इध᳚म्⁠। एति॑⁠। ति॒ष्ठ॒⁠। गा॒य॒त्री⁠। त्वा॒⁠। छन्द॑साम्⁠। अ॒व॒तु॒⁠। त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। स्तोमः॑⁠। र॒थ॒न्त॒रमिति॑ रथं—त॒रम्⁠। साम॑⁠। अ॒ग्निः⁠। दे॒वता᳚⁠। ब्रह्म॑⁠। द्रवि॑णम्⁠। उ॒ग्राम्⁠। एति॑⁠। ति॒ष्ठ॒⁠। त्रि॒ष्टुप्⁠। त्वा॒⁠। छन्द॑साम्⁠। अ॒व॒तु॒⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। स्तोमः॑⁠। बृ॒हत्⁠। साम॑⁠। इन्द्रः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। द्रवि॑णम्⁠। वि॒राज॒मिति॑ वि—राज᳚म्⁠। एति॑⁠। ति॒ष्ठ॒⁠। जग॑ती⁠। त्वा॒⁠। छन्द॑साम्⁠। अ॒व॒तु॒⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। स्तोमः॑⁠। वै॒रू॒पम्⁠। साम॑⁠। म॒रुतः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। विट्⁠। द्रवि॑णम्⁠। उदी॑चीम्⁠। एति॑⁠। ति॒ष्ठ॒⁠। अ॒नु॒ष्टुबित्य॑नु—स्तुप्⁠। त्वा॒⁠। २४ (५०) [२४] छन्द॑साम्⁠। अ॒व॒तु॒⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। स्तोमः॑⁠। वै॒रा॒जम्⁠। साम॑⁠। मि॒त्रावरु॑णा॒विति॑ मि॒त्रा—वरु॑णौ⁠। दे॒वता᳚⁠। बल᳚म्⁠। द्रवि॑णम्⁠। ऊ॒र्द्ध्वाम्⁠। एति॑⁠। ति॒ष्ठ॒⁠। प॒ङ्क्तिः⁠। त्वा॒⁠। छन्द॑साम्⁠। अ॒व॒तु॒⁠। त्रि॒ण॒व॒त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒शाविति॑ त्रिणव—त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒शौ⁠। स्तोमौ᳚⁠। शा॒क्व॒र॒रै॒व॒ते इति॑ शाक्वर—रै॒व॒ते⁠। साम॑नी॒ इति॑⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। वर्चः॑⁠। द्रवि॑णम्⁠। ई॒दृङ्⁠। च॒⁠। अ॒न्या॒दृङ्⁠। च॒⁠। ए॒ता॒दृङ्⁠। च॒⁠। प्र॒ति॒दृङ्ङिति॑ प्रति—दृङ्⁠। च॒⁠। मि॒तः⁠। च॒⁠। संमि॑त॒ इति॒ सं—मि॒तः॒⁠। च॒⁠। सभ॑रा॒ इति॒ स—भ॒राः॒⁠॥ शु॒क्रज्यो॑ति॒रिति॑ शु॒क्र—ज्यो॒तिः॒⁠। च॒⁠। चि॒त्रज्यो॑ति॒रिति॑ चि॒त्र—ज्यो॒तिः॒⁠। च॒⁠। स॒त्यज्यो॑ति॒रिति॑ स॒त्य—ज्यो॒तिः॒⁠। च॒⁠। ज्योति॑ष्मान्⁠। च॒⁠। स॒त्यः⁠। च॒⁠। ऋ॒त॒पा इत्यृ॑त—पाः⁠। च॒⁠। २५ (५०) [२५] अत्य॑ꣳहा॒ इत्यति॑—अ॒ꣳ॒हाः॒⁠॥ अ॒ग्नये᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। सोमा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒वि॒त्रे⁠। स्वाहा᳚⁠। सर॑स्वत्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। पू॒ष्णे⁠। स्वाहा᳚⁠। बृह॒स्पत॑ये⁠। स्वाहा᳚⁠। इन्द्रा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। घोषा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। श्लोका॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। अꣳशा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। भगा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। ख्‍षेत्र॑स्य⁠। पत॑ये⁠। स्वाहा᳚⁠। पृ॒थि॒व्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षाय⁠। स्वाहा᳚⁠। दि॒वे⁠। स्वाहा᳚⁠। सूर्या॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒न्द्रम॑से⁠। स्वाहा᳚⁠। नख्‍ष॑त्रेभ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒द्भ्य इत्य॑त्—भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। ओष॑धीभ्य॒ इत्योष॑धि—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। वन॒स्पति॑भ्य॒ इति॒ वन॒स्पति॑—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒रा॒च॒रेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒रि॒प्ल॒वेभ्य॒ इति॑ परि—प्ल॒वेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒री॒सृ॒पेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚ [२६] (अ॒नु॒ष्टुप्त्व॑र्त॒पाश्च॑ सरीसृ॒पेभ्यः॒ स्वाहा᳚) ॥१३॥
सोम॑स्य⁠। त्विषिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। तव॑⁠। इ॒व॒⁠। मे॒⁠। त्विषिः॑⁠। भू॒या॒त्⁠। अ॒मृत᳚म्⁠। अ॒सि॒⁠। मृ॒त्योः⁠। मा॒⁠। पा॒हि॒⁠। दि॒द्योत्⁠। मा॒⁠। पा॒हि॒⁠। अवे᳚ष्टा॒ इत्यव॑—इ॒ष्टाः॒⁠। द॒न्द॒शूकाः᳚⁠। निर॑स्त॒मिति॒ निः—अ॒स्त॒म्⁠। नमु॑चेः⁠। शिरः॑⁠॥ सोमः॑⁠। राजा᳚⁠। वरु॑णः⁠। दे॒वाः⁠। ध॒र्म॒सुव॒ इति॑ धर्म—सुवः॑⁠। च॒⁠। ये⁠॥ ते⁠। ते॒⁠। वाच᳚म्⁠। सु॒व॒न्ता॒म्⁠। ते⁠। ते॒⁠। प्रा॒णमिति॑ प्र—अ॒नम्⁠। सु॒व॒न्ता॒म्⁠। ते⁠। ते॒⁠। चख्‍षुः॑⁠। सु॒व॒न्ता॒म्⁠। ते⁠। ते॒⁠। श्रोत्र᳚म्⁠। सु॒व॒न्ता॒म्⁠। सोम॑स्य⁠। त्वा॒⁠। द्यु॒म्नेन॑⁠। अ॒भीति॑⁠। सि॒ञ्चा॒मि॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। २७ (५०) [२७] तेज॑सा⁠। सूर्य॑स्य⁠। वर्च॑सा⁠। इन्द्र॑स्य⁠। इ॒न्द्रि॒येण॑⁠। मि॒त्रावरु॑णयो॒रिति॑ मि॒त्रा—वरु॑णयोः⁠। वी॒र्ये॑ण⁠। म॒रुता᳚म्⁠। ओज॑सा⁠। ख्‍ष॒त्राणा᳚म्⁠। ख्‍ष॒त्रप॑ति॒रिति॑ ख्‍ष॒त्र—प॒तिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। अतीति॑⁠। दि॒वः⁠। पा॒हि॒⁠। स॒माव॑वृत्र॒न्निति॑ सं—आव॑वृत्रन्न्⁠। अ॒ध॒राक्⁠। उदी॑चीः⁠। अहि᳚म्⁠। बु॒द्ध्निय᳚म्⁠। अन्विति॑⁠। स॒ञ्चर॑न्ती॒रिति॑ सं—चर॑न्तीः⁠। ताः⁠। पर्व॑तस्य⁠। वृ॒ष॒भस्य॑⁠। पृ॒ष्ठे⁠। नावः॑⁠। च॒र॒न्ति॒⁠। स्व॒सिच॒ इति॑ स्व—सिचः॑⁠। इ॒या॒नाः⁠॥ रुद्र॑⁠। यत्⁠। ते॒⁠। क्रयि॑⁠। पर᳚म्⁠। नाम॑⁠। तस्मै᳚⁠। हु॒तम्⁠। अ॒सि॒⁠। य॒मेष्ट॒मिति॑ य॒म—इ॒ष्ट॒म्⁠। अ॒सि॒⁠॥ प्रजा॑पत॒ इति॒ प्रजा᳚—प॒ते॒⁠। न⁠। त्वत्⁠। ए॒तानि॑⁠। अ॒न्यः⁠। विश्वा᳚⁠। जा॒तानि॑⁠। परीति॑⁠। ता⁠। ब॒भू॒व॒⁠॥ यत्का॑मा॒ इति॒ यत्—का॒माः॒⁠। ते॒⁠। जु॒हु॒मः⁠। तत्⁠। नः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠। व॒यम्⁠। स्या॒म॒⁠। पत॑यः⁠। र॒यी॒णाम् [२८] (अ॒ग्नेस्तैका॑दश च) ॥१४॥
इन्द्र॑स्य⁠। वज्रः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वार्त्र॑घ्न॒ इति॒ वार्त्र॑—घ्नः॒⁠। त्वया᳚⁠। अ॒यम्⁠। वृ॒त्रम्⁠। व॒द्ध्या॒त्⁠। मि॒त्रावरु॑णयो॒रिति॑ मि॒त्रा—वरु॑णयोः⁠। त्वा॒⁠। प्र॒शा॒स्त्रोरिति॑ प्र—शा॒स्त्रोः⁠। प्र॒शिषेति॑ प्र—शिषा᳚⁠। यु॒न॒ज्मि॒⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। योगे॑न⁠। विष्णोः᳚⁠। क्रमः॑⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। क्रा॒न्तम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। विक्रा᳚न्त॒मिति॒ वि—क्रा॒न्त॒म्⁠। अ॒सि॒⁠। म॒रुता᳚म्⁠। प्र॒स॒व इति॑ प्र—स॒वे⁠। जे॒ष॒म्⁠। आ॒प्तम्⁠। मनः॑⁠। समिति॑⁠। अ॒हम्⁠। इ॒न्द्रि॒येण॑⁠। वी॒र्ये॑ण⁠। प॒शू॒नाम्⁠। म॒न्युः⁠। अ॒सि॒⁠। तव॑⁠। इ॒व॒⁠। मे॒⁠। म॒न्युः⁠। भू॒या॒त्⁠। नमः॑⁠। मा॒त्रे⁠। पृ॒थि॒व्यै⁠। मा⁠। अ॒हम्⁠। मा॒तर᳚म्⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। हि॒ꣳ॒सि॒ष॒म्⁠। मा⁠। २९ (५०) [२९] माम्⁠। मा॒ता⁠। पृ॒थि॒वी⁠। हि॒ꣳ॒सी॒त्⁠। इय॑त्⁠। अ॒सि॒⁠। आयुः॑⁠। अ॒सि॒⁠। आयुः॑⁠। मे॒⁠। धे॒हि॒⁠। ऊर्क्⁠। अ॒सि॒⁠। ऊर्ज᳚म्⁠। मे॒⁠। धे॒हि॒⁠। युङ्⁠। अ॒सि॒⁠। वर्चः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वर्चः॑⁠। मयि॑⁠। धे॒हि॒⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। गृ॒हप॑तय॒ इति॑ गृ॒ह—प॒त॒ये॒⁠। स्वाहा᳚⁠। सोमा॑य⁠। वन॒स्पत॑ये⁠। स्वाहा᳚⁠। इन्द्र॑स्य⁠। बला॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। म॒रुता᳚म्⁠। ओज॑से⁠। स्वाहा᳚⁠। ह॒ꣳ॒सः⁠। शु॒चि॒षदिति॑ शुचि—सत्⁠। वसुः॑⁠। अ॒न्त॒रि॒ख्‍ष॒सदित्य॑न्तरिख्‍ष—सत्⁠। होता᳚⁠। वे॒दि॒षदिति॑ वेदि—सत्⁠। अति॑थिः⁠। दु॒रो॒ण॒सदिति॑ दुरोण—सत्⁠॥ नृ॒षदिति॑ नृ—सत्⁠। व॒र॒सदिति॑ वर—सत्⁠। ऋ॒त॒सदित्यृ॑त—सत्⁠। व्यो॒म॒सदिति॑ व्योम—सत्⁠। अ॒ब्जा इत्य॑प्—जाः⁠। गो॒जा इति॑ गो—जाः⁠। ऋ॒त॒जा इत्यृ॑त—जाः⁠। अ॒द्रि॒जा इत्य॑द्रि—जाः⁠। ऋ॒तं⁠। बृ॒हत् [३०] (हि॒ꣳ॒सि॒षं॒ मर्त॒जास्त्रीणि॑ च) ॥१५॥
मि॒त्रः⁠। अ॒सि॒⁠। वरु॑णः⁠। अ॒सि॒⁠। समिति॑⁠। अ॒हम्⁠। विश्वैः᳚⁠। दे॒वैः⁠। ख्‍ष॒त्रस्य॑⁠। नाभिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। ख्‍ष॒त्रस्य॑⁠। योनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। स्यो॒नाम्⁠। एति॑⁠। सी॒द॒⁠। सु॒षदा॒मिति॑ सु—सदा᳚म्⁠। एति॑⁠। सी॒द॒⁠। मा⁠। त्वा॒⁠। हि॒ꣳ॒सी॒त्⁠। मा⁠। मा॒⁠। हि॒ꣳ॒सी॒त्⁠। नीति॑⁠। स॒सा॒द॒⁠। धृ॒तव्र॑त॒ इति॑ धृ॒त—व्र॒तः॒⁠। वरु॑णः⁠। प॒स्त्या॑सु⁠। एति॑⁠। साम्रा᳚ज्या॒येति॒ सां—रा॒ज्या॒य॒⁠। सु॒क्रतु॒रिति॑ सु—क्रतुः॑⁠। ब्रह्मा(३)न्⁠। त्वम्⁠। रा॒ज॒न्न्⁠। ब्र॒ह्मा⁠। अ॒सि॒⁠। स॒वि॒ता⁠। अ॒सि॒⁠। स॒त्यस॑व॒ इति॑ स॒त्य—स॒वः॒⁠। ब्रह्मा(३)न्⁠। त्वम्⁠। रा॒ज॒न्न्⁠। ब्र॒ह्मा⁠। अ॒सि॒⁠। इन्द्रः॑⁠। अ॒सि॒⁠। स॒त्यौजा॒ इति॑ स॒त्य—ओ॒जाः॒⁠। ३१ (५०) [३१] (४०) (स॒त्यौजा᳚श्चत्वारि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥१६॥
ब्रह्मा(३)न्⁠। त्वम्⁠। रा॒ज॒न्न्⁠। ब्र॒ह्मा⁠। अ॒सि॒⁠। मि॒त्रः⁠। अ॒सि॒⁠। सु॒शेव॒ इति॑ सु—शेवः॑⁠। ब्रह्मा(३)न्⁠। त्वम्⁠। रा॒ज॒न्न्⁠। ब्र॒ह्मा⁠। अ॒सि॒⁠। वरु॑णः⁠। अ॒सि॒⁠। स॒त्यध॒र्मेति॑ स॒त्य—ध॒र्मा॒⁠। इन्द्र॑स्य⁠। वज्रः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वार्त्र॑घ्न॒ इति॒ वार्त्र॑—घ्नः॒⁠। तेन॑⁠। मे॒⁠। र॒द्ध्य॒⁠। दिशः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒यम्⁠। राजा᳚⁠। अ॒भू॒त्⁠। सुश्लो॒का(४) इँति॒ सु—श्लो॒का(४)⁠। सुँम॑ङ्ग॒ला(४) इँति॒ सु—म॒ङ्ग॒ला(४)⁠। सँत्य॑रा॒जा(३)निति॒ सत्य॑—रा॒जा(३)न्⁠॥ अ॒पाम्⁠। नप्त्रे᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ऊ॒र्जः⁠। नप्त्रे᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। गृ॒हप॑तय॒ इति॑ गृ॒ह—प॒त॒ये॒⁠। स्वाहा᳚⁠॥ ३२ आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। हिर॑ण्यम्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सा॒र॒स्व॒तम्⁠। च॒रुम्⁠। व॒थ्स॒त॒री⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सा॒वि॒त्रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। उ॒प॒द्ध्व॒स्त इत्यु॑प—ध्व॒स्तः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। श्या॒मः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। शि॒ति॒पृ॒ष्ठ इति॑ शिति—पृ॒ष्ठः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। ऋ॒ष॒भः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वा॒रु॒णम्⁠। दश॑कपाल॒मिति॒ दश॑—क॒पा॒ल॒म्⁠। म॒हानि॑रष्ट॒ इति॑ म॒हा—नि॒र॒ष्टः॒⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सौ॒म्यम्⁠। च॒रुम्⁠। ब॒भ्रुः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। त्वा॒ष्ट्रम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। शु॒ण्ठः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वै॒ष्ण॒वम्⁠। त्रि॒क॒पा॒लमिति॑ त्रि—क॒पा॒ल॒म्⁠। वा॒म॒नः⁠। दख्‍षि॑णा [३३] (आ॒ग्ने॒यꣳ हिर॑ण्यꣳ सारस्व॒तंद्विच॑त्वारिꣳशत्) ॥१७॥
स॒द्यः⁠। दी॒ख्‍ष॒य॒न्ति॒⁠। स॒द्यः⁠। सोम᳚म्⁠। क्री॒ण॒न्ति॒⁠। पु॒ण्ड॒रि॒स्र॒जाम्⁠। प्रेति॑⁠। य॒च्छ॒ति॒⁠। द॒शभि॒रिति॑ द॒श—भिः॒⁠। व॒थ्स॒त॒रैः⁠। सोम᳚म्⁠। क्री॒णा॒ति॒⁠। द॒श॒पेय॒ इति॑ दश—पेयः॑⁠। भ॒व॒ति॒⁠। श॒तम्⁠। ब्रा॒ह्म॒णाः⁠। पि॒ब॒न्ति॒⁠। स॒प्त॒द॒शमिति॑ सप्त—द॒शम्⁠। स्तो॒त्रम्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रा॒का॒शौ⁠। अ॒द्ध्व॒र्यवे᳚⁠। द॒दा॒ति॒⁠। स्रज᳚म्⁠। उ॒द्गा॒त्र इत्यु॑त्—गा॒त्रे⁠। रु॒क्मम्⁠। होत्रे᳚⁠। अश्व᳚म्⁠। प्र॒स्तो॒तृ॒प्र॒ति॒ह॒र्तृभ्या॒मिति॑ प्रस्तोतृप्रतिह॒र्तृ—भ्यां॒⁠। द्वाद॑श⁠। प॒ष्ठौ॒हीः⁠। ब्र॒ह्मणे᳚⁠। व॒शाम्⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒णायेति॑ मैत्रा—व॒रु॒णाय॑⁠। ऋ॒ष॒भम्⁠। ब्रा॒ह्म॒णा॒च्छ॒ꣳ॒सिने᳚⁠। वास॑सी॒ इति॑⁠। ने॒ष्टा॒पो॒तृभ्या॒मिति॑ नेष्टापो॒तृ—भ्या॒म्⁠। स्थूरि॑⁠। य॒वा॒चि॒तमिति॑ यव—आ॒चि॒तम्⁠। अ॒च्छा॒वा॒काय॑⁠। अ॒न॒ड्वाह᳚म्⁠। अ॒ग्नीध॒ इत्य॑ग्नि—इधे᳚⁠। भा॒र्ग॒वः⁠। होता᳚⁠। भ॒व॒ति॒⁠। श्रा॒य॒न्तीय᳚म्⁠। ब्र॒ह्म॒सा॒ममिति॑ ब्रह्म—सा॒मम्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। वा॒र॒व॒न्तीय॒मिति॑ वार—व॒न्तीय᳚म्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म॒सा॒ममित्य॑ग्निष्टोम—सा॒मम्⁠। सा॒र॒स्व॒तीः⁠। अ॒पः⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒ [३४] (वा॒र॒व॒न्तीयं॑ च॒त्वारि॑ च) ॥१८॥
आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। हिर॑ण्यम्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। ऋ॒ष॒भः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। वै॒श्व॒दे॒वमिति॑ वैश्व—दे॒वम्⁠। च॒रुम्⁠। पि॒शङ्गी᳚⁠। प॒ष्ठौ॒ही⁠। दख्‍षि॑णा⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒णीमिति॑ मैत्रा—व॒रु॒णीम्⁠। आ॒मिख्‍षा᳚म्⁠। व॒शा⁠। दख्‍षि॑णा⁠। बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। शि॒ति॒पृ॒ष्ठ इति॑ शिति—पृ॒ष्ठः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। आ॒दि॒त्याम्⁠। म॒ल्॒‌हाम्⁠। ग॒र्भिणी᳚म्⁠। एति॑⁠। ल॒भ॒ते॒⁠। मा॒रु॒तीम्⁠। पृश्ञि᳚म्⁠। प॒ष्ठौ॒हीम्⁠। अ॒श्विभ्या॒मित्य॒श्वि—भ्या॒म्⁠। पू॒ष्णे⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सर॑स्वते⁠। स॒त्य॒वाच॒ इति॑ सत्य—वाचे᳚⁠। च॒रुम्⁠। स॒वि॒त्रे⁠। स॒त्यप्र॑सवा॒येति॑ स॒त्य—प्र॒स॒वा॒य॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। ति॒सृ॒ध॒न्वमिति॑ तिसृ—ध॒न्वम्⁠। शु॒ष्क॒दृ॒तिरिति॑ शुष्क—दृ॒तिः⁠। दख्‍षि॑णा [३५] (अ॒ग्ने॒यꣳ हिर॑ण्यमै॒द्रमृ॑ष॒भो वै᳚श्वदे॒वं पि॒शङ्गी॑ बार्‌हस्प॒त्यꣳस॒प्तच॑त्वारिꣳशत्) ॥१९॥
आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सौ॒म्यम्⁠। च॒रुम्⁠। सा॒वि॒त्रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। बा॒र्॒‌ह॒स्प॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। त्वा॒ष्ट्रम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। वै॒श्वा॒न॒रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। दख्‍षि॑णः⁠। र॒थ॒वा॒ह॒न॒वा॒ह इति॑ रथवाहन—वा॒हः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। सा॒र॒स्व॒तम्⁠। च॒रुम्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। पौ॒ष्णम्⁠। च॒रुम्⁠। मै॒त्रम्⁠। च॒रुम्⁠। वा॒रु॒णम्⁠। च॒रुम्⁠। ख्‍षै॒त्र॒प॒त्यमिति॑ ख्‍षैत्र—प॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। आ॒दि॒त्यम्⁠। च॒रुम्⁠। उत्त॑र॒ इत्युत्—त॒रः॒⁠। र॒थ॒वा॒ह॒न॒वा॒ह इति॑ रथवाहन—वा॒हः⁠। दख्‍षि॑णा [३६] (आ॒ग्ने॒यꣳ सौ॒म्यं बा॑र्‌हस्प॒त्यंचतु॑स्त्रिꣳशत्) ॥२०॥
स्वा॒द्वीम्⁠। त्वा॒⁠। स्वा॒दुना᳚⁠। ती॒व्राम्⁠। ती॒व्रेण॑⁠। अ॒मृता᳚म्⁠। अ॒मृते॑न⁠। सृ॒जामि॑⁠। समिति॑⁠। सोमे॑न⁠। सोमः॑⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒श्विभ्या॒मित्य॒श्वि—भ्या॒म्⁠। प॒च्य॒स्व॒⁠। सर॑स्वत्यै⁠। प॒च्य॒स्व॒⁠। इन्द्रा॑य⁠। सु॒त्रांण॒ इति॑ सु—त्रांणे᳚⁠। प॒च्य॒स्व॒⁠। पु॒नातु॑⁠। ते॒⁠। प॒रि॒स्रुत॒मिति॑ परि—स्रुत᳚म्⁠। सोम᳚म्⁠। सूर्य॑स्य⁠। दु॒हि॒ता⁠॥ वारे॑ण⁠। शश्व॑ता⁠। तना᳚⁠॥ वा॒युः⁠। पू॒तः⁠। प॒वित्रे॑ण⁠। प्र॒त्यङ्⁠। सोमः॑⁠। अति॑द्रुत॒ इत्यति॑—द्रु॒तः॒⁠॥ इन्द्र॑स्य⁠। युज्यः॑⁠। सखा᳚⁠॥ कु॒वित्⁠। अ॒ङ्ग⁠। यव॑मन्त॒ इति॒ यव॑—म॒न्तः॒⁠। यव᳚म्⁠। चि॒त्⁠। यथा᳚⁠। दान्ति॑⁠। अ॒नु॒पू॒र्वमित्य॑नु—पू॒र्वम्⁠। वि॒यूयेति॑ वि—यूय॑⁠॥ इ॒हेहेती॒ह—इ॒ह॒⁠। ए॒षा॒म्⁠। कृ॒णु॒त॒⁠। भोज॑नानि⁠। ये⁠। ब॒र्॒‌हिषः॑⁠। नमो॑वृक्ति॒मिति॒ नमः॑—वृ॒क्ति॒म्⁠। न⁠। ज॒ग्मुः⁠॥ आ॒श्वि॒नम्⁠। धू॒म्रम्⁠। एति॑⁠। ल॒भ॒ते॒⁠। सा॒र॒स्व॒तम्⁠। मे॒षम्⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। ऋ॒ष॒भम्⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। सा॒वि॒त्रम्⁠। द्वाद॑शकपाल॒मिति॒ द्वाद॑श—क॒पा॒ल॒म्⁠। वा॒रु॒णम्⁠। दश॑कपाल॒मिति॒ दश॑—क॒पा॒ल॒म्⁠। सोम॑प्रतीका॒ इति॒ सोम॑—प्र॒ती॒काः॒⁠। पि॒त॒रः॒⁠। तृ॒प्णु॒त॒⁠। वड॑बा⁠। दख्‍षि॑णा [३७] (भोज॑नानि॒षड्वि॑ꣳशतिश्च) ॥२१॥
अग्ना॑विष्णू॒ इत्यग्ना᳚—वि॒ष्णू॒⁠। महि॑⁠। तत्⁠। वा॒म्⁠। म॒हि॒त्वमिति॑ महि—त्वम्⁠। वी॒तम्⁠। घृ॒तस्य॑⁠। गुह्या॑नि⁠। नाम॑⁠॥ दमे॑दम॒ इति॒ दमे᳚—द॒मे॒⁠। स॒प्त⁠। रत्ना᳚⁠। दधा॑ना⁠। प्रतीति॑⁠। वा॒म्⁠। जि॒ह्वा⁠। घृ॒तम्⁠। एति॑⁠। च॒र॒ण्ये॒त्⁠॥ अग्ना॑विष्णू॒ इत्यग्ना᳚—वि॒ष्णू॒⁠। महि॑⁠। धाम॑⁠। प्रि॒यम्⁠। वा॒म्⁠। वी॒थः⁠। घृ॒तस्य॑⁠। गुह्या᳚⁠। जु॒षा॒णा⁠॥ दमे॑दम॒ इति॒ दमे᳚—द॒मे॒⁠। सु॒ष्टु॒तीरिति॑ सु—स्तु॒तीः⁠। वा॒वृ॒धा॒ना⁠। प्रतीति॑⁠। वा॒म्⁠। जि॒ह्वा⁠। घृ॒तम्⁠। उदिति॑⁠। च॒र॒ण्ये॒त्⁠॥ प्रेति॑⁠। नः॒⁠। दे॒वी⁠। सर॑स्वती⁠। वाजे॑भिः⁠। वा॒जिनी॑व॒तीति॑ वा॒जिनी᳚—व॒ती॒⁠॥ धी॒नाम्⁠। अ॒वि॒त्री⁠। अ॒व॒तु॒⁠॥ एति॑⁠। नः॒⁠। दि॒वः⁠। बृ॒ह॒तः⁠। ३८ (५०) [३८] पर्व॑तात्⁠। एति॑⁠। सर॑स्वती⁠। य॒ज॒ता⁠। ग॒न्तु॒⁠। य॒ज्ञम्⁠॥ हव᳚म्⁠। दे॒वी⁠। जु॒जु॒षा॒णा⁠। घृ॒ताची᳚⁠। श॒ग्माम्⁠। नः॒⁠। वाच᳚म्⁠। उ॒श॒ती⁠। शृ॒णो॒तु॒⁠॥ बृह॑स्पते⁠। जु॒षस्व॑⁠। नः॒⁠। ह॒व्यानि॑⁠। वि॒श्व॒दे॒व्येति॑ विश्व—दे॒व्य॒⁠॥ रास्व॑⁠। रत्ना॑नि⁠। दा॒शुषे᳚⁠॥ ए॒वा⁠। पि॒त्रे⁠। वि॒श्वदे॑वा॒येति॑ वि॒श्व—दे॒वा॒य॒⁠। वृष्णे᳚⁠। य॒ज्ञैः⁠। वि॒धे॒म॒⁠। नम॑सा⁠। ह॒विर्भि॒रिति॑ ह॒विः—भिः॒⁠॥ बृह॑स्पते⁠। सु॒प्र॒जा इति॑ सु—प्र॒जाः⁠। वी॒रव॑न्त॒ इति॑ वी॒र—व॒न्तः॒⁠। व॒यम्⁠। स्या॒म॒⁠। पत॑यः⁠। र॒यी॒णाम्⁠॥ बृह॑स्पते⁠। अतीति॑⁠। यत्⁠। अ॒र्यः⁠। अर्‌हा᳚त्⁠। द्यु॒मदिति॑ द्यु—मत्⁠। वि॒भातीति॑ वि—भाति॑⁠। क्रतु॑म॒दिति॒ क्रतु॑—म॒त्⁠। जने॑षु⁠॥ यत्⁠। दी॒दय॑त्⁠। शव॑सा⁠। ३९ (५०) [३९] ऋ॒त॒प्र॒जा॒तेत्यृ॑त—प्र॒जा॒त॒⁠। तत्⁠। अ॒स्मासु॑⁠। द्रवि॑णम्⁠। धे॒हि॒⁠। चि॒त्रम्⁠॥ एति॑⁠। नः॒⁠। मि॒त्रा॒व॒रु॒णेति॑ मित्रा—व॒रु॒णा॒⁠। घृ॒तैः⁠। गव्यू॑तिम्⁠। उ॒ख्‍ष॒त॒म्⁠॥ मद्ध्वा᳚⁠। रजा॑ꣳसि⁠। सु॒क्र॒तू॒ इति॑ सु—क्र॒तू॒⁠॥ प्रेति॑⁠। बा॒हवा᳚⁠। सि॒सृ॒त॒म्⁠। जी॒वसे᳚⁠। नः॒⁠। एति॑⁠। नः॒⁠। गव्यू॑तिम्⁠। उ॒ख्‍ष॒त॒म्⁠। घृ॒तेन॑⁠॥ एति॑⁠। नः॒⁠। जने᳚⁠। श्र॒व॒य॒त॒म्⁠। यु॒वा॒ना॒⁠। श्रु॒तम्⁠। मे॒⁠। मि॒त्रा॒व॒रु॒णेति॑ मित्रा—व॒रु॒णा॒⁠। हवा᳚⁠। इ॒मा⁠॥ अ॒ग्निम्⁠। वः॒⁠। पू॒र्व्यम्⁠। गि॒रा⁠। दे॒वम्⁠। ई॒डे॒⁠। वसू॑नाम्⁠॥ स॒प॒र्यन्तः॑⁠। पु॒रु॒प्रि॒यमिति॑ पुरु—प्रि॒यम्⁠। मि॒त्रम्⁠। न⁠। ख्‍षे॒त्र॒साध॑स॒मिति॑ ख्‍षेत्र—साध॑सम्⁠॥ म॒ख्‍षु⁠। दे॒वव॑त॒ इति॑ दे॒व—व॒तः॒⁠। रथः॑⁠। ४० (५०) [४०] शूरः॑⁠। वा॒⁠। पृ॒थ्स्विति॑ पृत्—सु⁠। कासु॑⁠। चि॒त्⁠॥ दे॒वाना᳚म्⁠। यः⁠। इत्⁠। मनः॑⁠। यज॑मानः⁠। इय॑ख्‍षति⁠। अ॒भीति॑⁠। इत्⁠। अय॑ज्वनः⁠। भु॒व॒त्⁠॥ न⁠। य॒ज॒मा॒न॒⁠। रि॒ष्य॒सि॒⁠। न⁠। सु॒न्वा॒न॒⁠। न⁠। दे॒व॒यो॒ इति॑ देव—यो॒⁠॥ अस॑त्⁠। अत्र॑⁠। सु॒वीर्य॒मिति॑ सु—वीर्य᳚म्⁠। उ॒त⁠। त्यत्⁠। आ॒श्वश्वि॑य॒मित्या॑शु—अश्वि॑यम्⁠॥ नकिः॑⁠। तम्⁠। कर्म॑णा⁠। न॒श॒त्⁠। न⁠। प्रेति॑⁠। यो॒ष॒त्⁠। न⁠। यो॒ष॒ति॒⁠॥ उपेति॑⁠। ख्‍ष॒र॒न्ति॒⁠। सिन्ध॑वः⁠। म॒यो॒भुव॒ इति॑ मयः—भुवः॑⁠। ई॒जा॒नम्⁠। च॒⁠। य॒ख्‍ष्यमा॑णम्⁠। च॒⁠। धे॒नवः॑⁠॥ पृ॒णन्त᳚म्⁠। च॒⁠। पपु॑रिम्⁠। च॒⁠। ४१ (५०) [४१] श्र॒व॒स्यवः॑⁠। घृ॒तस्य॑⁠। धाराः᳚⁠। उपेति॑⁠। य॒न्ति॒⁠। वि॒श्वतः॑⁠॥ सोमा॑रु॒द्रेति॒ सोमा᳚—रु॒द्रा॒⁠। वीति॑⁠। वृ॒ह॒त॒म्⁠। विषू॑चीम्⁠। अमी॑वा⁠। या⁠। नः॒⁠। गय᳚म्⁠। आ॒वि॒वेशेत्या᳚—वि॒वेश॑⁠॥ आ॒रे⁠। बा॒धे॒था॒म्⁠। निर्‌ऋ॑ति॒मिति॒ निः—ऋ॒ति॒म्⁠। प॒रा॒चैः⁠। कृ॒तम्⁠। चि॒त्⁠। एनः॑⁠। प्रेति॑⁠। मु॒मु॒क्त॒म्⁠। अ॒स्मत्⁠॥ सोमा॑रु॒द्रेति॒ सोमा᳚—रु॒द्रा॒⁠। यु॒वम्⁠। ए॒तानि॑⁠। अ॒स्मे इति॑⁠। विश्वा᳚⁠। त॒नूषु॑⁠। भे॒ष॒जानि॑⁠। ध॒त्त॒म्⁠। अवेति॑⁠। स्य॒त॒म्⁠। मु॒ञ्चत᳚म्⁠। यत्⁠। नः॒⁠। अस्ति॑⁠। त॒नूषु॑⁠। ब॒द्धम्⁠। कृ॒तम्⁠। एनः॑⁠। अ॒स्मत्⁠। सोमा॑पूष॒णेति॒ सोमा᳚—पू॒ष॒णा॒⁠। जन॑ना⁠। र॒यी॒णाम्⁠। जन॑ना⁠। दि॒वः⁠। जन॑ना⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠॥ जा॒तौ⁠। विश्व॑स्य⁠। भुव॑नस्य⁠। गो॒पौ⁠। दे॒वाः⁠। अ॒कृ॒ण्व॒न्न्⁠। अ॒मृत॑स्य⁠। नाभि᳚म्⁠॥ इ॒मौ⁠। दे॒वौ⁠। जाय॑मानौ⁠। जु॒ष॒न्त॒⁠। इ॒मौ⁠। तमा॑ꣳसि⁠। गू॒ह॒ता॒म्⁠। अजु॑ष्टा⁠॥ आ॒भ्याम्⁠। इन्द्रः॑⁠। प॒क्वम्⁠। आ॒मासु॑⁠। अ॒न्तः⁠। सो॒मा॒पू॒षभ्या॒मिति॑ सोमापू॒ष—भ्या॒म्⁠। ज॒न॒त्⁠। उ॒स्रिया॑सु [४२] (बृ॒ह॒तःशव॑सा॒रथः॒पपु॑रिं चदि॒वो जन॑ना॒पञ्च॑विꣳशतिश्च) ॥२२॥
अनुवाकाः पञ्चशती
२२ ४०