कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता क्रम पाठः
चतुर्थकाण्डे षष्ठः प्रश्नः

कांड ४ प्रश्न ६
परिषेचनसंस्काराभिधानं

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
अश्म॒न्नूर्ज᳚म्⁠। ऊर्ज॒म् पर्व॑ते⁠। पर्व॑ते शिश्रिया॒णाम्⁠। शि॒श्रि॒या॒णाव्ँवाते᳚⁠। वाते॑ प॒र्जन्ये᳚⁠। प॒र्जन्ये॒ वरु॑णस्य⁠। वरु॑णस्य॒ शुष्मे᳚⁠। शुष्म॒ इति॒ शुष्मे᳚⁠॥ अ॒द्भ्य ओष॑धीभ्यः⁠। अ॒द्भ्य इत्य॑त्—भ्यः⁠। ओष॑धीभ्यो॒ वन॒स्पति॑भ्यः⁠। ओष॑धीभ्य॒ इत्योष॑धि—भ्यः॒⁠। वन॒स्पति॒भ्योऽधि॑⁠। वन॒स्पति॑भ्य॒ इति॒ वन॒स्पति॑—भ्यः॒⁠। अधि॒ सम्भृ॑ताम्⁠। सम्भृ॑ता॒म् ताम्⁠। सम्भृ॑ता॒मिति॒ सं—भृ॒ता॒म्⁠। ताम् नः॑⁠। न॒ इष᳚म्⁠। इष॒मूर्ज᳚म्⁠। ऊर्ज॑म् धत्त⁠। ध॒त्त॒ म॒रु॒तः॒⁠। म॒रु॒तः॒ स॒ꣳ॒र॒रा॒णाः⁠। स॒ꣳ॒र॒रा॒णा इति॑ सम्—र॒रा॒णाः⁠॥ अश्म॑ꣴस्ते⁠। ते॒ ख्‍षुत्⁠। ख्‍षुद॒मुम्⁠। अ॒मुम् ते᳚⁠। ते॒ शुक्⁠। शुगृ॑च्छतु⁠। ऋ॒च्छ॒तु॒ यम्⁠। यम् द्वि॒ष्मः⁠। द्वि॒ष्म इति॑ द्वि॒ष्मः⁠॥ स॒मु॒द्रस्य॑ त्वा⁠। त्वा॒ऽवाक॑या⁠। अ॒वाक॒याऽग्ने᳚⁠। अग्ने॒ परि॑⁠। परि॑ व्ययामसि⁠। व्य॒या॒म॒सीति॑ व्ययामसि⁠॥ पा॒व॒को अ॒स्मभ्य᳚म्⁠। अ॒स्मभ्य॑ꣳ शि॒वः⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। शि॒वो भ॑व⁠। भ॒वेति॑ भव⁠॥ हि॒मस्य॑ त्वा⁠। त्वा॒ ज॒रायु॑णा⁠। ज॒रायु॒णाऽग्ने᳚⁠। अग्ने॒ परि॑⁠। परि॑ व्ययामसि⁠। व्य॒या॒म॒सीति॑ व्ययामसि⁠॥ पा॒व॒को अ॒स्मभ्य᳚म्⁠। अ॒स्मभ्य॑ꣳ शि॒वः⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। शि॒वो भ॑व⁠। भ॒वेति॑ भव⁠॥ उप॒ ज्मन्न्⁠। [१] ज्मन्नुप॑⁠। उप॑ वेत॒से⁠। वे॒त॒सेऽव॑त्तरम्⁠। अव॑त्तरम् न॒दीषु॑⁠। अव॑त्तर॒मित्यव॑त्—त॒र॒म्⁠। न॒दीष्वा⁠। एत्या⁠॥ अग्ने॑ पि॒त्तम्⁠। पि॒त्तम॒पाम्⁠। अ॒पाम॑सि⁠। अ॒सीत्य॑सि⁠॥ मण्डू॑कि॒ ताभिः॑⁠। ताभि॒रा⁠। आ ग॑हि⁠। ग॒हि॒ सा⁠। सेमम्⁠। इ॒मम् नः॑⁠। नो॒ य॒ज्ञम्⁠। य॒ज्ञमिति॑ य॒ज्ञम्⁠॥ पा॒व॒कव॑र्णꣳ शि॒वम्⁠। पा॒व॒कव॑र्ण॒मिति॑ पाव॒क—व॒र्ण॒म्⁠। शि॒वम् कृ॑धि⁠। कृ॒धीति॑ कृधि⁠॥ पा॒व॒क आ⁠। आ चि॒तय॑न्त्या⁠। चि॒तय॑न्त्या कृ॒पा⁠। कृ॒पेति॑ कृ॒पा⁠॥ ख्‍षाम॑न् रुरु॒चे⁠। रु॒रु॒च उ॒षसः॑⁠। उ॒षसो॒ न⁠। न भा॒नुना᳚⁠। भा॒नुनेति॑ भा॒नुना᳚⁠॥ तूर्व॒न् न⁠। न याम॑न्न्⁠। याम॒न्नेत॑शस्य⁠। एत॑शस्य॒ नु⁠। नू रणे᳚⁠। रण॒ आ⁠। आ यः⁠। यो घृ॒णे⁠। घृ॒ण इति॑ घृ॒णे⁠॥ न त॑तृषा॒णः⁠। त॒तृ॒षा॒णो अ॒जरः॑⁠। अ॒जर॒ इत्य॒जरः॑⁠॥ अग्ने॑ पावक⁠। पा॒व॒क॒ रो॒चिषा᳚⁠। रो॒चिषा॑ म॒न्द्रया᳚⁠। म॒न्द्रया॑ देव⁠। दे॒व॒ जि॒ह्वया᳚⁠। जि॒ह्वयेति॑ जि॒ह्वया᳚⁠॥ आ दे॒वान्⁠। दे॒वान्‌व॑ख्‍षि⁠। [२] व॒ख्‍षि॒ यख्‍षि॑⁠। यख्‍षि॑ च⁠। चेति॑ च⁠॥ स नः॑⁠। नः॒ पा॒व॒क॒⁠। पा॒व॒क॒ दी॒दि॒वः॒⁠। दी॒दि॒वोऽग्ने᳚⁠। अग्ने॑ दे॒वान्⁠। दे॒वाꣳ इ॒ह⁠। इ॒हा⁠। आ व॑ह⁠। व॒हेति॑ वह⁠॥ उप॑ य॒ज्ञम्⁠। य॒ज्ञꣳ ह॒विः⁠। ह॒विश्च॑⁠। च॒ नः॒⁠। न॒ इति॑ नः⁠॥ अ॒पामि॒दम्⁠। इ॒दम् न्यय॑नम्⁠। न्यय॑नꣳ समु॒द्रस्य॑⁠। न्यय॑न॒मिति॑ नि—अय॑नम्⁠। स॒मु॒द्रस्य॑ नि॒वेश॑नम्⁠। नि॒वेश॑न॒मिति॑ नि—वेश॑नम्⁠॥ अ॒न्यम् ते᳚⁠। ते॒ अ॒स्मत्⁠। अ॒स्मत् त॑पन्तु⁠। त॒प॒न्तु॒ हे॒तयः॑⁠। हे॒तयः॑ पाव॒कः⁠। पा॒व॒को अ॒स्मभ्य᳚म्⁠। अ॒स्मभ्य॑ꣳ शि॒वः⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। शि॒वो भ॑व⁠। भ॒वेति॑ भव⁠॥ नम॑स्ते⁠। ते॒ हर॑से⁠। हर॑से शो॒चिषे᳚⁠। शो॒चिषे॒ नमः॑⁠। नम॑स्ते⁠। ते॒ अ॒स्तु॒⁠। अ॒स्त्व॒र्चिषे᳚⁠। अ॒र्चिष॒ इत्य॒र्चिषे᳚⁠॥ अ॒न्यम् ते᳚⁠। ते॒ अ॒स्मत्⁠। अ॒स्मत् त॑पन्तु⁠। त॒प॒न्तु॒ हे॒तयः॑⁠। हे॒तयः॑ पाव॒कः⁠। पा॒व॒को अ॒स्मभ्य᳚म्⁠। अ॒स्मभ्य॑ꣳ शि॒वः⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। शि॒वो भ॑व⁠। भ॒वेति॑ भव⁠॥ नृ॒षदे॒ वट्⁠। नृ॒षद॒ इति॑ नृ—सदे᳚⁠। वड॑फ्सु॒षदे᳚⁠। [३] अ॒फ्सु॒षदे॒ वट्⁠। अ॒फ्सु॒षद॒ इत्य॑फ्सु—सदे᳚⁠। वड् व॑न॒सदे᳚⁠। व॒न॒सदे॒ वट्⁠। व॒न॒सद॒ इति॑ वन—सदे᳚⁠। वड् ब॑र्हि॒षदे᳚⁠। ब॒र्॒‌हि॒षदे॒ वट्⁠। ब॒र्॒‌हि॒षद॒ इति॑ बर्‌हि—सदे᳚⁠। वट्थ् सु॑व॒र्विदे᳚⁠। सु॒व॒र्विदे॒ वट्⁠। सु॒व॒र्विद॒ इति॑ सुवः—विदे᳚⁠। वडिति॒ वट्⁠॥ ये दे॒वाः⁠। दे॒वा दे॒वाना᳚म्⁠। दे॒वाना᳚य्ँय॒ज्ञियाः᳚⁠। य॒ज्ञिया॑ य॒ज्ञिया॑नाम्⁠। य॒ज्ञिया॑नाꣳ सव्ँवथ्स॒रीण᳚म्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रीण॒मुप॑⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रीण॒मिति॑ सं—व॒थ्स॒रीण᳚म्⁠। उप॑ भा॒गम्⁠। भा॒गमास॑ते⁠। आस॑त॒ इत्यास॑ते⁠॥ अ॒हु॒तादो॑ ह॒विषः॑⁠। अ॒हु॒ताद॒ इत्य॑हुत—अदः॑⁠। ह॒विषो॑ य॒ज्ञे⁠। य॒ज्ञे अ॒स्मिन्न्⁠। अ॒स्मिन्थ् स्व॒यम्⁠। स्व॒यम् जु॑हुद्ध्वम्⁠। जु॒हु॒द्ध्व॒म् मधु॑नः⁠। मधु॑नो घृ॒तस्य॑⁠। घृ॒तस्येति॑ घृ॒तस्य॑⁠॥ ये दे॒वाः⁠। दे॒वा दे॒वेषु॑⁠। दे॒वेष्वधि॑⁠। अधि॑ देव॒त्वम्⁠। दे॒व॒त्वमाय॑न्न्⁠। दे॒व॒त्वमिति॑ देव—त्वम्⁠। आय॒न्॒‌ये⁠। ये ब्रह्म॑णः⁠। ब्रह्म॑णः पुरे॒तारः॑⁠। पु॒र॒ए॒तारो॑ अ॒स्य⁠। पु॒र॒ए॒तार॒ इति॑ पुरः—ए॒तारः॑⁠। अ॒स्येत्य॒स्य⁠॥ येभ्यो॒ न⁠। नर्ते⁠। ऋ॒ते पव॑ते⁠। पव॑ते॒ धाम॑⁠। धाम॒ किम्⁠। किम् च॒न⁠। च॒न न⁠। न ते⁠। ते दि॒वः⁠। दि॒वो न⁠। न पृ॑थि॒व्याः⁠। पृ॒थि॒व्या अधि॑⁠। अधि॒ स्नुषु॑⁠। स्नुष्विति॒ स्नुषु॑⁠॥ प्रा॒ण॒दा अ॑पान॒दाः⁠। प्रा॒ण॒दा इति॑ प्राण—दाः⁠। [४] अ॒पा॒न॒दा व्या॑न॒दाः⁠। अ॒पा॒न॒दा इत्य॑पान—दाः⁠। व्या॒न॒दाश्च॑ख्‍षु॒र्दाः⁠। व्या॒न॒दा इति॑ व्यान—दाः⁠। च॒ख्‍षु॒र्दा व॑र्चो॒दाः⁠। च॒ख्‍षु॒र्दा इति॑ चख्‍षुः—दाः⁠। व॒र्चो॒दा व॑रिवो॒दाः⁠। व॒र्चो॒दा इति॑ वर्चः—दाः⁠। व॒रि॒वो॒दा इति॑ वरिवः—दाः⁠॥ अ॒न्यम् ते᳚⁠। ते॒ अ॒स्मत्⁠। अ॒स्मत् त॑पन्तु⁠। त॒प॒न्तु॒ हे॒तयः॑⁠। हे॒तयः॑ पाव॒कः⁠। पा॒व॒को अ॒स्मभ्य᳚म्⁠। अ॒स्मभ्य॑ꣳ शि॒वः⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। शि॒वो भ॑व⁠। भ॒वेति॑ भव⁠॥ अ॒ग्निस्ति॒ग्मेन॑⁠। ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा᳚⁠। शो॒चिषा॒ यꣳस॑त्⁠। यꣳस॒द् विश्व᳚म्⁠। विश्व॒म् नि⁠। न्य॑त्रिण᳚म्⁠। अ॒त्रिण॒मित्य॒त्रिण᳚म्⁠॥ अ॒ग्निर् नः॑⁠। नो॒ व॒ꣳ॒स॒ते॒⁠। व॒ꣳ॒स॒ते॒ र॒यिम्⁠। र॒यिमिति॑ र॒यिम्⁠॥ सैना⁠। ए॒नाऽनी॑केन⁠। अनी॑केन सुवि॒दत्रः॑⁠। सु॒वि॒दत्रो॑ अ॒स्मे⁠। सु॒वि॒दत्र॒ इति॑ सु—वि॒दत्रः॑⁠। अ॒स्मे यष्टा᳚⁠। अ॒स्मे इत्य॒स्मे⁠। यष्टा॑ दे॒वान्⁠। दे॒वाꣳ आय॑जिष्ठः⁠। आय॑जिष्ठः स्व॒स्ति⁠। आय॑जिष्ठ॒ इत्या—य॒जि॒ष्ठः॒⁠। स्व॒स्तीति॑ स्व॒स्ति⁠॥ अद॑ब्धो गो॒पाः⁠। गो॒पा उ॒त⁠। गो॒पा इति॑ गो—पाः⁠। उ॒त नः॑⁠। नः॒ प॒र॒स्पाः⁠। प॒र॒स्पा अग्ने᳚⁠। प॒र॒स्पा इति॑ परः—पाः⁠। अग्ने᳚ द्यु॒मत्⁠। द्यु॒मदु॒त⁠। द्यु॒मदिति॑ द्यु—मत्⁠। उ॒त रे॒वत्⁠। रे॒वद् दि॑दीहि⁠। दि॒दी॒हीति॑ दिदीहि⁠॥ [५] (उप॑ दे॒वान् वट् प्रा॑ण॒दा श्चतु॑श्चत्वारिꣳशच्च) ॥१॥
य इ॒मा⁠। इ॒मा विश्वा᳚⁠। विश्वा॒ भुव॑नानि⁠। भुव॑नानि॒ जुह्व॑त्⁠। जुह्व॒दृषिः॑⁠। ऋषि॒र्॒‌होता᳚⁠। होता॑ निष॒साद॑⁠। नि॒ष॒सादा॑ पि॒ता⁠। नि॒ष॒सादेति॑ नि—स॒साद॑⁠। पि॒ता नः॑⁠। न॒ इति॑ नः⁠॥ स आ॒शिषा᳚⁠। आ॒शिषा॒ द्रवि॑णम्⁠। आ॒शिषेत्या᳚—शिषा᳚⁠। द्रवि॑णमि॒च्छमा॑नः⁠। इ॒च्छमा॑नः परम॒च्छदः॑⁠। प॒र॒म॒च्छदो॒ वरे᳚⁠। प॒र॒म॒च्छद॒ इति॑ परम—छदः॑⁠। वर॒ आ⁠। आ वि॑वेश⁠। वि॒वे॒शेति॑ विवेश⁠॥ वि॒श्वक॑र्मा॒ मन॑सा⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। मन॑सा॒ यत्⁠। यद् विहा॑याः⁠। विहा॑या धा॒ता⁠। विहा॑या॒ इति॒ वि—हा॒याः॒⁠। धा॒ता वि॑धा॒ता⁠। वि॒धा॒ता प॑र॒मा⁠। वि॒धा॒तेति॑ वि—धा॒ता⁠। प॒र॒मोत⁠। उ॒त स॒न्दृक्⁠। स॒न्दृगिति॑ सम्—दृक्⁠॥ तेषा॑मि॒ष्टानि॑⁠। इ॒ष्टानि॒ सम्⁠। समि॒षा⁠। इ॒षा म॑दन्ति⁠। म॒द॒न्ति॒ यत्र॑⁠। यत्र॑ सप्त॒र्॒‌षीन्⁠। स॒प्त॒र्॒‌षीन् प॒रः⁠। स॒प्त॒र्॒‌षीनिति॑ सप्त—ऋ॒षीन्⁠। प॒र एक᳚म्⁠। एक॑मा॒हुः⁠। आ॒हुरित्या॒हुः⁠॥ यो नः॑⁠। नः॒ पि॒ता⁠। पि॒ता ज॑नि॒ता⁠। ज॒नि॒ता यः⁠। यो वि॑धा॒ता⁠। वि॒धा॒ता यः⁠। वि॒धा॒तेति॑ वि—धा॒ता⁠। यो नः॑⁠। नः॒ स॒तः⁠। स॒तो अ॒भि⁠। अ॒भ्या⁠। आ सत्⁠। सज् ज॒जान॑⁠। ज॒जानेति॑ ज॒जान॑⁠॥ [६] यो दे॒वाना᳚म्⁠। दे॒वाना᳚म् नाम॒धाः⁠। ना॒म॒धा एकः॑⁠। ना॒म॒धा इति॑ नाम—धाः⁠। एक॑ ए॒व⁠। ए॒व तम्⁠। तꣳ स॑म्प्र॒श्ञम्⁠। स॒म्प्र॒श्ञम् भुव॑ना⁠। स॒म्प्र॒श्ञमिति॑ सम्—प्र॒श्ञम्⁠। भुव॑ना यन्ति⁠। य॒न्त्य॒न्या⁠। अ॒न्येत्य॒न्या⁠॥ त आ⁠। आऽय॑जन्त⁠। अ॒य॒ज॒न्त॒ द्रवि॑णम्⁠। द्रवि॑ण॒ꣳ॒ सम्⁠। सम॑स्मै⁠। अ॒स्मा॒ ऋष॑यः⁠। ऋष॑यः॒ पूर्वे᳚⁠। पूर्वे॑ जरि॒तारः॑⁠। ज॒रि॒तारो॒ न⁠। न भू॒ना⁠। भू॒नेति॑ भू॒ना⁠॥ अ॒सूर्ता॒ सूर्ता᳚⁠। सूर्ता॒ रज॑सः⁠। रज॑सो वि॒माने᳚⁠। वि॒माने॒ ये⁠। वि॒मान॒ इति॑ वि—माने᳚⁠। ये भू॒तानि॑⁠। भू॒तानि॑ स॒मकृ॑ण्वन्न्⁠। स॒मकृ॑ण्वन्नि॒मानि॑⁠। स॒मकृ॑ण्व॒न्निति॑ सम्—अकृ॑ण्वन्न्⁠। इ॒मानीती॒मानि॑⁠॥ न तम्⁠। तव्ँवि॑दाथ⁠। वि॒दा॒थ॒ यः⁠। य इ॒दम्⁠। इ॒दम् ज॒जान॑⁠। ज॒जाना॒न्यत्⁠। अ॒न्यद् यु॒ष्माक᳚म्⁠। यु॒ष्माक॒मन्त॑रम्⁠। अन्त॑रम् भवाति⁠। भ॒वा॒तीति॑ भवाति⁠॥ नी॒हा॒रेण॒ प्रावृ॑ताः⁠। प्रावृ॑ता॒ जल्प्या᳚⁠। जल्प्या॑ च⁠। चा॒सु॒तृपः॑⁠। अ॒सु॒तृप॑ उक्थ॒शासः॑⁠। अ॒सु॒तृप॒ इत्य॑सु—तृपः॑⁠। उ॒क्थ॒शास॑श्चरन्ति⁠। उ॒क्थ॒शास॒ इत्यु॑क्थ—शासः॑⁠। च॒र॒न्तीति॑ चरन्ति⁠॥ प॒रो दि॒वा⁠। दि॒वा प॒रः⁠। प॒र ए॒ना⁠। ए॒ना पृ॑थि॒व्या⁠। [७] पृ॒थि॒व्या प॒रः⁠। प॒रो दे॒वेभिः॑⁠। दे॒वेभि॒रसु॑रैः⁠। असु॑रै॒र् गुहा᳚⁠। गुहा॒ यत्⁠। यदिति॒ यत्⁠॥ कꣴ स्वि॑त्⁠। स्वि॒द् गर्भ᳚म्⁠। गर्भ॑म् प्रथ॒मम्⁠। प्र॒थ॒मम् द॑द्ध्रे⁠। द॒द्ध्र॒ आपः॑⁠। आपो॒ यत्र॑⁠। यत्र॑ दे॒वाः⁠। दे॒वाः स॒मग॑च्छन्त⁠। स॒मग॑च्छन्त॒ विश्वे᳚⁠। स॒मग॑च्छ॒न्तेति॑ सम्—अग॑च्छन्त⁠। विश्व॒ इति॒ विश्वे᳚⁠॥ तमित्⁠। इद् गर्भ᳚म्⁠। गर्भ॑म् प्रथ॒मम्⁠। प्र॒थ॒मम् द॑द्ध्रे⁠। द॒द्ध्र॒ आपः॑⁠। आपो॒ यत्र॑⁠। यत्र॑ दे॒वाः⁠। दे॒वाः स॒मग॑च्छन्त⁠। स॒मग॑च्छन्त॒ विश्वे᳚⁠। स॒मग॑च्छ॒न्तेति॑ सम्—अग॑च्छन्त⁠। विश्व॒ इति॒ विश्वे᳚⁠॥ अ॒जस्य॒ नाभौ᳚⁠। नाभा॒वधि॑⁠। अद्ध्येक᳚म्⁠। एक॒मर्पि॑तम्⁠। अर्पि॑त॒य्ँयस्मि॑न्न्⁠। यस्मि॑न्नि॒दम्⁠। इ॒दव्ँविश्व᳚म्⁠। विश्व॒म् भुव॑नम्⁠। भुव॑न॒मधि॑⁠। अधि॑ श्रि॒तम्⁠। श्रि॒तमिति॑ श्रि॒तम्⁠॥ वि॒श्वक॑र्मा॒ हि⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। ह्यज॑निष्ट⁠। अज॑निष्ट दे॒वः⁠। दे॒व आत्⁠। आदित्⁠। इद् ग॑न्ध॒र्वः⁠। ग॒न्ध॒र्वो अ॑भवत्⁠। अ॒भ॒व॒द् द्वि॒तीयः॑⁠। द्वि॒तीय॒ इति॑ द्वि॒तीयः॑⁠॥ तृ॒तीयः॑ पि॒ता⁠। पि॒ता ज॑नि॒ता⁠। ज॒नि॒तौष॑धीनाम्⁠। ओष॑धीनाम॒पाम्⁠। [८] अ॒पाम् गर्भ᳚म्⁠। गर्भ॒व्ँवि⁠। व्य॑दधात्⁠। अ॒द॒धा॒त्॒ पु॒रु॒त्रा⁠। पु॒रु॒त्रेति॑ पुरु—त्रा⁠॥ चख्‍षु॑षः पि॒ता⁠। पि॒ता मन॑सा⁠। मन॑सा॒ हि⁠। हि धीरः॑⁠। धीरो॑ घृ॒तम्⁠। घृ॒तमे॑ने⁠। ए॒ने॒ अ॒ज॒न॒त्॒⁠। ए॒ने॒ इत्ये॑ने⁠। अ॒ज॒न॒न् नन्न॑माने⁠। नन्न॑माने॒ इति॒ नन्न॑माने⁠॥ य॒देत्⁠। इ॒दन्ताः᳚⁠। अन्ता॒ अद॑दृꣳहन्त⁠। अद॑दृꣳहन्त॒ पूर्वे᳚⁠। पूर्व॒ आत्⁠। आदित्⁠। इद् द्यावा॑पृथि॒वी⁠। द्यावा॑पृथि॒वी अ॑प्रथेताम्⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। अ॒प्र॒थे॒ता॒मित्य॑प्रथेताम्⁠॥ वि॒श्वत॑श्चख्‍षुरु॒त⁠। वि॒श्वत॑श्चख्‍षु॒रिति॑ वि॒श्वतः॑—च॒ख्‍षुः॒⁠। उ॒त वि॒श्वतो॑मुखः⁠। वि॒श्वतो॑मुखो वि॒श्वतो॑हस्तः⁠। वि॒श्वतो॑मुख॒ इति॑ वि॒श्वतः॑—मु॒खः॒⁠। वि॒श्वतो॑हस्त उ॒त⁠। वि॒श्वतो॑हस्त॒ इति॑ वि॒श्वतः॑—ह॒स्तः॒⁠। उ॒त वि॒श्वत॑स्पात्⁠। वि॒श्वत॑स्पा॒दिति॑ वि॒श्वतः॑—पा॒त्॒⁠॥ सम् बा॒हुभ्या᳚म्⁠। बा॒हुभ्या॒म् नम॑ति⁠। बा॒हुभ्या॒मिति॑ बा॒हु—भ्या॒म्⁠। नम॑ति॒ सम्⁠। सम् पत॑त्रैः⁠। पत॑त्रै॒र् द्यावा॑पृथि॒वी⁠। द्यावा॑पृथि॒वी ज॒नय॑न्न्⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। ज॒नय॑न् दे॒वः⁠। दे॒व एकः॑⁠। एक॒ इत्येकः॑⁠॥ किꣴ स्वि॑त्⁠। स्वि॒दा॒सी॒त्॒⁠। आ॒सी॒द॒धि॒ष्ठान᳚म्⁠। अ॒धि॒ष्ठान॑मा॒रम्भ॑णम्⁠। अ॒धि॒ष्ठान॒मित्य॑धि—स्थान᳚म्⁠। आ॒रम्भ॑णम् कत॒मत्⁠। आ॒रम्भ॑ण॒मित्या᳚—रम्भ॑णम्⁠। क॒त॒मथ् स्वि॑त्⁠। स्वि॒त् किम्⁠। किमा॑सीत्⁠। आ॒सी॒दित्या॑सीत्⁠॥ यदी॒भूमि᳚म्⁠। भूमि॑म् ज॒नय॑न्न्⁠। ज॒नय॑न् वि॒श्वक॑र्मा⁠। [९] वि॒श्वक॑र्मा॒ वि⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। वि द्याम्⁠। द्यामौर्णो᳚त्⁠। और्णो᳚न् महि॒ना⁠। म॒हि॒ना वि॒श्वच॑ख्‍षाः⁠। वि॒श्वच॑ख्‍षा॒ इति॑ वि॒श्व—च॒ख्‍षाः॒⁠॥ किꣴ स्वि॑त्⁠। स्वि॒द् वन᳚म्⁠। वन॒म् कः⁠। क उ॑⁠। उ॒ सः⁠। स वृ॒ख्‍षः⁠। वृ॒ख्‍ष आ॑सीत्⁠। आ॒सी॒द् यतः॑⁠। यतो॒ द्यावा॑पृथि॒वी⁠। द्यावा॑पृथि॒वी नि॑ष्टत॒ख्‍षुः⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। नि॒ष्ट॒त॒ख्‍षुरिति॑ निः—त॒त॒ख्‍षुः⁠॥ मनी॑षिणो॒ मन॑सा⁠। मन॑सा पृ॒च्छत॑⁠। पृ॒च्छतेत्⁠। इदु॑⁠। उ॒ तत्⁠। तद् यत्⁠। यद॒द्ध्यति॑ष्ठत्⁠। अ॒द्ध्यति॑ष्ठ॒द् भुव॑नानि⁠। अ॒द्ध्यति॑ष्ठ॒दित्य॑द्धि—अति॑ष्ठत्⁠। भुव॑नानि धा॒रय॑न्न्⁠। धा॒रय॒न्निति॑ धा॒रय॑न्न्⁠॥ या ते᳚⁠। ते॒ धामा॑नि⁠। धामा॑नि पर॒माणि॑⁠। प॒र॒माणि॒ या⁠। याऽव॒मा⁠। अ॒व॒मा या⁠। या म॑द्ध्य॒मा⁠। म॒द्ध्य॒मा वि॑श्वकर्मन्न्⁠। वि॒श्व॒क॒र्म॒न्नु॒त⁠। वि॒श्व॒क॒र्म॒न्निति॑ विश्व—क॒र्म॒न्न्॒⁠। उ॒तेमा⁠। इ॒मेती॒मा⁠॥ शिख्‍षा॒ सखि॑भ्यः⁠। सखि॑भ्यो ह॒विषि॑⁠। सखि॑भ्य॒ इति॒ सखि॑—भ्यः॒⁠। ह॒विषि॑ स्वधावः⁠। स्व॒धा॒वः॒ स्व॒यम्⁠। स्व॒धा॒व॒ इति॑ स्वधा—वः॒⁠। स्व॒यय्ँय॑जस्व⁠। य॒ज॒स्व॒ त॒नुव᳚म्⁠। त॒नुव॑म् जुषा॒णः⁠। जु॒षा॒ण इति॑ जुषा॒णः⁠॥ वा॒चस्पति᳚म्⁠। पति॑व्ँवि॒श्वक॑र्माणम्⁠। वि॒श्वक॑र्माणमू॒तये᳚⁠। वि॒श्वक॑र्माण॒मिति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒ण॒म्⁠। ऊ॒तये॑ मनो॒युज᳚म्⁠। [१०] म॒नो॒युज॒व्ँवाजे᳚⁠। म॒नो॒युज॒मिति॑ मनः—युज᳚म्⁠। वाजे॑ अ॒द्य⁠। अ॒द्या हु॑वेम⁠। हु॒वे॒मेति॑ हुवेम⁠॥ स नः॑⁠। नो॒ नेदि॑ष्ठा⁠। नेदि॑ष्ठा॒ हव॑नानि⁠। हव॑नानि जोषते⁠। जो॒ष॒ते॒ वि॒श्वश॑म्भूः⁠। वि॒श्वश॑म्भू॒रव॑से⁠। वि॒श्वश॑म्भू॒रिति॑ वि॒श्व—श॒म्भूः॒⁠। अव॑से सा॒धुक॑र्मा⁠। सा॒धुक॒र्मेति॑ सा॒धु—क॒र्मा॒⁠॥ विश्व॑कर्मन्‌ह॒विषा᳚⁠। विश्व॑कर्म॒न्निति॒ विश्व॑—क॒र्म॒न्न्॒⁠। ह॒विषा॑ वावृधा॒नः⁠। वा॒वृ॒धा॒नः स्व॒यम्⁠। स्व॒यय्ँय॑जस्व⁠। य॒ज॒स्व॒ त॒नुव᳚म्⁠। त॒नुव॑म् जुषा॒णः⁠। जु॒षा॒ण इति॑ जुषा॒णः⁠॥ मुह्य॑न्त्व॒न्ये⁠। अ॒न्ये अ॒भितः॑⁠। अ॒भितः॑ स॒पत्नाः᳚⁠। स॒पत्ना॑ इ॒ह⁠। इ॒हास्माक᳚म्⁠। अ॒स्माक॑म् म॒घवा᳚⁠। म॒घवा॑ सू॒रिः⁠। म॒घवेति॑ म॒घ—वा॒⁠। सू॒रिर॑स्तु⁠। अ॒स्त्वित्य॑स्तु⁠॥ विश्व॑कर्मन्‌ह॒विषा᳚⁠। विश्व॑कर्म॒न्निति॒ विश्व॑—क॒र्म॒न्न्॒⁠। ह॒विषा॒ वर्द्ध॑नेन⁠। वर्द्ध॑नेन त्रा॒तार᳚म्⁠। त्रा॒तार॒मिन्द्र᳚म्⁠। इन्द्र॑मकृणोः⁠। अ॒कृ॒णो॒र॒व॒द्ध्यम्⁠। अ॒व॒द्ध्यमित्य॑व॒द्ध्यम्⁠॥ तस्मै॒ विशः॑⁠। विशः॒ सम्⁠। सम॑नमन्त⁠। अ॒न॒म॒न्त॒ पू॒र्वीः⁠। पू॒र्वीर॒यम्⁠। अ॒यमु॒ग्रः⁠। उ॒ग्रो वि॑ह॒व्यः॑⁠। वि॒ह॒व्यो॑ यथा᳚⁠। वि॒ह॒व्य॑ इति॑ वि—ह॒व्यः॑⁠। यथाऽस॑त्⁠। अस॒दित्यस॑त्⁠॥ स॒मु॒द्राय॑ व॒युना॑य⁠। व॒युना॑य॒ सिन्धू॑नाम्⁠। सिन्धू॑ना॒म् पत॑ये⁠। पत॑ये॒ नमः॑⁠। नम॒ इति॒ नमः॑⁠॥ न॒दीना॒ꣳ॒ सर्वा॑साम्⁠। सर्वा॑साम् पि॒त्रे⁠। पि॒त्रे जु॑हु॒त⁠। जु॒हु॒ता वि॒श्वक॑र्मणे⁠। वि॒श्वक॑र्मणे॒ विश्वा᳚⁠। वि॒श्वक॑र्मण॒ इति॑ वि॒श्व—क॒र्म॒णे॒⁠। विश्वाऽहा᳚⁠। अहाऽम॑र्त्यम्⁠। अम॑र्त्यꣳ ह॒विः⁠। ह॒विरिति॑ ह॒विः⁠॥ [११] (ज॒जानै॒ नौ ष॑धीनां॒ भूमिं॑ ज॒नय॑ न्नू॒तये॒ नमो॒ नव॑ च) ॥२॥
उदे॑नम्⁠। ए॒न॒मु॒त्त॒राम्⁠। उ॒त्त॒राम् न॑य⁠। उ॒त्त॒रामित्यु॑त्—त॒राम्⁠। न॒याग्ने᳚⁠। अग्ने॑ घृतेन⁠। घृ॒ते॒ना॒हु॒त॒⁠। आ॒हु॒तेत्या᳚—हु॒त॒⁠॥ रा॒यस्पोषे॑ण⁠। पोषे॑ण॒ सम्⁠। सꣳ सृ॑ज⁠। सृ॒ज॒ प्र॒जया᳚⁠। प्र॒जया॑ च⁠। प्र॒जयेति॑ प्र—जया᳚⁠। च॒ धने॑न⁠। धने॑न च⁠। चेति॑ च⁠॥ इन्द्रे॒मम्⁠। इ॒मम् प्र॑त॒राम्⁠। प्र॒त॒राम् कृ॑धि⁠। प्र॒त॒रामिति॑ प्र—त॒राम्⁠। कृ॒धि॒ स॒जा॒ताना᳚म्⁠। स॒जा॒ताना॑मसत्⁠। स॒जा॒ताना॒मिति॑ स—जा॒ताना᳚म्⁠। अ॒स॒द् व॒शी⁠। व॒शीति॑ व॒शी⁠॥ समे॑नम्⁠। ए॒न॒व्ँवर्च॑सा⁠। वर्च॑सा सृज⁠। सृ॒ज॒ दे॒वेभ्यः॑⁠। दे॒वेभ्यो॑ भाग॒धाः⁠। भा॒ग॒धा अ॑सत्⁠। भा॒ग॒धा इति॑ भाग—धाः⁠। अ॒स॒दित्य॑सत्⁠॥ यस्य॑ कु॒र्मः⁠। कु॒र्मो ह॒विः⁠। ह॒विर् गृ॒हे⁠। गृ॒हे तम्⁠। तम॑ग्ने⁠। अ॒ग्ने॒ व॒र्द्ध॒य॒⁠। व॒र्द्ध॒या॒ त्वम्⁠। त्वमिति॒ त्वम्⁠॥ तस्मै॑ दे॒वाः⁠। दे॒वा अधि॑⁠। अधि॑ ब्रवन्न्⁠। ब्र॒व॒न्न॒यम्⁠। अ॒यम् च॑⁠। च॒ ब्रह्म॑णः⁠। ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑⁠। पति॒रिति॒ पतिः॑⁠॥ उदु॑⁠। उ॒ त्वा॒⁠। त्वा॒ विश्वे᳚⁠। विश्वे॑ दे॒वाः⁠। दे॒वा अग्ने᳚⁠। [१२] अग्ने॒ भर॑न्तु⁠। भर॑न्तु॒ चित्ति॑भिः⁠। चित्ति॑भि॒रिति॒ चित्ति॑—भिः॒⁠॥ स नः॑⁠। नो॒ भ॒व॒⁠। भ॒व॒ शि॒वत॑मः⁠। शि॒वत॑मः सु॒प्रती॑कः⁠। शि॒वत॑म॒ इति॑ शि॒व—त॒मः॒⁠। सु॒प्रती॑को वि॒भाव॑सुः⁠। सु॒प्रती॑क॒ इति॑ सु—प्रती॑कः⁠। वि॒भाव॑सु॒रिति॑ वि॒भा—व॒सुः॒⁠॥ पञ्च॒ दिशः॑⁠। दिशो॒ दैवीः᳚⁠। दैवी᳚र् य॒ज्ञम्⁠। य॒ज्ञम॑वन्तु⁠। अ॒व॒न्तु॒ दे॒वीः⁠। दे॒वीरप॑⁠। अपाम॑तिम्⁠। अम॑तिम् दुर्म॒तिम्⁠। दु॒र्म॒तिम् बाध॑मानाः⁠। दु॒र्म॒तिमिति॑ दुः—म॒तिम्⁠। बाध॑माना॒ इति॒ बाध॑मानाः⁠॥ रा॒यस्पोषे᳚⁠। पोषे॑ य॒ज्ञप॑तिम्⁠। य॒ज्ञप॑तिमा॒भज॑न्तीः⁠। य॒ज्ञप॑ति॒मिति॑ य॒ज्ञ—प॒ति॒म्⁠। आ॒भज॑न्ती॒रित्या᳚—भज॑न्तीः⁠॥ रा॒यस्पोषे᳚⁠। पोषे॒ अधि॑⁠। अधि॑ य॒ज्ञः⁠। य॒ज्ञो अ॑स्थात्⁠। अ॒स्था॒थ् समि॑द्धे⁠। समि॑द्धे अ॒ग्नौ⁠। समि॑द्ध॒ इति॒ सम्—इ॒द्धे॒⁠। अ॒ग्नावधि॑⁠। अधि॑ मामहा॒नः⁠। मा॒म॒हा॒न इति॑ मामहा॒नः⁠॥ उ॒क्थप॑त्र॒ ईड्‍यः॑⁠। उ॒क्थप॑त्र॒ इत्यु॒क्थ—प॒त्रः॒⁠। ईड्‍यो॑ गृभी॒तः⁠। गृ॒भी॒तस्त॒प्तम्⁠। त॒प्तम् घ॒र्मम्⁠। घ॒र्मम् प॑रि॒गृह्य॑⁠। प॒रि॒गृह्या॑यजन्त⁠। प॒रि॒गृह्येति॑ परि—गृह्य॑⁠। अ॒य॒ज॒न्तेत्य॑यजन्त⁠॥ ऊ॒र्जा यत्⁠। यद् य॒ज्ञम्⁠। य॒ज्ञमश॑मन्त⁠। अश॑मन्त दे॒वाः⁠। दे॒वा दैव्या॑य⁠। दैव्या॑य ध॒र्त्रे⁠। ध॒र्त्रे जोष्ट्रे᳚⁠। जोष्ट्र॒ इति॒ जोष्ट्रे᳚⁠॥ दे॒व॒श्रीः श्रीम॑णाः⁠। दे॒व॒श्रीरिति॑ देव—श्रीः⁠। श्रीम॑णाः श॒तप॑याः⁠। श्रीम॑णा॒ इति॒ श्री—म॒नाः॒⁠। श॒तप॑याः परि॒गृह्य॑⁠। श॒तप॑या॒ इति॑ श॒त—प॒याः॒⁠। [१३] प॒रि॒गृह्य॑ दे॒वाः⁠। प॒रि॒गृह्येति॑ परि—गृह्य॑⁠। दे॒वा य॒ज्ञम्⁠। य॒ज्ञमा॑यन्न्⁠। आ॒य॒न्नित्या॑यन्न्⁠॥ सूर्य॑रश्मि॒र्॒‌हरि॑केशः⁠। सूर्य॑रश्मि॒रिति॒ सूर्य॑—र॒श्मिः॒⁠। हरि॑केशः पु॒रस्ता᳚त्⁠। हरि॑केश॒ इति॒ हरि॑—के॒शः॒⁠। पु॒रस्ता᳚थ् सवि॒ता⁠। स॒वि॒ता ज्योतिः॑⁠। ज्योति॒रुत्⁠। उद॑यान्⁠। अ॒या॒ꣳ॒ अज॑स्रम्⁠। अज॑स्र॒मित्यज॑स्रम्⁠॥ तस्य॑ पू॒षा⁠। पू॒षा प्र॑स॒वम्⁠। प्र॒स॒वय्ँया॑ति⁠। प्र॒स॒वमिति॑ प्र—स॒वम्⁠। या॒ति॒ दे॒वः⁠। दे॒वः स॒म्पश्य॑न्न्⁠। स॒म्पश्य॒न् विश्वा᳚⁠। स॒म्पश्य॒न्निति॑ सम्—पश्य॑न्न्⁠। विश्वा॒ भुव॑नानि⁠। भुव॑नानि गो॒पाः⁠। गो॒पा इति॑ गो—पाः⁠॥ दे॒वा दे॒वेभ्यः॑⁠। दे॒वेभ्यो॑ अद्ध्व॒र्यन्तः॑⁠। अ॒द्ध्व॒र्यन्तो॑ अस्थुः⁠। अ॒स्थु॒र् वी॒तम्⁠। वी॒तꣳ श॑मि॒त्रे⁠। श॒मि॒त्रे श॑मि॒ता⁠। श॒मि॒ता य॒जद्ध्यै᳚⁠। य॒जद्ध्या॒ इति॑ य॒जद्ध्यै᳚⁠॥ तु॒रीयो॑ य॒ज्ञः⁠। य॒ज्ञो यत्र॑⁠। यत्र॑ ह॒व्यम्⁠। ह॒व्यमेति॑⁠। एति॒ ततः॑⁠। ततः॑ पाव॒काः⁠। पा॒व॒का आ॒शिषः॑⁠। आ॒शिषो॑ नः⁠। आ॒शिष॒ इत्या᳚—शिषः॑⁠। नो॒ जु॒ष॒न्ता॒म्⁠। जु॒ष॒न्ता॒मिति॑ जुषन्ताम्⁠॥ वि॒मान॑ ए॒षः⁠। वि॒मान॒ इति॑ वि—मानः॑⁠। ए॒ष दि॒वः⁠। दि॒वो मद्ध्ये᳚⁠। मद्ध्य॑ आस्ते⁠। आ॒स्त॒ आ॒प॒प्रि॒वान्⁠। आ॒प॒प्रि॒वान् रोद॑सी⁠। आ॒प॒प्रि॒वानित्या᳚—प॒प्रि॒वान्⁠। रोद॑सी अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। रोद॑सी॒ इति॒ रोद॑सी⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍ष॒मित्य॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠॥ स वि॒श्वाचीः᳚⁠। वि॒श्वाची॑र॒भि⁠। अ॒भि च॑ष्टे⁠। [१४] च॒ष्टे॒ घृ॒ताचीः᳚⁠। घृ॒ताची॑रन्त॒रा⁠। अ॒न्त॒रा पूर्व᳚म्⁠। पूर्व॒मप॑रम्⁠। अप॑रम् च⁠। च॒ के॒तुम्⁠। के॒तुमिति॑ के॒तुम्⁠॥ उ॒ख्‍षा स॑मु॒द्रः⁠। स॒मु॒द्रो अ॑रु॒णः⁠। अ॒रु॒णः सु॑प॒र्णः⁠। सु॒प॒र्णः पूर्व॑स्य⁠। सु॒प॒र्ण इति॑ सु—प॒र्णः⁠। पूर्व॑स्य॒ योनि᳚म्⁠। योनि॑म् पि॒तुः⁠। पि॒तुरा⁠। आ वि॑वेश⁠। वि॒वे॒शेति॑ विवेश⁠॥ मद्ध्ये॑ दि॒वः⁠। दि॒वो निहि॑तः⁠। निहि॑तः॒ पृश्ञिः॑⁠। निहि॑त॒ इति॒ नि—हि॒तः॒⁠। पृश्ञि॒रश्मा᳚⁠। अश्मा॒ वि⁠। वि च॑क्रमे⁠। च॒क्र॒मे॒ रज॑सः⁠। रज॑सः पाति⁠। पा॒त्यन्तौ᳚⁠। अन्ता॒वित्यन्तौ᳚⁠॥ इन्द्र॒व्ँविश्वाः᳚⁠। विश्वा॑ अवीवृधन्न्⁠। अ॒वी॒वृ॒ध॒न्थ् स॒मु॒द्रव्य॑चसम्⁠। स॒मु॒द्रव्य॑चस॒ङ्‌गिरः॑⁠। स॒मु॒द्रव्य॑चस॒मिति॑ समु॒द्र—व्य॒च॒स॒म्⁠। गिर॒ इति॒ गिरः॑⁠॥ र॒थीत॑मꣳ रथी॒नाम्⁠। र॒थीत॑म॒मिति॑ र॒थि—त॒म॒म्⁠। र॒थी॒नाव्ँवाजा॑नाम्⁠। वाजा॑ना॒ꣳ॒ सत्प॑तिम्⁠। सत्प॑ति॒म् पति᳚म्⁠। सत्प॑ति॒मिति॒ सत्—प॒ति॒म्⁠। पति॒मिति॒ पति᳚म्⁠॥ सु॒म्न॒हूर् य॒ज्ञः⁠। सु॒म्न॒हूरिति॑ सुम्न—हूः⁠। य॒ज्ञो दे॒वान्⁠। दे॒वाꣳ आ⁠। आ च॑⁠। च॒ व॒ख्‍ष॒त्॒⁠। व॒ख्‍ष॒द् यख्‍ष॑त्⁠। यख्‍ष॑द॒ग्निः⁠। अ॒ग्निर् दे॒वः⁠। दे॒वो दे॒वान्⁠। दे॒वाꣳ आ⁠। आ च॑⁠। च॒ व॒ख्‍ष॒त्॒⁠। व॒ख्‍ष॒दिति॑ वख्‍षत्⁠॥ वाज॑स्य मा⁠। मा॒ प्र॒स॒वेन॑⁠। प्र॒स॒वेनो᳚द्ग्रा॒भेण॑⁠। प्र॒स॒वेनेति॑ प्र—स॒वेन॑⁠। उ॒द्ग्रा॒भेणोत्⁠। उ॒द्ग्रा॒भेणेत्यु॑त्—ग्रा॒भेण॑⁠। उद॑ग्रभीत्⁠। अ॒ग्र॒भी॒दित्य॑ग्रभीत्⁠॥ अथा॑ स॒पत्ना॑न्⁠। स॒पत्ना॒ꣳ॒ इन्द्रः॑⁠। इन्द्रो॑ मे⁠। मे॒ नि॒ग्रा॒भेण॑⁠। नि॒ग्रा॒भेणाध॑रान्⁠। नि॒ग्रा॒भेणेति॑ नि—ग्रा॒भेण॑⁠। अध॑राꣳ अकः⁠। अ॒क॒रित्य॑कः⁠॥ उ॒द्ग्रा॒भम् च॑⁠। उ॒द्ग्रा॒भमित्यु॑त्—ग्रा॒भम्⁠। च॒ नि॒ग्रा॒भम्⁠। नि॒ग्रा॒भम् च॑⁠। नि॒ग्रा॒भमिति॑ नि—ग्रा॒भम्⁠। च॒ ब्रह्म॑⁠। ब्रह्म॑ दे॒वाः⁠। दे॒वा अ॑वीवृधन्न्⁠। अ॒वी॒वृ॒ध॒न्नित्य॑वीवृधन्न्⁠॥ अथा॑ स॒पत्ना॑न्⁠। स॒पत्ना॑निन्द्रा॒ग्नी⁠। इ॒न्द्रा॒ग्नी मे᳚⁠। इ॒न्द्रा॒ग्नी इती᳚न्द्र—अ॒ग्नी⁠। मे॒ वि॒षू॒चीना॑न्⁠। वि॒षू॒चीना॒न्॒‌वि⁠। व्य॑स्यताम्⁠। अ॒स्य॒ता॒मित्य॑स्यताम्⁠॥ [१५] (दे॒वाः श॒तप॑या अ॒भि वाज॑स्य॒ षड्वि॑ꣳशतिश्च) ॥३॥
आ॒शुः शिशा॑नः⁠। शिशा॑नो वृष॒भः⁠। वृ॒ष॒भो न⁠। न यु॒द्ध्मः⁠। यु॒द्ध्मो घ॑नाघ॒नः⁠। घ॒ना॒घ॒नः ख्‍षोभ॑णः⁠। ख्‍षोभ॑णश्चर्‌षणी॒नाम्⁠। च॒र्॒‌ष॒णी॒नामिति॑ चर्‌षणी॒नाम्⁠॥ स॒ङ्‌क्रन्द॑नोऽनिमि॒षः⁠। स॒ङ्‍क्रन्द॑न॒ इति॑ सम्—क्रन्द॑नः⁠। अ॒नि॒मि॒ष ए॑कवी॒रः⁠। अ॒नि॒मि॒ष इत्य॑नि—मि॒षः⁠। ए॒क॒वी॒रः श॒तम्⁠। ए॒क॒वी॒र इत्ये॑क—वी॒रः⁠। श॒तꣳ सेनाः᳚⁠। सेना॑ अजयत्⁠। अ॒ज॒य॒थ् सा॒कम्⁠। सा॒कमिन्द्रः॑⁠। इन्द्र॒ इतीन्द्रः॑⁠॥ स॒ङ्‍क्रन्द॑नेनानिमि॒षेण॑⁠। स॒ङ्‍क्रन्द॑ने॒नेति॑ सं—क्रन्द॑नेन⁠। अ॒नि॒मि॒षेण॑ जि॒ष्णुना᳚⁠। अ॒नि॒मि॒षेणेत्य॑नि—मि॒षेण॑⁠। जि॒ष्णुना॑ युत्का॒रेण॑⁠। यु॒त्का॒रेण॑ दुश्च्यव॒नेन॑⁠। यु॒त्का॒रेणेति॑ युत्—का॒रेण॑⁠। दु॒श्च्य॒व॒नेन॑ धृ॒ष्णुना᳚⁠। दु॒श्च्य॒व॒नेनेति॑ दुः—च्य॒व॒नेन॑⁠। धृ॒ष्णुनेति॑ धृ॒ष्णुना᳚⁠॥ तदिन्द्रे॑ण⁠। इन्द्रे॑ण जयत⁠। ज॒य॒त॒ तत्⁠। तथ् स॑हद्ध्वम्⁠। स॒ह॒द्ध्व॒य्ँयुधः॑⁠। युधो॑ नरः⁠। न॒र॒ इषु॑हस्तेन⁠। इषु॑हस्तेन॒ वृष्णा᳚⁠। इषु॑हस्ते॒नेतीषु॑—ह॒स्ते॒न॒⁠। वृष्णेति॒ वृष्णा᳚⁠॥ स इषु॑हस्तैः⁠। इषु॑हस्तैः॒ सः⁠। इषु॑हस्तै॒रितीषु॑—ह॒स्तैः॒⁠। स नि॑ष॒ङ्‍गिभिः॑⁠। नि॒ष॒ङ्‍गिभि॑र् व॒शी⁠। नि॒ष॒ङ्‍गिभि॒रिति॑ निष॒ङ्‍गि—भिः॒⁠। व॒शी सꣴस्र॑ष्टा⁠। सꣴस्र॑ष्टा॒ सः⁠। सꣴस्र॒ष्टेति॒ सम्—स्र॒ष्टा॒⁠। स युधः॑⁠। युध॒ इन्द्रः॑⁠। इन्द्रो॑ ग॒णेन॑⁠। ग॒णेनेति॑ ग॒णेन॑⁠॥ स॒ꣳ॒सृ॒ष्ट॒जिथ् सो॑म॒पाः⁠। स॒ꣳ॒सृ॒ष्ट॒जिदिति॑ सꣳसृष्ट—जित्⁠। सो॒म॒पा बा॑हुश॒र्धी⁠। सो॒म॒पा इति॑ सोम—पाः⁠। बा॒हु॒श॒र्द्ध्यू᳚र्द्ध्वद्ध॑न्वा⁠। बा॒हु॒श॒र्द्धीति॑ बाहु—श॒र्धी⁠। ऊ॒र्द्ध्वध॑न्वा॒ प्रति॑हिताभिः⁠। ऊ॒र्द्ध्वध॒न्वेत्यू॒र्द्ध्व—ध॒न्वा॒⁠। प्रति॑हिताभि॒रस्ता᳚⁠। प्रति॑हिताभि॒रिति॒ प्रति॑—हि॒ता॒भिः॒⁠। अस्तेत्यस्ता᳚⁠॥ बृह॑स्पते॒ परि॑⁠। परि॑ दीय⁠। दी॒या॒ रथे॑न⁠। [१६] रथे॑न रख्‍षो॒हा⁠। र॒ख्‍षो॒हाऽमित्रा॑न्⁠। र॒ख्‍षो॒हेति॑ रख्‍षः—हा⁠। अ॒मित्रा॑ꣳ अप॒बाध॑मानः⁠। अ॒प॒बाध॑मान॒ इत्य॑प—बाध॑मानः⁠॥ प्र॒भ॒ञ्जन्थ् सेनाः᳚⁠। प्र॒भ॒ञ्जन्निति॑ प्र—भ॒ञ्जन्न्⁠। सेनाः᳚ प्रमृ॒णः⁠। प्र॒मृ॒णो यु॒धा⁠। प्र॒मृ॒ण इति॑ प्र—मृ॒णः⁠। यु॒धा जय॑न्न्⁠। जय॑न्न॒स्माक᳚म्⁠। अ॒स्माक॑मेधि⁠। ए॒द्ध्य॒वि॒ता⁠। अ॒वि॒ता रथा॑नाम्⁠। रथा॑ना॒मिति॒ रथा॑नाम्⁠॥ गो॒त्र॒भिद॑म् गो॒विद᳚म्⁠। गो॒त्र॒भिद॒मिति॑ गोत्र—भिद᳚म्⁠। गो॒विद॒व्ँवज्र॑बाहुम्⁠। गो॒विद॒मिति॑ गो—विद᳚म्⁠। वज्र॑बाहु॒म् जय॑न्तम्⁠। वज्र॑बाहु॒मिति॒ वज्र॑—बा॒हु॒म्⁠। जय॑न्त॒मज्म॑⁠। अज्म॑ प्रमृ॒णन्त᳚म्⁠। प्र॒मृ॒णन्त॒मोज॑सा⁠। प्र॒मृ॒णन्त॒मिति॑ प्र—मृ॒णन्त᳚म्⁠। ओज॒सेत्योज॑सा⁠॥ इ॒मꣳ स॑जाताः⁠। स॒जा॒ता॒ अनु॑⁠। स॒जा॒ता॒ इति॑ स—जा॒ताः॒⁠। अनु॑ वीरयद्ध्वम्⁠। वी॒र॒य॒द्ध्व॒मिन्द्र᳚म्⁠। इन्द्र॑ꣳ सखा॒यः⁠। स॒खा॒योऽनु॑⁠। अनु॒ सम्⁠। सꣳ र॑भद्ध्वम्⁠। र॒भ॒द्ध्व॒मिति॑ रभद्ध्वम्⁠॥ ब॒ल॒वि॒ज्ञा॒यः स्थवि॑रः⁠। ब॒ल॒वि॒ज्ञा॒य इति॑ बल—वि॒ज्ञा॒यः⁠। स्थवि॑रः॒ प्रवी॑रः⁠। प्रवी॑रः॒ सह॑स्वान्⁠। प्रवी॑र॒ इति॒ प्र—वी॒रः॒⁠। सह॑स्वान्‌वा॒जी⁠। वा॒जी सह॑मानः⁠। सह॑मान उ॒ग्रः⁠। उ॒ग्र इत्यु॒ग्रः⁠॥ अ॒भिवी॑रो अ॒भिस॑त्वा⁠। अ॒भिवी॑र॒ इत्य॒भि—वी॒रः॒⁠। अ॒भिस॑त्वा सहो॒जाः⁠। अ॒भिस॒त्वेत्य॒भि—स॒त्वा॒⁠। स॒हो॒जा जैत्र᳚म्⁠। स॒हो॒जा इति॑ सहः—जाः⁠। जैत्र॑मिन्द्र⁠। इ॒न्द्र॒ रथ᳚म्⁠। रथ॒मा⁠। आ ति॑ष्ठ⁠। ति॒ष्ठ॒ गो॒वित्⁠। गो॒विदिति॑ गो—वित्⁠॥ अ॒भि गो॒त्राणि॑⁠। गो॒त्राणि॒ सह॑सा⁠। सह॑सा॒ गाह॑मानः⁠। गाह॑मानोऽदा॒यः⁠। अ॒दा॒यो वी॒रः⁠। [१७] वी॒रः श॒तम॑न्युः⁠। श॒तम॑न्यु॒रिन्द्रः॑⁠। श॒तम॑न्यु॒रिति॑ श॒त—म॒न्युः॒⁠। इन्द्र॒ इतीन्द्रः॑⁠॥ दु॒श्च्य॒व॒नः पृ॑तना॒षाट्⁠। दु॒श्च्य॒व॒न इति॑ दुः—च्य॒व॒नः⁠। पृ॒त॒ना॒षाड॑यु॒द्ध्यः⁠। अ॒यु॒द्ध्यो᳚ऽस्माक᳚म्⁠। अ॒स्माक॒ꣳ॒ सेनाः᳚⁠। सेना॑ अवतु⁠। अ॒व॒तु॒ प्र⁠। प्र यु॒थ्सु⁠। यु॒थ्स्विति॑ युत्—सु⁠॥ इन्द्र॑ आसाम्⁠। आ॒सा॒म् ने॒ता⁠। ने॒ता बृह॒स्पतिः॑⁠। बृह॒स्पति॒र् दख्‍षि॑णा⁠। दख्‍षि॑णा य॒ज्ञः⁠। य॒ज्ञः पु॒रः⁠। पु॒र ए॑तु⁠। ए॒तु॒ सोमः॑⁠। सोम॒ इति॒ सोमः॑⁠॥ दे॒व॒से॒नाना॑मभिभञ्जती॒नाम्⁠। दे॒व॒से॒नाना॒मिति॑ देव—से॒नाना᳚म्⁠। अ॒भि॒भ॒ञ्ज॒ती॒नाम् जय॑न्तीनाम्⁠। अ॒भि॒भ॒ञ्ज॒ती॒नामित्य॑भि—भ॒ञ्ज॒ती॒नाम्⁠। जय॑न्तीनाम् म॒रुतः॑⁠। म॒रुतो॑ यन्तु⁠। य॒न्त्वग्रे᳚⁠। अग्र॒ इत्यग्रे᳚⁠॥ इन्द्र॑स्य॒ वृष्णः॑⁠। वृष्णो॒ वरु॑णस्य⁠। वरु॑णस्य॒ राज्ञः॑⁠। राज्ञ॑ आदि॒त्याना᳚म्⁠। आ॒दि॒त्याना᳚म् म॒रुता᳚म्⁠। म॒रुता॒ꣳ॒ शर्द्धः॑⁠। शर्द्ध॑ उ॒ग्रम्⁠। उ॒ग्रमित्यु॒ग्रम्⁠॥ म॒हाम॑नसाम् भुवनच्य॒वाना᳚म्⁠। म॒हाम॑नसा॒मिति॑ म॒हा—म॒न॒सा॒म्⁠। भु॒व॒न॒च्य॒वाना॒म् घोषः॑⁠। भु॒व॒न॒च्य॒वाना॒मिति॑ भुवन—च्य॒वाना᳚म्⁠। घोषो॑ दे॒वाना᳚म्⁠। दे॒वाना॒म् जय॑ताम्⁠। जय॑ता॒मुत्⁠। उद॑स्थात्⁠। अ॒स्था॒दित्य॑स्थात्⁠॥ अ॒स्माक॒मिन्द्रः॑⁠। इन्द्रः॒ समृ॑तेषु⁠। समृ॑तेषु ध्व॒जेषु॑⁠। समृ॑ते॒ष्विति॒ सम्—ऋ॒ते॒षु॒⁠। ध्व॒जेष्व॒स्माक᳚म्⁠। अ॒स्माक॒य्ँयाः⁠। या इष॑वः⁠। इष॑व॒स्ताः⁠। ता ज॑यन्तु⁠। ज॒य॒न्त्विति॑ जयन्तु⁠॥ [१८] अ॒स्माक॑व्ँवी॒राः⁠। वी॒रा उत्त॑रे⁠। उत्त॑रे भवन्तु⁠। उत्त॑र॒ इत्युत्—त॒रे॒⁠। भ॒व॒न्त्व॒स्मान्⁠। अ॒स्मानु॑⁠। उ॒ दे॒वाः॒⁠। दे॒वा॒ अ॒व॒त॒⁠। अ॒व॒ता॒ हवे॑षु⁠। हवे॒ष्विति॒ हवे॑षु⁠॥ उद्ध॑र्‌षय⁠। ह॒र्॒‌ष॒य॒ म॒घ॒व॒न्न्॒⁠। म॒घ॒व॒न्नायु॑धानि⁠। म॒घ॒व॒न्निति॑ मघ—व॒न्न्॒⁠। आयु॑धा॒न्युत्⁠। उथ् सत्व॑नाम्⁠। सत्व॑नाम् माम॒काना᳚म्⁠। मा॒म॒काना॒म् महा॑ꣳसि⁠। महा॑ꣳसीति॒ महा॑ꣳसि⁠॥ उद् वृ॑त्रहन्न्⁠। वृ॒त्र॒ह॒न्॒‌वा॒जिना᳚म्⁠। वृ॒त्र॒ह॒न्निति॑ वृत्र—ह॒न्न्॒⁠। वा॒जिना॒व्ँवाजि॑नानि⁠। वाजि॑ना॒न्युत्⁠। उद् रथा॑नाम्⁠। रथा॑ना॒म् जय॑ताम्⁠। जय॑तामेतु⁠। ए॒तु॒ घोषः॑⁠। घोष॒ इति॒ घोषः॑⁠॥ उप॒ प्र⁠। प्रेत॑⁠। इ॒त॒ जय॑त⁠। जय॑ता नरः⁠। न॒रः॒ स्थि॒राः⁠। स्थि॒रा वः॑⁠। वः॒ स॒न्तु॒⁠। स॒न्तु॒ बा॒हवः॑⁠। बा॒हव॒ इति॑ बा॒हवः॑⁠॥ इन्द्रो॑ वः⁠। वः॒ शर्म॑⁠। शर्म॑ यच्छतु⁠। य॒च्छ॒त्व॒ना॒धृ॒ष्याः⁠। अ॒ना॒धृ॒ष्या यथा᳚⁠। अ॒ना॒धृ॒ष्या इत्य॑ना—धृ॒ष्याः⁠। यथाऽस॑थ⁠। अस॒थेत्यस॑थ⁠॥ अव॑सृष्टा॒ परा᳚⁠। अव॑सृ॒ष्टेत्यव॑—सृ॒ष्टा॒⁠। परा॑ पत⁠। प॒त॒ शर॑व्ये⁠। शर॑व्ये॒ ब्रह्म॑सꣳशिता⁠। ब्रह्म॑सꣳशि॒तेति॒ ब्रह्म॑—स॒ꣳ॒शि॒ता॒⁠॥ गच्छा॒मित्रा॑न्⁠। अ॒मित्रा॒न् प्र⁠। प्र वि॑श⁠। [१९] वि॒श॒ मा⁠। मैषा᳚म्⁠। ए॒षा॒म् कम्⁠। कम् च॒न⁠। च॒नोत्⁠। उच्छि॑षः⁠। शि॒ष॒ इति॑ शिषः⁠॥ मर्मा॑णि ते⁠। ते॒ वर्म॑भिः⁠। वर्म॑भि श्छादयामि⁠। वर्म॑भि॒रिति॒ वर्म॑—भिः॒⁠। छा॒द॒या॒मि॒ सोमः॑⁠। सोम॑स्त्वा⁠। त्वा॒ राजा᳚⁠। राजा॒ऽमृते॑न⁠। अ॒मृते॑ना॒भि⁠। अ॒भि व॑स्ताम्⁠। व॒स्ता॒मिति॑ वस्ताम्⁠॥ उ॒रोर् वरी॑यः⁠। वरी॑यो॒ वरि॑वः⁠। वरि॑वस्ते⁠। ते॒ अ॒स्तु॒⁠। अ॒स्तु॒ जय॑न्तम्⁠। जय॑न्त॒म् त्वाम्⁠। त्वामनु॑⁠। अनु॑ मदन्तु⁠। म॒द॒न्तु॒ दे॒वाः⁠। दे॒वा इति॑ दे॒वाः⁠॥ यत्र॑ बा॒णाः⁠। बा॒णाः स॒म्पत॑न्ति⁠। स॒म्पत॑न्ति कुमा॒राः⁠। स॒म्पत॒न्तीति॑ सम्—पत॑न्ति⁠। कु॒मा॒रा वि॑शि॒खाः⁠। वि॒शि॒खा इ॑व⁠। वि॒शि॒खा इति॑ वि—शि॒खाः⁠। इ॒वेती॑व⁠॥ इन्द्रो॑ नः⁠। न॒स्तत्र॑⁠। तत्र॑ वृत्र॒हा⁠। वृ॒त्र॒हा वि॑श्वा॒हा⁠। वृ॒त्र॒हेति॑ वृत्र—हा⁠। वि॒श्वा॒हा शर्म॑⁠। वि॒श्वा॒हेति॑ विश्व—हा⁠। शर्म॑ यच्छतु⁠। य॒च्छ॒त्विति॑ यच्छतु⁠॥ [२०] (दी॒या॒ ऽदा॒यो ज॑यन्त्व॒ मित्रा॒न् प्र च॑त्वारि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥४॥
प्राची॒मनु॑⁠। अनु॑ प्र॒दिश᳚म्⁠। प्र॒दिश॒म् प्र⁠। प्र॒दिश॒मिति॑ प्र—दिश᳚म्⁠। प्रेहि॑⁠। इ॒हि॒ वि॒द्वान्⁠। वि॒द्वान॒ग्नेः⁠। अ॒ग्नेर॑ग्ने⁠। अ॒ग्ने॒ पु॒रोअ॑ग्निः⁠। पु॒रोअ॑ग्निर् भव⁠। पु॒रोअ॑ग्नि॒रिति॑ पु॒रः—अ॒ग्निः॒⁠। भ॒वे॒ह⁠। इ॒हेती॒ह⁠॥ विश्वा॒ आशाः᳚⁠। आशा॒ दीद्या॑नः⁠। दीद्या॑नो॒ वि⁠। वि भा॑हि⁠। भा॒ह्यूर्ज᳚म्⁠। ऊर्ज॑म् नः⁠। नो॒ धे॒हि॒⁠। धे॒हि॒ द्वि॒पदे᳚⁠। द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे⁠। द्वि॒पद॒ इति॑ द्वि—पदे᳚⁠। चतु॑ष्पद॒ इति॒ चतुः॑—प॒दे॒⁠॥ क्रम॑द्ध्वम॒ग्निना᳚⁠। अ॒ग्निना॒ नाक᳚म्⁠। नाक॒मुख्य᳚म्⁠। उख्य॒ꣳ॒ हस्ते॑षु⁠। हस्ते॑षु॒ बिभ्र॑तः⁠। बिभ्र॑त॒ इति॒ बिभ्र॑तः⁠॥ दि॒वः पृ॒ष्ठम्⁠। पृ॒ष्ठꣳ सुवः॑⁠। सुव॑र् ग॒त्वा⁠। ग॒त्वा मि॒श्राः⁠। मि॒श्रा दे॒वेभिः॑⁠। दे॒वेभि॑राद्ध्वम्⁠। आ॒द्ध्व॒मित्या᳚द्ध्वम्⁠॥ पृ॒थि॒व्या अ॒हम्⁠। अ॒हमुत्⁠। उद॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍ष॒मा⁠। आऽरु॑हम्⁠। अ॒रु॒ह॒म॒न्तरि॑ख्‍षात्⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षा॒द् दिव᳚म्⁠। दिव॒मा⁠। आऽरु॑हम्⁠। अ॒रु॒ह॒मित्य॑रुहम्⁠॥ दि॒वो नाक॑स्य⁠। नाक॑स्य पृ॒ष्ठात्⁠। पृ॒ष्ठाथ् सुवः॑⁠। सुव॒र् ज्योतिः॑⁠। ज्योति॑रगाम्⁠। अ॒गा॒म॒हम्⁠। [२१] अ॒हमित्य॒हम्⁠॥ सुव॒र् यन्तः॑⁠। यन्तो॒ न⁠। नाप॑⁠। अपे᳚ख्‍षन्ते⁠। ई॒ख्‍ष॒न्त॒ आ⁠। आ द्याम्⁠। द्याꣳ रो॑हन्ति⁠। रो॒ह॒न्ति॒ रोद॑सी⁠। रोद॑सी॒ इति॒ रोद॑सी⁠॥ य॒ज्ञय्ँये⁠। ये वि॒श्वतो॑धारम्⁠। वि॒श्वतो॑धार॒ꣳ॒ सुवि॑द्वाꣳसः⁠। वि॒श्वतो॑धार॒मिति॑ वि॒श्वतः॑—धा॒र॒म्⁠। सुवि॑द्वाꣳसो वितेनि॒रे⁠। सुवि॑द्वाꣳस॒ इति॒ सु—वि॒द्वा॒ꣳ॒सः॒⁠। वि॒ते॒नि॒र इति॑ वि—ते॒नि॒रे⁠॥ अग्ने॒ प्र⁠। प्रेहि॑⁠। इ॒हि॒ प्र॒थ॒मः⁠। प्र॒थ॒मो दे॑वय॒ताम्⁠। दे॒व॒य॒ताम् चख्‍षुः॑⁠। दे॒व॒य॒तामिति॑ देव—य॒ताम्⁠। चख्‍षु॑र् दे॒वाना᳚म्⁠। दे॒वाना॑मु॒त⁠। उ॒त मर्त्या॑नाम्⁠। मर्त्या॑ना॒मिति॒ मर्त्या॑नाम्⁠॥ इय॑ख्‍षमाणा॒ भृगु॑भिः⁠। भृगु॑भिः स॒जोषाः᳚⁠। भृगु॑भि॒रिति॒ भृगु॑—भिः॒⁠। स॒जोषाः॒ सुवः॑⁠। स॒जोषा॒ इति॑ स—जोषाः᳚⁠। सुव॑र् यन्तु⁠। य॒न्तु॒ यज॑मानाः⁠। यज॑मानाः स्व॒स्ति⁠। स्व॒स्तीति॑ स्व॒स्ति⁠॥ नक्तो॒षासा॒ सम॑नसा⁠। सम॑नसा॒ विरू॑पे⁠। सम॑न॒सेति॒ स—म॒न॒सा॒⁠। विरू॑पे धा॒पये॑ते⁠। विरू॑पे॒ इति॒ वि—रू॒पे॒⁠। धा॒पये॑ते॒ शिशु᳚म्⁠। धा॒पये॑ते॒ इति॑ धा॒पये॑ते⁠। शिशु॒मेक᳚म्⁠। एक॑ꣳ समी॒ची⁠। स॒मी॒ची इति॑ समी॒ची⁠॥ द्यावा॒ ख्‍षाम॑⁠। ख्‍षामा॑ रु॒क्मः⁠। रु॒क्मो अ॒न्तः⁠। अ॒न्तर् वि⁠। वि भा॑ति⁠। भा॒ति॒ दे॒वाः⁠। दे॒वा अ॒ग्निम्⁠। अ॒ग्निम् धा॑रयन्न्⁠। धा॒र॒य॒न् द्र॒वि॒णो॒दाः⁠। द्र॒वि॒णो॒दा इति॑ द्रविणः—दाः⁠॥ अग्ने॑ सहस्राख्‍ष⁠। स॒ह॒स्रा॒ख्‍ष॒ श॒त॒मू॒र्द्ध॒न्न्॒⁠। स॒ह॒स्रा॒ख्‍षेति॑ सहस्र—अ॒ख्‍ष॒⁠। [२२] श॒त॒मू॒र्द्ध॒ञ्छ॒तम्⁠। श॒त॒मू॒र्द्ध॒न्निति॑ शत—मू॒र्द्ध॒न्न्॒⁠। श॒तम् ते᳚⁠। ते॒ प्रा॒णाः⁠। प्रा॒णाः स॒हस्र᳚म्⁠। प्रा॒णा इति॑ प्र—अ॒नाः⁠। स॒हस्र॑मपा॒नाः⁠। अ॒पा॒ना इत्य॑प—अ॒नाः⁠॥ त्वꣳ सा॑ह॒स्रस्य॑⁠। सा॒ह॒स्रस्य॑ रा॒यः⁠। रा॒य ई॑शिषे⁠। ई॒शि॒षे॒ तस्मै᳚⁠। तस्मै॑ ते⁠। ते॒ वि॒धे॒म॒⁠। वि॒धे॒म॒ वाजा॑य⁠। वाजा॑य॒ स्वाहा᳚⁠। स्वाहेति॒ स्वाहा᳚⁠॥ सु॒प॒र्णो॑ऽसि⁠। सु॒प॒र्ण इति॑ सु—प॒र्णः⁠। अ॒सि॒ ग॒रुत्मा॑न्⁠। ग॒रुत्मा᳚न् पृथि॒व्याम्⁠। पृ॒थि॒व्याꣳ सी॑द⁠। सी॒द॒ पृ॒ष्ठे⁠। पृ॒ष्ठे पृ॑थि॒व्याः⁠। पृ॒थि॒व्याः सी॑द⁠। सी॒द॒ भा॒सा⁠। भा॒साऽन्तरि॑ख्‍षम्⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍ष॒मा⁠। आ पृ॑ण⁠। पृ॒ण॒ ज्योति॑षा⁠। ज्योति॑षा॒ दिव᳚म्⁠। दिव॒मुत्⁠। उत् त॑भान⁠। स्त॒भा॒न॒ तेज॑सा⁠। तेज॑सा॒ दिशः॑⁠। दिश॒ उत्⁠। उद् दृ॑ꣳह⁠। दृ॒ꣳ॒हेति॑ दृꣳह⁠॥ आ॒जुह्वा॑नः सु॒प्रती॑कः⁠। आ॒जुह्वा॑न॒ इत्या᳚—जुह्वा॑नः⁠। सु॒प्रती॑कः पु॒रस्ता᳚त्⁠। सु॒प्रती॑क॒ इति॑ सु—प्रती॑कः⁠। पु॒रस्ता॒दग्ने᳚⁠। अग्ने॒ स्वाम्⁠। स्वाय्ँयोनि᳚म्⁠। योनि॒मा⁠। आ सी॑द⁠। सी॒द॒ सा॒द्ध्या⁠। सा॒द्ध्येति॑ सा॒द्ध्या⁠॥ अ॒स्मिन्थ् स॒धस्थे᳚⁠। स॒धस्थे॒ अधि॑⁠। स॒धस्थ॒ इति॑ स॒ध—स्थे॒⁠। अद्ध्युत्त॑रस्मिन्न्⁠। उत्त॑रस्मि॒न् विश्वे᳚⁠। उत्त॑रस्मि॒न्नित्युत्—त॒र॒स्मि॒न्न्॒⁠। विश्वे॑ देवाः⁠। दे॒वा॒ यज॑मानः⁠। [२३] यज॑मानश्च⁠। च॒ सी॒द॒त॒⁠। सी॒द॒तेति॑ सीदत⁠॥ प्रेद्धो॑ अग्ने⁠। प्रेद्ध॒ इति॒ प्र—इ॒द्धः॒⁠। अ॒ग्ने॒ दी॒दि॒हि॒⁠। दी॒दि॒हि॒ पु॒रः⁠। पु॒रो नः॑⁠। नोऽज॑स्रया⁠। अज॑स्रया सू॒र्म्या᳚⁠। सू॒र्म्या॑ यविष्ठ⁠। य॒वि॒ष्ठेति॑ यविष्ठ⁠॥ त्वाꣳ शश्व॑न्तः⁠। शश्व॑न्त॒ उप॑⁠। उप॑ यन्ति⁠। य॒न्ति॒ वाजाः᳚⁠। वाजा॒ इति॒ वाजाः᳚⁠॥ वि॒धेम॑ ते⁠। ते॒ प॒र॒मे⁠। प॒र॒मे जन्म॑न्न्⁠। जन्म॑न्नग्ने⁠। अ॒ग्ने॒ वि॒धेम॑⁠। वि॒धेम॒ स्तोमैः᳚⁠। स्तोमै॒रव॑रे⁠। अव॑रे स॒धस्थे᳚⁠। स॒धस्थ॒ इति॑ स॒ध—स्थे॒⁠॥ यस्मा॒द् योनेः᳚⁠। योने॑रु॒दारि॑थ⁠। उ॒दारि॑था॒ यजे᳚⁠। उ॒दारि॒थेत्यु॑त्—आरि॑थ⁠। यजे॒ तम्⁠। तम् प्र⁠। प्र त्वे⁠। त्वे ह॒वीꣳषि॑⁠। त्वे इति॒ त्वे⁠। ह॒वीꣳषि॑ जुहुरे⁠। जु॒हु॒रे॒ समि॑द्धे⁠। समि॑द्ध॒ इति॒ सं—इ॒द्धे॒⁠॥ ताꣳ स॑वि॒तुः⁠। स॒वि॒तुर् वरे᳚ण्यस्य⁠। वरे᳚ण्यस्य चि॒त्राम्⁠। चि॒त्रामा⁠। आऽहम्⁠। अ॒हव्ँवृ॑णे⁠। वृ॒णे॒ सु॒म॒तिम्⁠। सु॒म॒तिव्ँवि॒श्वज॑न्याम्⁠। सु॒म॒तिमिति॑ सु—म॒तिम्⁠। वि॒श्वज॑न्या॒मिति॑ वि॒श्व—ज॒न्या॒म्⁠॥ याम॑स्य⁠। अ॒स्य॒ कण्वः॑⁠। कण्वो॒ अदु॑हत्⁠। अदु॑ह॒त् प्रपी॑नाम्⁠। प्रपी॑नाꣳ स॒हस्र॑धाराम्⁠। प्रपी॑ना॒मिति॒ प्र—पी॒ना॒म्⁠। स॒हस्र॑धारा॒म् पय॑सा⁠। स॒हस्र॑धारा॒मिति॑ स॒हस्र॑—धा॒रा॒म्⁠। [२४] पय॑सा म॒हीम्⁠। म॒हीम् गाम्⁠। गामिति॒ गाम्⁠॥ स॒प्त ते᳚⁠। ते॒ अ॒ग्ने॒⁠। अ॒ग्ने॒ स॒मिधः॑⁠। स॒मिधः॑ स॒प्त⁠। स॒मिध॒ इति॑ सम्—इधः॑⁠। स॒प्त॒ जि॒ह्वाः⁠। जि॒ह्वाः स॒प्त⁠। स॒प्तर्‌ष॑यः⁠। ऋष॑यः स॒प्त⁠। स॒प्त धाम॑⁠। धाम॑ प्रि॒याणि॑⁠। प्रि॒याणीति॑ प्रि॒याणि॑⁠॥ स॒प्त होत्राः᳚⁠। होत्राः᳚ सप्त॒धा⁠। स॒प्त॒धा त्वा᳚⁠। स॒प्त॒धेति॑ सप्त—धा⁠। त्वा॒ य॒ज॒न्ति॒⁠। य॒ज॒न्ति॒ स॒प्त⁠। स॒प्त योनीः᳚⁠। योनी॒रा⁠। आ पृ॑णस्व⁠। पृ॒ण॒स्वा॒ घृ॒तेन॑⁠। घृ॒तेनेति॑ घृ॒तेन॑⁠॥ ई॒दृङ्‍ च॑⁠। चा॒न्या॒दृङ्‌ङ्‍⁠। अ॒न्या॒दृङ्‍ च॑⁠। चै॒ता॒दृङ्‌ङ्‍⁠। ए॒ता॒दृङ्‍ च॑⁠। च॒ प्र॒ति॒दृङ्‌ङ्‍⁠। प्र॒ति॒दृङ्‍ च॑⁠। प्र॒ति॒दृङ्‍ङिति॑ प्रति—दृङ्‌ङ्‍⁠। च॒ मि॒तः⁠। मि॒तश्च॑⁠। च॒ सम्मि॑तः⁠। सम्मि॑तश्च⁠। सम्मि॑त॒ इति॒ सम्—मि॒तः॒⁠। च॒ सभ॑राः⁠। सभ॑रा॒ इति॒ स—भ॒राः॒⁠॥ शु॒क्रज्यो॑तिश्च⁠। शु॒क्रज्यो॑ति॒रिति॑ शु॒क्र—ज्यो॒तिः॒⁠। च॒ चि॒त्रज्यो॑तिः⁠। चि॒त्रज्यो॑तिश्च⁠। चि॒त्रज्यो॑ति॒रिति॑ चि॒त्र—ज्यो॒तिः॒⁠। च॒ स॒त्यज्यो॑तिः⁠। स॒त्यज्यो॑तिश्च⁠। स॒त्यज्यो॑ति॒रिति॑ स॒त्य—ज्यो॒तिः॒⁠। च॒ ज्योति॑ष्मान्⁠। ज्योति॑ष्माꣴश्च⁠। च॒ स॒त्यः⁠। स॒त्यश्च॑⁠। च॒र्त॒पाः⁠। ऋ॒त॒पाश्च॑⁠। ऋ॒त॒पा इत्यृ॑त—पाः⁠। चात्य॑ꣳहाः⁠। अत्य॑ꣳहा॒ इत्यति॑—अ॒ꣳ॒हाः॒⁠॥ [२५] ऋ॒त॒जिच् च॑⁠। ऋ॒त॒जिदित्यृ॑त—जित्⁠। च॒ स॒त्य॒जित्⁠। स॒त्य॒जिच् च॑⁠। स॒त्य॒जिदिति॑ सत्य—जित्⁠। च॒ से॒न॒जित्⁠। से॒न॒जिच् च॑⁠। से॒न॒जिदिति॑ सेन—जित्⁠। च॒ सु॒षेणः॑⁠। सु॒षेण॑श्च⁠। सु॒षेण॒ इति॑ सु—सेनः॑⁠। चान्त्य॑मित्रः⁠। अन्त्य॑मित्रश्च⁠। अन्त्य॑मित्र॒ इत्यन्ति॑—अ॒मि॒त्रः॒⁠। च॒ दू॒रेअ॑मित्रः⁠। दू॒रेअ॑मित्रश्च⁠। दू॒रेअ॑मित्र॒ इति॑ दू॒रे—अ॒मि॒त्रः॒⁠। च॒ ग॒णः⁠। ग॒ण इति॑ ग॒णः⁠॥ ऋ॒तश्च॑⁠। च॒ स॒त्यः⁠। स॒त्यश्च॑⁠। च॒ ध्रु॒वः⁠। ध्रु॒वश्च॑⁠। च॒ ध॒रुणः॑⁠। ध॒रुण॑श्च⁠। च॒ ध॒र्ता⁠। ध॒र्ता च॑⁠। च॒ वि॒ध॒र्ता⁠। वि॒ध॒र्ता च॑⁠। वि॒ध॒र्तेति॑ वि—ध॒र्ता⁠। च॒ वि॒धा॒र॒यः⁠। वि॒धा॒र॒य इति॑ वि—धा॒र॒यः⁠॥ ई॒दृख्‍षा॑स एता॒दृख्‍षा॑सः⁠। ए॒ता॒दृख्‍षा॑स उ⁠। ऊ॒ षु णः॑⁠। सु नः॑⁠। नः॒ स॒दृख्‍षा॑सः⁠। स॒दृख्‍षा॑सः॒ प्रति॑सदृख्‍षासः⁠। प्रति॑सदृख्‍षास॒ आ⁠। प्रति॑सदृख्‍षास॒ इति॒ प्रति॑—स॒दृ॒ख्‍षा॒सः॒⁠। एत॑न⁠। इ॒त॒नेती॑तन⁠॥ मि॒तास॑श्च⁠। च॒ सम्मि॑तासः⁠। सम्मि॑तासश्च⁠। सम्मि॑तास॒ इति॒ सम्—मि॒ता॒सः॒⁠। च॒ नः॒⁠। न॒ ऊ॒तये᳚⁠। ऊ॒तये॒ सभ॑रसः⁠। सभ॑रसो मरुतः⁠। सभ॑रस॒ इति॒ स—भ॒र॒सः॒⁠। म॒रु॒तो॒ य॒ज्ञे⁠। य॒ज्ञे अ॒स्मिन्न्⁠। अ॒स्मिन्निन्द्र᳚म्⁠। इन्द्र॒म् दैवीः᳚⁠। दैवी॒र् विशः॑⁠। विशो॑ म॒रुतः॑⁠। म॒रुतोऽनु॑वर्त्मानः⁠। अनु॑वर्त्मानो॒ यथा᳚⁠। अनु॑वर्त्मान॒ इत्यनु॑—व॒र्त्मा॒नः॒⁠। यथेन्द्र᳚म्⁠। इन्द्र॒म् दैवीः᳚⁠। दैवी॒र् विशः॑⁠। विशो॑ म॒रुतः॑⁠। म॒रुतोऽनु॑वर्त्मानः⁠। अनु॑वर्त्मान ए॒वम्⁠। अनु॑वर्त्मान॒ इत्यनु॑—व॒र्त्मा॒नः॒⁠। ए॒वमि॒मम्⁠। इ॒मय्ँयज॑मानम्⁠। यज॑मान॒म् दैवीः᳚⁠। दैवी᳚श्च⁠। च॒ विशः॑⁠। विशो॒ मानु॑षीः⁠। मानु॑षीश्च⁠। चानु॑वर्त्मानः⁠। अनु॑वर्त्मानो भवन्तु⁠। अनु॑वर्त्मान॒ इत्यनु॑—व॒र्त्मा॒नः॒⁠। भ॒व॒न्त्विति॑ भवन्तु⁠॥ [२६] (अ॒गा॒ꣳ॒ स॒ह॒स्रा॒ख्‍ष॒ दे॒वाः॒ स॒हस्र॑धारा॒ मत्य॑ꣳहा॒ अनु॑वर्त्मानः॒ षोड॑श च) ॥५॥
जी॒मूत॑स्येव⁠। इ॒व॒ भ॒व॒ति॒⁠। भ॒व॒ति॒ प्रती॑कम्⁠। प्रती॑क॒य्ँयत्⁠। यद् व॒र्मी⁠। व॒र्मी याति॑⁠। याति॑ स॒मदा᳚म्⁠। स॒मदा॑मु॒पस्थे᳚⁠। स॒मदा॒मिति॑ स—मदा᳚म्⁠। उ॒पस्थ॒ इत्यु॒प—स्थे॒⁠॥ अना॑विद्धया त॒नुवा᳚⁠। अना॑विद्ध॒येत्यना᳚—वि॒द्ध॒या॒⁠। त॒नुवा॑ जय⁠। ज॒य॒ त्वम्⁠। त्वꣳ सः⁠। स त्वा᳚⁠। त्वा॒ वर्म॑णः⁠। वर्म॑णो महि॒मा⁠। म॒हि॒मा पि॑पर्तु⁠। पि॒प॒र्त्विति॑ पिपर्तु⁠॥ धन्व॑ना॒ गाः⁠। गा धन्व॑ना⁠। धन्व॑ना॒ऽऽजिम्⁠। आ॒जिम् ज॑येम⁠। ज॒ये॒म॒ धन्व॑ना⁠। धन्व॑ना ती॒व्राः⁠। ती॒व्राः स॒मदः॑⁠। स॒मदो॑ जयेम⁠। स॒मद॒ इति॑ स—मदः॑⁠। ज॒ये॒मेति॑ जयेम⁠॥ धनुः॒ शत्रोः᳚⁠। शत्रो॑रपका॒मम्⁠। अ॒प॒का॒मम् कृ॑णोति⁠। अ॒प॒का॒ममित्य॑प—का॒मम्⁠। कृ॒णो॒ति॒ धन्व॑ना⁠। धन्व॑ना॒ सर्वाः᳚⁠। सर्वाः᳚ प्र॒दिशः॑⁠। प्र॒दिशो॑ जयेम⁠। प्र॒दिश॒ इति॑ प्र—दिशः॑⁠। ज॒ये॒मेति॑ जयेम⁠॥ व॒ख्‍ष्यन्ती॑व⁠। इ॒वेत्⁠। इदा⁠। आ ग॑नीगन्ति⁠। ग॒नी॒ग॒न्ति॒ कर्ण᳚म्⁠। कर्ण॑म् प्रि॒यम्⁠। प्रि॒यꣳ सखा॑यम्⁠। सखा॑यम् परिषस्वजा॒ना⁠। प॒रि॒ष॒स्व॒जा॒नेति॑ परि—स॒स्व॒जा॒ना⁠॥ योषे॑व⁠। इ॒व॒ शि॒ङ्‍क्ते॒⁠। शि॒ङ्‍क्ते॒ वित॑ता⁠। वित॒ताऽधि॑⁠। वित॒तेति॒ वि—त॒ता॒⁠। अधि॒ धन्व॑न्न्⁠। धन्व॒न् ज्या⁠। [२७] ज्या इ॒यम्⁠। इ॒यꣳ सम॑ने⁠। सम॑ने पा॒रय॑न्ती⁠। पा॒रय॒न्तीति॑ पा॒रय॑न्ती⁠॥ ते आ॒चर॑न्ती⁠। ते इति॒ ते⁠। आ॒चर॑न्ती॒ सम॑ना⁠। आ॒चर॑न्ती॒ इत्या᳚—चर॑न्ती⁠। सम॑नेव⁠। इ॒व॒ योषा᳚⁠। योषा॑ मा॒ता⁠। मा॒तेव॑⁠। इ॒व॒ पु॒त्रम्⁠। पु॒त्रं बि॑भृताम्⁠। बि॒भृ॒ता॒मु॒पस्थे᳚⁠। उ॒पस्थ॒ इत्यु॒प—स्थे॒⁠॥ अप॒ शत्रू॑न्⁠। शत्रू॑न्‌विद्ध्यताम्⁠। वि॒द्ध्य॒ता॒ꣳ॒ स॒व्ँवि॒दा॒ने⁠। स॒व्ँवि॒दा॒ने आर्त्नी᳚⁠। स॒व्ँवि॒दा॒ने इति॑ सम्—वि॒दा॒ने⁠। आर्त्नी॑ इ॒मे⁠। आर्त्नी॒ इत्यार्त्नी᳚⁠। इ॒मे वि॑ष्फु॒रन्ती᳚⁠। इ॒मे इती॒मे⁠। वि॒ष्फु॒रन्ती॑ अ॒मित्रा॑न्⁠। वि॒ष्फु॒रन्ती॒ इति॑ वि—स्फु॒रन्ती᳚⁠। अ॒मित्रा॒नित्य॒मित्रा॑न्⁠॥ ब॒ह्वी॒नाम् पि॒ता⁠। पि॒ता ब॒हुः⁠। ब॒हुर॑स्य⁠। अ॒स्य॒ पु॒त्रः⁠। पु॒त्रश्चि॒श्चा⁠। चि॒श्चा कृ॑णोति⁠। कृ॒णो॒ति॒ सम॑ना⁠। सम॑नाऽव॒गत्य॑⁠। अ॒व॒गत्येत्य॑व—गत्य॑⁠॥ इ॒षु॒धिः सङ्‍काः᳚⁠। इ॒षु॒धिरिती॑षु—धिः⁠। सङ्‍काः॒ पृत॑नाः⁠। पृत॑नाश्च⁠। च॒ सर्वाः᳚⁠। सर्वाः᳚ पृ॒ष्ठे⁠। पृ॒ष्ठे निन॑द्धः⁠। निन॑द्धो जयति⁠। निन॑द्ध॒ इति॒ नि—न॒द्धः॒⁠। ज॒य॒ति॒ प्रसू॑तः⁠। प्रसू॑त॒ इति॒ प्र—सू॒तः॒⁠॥ रथे॒ तिष्ठ॑न्न्⁠। तिष्ठ॑न् नयति⁠। न॒य॒ति॒ वा॒जिनः॑⁠। वा॒जिनः॑ पु॒रः⁠। पु॒रो यत्र॑यत्र⁠। यत्र॑यत्र का॒मय॑ते⁠। यत्र॑य॒त्रेति॒ यत्र॑—य॒त्र॒⁠। का॒मय॑ते सुषार॒थिः⁠। सु॒षा॒र॒थिरिति॑ सु—सा॒र॒थिः⁠॥ अ॒भीशूना॑म् महि॒मान᳚म्⁠। म॒हि॒मान॑म् पनायत⁠। [२८] प॒ना॒य॒त॒ मनः॑⁠। मनः॑ प॒श्चात्⁠। प॒श्चादनु॑⁠। अनु॑ यच्छन्ति⁠। य॒च्छ॒न्ति॒ र॒श्मयः॑⁠। र॒श्मय॒ इति॑ र॒श्मयः॑⁠॥ ती॒व्रान् घोषा॑न्⁠। घोषा᳚न् कृण्वते⁠। कृ॒ण्व॒ते॒ वृष॑पाणयः⁠। वृष॑पाण॒योऽश्वाः᳚⁠। वृष॑पाणय॒ इति॒ वृष॑—पा॒ण॒यः॒⁠। अश्वा॒ रथे॑भिः⁠। रथे॑भिः स॒ह⁠। स॒ह वा॒जय॑न्तः⁠। वा॒जय॑न्त॒ इति॑ वा॒जय॑न्तः⁠॥ अ॒व॒क्राम॑न्तः॒ प्रप॑दैः⁠। अ॒व॒क्राम॑न्त॒ इत्य॑व—क्राम॑न्तः⁠। प्रप॑दैर॒मित्रा॑न्⁠। प्रप॑दै॒रिति॒ प्र—प॒दैः॒⁠। अ॒मित्रा᳚न् ख्‍षि॒णन्ति॑⁠। ख्‍षि॒णन्ति॒ शत्रू॑न्⁠। शत्रू॒ꣳ॒रन॑पव्ययन्तः⁠। अन॑पव्ययन्त॒ इत्यन॑प—व्य॒य॒न्तः॒⁠॥ र॒थ॒वाह॑नꣳ ह॒विः⁠। र॒थ॒वाह॑न॒मिति॑ रथ—वाह॑नम्⁠। ह॒विर॑स्य⁠। अ॒स्य॒ नाम॑⁠। नाम॒ यत्र॑⁠। यत्रायु॑धम्⁠। आयु॑ध॒म् निहि॑तम्⁠। निहि॑तमस्य⁠। निहि॑त॒मिति॒ नि—हि॒त॒म्⁠। अ॒स्य॒ वर्म॑⁠। वर्मेति॒ वर्म॑⁠॥ तत्रा॒ रथ᳚म्⁠। रथ॒मुप॑⁠। उप॑ श॒ग्मम्⁠। श॒ग्मꣳ स॑देम⁠। स॒दे॒म॒ वि॒श्वाहा᳚⁠। वि॒श्वाहा॑ व॒यम्⁠। वि॒श्वाहेति॑ विश्वा—अहा᳚⁠। व॒यꣳ सु॑मन॒स्यमा॑नाः⁠। सु॒म॒न॒स्यमा॑ना॒ इति॑ सु—म॒न॒स्यमा॑नाः⁠॥ स्वा॒दु॒ष॒ꣳ॒सदः॑ पि॒तरः॑⁠। स्वा॒दु॒ष॒ꣳ॒सद॒ इति॑ स्वादु—स॒ꣳ॒सदः॑⁠। पि॒तरो॑ वयो॒धाः⁠। व॒यो॒धाः कृ॑च्छ्रे॒श्रितः॑⁠। व॒यो॒धा इति॑ वयः—धाः⁠। कृ॒च्छ्रे॒श्रितः॒ शक्ती॑वन्तः⁠। कृ॒च्छ्रे॒श्रित॒ इति॑ कृच्छ्रे—श्रितः॑⁠। शक्ती॑वन्तो गभी॒राः⁠। शक्ती॑वन्त॒ इति॒ शक्ति॑—व॒न्तः॒⁠। ग॒भी॒रा इति॑ गभी॒राः⁠॥ चि॒त्रसे॑ना॒ इषु॑बलाः⁠। चि॒त्रसे॑ना॒ इति॑ चि॒त्र—से॒नाः॒⁠। इषु॑बला॒ अमृ॑द्ध्राः⁠। इषु॑बला॒ इतीषु॑—ब॒लाः॒⁠। अमृ॑द्ध्राः स॒तोवी॑राः⁠। स॒तोवी॑रा उ॒रवः॑⁠। स॒तोवी॑रा॒ इति॑ स॒तः—वी॒राः॒⁠। उ॒रवो᳚ व्रातसा॒हाः⁠। व्रा॒त॒सा॒हा इति॑ व्रात—सा॒हाः⁠॥ ब्राह्म॑नासः॒ पित॑रः⁠। [२९] पित॑रः॒ सोम्या॑सः⁠। सोम्या॑सः शि॒वे⁠। शि॒वे नः॑⁠। शि॒वे इति॑ शि॒वे⁠। नो॒ द्यावा॑पृथि॒वी⁠। द्यावा॑पृथि॒वी अ॑ने॒हसा᳚⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। अ॒ने॒हसेत्य॑ने॒हसा᳚⁠॥ पू॒षा नः॑⁠। नः॒ पा॒तु॒⁠। पा॒तु॒ दु॒रि॒तात्⁠। दु॒रि॒तादृ॑तावृधः⁠। दु॒रि॒तादिति॑ दुः—इ॒तात्⁠। ऋ॒ता॒वृ॒धो॒ रख्‍ष॑⁠। ऋ॒ता॒वृ॒ध॒ इत्यृ॑त—वृ॒धः॒⁠। रख्‍षा॒ माकिः॑⁠। माकि॑र् नः⁠। नो॒ अ॒घश॑ꣳसः⁠। अ॒घश॑ꣳस ईशत⁠। अ॒घश॑ꣳस॒ इत्य॒घ—श॒ꣳ॒सः॒⁠। ई॒श॒तेती॑शत⁠॥ सु॒प॒र्णव्ँव॑स्ते⁠। सु॒प॒र्णमिति॑ सु—प॒र्णम्⁠। व॒स्ते॒ मृ॒गः⁠। मृ॒गो अ॑स्याः⁠। अ॒स्या॒ दन्तः॑⁠। दन्तो॒ गोभिः॑⁠। गोभिः॒ सन्न॑द्धा⁠। सन्न॑द्धा पतति⁠। सन्न॒द्धेति॒ सम्—न॒द्धा॒⁠। प॒त॒ति॒ प्रसू॑ता⁠। प्रसू॒तेति॒ प्र—सू॒ता॒⁠॥ यत्रा॒ नरः॑⁠। नरः॒ सम्⁠। सम् च॑⁠। च॒ वि⁠। वि च॑⁠। च॒ द्रव॑न्ति⁠। द्रव॑न्ति॒ तत्र॑⁠। तत्रा॒स्मभ्य᳚म्⁠। अ॒स्मभ्य॒मिष॑वः⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। इष॑वः॒ शर्म॑⁠। शर्म॑ यꣳसन्न्⁠। य॒ꣳ॒स॒न्निति॑ यꣳसन्न्⁠॥ ऋजी॑ते॒ परि॑⁠। परि॑ वृङ्‍ग्धि⁠। वृ॒ङ्‍ग्धि॒ नः॒⁠। नोऽश्मा᳚⁠। अश्मा॑ भवतु⁠। भ॒व॒तु॒ नः॒⁠। न॒स्त॒नूः⁠। त॒नूरिति॑ त॒नूः⁠॥ सोमो॒ अधि॑⁠। अधि॑ ब्रवीतु⁠। ब्र॒वी॒तु॒ नः॒⁠। नोऽदि॑तिः⁠। अदि॑तिः॒ शर्म॑⁠। [३०] शर्म॑ यच्छतु⁠। य॒च्छ॒त्विति॑ यच्छतु⁠॥ आ ज॑ङ्‍घन्ति⁠। ज॒ङ्‍घ॒न्ति॒ सानु॑⁠। सान्वे॑षाम्⁠। ए॒षां॒ ज॒घना॑न्⁠। ज॒घना॒ꣳ॒ उप॑⁠। उप॑ जिघ्नते⁠। जि॒घ्न॒त॒ इति॑ जिघ्नते⁠॥ अश्वा॑जनि॒ प्रचे॑तसः⁠। अश्वा॑ज॒नीत्यश्व॑—अ॒ज॒नि॒⁠। प्रचे॑त॒सोऽश्वा॑न्⁠। प्रचे॑तस॒ इति॒ प्र—चे॒त॒सः॒⁠। अश्वा᳚न्थ् स॒मथ्सु॑⁠। स॒मथ्सु॑ चोदय⁠। स॒मथ्स्विति॑ स॒मत्—सु॒⁠। चो॒द॒येति॑ चोदय⁠॥ अहि॑रिव⁠। इ॒व॒ भो॒गैः⁠। भो॒गैः परि॑⁠। पर्ये॑ति⁠। ए॒ति॒ बा॒हुम्⁠। बा॒हुम् ज्यायाः᳚⁠। ज्याया॑ हे॒तिम्⁠। हे॒तिम् प॑रि॒बाध॑मानः⁠। प॒रि॒बाध॑मान॒ इति॑ परि—बाध॑मानः⁠॥ ह॒स्त॒घ्नो विश्वा᳚⁠। ह॒स्त॒घ्न इति॑ हस्त—घ्नः⁠। विश्वा॑ व॒युना॑नि⁠। व॒युना॑नि वि॒द्वान्⁠। वि॒द्वान् पुमा॑न्⁠। पुमा॒न् पुमा॑ꣳसम्⁠। पुमा॑ꣳस॒म् परि॑⁠। परि॑ पातु⁠। पा॒तु॒ वि॒श्वतः॑⁠। वि॒श्वत॒ इति॑ वि॒श्वतः॑⁠॥ वन॑स्पते वी॒ड्व॑ङ्‍गः⁠। वी॒ड्व॑ङ्‍गो॒ हि⁠। वी॒ड्व॑ङ्‍ग॒ इति॑ वी॒डु—अ॒ङ्‍गः॒⁠। हि भू॒याः⁠। भू॒या अ॒स्मथ्स॑खा⁠। अ॒स्मथ्स॑खा प्र॒तर॑णः⁠। अ॒स्मथ्स॒खेत्य॒स्मत्—स॒खा॒⁠। प्र॒तर॑णः सु॒वीरः॑⁠। प्र॒तर॑ण॒ इति॑ प्र—तर॑णः⁠। सु॒वीर॒ इति॑ सु—वीरः॑⁠॥ गोभिः॒ सन्न॑द्धः⁠। सन्न॑द्धो असि⁠। सन्न॑द्ध॒ इति॒ सं—न॒द्धः॒⁠। अ॒सि॒ वी॒डय॑स्व⁠। वी॒डय॑स्वास्था॒ता⁠। आ॒स्था॒ता ते᳚⁠। आ॒स्था॒तेत्या᳚—स्था॒ता⁠। ते॒ ज॒य॒तु॒⁠। ज॒य॒तु॒ जेत्वा॑नि⁠। जेत्वा॒नीति॒ जेत्वा॑नि⁠॥ दि॒वः पृ॑थि॒व्याः⁠। पृ॒थि॒व्याः परिः॑⁠। पर्योजः॑⁠। [३१] ओज॒ उद्भृ॑तम्⁠। उद्भृ॑त॒व्ँवन॒स्पति॑भ्यः⁠। उद्भृ॑त॒मित्युत्—भृ॒त॒म्⁠। वन॒स्पति॑भ्यः॒ परि॑⁠। वन॒स्पति॑भ्य॒ इति॒ वन॒स्पति॑—भ्यः॒⁠। पर्याभृ॑तम्⁠। आभृ॑त॒ꣳ॒ सहः॑⁠। आभृ॑त॒मित्या—भृ॒त॒म्⁠। सह॒ इति॒ सहः॑⁠॥ अ॒पामो॒ज्मान᳚म्⁠। ओ॒ज्मान॒म् परि॑⁠। परि॒ गोभिः॑⁠। गोभि॒रावृ॑तम्⁠। आवृ॑त॒मिन्द्र॑स्य⁠। आवृ॑त॒मित्या—वृ॒त॒म्⁠। इन्द्र॑स्य॒ वज्र᳚म्⁠। वज्र॑ꣳ ह॒विषा᳚⁠। ह॒विषा॒ रथ᳚म्⁠। रथ॑य्ँयज⁠। य॒जेति॑ यज⁠॥ इन्द्र॑स्य॒ वज्रः॑⁠। वज्रो॑ म॒रुता᳚म्⁠। म॒रुता॒मनी॑कम्⁠। अनी॑कम् मि॒त्रस्य॑⁠। मि॒त्रस्य॒ गर्भः॑⁠। गर्भो॒ वरु॑णस्य⁠। वरु॑णस्य॒ नाभिः॑⁠। नाभि॒रिति॒ नाभिः॑⁠॥ सेमाम्⁠। इ॒माम् नः॑⁠। नो॒ ह॒व्यदा॑तिम्⁠। ह॒व्यदा॑तिम् जुषा॒णः⁠। ह॒व्यदा॑ति॒मिति॑ ह॒व्य—दा॒ति॒म्⁠। जु॒षा॒णो देव॑⁠। देव॑ रथ⁠। र॒थ॒ प्रति॑⁠। प्रति॑ ह॒व्या⁠। ह॒व्या गृ॑भाय⁠। गृ॒भा॒येति॑ गृभाय⁠॥ उप॑ श्वासय⁠। श्वा॒स॒य॒ पृ॒थि॒वीम्⁠। पृ॒थि॒वीमु॒त⁠। उ॒त द्याम्⁠। द्याम् पु॑रु॒त्रा⁠। पु॒रु॒त्रा ते᳚⁠। पु॒रु॒त्रेति॑ पुरु—त्रा⁠। ते॒ म॒नु॒ता॒म्⁠। म॒नु॒ता॒व्ँविष्ठि॑तम्⁠। विष्ठि॑त॒म् जग॑त्⁠। विष्ठि॑त॒मिति॒ वि—स्थि॒त॒म्⁠। जग॒दिति॒ जग॑त्⁠॥ स दु॑न्दुभे⁠। दु॒न्दु॒भे॒ स॒जूः⁠। स॒जूरिन्द्रे॑ण⁠। स॒जूरिति॑ स—जूः⁠। इन्द्रे॑ण दे॒वैः⁠। दे॒वैर् दू॒रात्⁠। दू॒राद् दवी॑यः⁠। [३२] दवी॑यो॒ अप॑⁠। अप॑ सेध⁠। से॒ध॒ शत्रू॑न्⁠। शत्रू॒निति॒ शत्रू॑न्⁠॥ आ क्र॑न्दय⁠। क्र॒न्द॒य॒ बल᳚म्⁠। बल॒मोजः॑⁠। ओजो॑ नः⁠। न॒ आ⁠। आ धाः᳚⁠। धा॒ निः⁠। निष्ट॑निहि⁠। स्त॒नि॒हि॒ दु॒रि॒ता⁠। दु॒रि॒ता बाध॑मानः⁠। दु॒रि॒तेति॑ दुः—इ॒ता⁠। बाध॑मान॒ इति॒ बाध॑मानः⁠॥ अप॑ प्रोथ⁠। प्रो॒थ॒ दु॒न्दु॒भे॒⁠। दु॒न्दु॒भे॒ दु॒च्छुना॑न्⁠। दु॒च्छुना॑ꣳ इ॒तः⁠। इ॒त इन्द्र॑स्य⁠। इन्द्र॑स्य मु॒ष्टिः⁠। मु॒ष्टिर॑सि⁠। अ॒सि॒ वी॒डय॑स्व⁠। वी॒डय॒स्वेति॑ वी॒डय॑स्व⁠॥ आऽमूः⁠। अ॒मूर॑ज⁠। अ॒ज॒ प्र॒त्याव॑र्तय⁠। प्र॒त्याव॑र्तये॒माः⁠। प्र॒त्याव॑र्त॒येति॑ प्रति—आव॑र्तय⁠। इ॒माः के॑तु॒मत्⁠। के॒तु॒मद् दु॑न्दु॒भिः⁠। के॒तु॒मदिति॑ केतु—मत्⁠। दु॒न्दु॒भिर् वा॑वदीति⁠। वा॒व॒दी॒तीति॑ वावदीति⁠॥ समश्व॑पर्णाः⁠। अश्व॑पर्णा॒श्चर॑न्ति⁠। अश्व॑पर्णा॒ इत्यश्व॑—प॒र्णाः॒⁠। चर॑न्ति नः⁠। नो॒ नरः॑⁠। नरो॒ऽस्माक᳚म्⁠। अ॒स्माक॑मिन्द्र⁠। इ॒न्द्र॒ र॒थिनः॑⁠। र॒थिनो॑ जयन्तु⁠। ज॒य॒न्त्विति॑ जयन्तु⁠॥ [३३] (धन्व॑न् महि॒मानं॒ ब्राह्म॑णा॒सो ऽदि॑तिः पृथि॒व्याः परि॑ दू॒रा देक॑चत्वारिꣳशच्च) ॥६॥
यदक्र॑न्दः⁠। अक्र॑न्दः प्रथ॒मम्⁠। प्र॒थ॒मम् जाय॑मानः⁠। जाय॑मान उ॒द्यन्न्⁠। उ॒द्यन्थ् स॑मु॒द्रात्⁠। उ॒द्यन्नित्यु॑त्—यन्न्⁠। स॒मु॒द्रादु॒त⁠। उ॒त वा᳚⁠। वा॒ पुरी॑षात्⁠। पुरी॑षा॒दिति॒ पुरी॑षात्⁠॥ श्ये॒नस्य॑ प॒ख्‍षा⁠। प॒ख्‍षा ह॑रि॒णस्य॑⁠। ह॒रि॒णस्य॑ बा॒हू⁠। बा॒हू उ॑प॒स्तुत्य᳚म्⁠। बा॒हू इति॑ बा॒हू⁠। उ॒प॒स्तुत्य॒म् महि॑⁠। उ॒प॒स्तुत्य॒मित्यु॑प—स्तुत्य᳚म्⁠। महि॑ जा॒तम्⁠। जा॒तम् ते᳚⁠। ते॒ अ॒र्व॒न्न्॒⁠। अ॒र्व॒न्नित्य॑र्वन्न्⁠॥ य॒मेन॑ द॒त्तम्⁠। द॒त्तम् त्रि॒तः⁠। त्रि॒त ए॑नम्⁠। ए॒न॒मा॒यु॒न॒क्॒⁠। आ॒यु॒न॒गिन्द्रः॑⁠। इन्द्र॑ एणम्⁠। ए॒न॒म् प्र॒थ॒मः⁠। प्र॒थ॒मो अधि॑⁠। अद्ध्य॑तिष्ठत्⁠। अ॒ति॒ष्ठ॒दित्य॑तिष्ठत्⁠॥ ग॒न्ध॒र्वो अ॑स्य⁠। अ॒स्य॒ र॒श॒नाम्⁠। र॒श॒नाम॑गृभ्णात्⁠। अ॒गृ॒भ्णा॒थ् सूरा᳚त्⁠। सूरा॒दश्व᳚म्⁠। अश्व॑व्ँवसवः⁠। व॒स॒वो॒ निः⁠। निर॑तष्ट⁠। अ॒त॒ष्टेत्य॑तष्ट⁠॥ असि॑ य॒मः⁠। य॒मो असि॑⁠। अस्या॑दि॒त्यः⁠। आ॒दि॒त्यो अ॑र्वन्न्⁠। अ॒र्व॒न्नसि॑⁠। असि॑ त्रि॒तः⁠। त्रि॒तो गुह्ये॑न⁠। गुह्ये॑न व्र॒तेन॑⁠। व्र॒तेनेति॑ व्र॒तेन॑⁠॥ असि॒ सोमे॑न⁠। सोमे॑न स॒मया᳚⁠। स॒मया॒ विपृ॑क्तः⁠। विपृ॑क्त आ॒हुः⁠। विपृ॑क्त॒ इति॒ वि—पृ॒क्तः॒⁠। [३४] आ॒हुस्ते᳚⁠। ते॒ त्रीणि॑⁠। त्रीणि॑ दि॒वि⁠। दि॒वि बन्ध॑नानि⁠। बन्ध॑ना॒नीति॒ बन्ध॑नानि⁠॥ त्रीणि॑ ते⁠। त॒ आ॒हुः॒⁠। आ॒हु॒र् दि॒वि⁠। दि॒वि बन्ध॑नानि⁠। बन्ध॑नानि॒ त्रीणि॑⁠। त्रीण्य॒फ्सु⁠। अ॒फ्सु त्रीणि॑⁠। अ॒फ्स्वित्य॑प्—सु⁠। त्रीण्य॒न्तः⁠। अ॒न्तः स॑मु॒द्रे⁠। स॒मु॒द्र इति॑ समु॒द्रे⁠॥ उ॒तेव॑⁠। इ॒व॒ मे॒⁠। मे॒ वरु॑णः⁠। वरु॑ण श्छन्थ्सि⁠। छ॒न्थ्स्य॒र्व॒न्न्॒⁠। अ॒र्व॒न्॒‌यत्र॑⁠। यत्रा॑ ते⁠। त॒ आ॒हुः⁠। आ॒हुः प॑र॒मम्⁠। प॒र॒मम् ज॒नित्र᳚म्⁠। ज॒नित्र॒मिति॑ ज॒नित्र᳚म्⁠॥ इ॒मा ते᳚⁠। ते॒ वा॒जि॒न्न्॒⁠। वा॒जि॒न्न॒व॒मार्ज॑नानि⁠। अ॒व॒मार्ज॑नानी॒मा⁠। अ॒व॒मार्ज॑ना॒नीत्य॑व—मार्ज॑नानि⁠। इ॒मा श॒फाना᳚म्⁠। श॒फाना॑ꣳ सनि॒तुः⁠। स॒नि॒तुर् नि॒धाना᳚⁠। नि॒धानेति॑ नि—धाना᳚⁠॥ अत्रा॑ ते⁠। ते॒ भ॒द्राः⁠। भ॒द्रा र॑श॒नाः⁠। र॒श॒ना अ॑पश्यम्⁠। अ॒प॒श्य॒मृ॒तस्य॑⁠। ऋ॒तस्य॒ याः⁠। या अ॑भि॒रख्‍ष॑न्ति⁠। अ॒भि॒रख्‍ष॑न्ति गो॒पाः⁠। अ॒भि॒रख्‍ष॒न्तीत्य॑भि—रख्‍ष॑न्ति⁠। गो॒पा इति॑ गो—पाः⁠॥ आ॒त्मान॑म् ते⁠। ते॒ मन॑सा⁠। मन॑सा॒ऽऽरात्⁠। आ॒राद॑जानाम्⁠। अ॒जा॒ना॒म॒वः⁠। अ॒वो दि॒वा⁠। दि॒वा प॒तय॑न्तम्⁠। [३५] प॒तय॑न्तम् पत॒ङ्‍गम्⁠। प॒त॒ङ्‍गमिति॑ पत॒ङ्‍गम्⁠॥ शिरो॑ अपश्यम्⁠। अ॒प॒श्य॒म् प॒थिभिः॑⁠। प॒थिभिः॑ सु॒गेभिः॑⁠। प॒थिभि॒रिति॑ प॒थि—भिः॒⁠। सु॒गेभि॑ररे॒णुभिः॑⁠। सु॒गेभि॒रिति॑ सु—गेभिः॑⁠। अ॒रे॒णुभि॒र् जेह॑मानम्⁠। अ॒रे॒णुभि॒रित्य॑रे॒णु—भिः॒⁠। जेह॑मानम् पत॒त्रि⁠। प॒त॒त्रीति॑ पत॒त्रि⁠॥ अत्रा॑ ते⁠। ते॒ रू॒पम्⁠। रू॒पमु॑त्त॒मम्⁠। उ॒त्त॒मम॑पश्यम्⁠। उ॒त्त॒ममित्यु॑त्—त॒मम्⁠। अ॒प॒श्य॒म् जिगी॑षमाणम्⁠। जिगी॑षमाणमि॒षः⁠। इ॒ष आ⁠। आ प॒दे⁠। प॒दे गोः⁠। गोरिति॒ गोः⁠॥ य॒दा ते᳚⁠। ते॒ मर्तः॑⁠। मर्तो॒ अनु॑⁠। अनु॒ भोग᳚म्⁠। भोग॒मान॑ट्⁠। आन॒डात्⁠। आदित्⁠। इद् ग्रसि॑ष्ठः⁠। ग्रसि॑ष्ठ॒ ओष॑धीः⁠। ओष॑धीरजीगः⁠। अ॒जी॒ग॒रित्य॑जीगः⁠॥ अनु॑ त्वा⁠। त्वा॒ रथः॑⁠। रथो॒ अनु॑⁠। अनु॒ मर्यः॑⁠। मर्यो॑ अर्वन्न्⁠। अ॒र्व॒न्ननु॑⁠। अनु॒ गावः॑⁠। गावोऽनु॑⁠। अनु॒ भगः॑⁠। भगः॑ क॒नीना᳚म्⁠। क॒नीना॒मिति॑ क॒नीना᳚म्⁠॥ अनु॒ व्राता॑सः⁠। व्राता॑स॒स्तव॑⁠। तव॑ स॒ख्यम्⁠। स॒ख्यमी॑युः⁠। ई॒यु॒रनु॑⁠। अनु॑ दे॒वाः⁠। दे॒वा म॑मिरे⁠। म॒मि॒रे॒ वी॒र्य᳚म्⁠। वी॒र्य॑म् ते⁠। [३६] त॒ इति॑ ते⁠॥ हिर॑ण्यशृ॒ङ्‍गोऽयः॑⁠। हिर॑ण्यशृङ्‍ग॒ इति॒ हिर॑ण्य—शृ॒ङ्‍गः॒⁠। अयो॑ अस्य⁠। अ॒स्य॒ पादाः᳚⁠। पादा॒ मनो॑जवाः⁠। मनो॑जवा॒ अव॑रः⁠। मनो॑जवा॒ इति॒ मनः॑—ज॒वाः॒⁠। अव॑र॒ इन्द्रः॑⁠। इन्द्र॑ आसीत्⁠। आ॒सी॒दित्या॑सीत्⁠॥ दे॒वा इत्⁠। इद॑स्य⁠। अ॒स्य॒ ह॒वि॒रद्य᳚म्⁠। ह॒वि॒रद्य॑मायन्न्⁠। ह॒वि॒रद्य॒मिति॑ हविः—अद्य᳚म्⁠। आ॒य॒न्॒‌यः⁠। यो अर्व॑न्तम्⁠। अर्व॑न्तम् प्रथ॒मः⁠। प्र॒थ॒मो अ॒द्ध्यति॑ष्ठत्⁠। अ॒द्ध्यति॑ष्ठ॒दित्य॑धि—अति॑ष्ठत्⁠॥ ई॒र्मान्ता॑सः॒ सिलि॑कमद्ध्यमासः⁠। ई॒र्मान्ता॑स॒ इती॒र्म—अ॒न्ता॒सः॒⁠। सिलि॑कमद्ध्यमासः॒ सम्⁠। सिलि॑कमद्ध्यमास॒ इति॒ सिलि॑क—म॒द्ध्य॒मा॒सः॒⁠। सꣳ शूर॑णासः⁠। शूर॑णासो दि॒व्यासः॑⁠। दि॒व्यासो॒ अत्याः᳚⁠। अत्या॒ इत्यत्याः᳚⁠॥ ह॒ꣳ॒सा इ॑व⁠। इ॒व॒ श्रे॒णि॒शः⁠। श्रे॒णि॒शो य॑तन्ते⁠। श्रे॒णि॒श इति॑ श्रेणि—शः⁠। य॒त॒न्ते॒ यत्⁠। यदाख्‍षि॑षुः⁠। आख्‍षि॑षुर् दि॒व्यम्⁠। दि॒व्यमज्म᳚म्⁠। अज्म॒मश्वाः᳚⁠। अश्वा॒ इत्यश्वाः᳚⁠॥ तव॒ शरी॑रम्⁠। शरी॑रम् पतयि॒ष्णु⁠। प॒त॒यि॒ष्ण्व॑र्वन्न्⁠। अ॒र्व॒न् तव॑⁠। तव॑ चि॒त्तम्⁠। चि॒त्तव्ँवातः॑⁠। वात॑ इव⁠। इ॒व॒ ध्रजी॑मान्⁠। ध्रजी॑मा॒निति॒ ध्रजी॑मान्⁠॥ तव॒ शृङ्‍गा॑णि⁠। शृङ्‍गा॑णि॒ विष्ठि॑ता⁠। विष्ठि॑ता पुरु॒त्रा⁠। विष्ठि॒तेति॒ वि—स्थि॒ता॒⁠। पु॒रु॒त्राऽर॑ण्येषु⁠। पु॒रु॒त्रेति॑ पुरु—त्रा⁠। अर॑ण्येषु॒ जर्भु॑राणा⁠। जर्भु॑राणा चरन्ति⁠। च॒र॒न्तीति॑ चरन्ति⁠॥ उप॒ प्र⁠। [३७] प्रागा᳚त्⁠। अ॒गा॒च्छस॑नम्⁠। शस॑नव्ँवा॒जी⁠। वा॒ज्यर्वा᳚⁠। अर्वा॑ देव॒द्रीचा᳚⁠। दे॒व॒द्रीचा॒ मन॑सा⁠। दे॒व॒द्रीचेति॑ देव—द्रीचा᳚⁠। मन॑सा॒ दीद्ध्या॑नः⁠। दीद्ध्या॑न॒ इति॒ दीद्ध्या॑नः⁠॥ अ॒जः पु॒रः⁠। पु॒रो नी॑यते⁠। नी॒य॒ते॒ नाभिः॑⁠। नाभि॑रस्य⁠। अ॒स्यानु॑⁠। अनु॑ प॒श्चात्⁠। प॒श्चात् क॒वयः॑⁠। क॒वयो॑ यन्ति⁠। य॒न्ति॒ रे॒भाः⁠। रे॒भा इति॑ रे॒भाः⁠॥ उप॒ प्र⁠। प्रागा᳚त्⁠। अ॒गा॒त् प्॒र॒मम्⁠। प॒र॒मय्ँयत्⁠। यथ् स॒धस्थ᳚म्⁠। स॒धस्थ॒मर्वा॑न्⁠। स॒धस्थ॒मिति॑ स॒ध—स्थ॒म्⁠। अर्वा॒ꣳ॒ अच्छ॑⁠। अच्छा॑ पि॒तर᳚म्⁠। पि॒तर॑म् मा॒तर᳚म्⁠। मा॒तर॑म् च⁠। चेति॑ च⁠॥ अ॒द्या दे॒वान्⁠। दे॒वान् जुष्ट॑तमः⁠। जुष्ट॑तमो॒ हि⁠। जुष्ट॑तम॒ इति॒ जुष्ट॑—त॒मः॒⁠। हि ग॒म्याः⁠। ग॒म्या अथ॑⁠। अथा⁠। आ शा᳚स्ते⁠। शा॒स्ते॒ दा॒शुषे᳚⁠। दा॒शुषे॒ वार्या॑णि⁠। वार्या॒णीति॒ वार्या॑णि⁠॥ [३८] (विपृ॑क्तो दि॒वा वी॒र्य॑ मुपै का॒न्नच॑त्वारि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥७॥
मा नः॑⁠। नो॒ मि॒त्रः⁠। मि॒त्रो वरु॑णः⁠। वरु॑णो अर्य॒मा⁠। अ॒र्य॒माऽऽयुः⁠। आ॒युरिन्द्रः॑⁠। इन्द्र॑ ऋभु॒ख्‍षाः⁠। ऋ॒भु॒ख्‍षा म॒रुतः॑⁠। ऋ॒भु॒ख्‍षा इत्यृ॑भु—ख्‍षाः⁠। म॒रुतः॒ परि॑⁠। परि॑ ख्यन्न्⁠। ख्य॒न्निति॑ ख्यन्न्⁠॥ यद् वा॒जिनः॑⁠। वा॒जिनो॑ दे॒वजा॑तस्य⁠। दे॒वजा॑तस्य॒ सप्तेः᳚⁠। दे॒वजा॑त॒स्येति॑ दे॒व—जा॒त॒स्य॒⁠। सप्तेः᳚ प्रव॒ख्‍ष्यामः॑⁠। प्र॒व॒ख्‍ष्यामो॑ वि॒दथे᳚⁠। प्र॒व॒ख्‍ष्याम॒ इति॑ प्र—व॒ख्‍ष्यामः॑⁠। वि॒दथे॑ वी॒र्या॑णि⁠। वी॒र्या॑णीति॑ वी॒र्या॑णि⁠॥ यन् नि॒र्णिजा᳚⁠। नि॒र्णिजा॒ रेक्ण॑सा⁠। नि॒र्णिजेति॑ निः—निजा᳚⁠। रेक्ण॑सा॒ प्रावृ॑तस्य⁠। प्रावृ॑तस्य रा॒तिम्⁠। रा॒तिम् गृ॑भी॒ताम्⁠। गृ॒भी॒ताम् मु॑ख॒तः⁠। मु॒ख॒तो नय॑न्ति⁠। नय॒न्तीति॒ नय॑न्ति⁠॥ सुप्रा॑ङ॒जः⁠। सुप्रा॒ङिति॒ सु—प्रा॒ङ्‍॒⁠। अ॒जो मेम्य॑त्⁠। मेम्य॑द् वि॒श्वरू॑पः⁠। वि॒श्वरू॑प इन्द्रापू॒ष्णोः⁠। वि॒श्वरू॑प॒ इति॑ वि॒श्व—रू॒पः॒⁠। इ॒न्द्रा॒पू॒ष्णोः प्रि॒यम्⁠। इ॒न्द्रा॒पू॒ष्णोरिती᳚न्द्रा—पू॒ष्णोः⁠। प्रि॒यमपि॑⁠। अप्ये॑ति⁠। ए॒ति॒ पाथः॑⁠। पाथ॒ इति॒ पाथः॑⁠॥ ए॒ष च्छागः॑⁠। छागः॑ पु॒रः⁠। पु॒रो अश्वे॑न⁠। अश्वे॑न वा॒जिना᳚⁠। वा॒जिना॑ पू॒ष्णः⁠। पू॒ष्णो भा॒गः⁠। भा॒गो नी॑यते⁠। नी॒य॒ते॒ वि॒श्वदे᳚व्यः⁠। वि॒श्वदे᳚व्य॒ इति॑ वि॒श्व—दे॒व्यः॒⁠॥ अ॒भि॒प्रिय॒य्ँयत्⁠। अ॒भि॒प्रिय॒मित्य॑भि—प्रिय᳚म्⁠। यत् पु॑रो॒डाश᳚म्⁠। पु॒रो॒डाश॒मर्व॑ता⁠। अर्व॑ता॒ त्वष्टा᳚⁠। त्वष्टेत्⁠। इदे॑नम्⁠। [३९] ए॒न॒ꣳ॒ सौ॒श्र॒व॒साय॑⁠। सौ॒श्र॒व॒साय॑ जिन्वति⁠। जि॒न्व॒तीति॑ जिन्वति⁠॥ यद्ध॒विष्य᳚म्⁠। ह॒विष्य॑मृतु॒शः⁠। ऋ॒तु॒शो दे॑व॒यान᳚म्⁠। ऋ॒तु॒श इत्यृ॑तु—शः⁠। दे॒व॒यान॒म् त्रिः⁠। दे॒व॒यान॒मिति॑ देव—यान᳚म्⁠। त्रिर् मानु॑षाः⁠। मानु॑षाः॒ परि॑⁠। पर्यश्व᳚म्⁠। अश्व॒म् नय॑न्ति⁠। नय॒न्तीति॒ नय॑न्ति⁠॥ अत्रा॑ पू॒ष्णः⁠। पू॒ष्णः प्र॑थ॒मः⁠। प्र॒थ॒मो भा॒गः⁠। भा॒ग ए॑ति⁠। ए॒ति॒ य॒ज्ञम्⁠। य॒ज्ञम् दे॒वेभ्यः॑⁠। दे॒वेभ्यः॑ प्रतिवे॒दय॑न्न्⁠। प्र॒ति॒वे॒दय॑न्न॒जः⁠। प्र॒ति॒वे॒दय॒न्निति॑ प्रति—वे॒दय॑न्न्⁠। अ॒ज इत्य॒जः⁠॥ होता᳚ऽद्ध्व॒र्युः⁠। अ॒द्ध्व॒र्युराव॑याः⁠। आव॑या अग्निमि॒न्धः⁠। आव॑या॒ इत्या—व॒याः॒⁠। अ॒ग्नि॒मि॒न्धो ग्रा॑वग्रा॒भः⁠। अ॒ग्नि॒मि॒न्ध इत्य॑ग्निम्—इ॒न्धः⁠। ग्रा॒व॒ग्रा॒भ उ॒त⁠। ग्रा॒व॒ग्रा॒भ इति॑ ग्राव—ग्रा॒भः⁠। उ॒त शꣴस्ता᳚⁠। शꣴस्ता॒ सुवि॑प्रः⁠। सुवि॑प्र॒ इति॒ सु—वि॒प्रः॒⁠॥ तेन॑ य॒ज्ञेन॑⁠। य॒ज्ञेन॒ स्व॑रङ्‍कृतेन⁠। स्व॑रङ्‍कृतेन॒ स्वि॑ष्टेन⁠। स्व॑रङ्‍कृते॒नेति॒ सु—अ॒र॒ङ्‍कृ॒ते॒न॒⁠। स्वि॑ष्टेन व॒ख्‍षणाः᳚⁠। स्वि॑ष्टे॒नेति॒ सु—इ॒ष्टे॒न॒⁠। व॒ख्‍षणा॒ आ⁠। आ पृ॑णद्ध्वम्⁠। पृ॒ण॒द्ध्व॒मिति॑ पृणद्ध्वम्⁠॥ यू॒प॒व्र॒स्का उ॒त⁠। यू॒प॒व्र॒स्का इति॑ यूप—व्र॒स्काः⁠। उ॒त ये⁠। ये यू॑पवा॒हाः⁠। यू॒प॒वा॒हाश्च॒षाल᳚म्⁠। यू॒प॒वा॒हा इति॑ यूप—वा॒हाः⁠। च॒षाल॒य्ँये⁠। ये अ॑श्वयू॒पाय॑⁠। अ॒श्व॒यू॒पाय॒ तख्‍ष॑ति⁠। अ॒श्व॒यू॒पायेत्य॑श्व—यू॒पाय॑⁠। तख्‍ष॒तीति॒ तख्‍ष॑ति⁠॥ ये च॑⁠। चार्व॑ते⁠। अर्व॑ते॒ पच॑नम्⁠। पच॑नꣳ स॒म्भर॑न्ति⁠। स॒म्भर॑न्त्यु॒तो⁠। स॒म्भर॒न्तीति॑ सम्—भर॑न्ति⁠। उ॒तो तेषा᳚म्⁠। उ॒तो इत्यु॒तो⁠। [४०] तेषा॑म॒भिगू᳚र्तिः⁠। अ॒भिगू᳚र्तिर् नः⁠। अ॒भिगू᳚र्ति॒रित्य॒भि—गू॒र्तिः॒⁠। न॒ इ॒न्व॒तु॒⁠। इ॒न्व॒त्विती᳚न्वतु⁠॥ उप॒ प्र⁠। प्रागा᳚त्⁠। अ॒गा॒थ् सु॒मत्⁠। सु॒मन् मे᳚⁠। सु॒मदिति॑ सु—मत्⁠। मे॒ऽधा॒यि॒⁠। अ॒धा॒यि॒ मन्म॑⁠। मन्म॑ दे॒वाना᳚म्⁠। दे॒वाना॒माशाः᳚⁠। आशा॒ उप॑⁠। उप॑ वी॒तपृ॑ष्ठः⁠। वी॒तपृ॑ष्ठ॒ इति॑ वी॒त—पृ॒ष्ठः॒⁠॥ अन्वे॑नम्⁠। ए॒न॒व्ँविप्राः᳚⁠। विप्रा॒ ऋष॑यः⁠। ऋष॑यो मदन्ति⁠। म॒द॒न्ति॒ दे॒वाना᳚म्⁠। दे॒वाना᳚म् पु॒ष्टे⁠। पु॒ष्टे च॑कृम⁠। च॒कृ॒मा॒ सु॒बन्धु᳚म्⁠। सु॒बन्धु॒मिति॑ सु—बन्धु᳚म्⁠॥ यद् वा॒जिनः॑⁠। वा॒जिनो॒ दाम॑⁠। दाम॑ स॒न्दान᳚म्⁠। स॒न्दान॒मर्व॑तः⁠। स॒न्दान॒मिति॑ सम्—दान᳚म्⁠। अर्व॑तो॒ या⁠। या शी॑र्‌ष॒ण्या᳚⁠। शी॒र्॒‌ष॒ण्या॑ रश॒ना⁠। र॒श॒ना रज्जुः॑⁠। रज्जु॑रस्य⁠। अ॒स्येत्य॑स्य⁠॥ यद् वा᳚⁠। वा॒ घ॒⁠। घा॒स्य॒⁠। अ॒स्य॒ प्रभृ॑तम्⁠। प्रभृ॑तमा॒स्ये᳚⁠। प्रभृ॑त॒मिति॒ प्र—भृ॒त॒म्⁠। आ॒स्ये॑ तृण᳚म्⁠। तृण॒ꣳ॒ सर्वा᳚⁠। सर्वा॒ ता⁠। ता ते᳚⁠। ते॒ अपि॑⁠। अपि॑ दे॒वेषु॑⁠। दे॒वेष्व॑स्तु⁠। अ॒स्त्वित्य॑स्तु⁠॥ यदश्व॑स्य⁠। अश्व॑स्य क्र॒विषः॑⁠। क्र॒विषो॒ मख्‍षि॑का⁠। [४१] मख्‍षि॒काऽऽश॑⁠। आश॒ यत्⁠। यद् वा᳚⁠। वा॒ स्वरौ᳚⁠। स्वरौ॒ स्वधि॑तौ⁠। स्वधि॑तौ रि॒प्तम्⁠। स्वधि॑ता॒विति॒ स्व—धि॒तौ॒⁠। रि॒प्तमस्ति॑⁠। अस्तीत्यस्ति॑⁠॥ यद्धस्त॑योः⁠। हस्त॑योः शमि॒तुः⁠। श॒मि॒तुर् यत्⁠। यन् न॒खेषु॑⁠। न॒खेषु॒ सर्वा᳚⁠। सर्वा॒ ता⁠। ता ते᳚⁠। ते॒ अपि॑⁠। अपि॑ दे॒वेषु॑⁠। दे॒वेष्व॑स्तु⁠। अ॒स्त्वित्य॑स्तु⁠॥ यदूव॑द्ध्यम्⁠। ऊव॑द्ध्यमु॒दर॑स्य⁠। उ॒दर॑स्याप॒वाति॑⁠। अ॒प॒वाति॒ यः⁠। अ॒प॒वातीत्य॑प—वाति॑⁠। य आ॒मस्य॑⁠। आ॒मस्य॑ क्र॒विषः॑⁠। क्र॒विषो॑ ग॒न्धः⁠। ग॒न्धो अस्ति॑⁠। अस्तीत्यस्ति॑⁠॥ सु॒कृ॒ता तत्⁠। सु॒कृ॒तेति॑ सु—कृ॒ता⁠। तच्छ॑मि॒तारः॑⁠। श॒मि॒तारः॑ कृण्वन्तु⁠। कृ॒ण्व॒न्तू॒त⁠। उ॒त मेध᳚म्⁠। मेध॑ꣳ शृत॒पाक᳚म्⁠। शृ॒त॒पाक॑म् पचन्तु⁠। शृ॒त॒पाक॒मिति॑ शृत—पाक᳚म्⁠। प॒च॒न्त्विति॑ पचन्तु⁠॥ यत् ते᳚⁠। ते॒ गात्रा᳚त्⁠। गात्रा॑द॒ग्निना᳚⁠। अ॒ग्निना॑ प॒च्यमा॑नात्⁠। प॒च्यमा॑नाद॒भि⁠। अ॒भि शूल᳚म्⁠। शूल॒म् निह॑तस्य⁠। निह॑तस्याव॒धाव॑ति⁠। निह॑त॒स्येति॒ नि—ह॒त॒स्य॒⁠। अ॒व॒धाव॒तीत्य॑व—धाव॑ति⁠॥ मा तत्⁠। तद् भूम्या᳚म्⁠। भूम्या॒मा⁠। आ श्रि॑षत्⁠। श्रि॒ष॒न् मा⁠। मा तृणे॑षु⁠। तृणे॑षु दे॒वेभ्यः॑⁠। दे॒वेभ्य॒स्तत्⁠। तदु॒शद्भ्यः॑⁠। उ॒शद्भ्यो॑ रा॒तम्⁠। उ॒शद्भ्य॒ इत्यु॒शत्—भ्यः॒⁠। रा॒तम॑स्तु⁠। अ॒स्त्वित्य॑स्तु⁠॥ [४२] (इ दु॒तो क्र॒विषः॑ श्रिषथ् स॒प्त च॑) ॥८॥
ये वा॒जिन᳚म्⁠। वा॒जिन॑म् परि॒पश्य॑न्ति⁠। प॒रि॒पश्य॑न्ति प॒क्वम्⁠। प॒रि॒पश्य॒न्तीति॑ परि—पश्य॑न्ति⁠। प॒क्वय्ँये⁠। य ई᳚म्⁠। ई॒मा॒हुः⁠। आ॒हुः सु॑र॒भिः⁠। सु॒र॒भिर् निः⁠। निर्‌ह॑र⁠। ह॒रेति॑⁠। इतीतीति॑⁠॥ ये च॑⁠। चार्व॑तः⁠। अर्व॑तो माꣳसभि॒ख्‍षाम्⁠। मा॒ꣳ॒स॒भि॒ख्‍षामु॒पास॑ते⁠। मा॒ꣳ॒स॒भि॒ख्‍षामिति॑ माꣳस—भि॒ख्‍षाम्⁠। उ॒पास॑त उ॒तो⁠। उ॒पास॑त॒ इत्यु॑प—आस॑ते⁠। उ॒तो तेषा᳚म्⁠। उ॒तो इत्यु॒तो⁠। तेषा॑म॒भिगू᳚र्तिः⁠। अ॒भिगू᳚र्तिर् नः⁠। अ॒भिगू᳚र्ति॒रित्य॒भि—गू॒र्तिः॒⁠। न॒ इ॒न्व॒तु॒⁠। इ॒न्व॒त्विती᳚न्वतु⁠॥ यन् नीख्‍ष॑णम्⁠। नीख्‍ष॑णम् मा॒ꣴ॒स्पच॑न्याः⁠। मा॒ꣴ॒स्पच॑न्या उ॒खायाः᳚⁠। उ॒खाया॒ या⁠। या पात्रा॑णि⁠। पात्रा॑णि यू॒ष्णः⁠। यू॒ष्ण आ॒सेच॑नानि⁠। आ॒सेच॑ना॒नीत्या᳚—सेच॑नानि⁠॥ ऊ॒ष्म॒ण्या॑ऽपि॒धाना᳚⁠। अ॒पि॒धाना॑ चरू॒णाम्⁠। अ॒पि॒धानेत्य॑पि—धाना᳚⁠। च॒रू॒णाम॒ङ्‍काः⁠। अ॒ङ्‍काः सू॒नाः⁠। सू॒नाः परि॑⁠। परि॑ भूषन्ति⁠। भू॒ष॒न्त्यश्व᳚म्⁠। अश्व॒मित्यश्व᳚म्⁠॥ नि॒क्रम॑णम् नि॒षद॑नम्⁠। नि॒क्रम॑ण॒मिति॑ नि—क्रम॑णम्⁠। नि॒षद॑नव्ँवि॒वर्त॑नम्⁠। नि॒षद॑न॒मिति॑ नि—सद॑नम्⁠। वि॒वर्त॑न॒य्ँयत्⁠। वि॒वर्त॑न॒मिति॑ वि—वर्त॑नम्⁠। यच्च॑⁠। च॒ पड्बी॑शम्⁠। पड्बी॑श॒मर्व॑तः⁠। अर्व॑त॒ इत्यर्व॑तः⁠॥ यच्च॑⁠। च॒ प॒पौ⁠। प॒पौ यत्⁠। यच्च॑⁠। च॒ घा॒सिम्⁠। घा॒सिम् ज॒घास॑⁠। [४३] ज॒घास॒ सर्वा᳚⁠। सर्वा॒ ता⁠। ता ते᳚⁠। ते॒ अपि॑⁠। अपि॑ दे॒वेषु॑⁠। दे॒वेष्व॑स्तु⁠। अ॒स्त्वित्य॑स्तु⁠॥ मा त्वा᳚⁠। त्वा॒ऽग्निः⁠। अ॒ग्नि ध्व॑नयित्⁠। ध्व॒न॒यि॒द् धू॒मग॑न्धिः⁠। धू॒मग॑न्धि॒र् मा⁠। धू॒मग॑न्धि॒रिति॑ धू॒म—ग॒न्धिः॒⁠। मोखा⁠। उ॒खा भ्राज॑न्ति⁠। भ्राज॑न्त्य॒भि⁠। अ॒भि वि॑क्त⁠। वि॒क्त॒ जघ्रिः॑⁠। जघ्रि॒रिति॒ जघ्रिः॑⁠॥ इ॒ष्टव्ँवी॒तम्⁠। वी॒तम॒भिगू᳚र्तम्⁠। अ॒भिगू᳚र्त॒व्ँवष॑ट्कृतम्⁠। अ॒भिगू᳚र्त॒मित्य॒भि—गू॒र्त॒म्⁠। वष॑ट्कृत॒म् तम्⁠। वष॑ट्कृत॒मिति॒ वष॑ट्—कृ॒त॒म्⁠। तम् दे॒वासः॑⁠। दे॒वासः॒ प्रति॑⁠। प्रति॑ गृभ्णन्ति⁠। गृ॒भ्ण॒न्त्यश्व᳚म्⁠। अश्व॒मित्यश्व᳚म्⁠॥ यदश्वा॑य⁠। अश्वा॑य॒ वासः॑⁠। वास॑ उपस्तृ॒णन्ति॑⁠। उ॒प॒स्तृ॒णन्त्य॑धीवा॒सम्⁠। उ॒प॒स्तृ॒णन्तीत्यु॑प—स्तृ॒णन्ति॑⁠। अ॒धी॒वा॒सय्ँया⁠। अ॒धी॒वा॒समित्य॑धि—वा॒सम्⁠। या हिर॑ण्यानि⁠। हिर॑ण्यान्यस्मै⁠। अ॒स्मा॒ इत्य॑स्मै⁠॥ स॒न्दान॒मर्व॑न्तम्⁠। स॒न्दान॒मिति॑ सम्—दान᳚म्⁠। अर्व॑न्त॒म् पड्बी॑शम्⁠। पड्बी॑शम् प्रि॒या⁠। प्रि॒या दे॒वेषु॑⁠। दे॒वेष्वा⁠। आ या॑मयन्ति⁠। या॒म॒य॒न्तीति॑ यामयन्ति⁠॥ यत् ते᳚⁠। ते॒ सा॒दे⁠। सा॒दे मह॑सा⁠। मह॑सा॒ शूकृ॑तस्य⁠। शूकृ॑तस्य॒ पार्ष्णि॑या⁠। शूकृ॑त॒स्येति॒ शू—कृ॒त॒स्य॒⁠। पार्ष्णि॑या वा⁠। वा॒ कश॑या⁠। कश॑या वा⁠। [४४] वा॒ तू॒तोद॑⁠। तु॒तोदेति॑ तु॒तोद॑⁠॥ स्रु॒चेव॑⁠। इ॒व॒ ता⁠। ता ह॒विषः॑⁠। ह॒विषो॑ अद्ध्व॒रेषु॑⁠। अ॒द्ध्व॒रेषु॒ सर्वा᳚⁠। सर्वा॒ ता⁠। ता ते᳚⁠। ते॒ ब्रह्म॑णा⁠। ब्रह्म॑णा सूदयामि⁠। सू॒द॒या॒मीति॑ सूदयामि⁠॥ चतु॑स्त्रिꣳशद् वा॒जिनः॑⁠। चतु॑स्त्रिꣳश॒दिति॒ चतुः॑—त्रि॒ꣳ॒श॒त्॒⁠। वा॒जिनो॑ दे॒वब॑न्धोः⁠। दे॒वब॑न्धो॒र् वङ्‍क्रीः᳚⁠। दे॒वब॑न्धो॒रिति॑ दे॒व—ब॒न्धोः॒⁠। वङ्‍क्री॒रश्व॑स्य⁠। अश्व॑स्य॒ स्वधि॑तिः⁠। स्वधि॑तिः॒ सम्⁠। स्वधि॑ति॒रिति॒ स्व—धि॒तिः॒⁠। समे॑ति⁠। ए॒तीत्ये॑ति⁠॥ अच्छि॑द्रा॒ गात्रा᳚⁠। गात्रा॑ व॒युना᳚⁠। व॒युना॑ कृणोत⁠। कृ॒णो॒त॒ परु॑ष्परुः⁠। परु॑ष्परुरनु॒घुष्य॑⁠। परु॑ष्परु॒रिति॒ परुः॑—प॒रुः॒⁠। अ॒नु॒घुष्या॒ वि⁠। अ॒नु॒घुष्येत्य॑नु—घुष्य॑⁠। वि श॑स्त⁠। श॒स्तेति॑ शस्त⁠॥ एक॒स्त्वष्टुः॑⁠। त्वष्टु॒रश्व॑स्य⁠। अश्व॑स्या विश॒स्ता⁠। वि॒श॒स्ता द्वा⁠। वि॒श॒स्तेति॑ वि—श॒स्ता⁠। द्वा य॒न्तारा᳚⁠। य॒न्तारा॑ भवतः⁠। भ॒व॒त॒स्तथा᳚⁠। तथ॒र्तुः⁠। ऋ॒तुरित्यृ॒तुः⁠॥ या ते᳚⁠। ते॒ गात्रा॑णाम्⁠। गात्रा॑णामृतु॒था⁠। ऋ॒तु॒था कृ॒णोमि॑⁠। ऋ॒तु॒थेत्यृ॑तु—था⁠। कृ॒णोमि॒ ताता᳚⁠। ताता॒ पिण्डा॑नाम्⁠। तातेति॒ ता—ता॒⁠। पिण्डा॑ना॒म् प्र⁠। प्र जु॑होमि⁠। जु॒हो॒म्य॒ग्नौ⁠। अ॒ग्नावित्य॒ग्नौ⁠॥ मा त्वा᳚⁠। त्वा॒ त॒प॒त्॒⁠। त॒प॒त् प्रि॒यः⁠। [४५] प्रि॒य आ॒त्मा⁠। आ॒त्माऽपि॒यन्त᳚म्⁠। अ॒पि॒यन्त॒म् मा⁠। अ॒पि॒यन्त॒मित्य॑पि—यन्त᳚म्⁠। मा स्वधि॑तिः⁠। स्वधि॑ति स्त॒नुवः॑⁠। स्वधि॑ति॒रिति॒ स्व—धि॒तिः॒⁠। त॒नुव॒ आ⁠। आ ति॑ष्ठिपत्⁠। ति॒ष्ठि॒प॒त् ते॒⁠। त॒ इति॑ ते⁠॥ मा ते᳚⁠। ते॒ गृ॒द्ध्नुः⁠। गृ॒द्ध्नुर॑विश॒स्ता⁠। अ॒वि॒श॒स्ताऽति॒हाय॑⁠। अ॒वि॒श॒स्तेत्य॑वि—श॒स्ता⁠। अ॒ति॒हाय॑ छि॒द्रा⁠। अ॒ति॒हायेत्य॑ति—हाय॑⁠। छि॒द्रा गात्रा॑णि⁠। गात्रा᳚ण्य॒सिना᳚⁠। अ॒सिना॒ मिथु॑⁠। मिथू॑ कः⁠। क॒रिति॑ कः⁠॥ न वै⁠। वा उ॑⁠। उ॒वे॒तत्⁠। ए॒तन् म्रि॑यसे⁠। म्रि॒य॒से॒ न⁠। न रि॑ष्यसि⁠। रि॒ष्य॒सि॒ दे॒वान्⁠। दे॒वाꣳ इत्⁠। इदे॑षि⁠। ए॒षि॒ प॒थिभिः॑⁠। प॒थिभिः॑ सु॒गेभिः॑⁠। प॒थिभि॒रिति॑ प॒थि—भिः॒⁠। सु॒गेभि॒रिति॑ सु—गेभिः॑⁠॥ हरी॑ ते⁠। हरी॒ इति॒ हरी᳚⁠। ते॒ युञ्जा᳚⁠। युञ्जा॒ पृष॑ती⁠। पृष॑ती अभूताम्⁠। पृष॑ती॒ इति॒ पृष॑ती⁠। अ॒भू॒ता॒मुप॑⁠। उपा᳚स्थात्⁠। अ॒स्था॒द् वा॒जी⁠। वा॒जी धु॒रि⁠। धु॒रि रास॑भस्य⁠। रास॑भ॒स्येति॒ रास॑भस्य⁠॥ सु॒गव्य॑म् नः⁠। सु॒गव्य॒मिति॑ सु—गव्य᳚म्⁠। नो॒ वा॒जी⁠। वा॒जी स्वश्वि॑यम्⁠। स्वश्वि॑यम् पु॒ꣳ॒सः⁠। स्वश्वि॑य॒मिति॑ सु—अश्वि॑यम्⁠। पु॒ꣳ॒सः पु॒त्रान्⁠। पु॒त्राꣳ उ॒त⁠। उ॒त वि॑श्वा॒पुष᳚म्⁠। वि॒श्वा॒पुष॑ꣳ र॒यिम्⁠। वि॒श्वा॒पुष॒मिति॑ विश्व—पुष᳚म्⁠। र॒यिमिति॑ र॒यिम्⁠॥ अ॒ना॒गा॒स्त्वम् नः॑⁠। अ॒ना॒गा॒स्त्वमित्य॑नागाः—त्वम्⁠। नो॒ अदि॑तिः⁠। अदि॑तिः कृणोतु⁠। कृ॒णो॒तु॒ ख्‍ष॒त्रम्⁠। ख्‍ष॒त्रम् नः॑⁠। नो॒ अश्वः॑⁠। अश्वो॑ वनताम्⁠। व॒न॒ता॒ꣳ॒ ह॒विष्मा॑न्⁠। ह॒विष्मा॒निति॑ ह॒विष्मा॑न्⁠॥ [४६] (घा॒सिं कश॑या तपद् र॒यिं नव॑ च) ॥९॥
अनुवाकाः पञ्चशती
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