कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
प्रथमकाण्डे द्वितीयः प्रश्नः

कांड १ प्रश्न २
अग्निष्टोमे क्रयः

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
आपः॑⁠। उ॒न्द॒न्तु॒⁠। जी॒वसे᳚⁠। दी॒र्घा॒यु॒त्वायेति॑ दीर्घायु—त्वाय॑⁠। वर्च॑से⁠। ओष॑धे⁠। त्राय॑स्व⁠। ए॒न॒म्⁠। स्वधि॑त॒ इति॒ स्व—धि॒ते॒⁠। मा⁠। ए॒न॒म्⁠। हि॒ꣳ॒सीः॒⁠। दे॒व॒श्रूरिति॑ देव—श्रूः⁠। ए॒तानि॑⁠। प्रेति॑⁠। व॒पे॒⁠। स्व॒स्ति⁠। उत्त॑रा॒णीत्युत्—त॒रा॒णि॒⁠। अ॒शी॒य॒⁠। आपः॑⁠। अ॒स्मान्⁠। मा॒तरः॑⁠। शु॒न्ध॒न्तु॒⁠। घृ॒तेन॑⁠। नः॒⁠। घृ॒त॒पुव॒ इति॑ घृत—पुवः॑⁠। पु॒न॒न्तु॒⁠। विश्व᳚म्⁠। अ॒स्मत्⁠। प्रेति॑⁠। व॒ह॒न्तु॒⁠। रि॒प्रम्⁠। उदिति॑⁠। आ॒भ्यः॒⁠। शुचिः॑⁠। एति॑⁠। पू॒तः⁠। ए॒मि॒⁠। सोम॑स्य⁠। त॒नूः⁠। अ॒सि॒⁠। त॒नुव᳚म्⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। म॒ही॒नाम्⁠। पयः॑⁠। अ॒सि॒⁠। व॒र्चो॒धा इति॑ वर्चः—धाः⁠। अ॒सि॒⁠। वर्चः॑⁠। १ (५०) [१] मयि॑⁠। धे॒हि॒⁠। वृ॒त्रस्य॑⁠। क॒नीनि॑का⁠। अ॒सि॒⁠। च॒ख्‍षु॒ष्पा इति॑ चख्‍षुः—पाः⁠। अ॒सि॒⁠। चख्‍षुः॑⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। चि॒त्पति॒रिति॑ चित्—पतिः॑⁠। त्वा॒⁠। पु॒ना॒तु॒⁠। वा॒क्पति॒रिति॑ वाक्—पतिः॑⁠। त्वा॒⁠। पु॒ना॒तु॒⁠। दे॒वः⁠। त्वा॒⁠। स॒वि॒ता⁠। पु॒ना॒तु॒⁠। अच्छि॑द्रेण⁠। प॒वित्रे॑ण⁠। वसोः᳚⁠। सूर्य॑स्य⁠। र॒श्मिभि॒रिति॑ र॒श्मि—भिः॒⁠। तस्य॑⁠। ते॒⁠। प॒वि॒त्र॒प॒त॒ इति॑ पवित्र—प॒ते॒⁠। प॒वित्रे॑ण⁠। यस्मै᳚⁠। कम्⁠। पु॒ने⁠। तत्⁠। श॒के॒य॒म्⁠। एति॑⁠। वः॒⁠। दे॒वा॒सः॒⁠। ई॒म॒हे॒⁠। सत्य॑धर्माण॒ इति॒ सत्य॑—ध॒र्मा॒णः॒⁠। अ॒द्ध्व॒रे⁠। यत्⁠। वः॒⁠। दे॒वा॒सः॒⁠। आ॒गु॒र इत्या᳚—गु॒रे⁠। यज्ञि॑यासः⁠। हवा॑महे⁠। इन्द्रा᳚ग्नी॒ इतीन्द्र॑—अ॒ग्नी॒⁠। द्यावा॑पृथिवी॒ इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी॒⁠। आपः॑⁠। ओ॒ष॒धीः॒⁠। त्वम्⁠। दी॒ख्‍षाणा᳚म्⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। इ॒ह⁠। मा॒⁠। सन्त᳚म्⁠। पा॒हि॒ [२] (वर्च॑ ओषधीर॒ष्टौ च॑) ॥१॥
आकू᳚त्या॒ इत्या—कू॒त्यै॒⁠। प्र॒युज॒ इति॑ प्र—युजे᳚⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। मे॒धायै᳚⁠। मन॑से⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। दी॒ख्‍षायै᳚⁠। तप॑से⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। सर॑स्वत्यै⁠। पू॒ष्णे⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। आपः॑⁠। दे॒वीः॒⁠। बृ॒ह॒तीः॒⁠। वि॒श्व॒शं॒भु॒व॒ इति॑ विश्व—शं॒भु॒वः॒⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। उ॒रु⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। नः॒⁠। ह॒विषा᳚⁠। वृ॒धा॒तु॒⁠। स्वाहा᳚⁠। विश्वे᳚⁠। दे॒वस्य॑⁠। ने॒तुः⁠। मर्तः॑⁠। वृ॒णी॒त॒⁠। स॒ख्यम्⁠। विश्वे᳚⁠। रा॒यः⁠। इ॒षु॒द्ध्य॒सि॒⁠। द्यु॒म्नम्⁠। वृ॒णी॒त॒⁠। पु॒ष्यसे᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ऋ॒ख्सा॒मयो॒रित्यृ॑क्—सा॒मयोः᳚⁠। शिल्पे॒ इति॑⁠। स्थः॒⁠। ते इति॑⁠। वा॒म्⁠। एति॑⁠। र॒भे॒⁠। ते इति॑⁠। मा॒⁠। ३ (५०) [३] पा॒त॒म्⁠। एति॑⁠। अ॒स्य⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। उ॒दृच॒ इत्यु॑त्—ऋचः॑⁠। इ॒माम्⁠। धिय᳚म्⁠। शिख्‍ष॑माणस्य⁠। दे॒व॒⁠। क्रतु᳚म्⁠। दख्‍ष᳚म्⁠। व॒रु॒ण॒⁠। समिति॑⁠। शि॒शा॒धि॒⁠। यया᳚⁠। अतीति॑⁠। विश्वा᳚⁠। दु॒रि॒तेति॑ दुः—इ॒ता⁠। तरे॑म⁠। सु॒तर्मा॑ण॒मिति॑ सु—तर्मा॑णम्⁠। अधीति॑⁠। नाव᳚म्⁠। रु॒हे॒म॒⁠। ऊर्क्⁠। अ॒सि॒⁠। आ॒ङ्गि॒र॒सी⁠। ऊर्ण॑म्रदा॒ इत्यूर्ण॑—म्र॒दाः॒⁠। ऊर्ज᳚म्⁠। मे॒⁠। य॒च्छ॒⁠। पा॒हि⁠। मा॒⁠। मा⁠। मा॒⁠। हि॒ꣳ॒सीः॒⁠। विष्णोः᳚⁠। शर्म॑⁠। अ॒सि॒⁠। शर्म॑⁠। यज॑मानस्य⁠। शर्म॑⁠। मे॒⁠। य॒च्छ॒⁠। नख्‍ष॑त्राणाम्⁠। मा॒⁠। अ॒ती॒का॒शात्⁠। पा॒हि॒⁠। इन्द्र॑स्य⁠। योनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। ४ (५०) [४] मा⁠। मा॒⁠। हि॒ꣳ॒सीः॒⁠। कृ॒ष्यै⁠। त्वा॒⁠। सु॒स॒स्याया॒ इति॑ सु—स॒स्यायै᳚⁠। सु॒पि॒प्प॒लाभ्य॒ इति॑ सु—पि॒प्प॒लाभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। ओष॑धीभ्य॒ इत्योष॑धि—भ्यः॒⁠। सू॒प॒स्था इति॑ सु—उ॒प॒स्थाः⁠। दे॒वः⁠। वन॒स्पतिः॑⁠। ऊ॒र्द्ध्वः⁠। मा॒⁠। पा॒हि॒⁠। एति॑⁠। उ॒दृच॒ इत्यु॑त्—ऋचः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। य॒ज्ञम्⁠। मन॑सा⁠। स्वाहा᳚⁠। द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒मिति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वीभ्या᳚म्⁠। स्वाहा᳚⁠। उ॒रोः⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षात्⁠। स्वाहा᳚⁠। य॒ज्ञम्⁠। वाता᳚त्⁠। एति॑⁠। र॒भे॒ [५] (मा॒ योनि॑रसि त्रि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥२॥
दैवी᳚म्⁠। धिय᳚म्⁠। म॒ना॒म॒हे॒⁠। सु॒मृ॒डी॒कामिति॑ सु—मृ॒डी॒काम्⁠। अ॒भिष्ट॑ये⁠। व॒र्चो॒धामिति॑ वर्चः—धाम्⁠। य॒ज्ञवा॑हस॒मिति॑ य॒ज्ञ—वा॒ह॒स॒म्⁠। सु॒पा॒रेति॑ सु—पा॒रा⁠। नः॒⁠। अ॒स॒त्⁠। वशे᳚⁠॥ ये⁠। दे॒वाः⁠। मनो॑जाता॒ इति॒ मनः॑—जा॒ताः॒⁠। म॒नो॒युज॒ इति॑ मनः—युजः॑⁠। सु॒दख्‍षा॒ इति॑ सु—दख्‍षाः᳚⁠। दख्‍ष॑पितार॒ इति॒ दख्‍ष॑—पि॒ता॒रः॒⁠। ते⁠। नः॒⁠। पा॒न्तु॒⁠। ते⁠। नः॒⁠। अ॒व॒न्तु॒⁠। तेभ्यः॑⁠। नमः॑⁠। तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। अग्ने᳚⁠। त्वम्⁠। स्विति॑⁠। जा॒गृ॒हि॒⁠। व॒यम्⁠। स्विति॑⁠। म॒न्दि॒षी॒म॒हि॒⁠। गो॒पा॒य⁠। नः॒⁠। स्व॒स्तये᳚⁠। प्र॒बुध॒ इति॑ प्र—बुधे᳚⁠। नः॒⁠। पुनः॑⁠। द॒दः॒⁠॥ त्वम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। व्र॒त॒पा इति॑ व्रत—पाः⁠। अ॒सि॒⁠। दे॒वः⁠। एति॑⁠। मर्त्ये॑षु⁠। आ⁠॥ त्वम्⁠। ६ (५०) [६] य॒ज्ञेषु॑⁠। ईड्यः॑⁠॥ विश्वे᳚⁠। दे॒वाः⁠। अ॒भीति॑⁠। माम्⁠। एति॑⁠। अ॒व॒वृ॒त्र॒न्न्⁠। पू॒षा⁠। स॒न्या⁠। सोमः॑⁠। राध॑सा⁠। दे॒वः⁠। स॒वि॒ता⁠। वसोः᳚⁠। व॒सु॒दावेति॑ वसु—दावा᳚⁠। रास्व॑⁠। इय॑त्⁠। सो॒म॒⁠। एति॑⁠। भूयः॑⁠। भ॒र॒⁠। मा⁠। पृ॒णन्न्⁠। पू॒र्त्या⁠। वीति॑⁠। रा॒धि॒⁠। मा⁠। अ॒हम्⁠। आयु॑षा⁠। च॒न्द्रम्⁠। अ॒सि॒⁠। मम॑⁠। भोगा॑य⁠। भ॒व॒⁠। वस्त्र᳚म्⁠। अ॒सि॒⁠। मम॑⁠। भोगा॑य⁠। भ॒व॒⁠। उ॒स्रा⁠। अ॒सि॒⁠। मम॑⁠। भोगा॑य⁠। भ॒व॒⁠। हयः॑⁠। अ॒सि॒⁠। मम॑⁠। भोगा॑य⁠। भ॒व॒⁠। ७ (५०) [७] छागः॑⁠। अ॒सि॒⁠। मम॑⁠। भोगा॑य⁠। भ॒व॒⁠। मे॒षः⁠। अ॒सि॒⁠। मम॑⁠। भोगा॑य⁠। भ॒व॒⁠। वा॒यवे᳚⁠। त्वा॒⁠। वरु॑णाय⁠। त्वा॒⁠। निर्‌ऋ॑त्या॒ इति॒ निः—ऋ॒त्यै॒⁠। त्वा॒⁠। रु॒द्राय॑⁠। त्वा॒⁠। देवीः᳚⁠। आ॒पः॒⁠। अ॒पा॒म्⁠। न॒पा॒त्⁠। यः⁠। ऊ॒र्मिः⁠। ह॒वि॒ष्यः॑⁠। इ॒न्द्रि॒यावा॒निती᳚न्द्रि॒य—वा॒न्⁠। म॒दिन्त॑मः⁠। तम्⁠। वः॒⁠। मा⁠। अवेति॑⁠। क्र॒मि॒ष॒म्⁠। अच्छि॑न्नम्⁠। तन्तु᳚म्⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। अन्विति॑⁠। गे॒ष॒म्⁠। भ॒द्रात्⁠। अ॒भीति॑⁠। श्रेयः॑⁠। प्रेति॑⁠। इ॒हि॒⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। पु॒र॒ए॒तेति॑ पुरः—ए॒ता⁠। ते॒⁠। अ॒स्तु॒⁠। अथ॑⁠। ई॒म्⁠। अवेति॑⁠। स्य॒⁠। वरे᳚⁠। एति॑⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। आ॒रे⁠। शत्रू॑न्⁠। कृ॒णु॒हि॒⁠। सर्व॑वीर॒ इति॒ सर्व॑—वी॒रः॒⁠। एति॑⁠। इ॒दम्⁠। अ॒ग॒न्म॒⁠। दे॒व॒यज॑न॒मिति॑ देव—यज॑नम्⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। विश्वे᳚⁠। दे॒वाः⁠। यत्⁠। अजु॑षन्त⁠। पूर्वे᳚⁠। ऋ॒ख्सा॒माभ्या॒मित्यृ॑ख्सा॒म—भ्या॒म्⁠। यजु॑षा⁠। स॒न्तर॑न्त॒ इति॑ सं—तर॑न्तः⁠। रा॒यः⁠। पोषे॑ण⁠। समिति॑⁠। इ॒षा⁠। म॒दे॒म॒ [८] (आ त्वम् हयो॑सि॒ मम॒ भोगा॑य भव स्य॒ पञ्च॑विꣳ शतिश्च) ॥३॥
इ॒यम्⁠। ते॒⁠। शु॒क्र॒⁠। त॒नूः⁠। इ॒दम्⁠। वर्चः॑⁠। तया᳚⁠। समिति॑⁠। भ॒व॒⁠। भ्राज᳚म्⁠। ग॒च्छ॒⁠। जूः⁠। अ॒सि॒⁠। धृ॒ता⁠। मन॑सा⁠। जुष्टा᳚⁠। विष्ण॑वे⁠। तस्याः᳚⁠। ते॒⁠। स॒त्यस॑वस॒ इति॑ स॒त्य—स॒व॒सः॒⁠। प्र॒स॒व इति॑ प्र—स॒वे⁠। वा॒चः⁠। य॒न्त्रम्⁠। अ॒शी॒य॒⁠। स्वाहा᳚⁠। शु॒क्रम्⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒मृत᳚म्⁠। अ॒सि॒⁠। वै॒श्व॒दे॒वमिति॑ वैश्व—दे॒वम्⁠। ह॒विः⁠। सूर्य॑स्य⁠। चख्‍षुः॑⁠। एति॑⁠। अ॒रु॒ह॒म्⁠। अ॒ग्नेः⁠। अ॒ख्‍ष्णः⁠। क॒नीनि॑काम्⁠। यत्⁠। एत॑शेभिः⁠। ईय॑से⁠। भ्राज॑मानः⁠। वि॒प॒श्चिता᳚⁠। चित्⁠। अ॒सि॒⁠। म॒ना⁠। अ॒सि॒⁠। धीः⁠। अ॒सि॒⁠। दख्‍षि॑णा⁠। ९ (५०) [९] अ॒सि॒⁠। य॒ज्ञिया᳚⁠। अ॒सि॒⁠। ख्‍ष॒त्रिया᳚⁠। अ॒सि॒⁠। अदि॑तिः⁠। अ॒सि॒⁠। उ॒भ॒यत॑श्शी॒र्ष्णीत्यु॑भ॒यतः॑—शी॒र्ष्णी॒⁠। सा⁠। नः॒⁠। सुप्रा॒चीति॒ सु—प्रा॒ची॒⁠। सुप्र॑ती॒चीति॒ सु—प्र॒ती॒ची॒⁠। समिति॑⁠। भ॒व॒⁠। मि॒त्रः⁠। त्वा॒⁠। प॒दि⁠। ब॒द्ध्ना॒तु॒⁠। पू॒षा⁠। अद्ध्व॑नः⁠। पा॒तु॒⁠। इन्द्रा॑य⁠। अद्ध्य॑ख्‍षा॒येत्यधि॑—अ॒ख्‍षा॒य॒⁠। अन्विति॑⁠। त्वा॒⁠। मा॒ता⁠। म॒न्य॒ता॒म्⁠। अन्विति॑⁠। पि॒ता⁠। अन्विति॑⁠। भ्राता᳚⁠। सग॑र्भ्य॒ इति॒ स—ग॒र्भ्यः॒⁠। अन्विति॑⁠। सखा᳚⁠। सयू᳚थ्य॒ इति॒ स—यू॒थ्यः॒⁠। सा⁠। दे॒वि॒⁠। दे॒वम्⁠। अच्छ॑⁠। इ॒हि॒⁠। इन्द्रा॑य⁠। सोम᳚म्⁠। रु॒द्रः⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। व॒र्त॒य॒तु॒⁠। मि॒त्रस्य॑⁠। प॒था⁠। स्व॒स्ति⁠। सोम॑स॒खेति॒ सोम॑—स॒खा॒⁠। पुनः॑⁠। एति॑⁠। इ॒हि॒⁠। स॒ह⁠। र॒य्या [१०] (दख्‍षि॑णा॒सोम॑सखा॒पञ्च॑ च) ॥४॥
वस्वी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। रु॒द्रा⁠। अ॒सि॒⁠। अदि॑तिः⁠। अ॒सि॒⁠। आ॒दि॒त्या⁠। अ॒सि॒⁠। शु॒क्रा⁠। अ॒सि॒⁠। च॒न्द्रा⁠। अ॒सि॒⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। त्वा॒⁠। सु॒म्ने⁠। र॒ण्व॒तु॒⁠। रु॒द्रः⁠। वसु॑भि॒रिति॒ वसु॑—भिः॒⁠। एति॑⁠। चि॒के॒तु॒⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। त्वा॒⁠। मू॒र्द्धन्न्⁠। एति॑⁠। जि॒घ॒र्मि॒⁠। दे॒व॒यज॑न॒ इति॑ देव—यज॑ने⁠। इडा॑याः⁠। प॒दे⁠। घृ॒तव॒तीति॑ घृ॒त—व॒ति॒⁠। स्वाहा᳚⁠। परि॑लिखित॒मिति॒ परि॑—लि॒खि॒त॒म्⁠। रख्‍षः॑⁠। परि॑लिखिता॒ इति॒ परि॑—लि॒खि॒ताः॒⁠। अरा॑तयः⁠। इ॒दम्⁠। अ॒हम्⁠। रख्‍ष॑सः⁠। ग्री॒वाः⁠। अपीति॑⁠। कृ॒न्ता॒मि॒⁠। यः⁠। अ॒स्मान्⁠। द्वेष्टि॑⁠। यम्⁠। च॒⁠। व॒यम्⁠। द्वि॒ष्मः⁠। इ॒दम्⁠। अ॒स्य॒⁠। ग्री॒वाः⁠। ११ (५०) [११] अपीति॑⁠। कृ॒न्ता॒मि॒⁠। अ॒स्मे इति॑⁠। रायः॑⁠। त्वे इति॑⁠। रायः॑⁠। तोते᳚⁠। रायः॑⁠। समिति॑⁠। दे॒वि॒⁠। दे॒व्या⁠। उ॒र्वश्या᳚⁠। प॒श्य॒स्व॒⁠। त्वष्टी॑मती⁠। ते॒⁠। स॒पे॒य॒⁠। सु॒रेता॒ इति॑ सु—रेताः᳚⁠। रेतः॑⁠। दधा॑ना⁠। वी॒रम्⁠। वि॒दे॒य॒⁠। तव॑⁠। स॒न्दृशीति॑ सं—दृशि॑⁠। मा⁠। अ॒हम्⁠। रा॒यः⁠। पोषे॑ण⁠। वीति॑⁠। यो॒ष॒म् [१२] (अ॒स्य॒ ग्री॒वाएका॒न्न त्रि॒(ग्म्॒) शच्च॑) ॥५॥
अ॒ꣳ॒शुना᳚⁠। ते॒⁠। अ॒ꣳ॒शुः⁠। पृ॒च्य॒ता॒म्⁠। परु॑षा⁠। परुः॑⁠। ग॒न्धः⁠। ते॒⁠। काम᳚म्⁠। अ॒व॒तु॒⁠। मदा॑य⁠। रसः॑⁠। अच्यु॑तः⁠। अ॒मात्यः॑⁠। अ॒सि॒⁠। शु॒क्रः⁠। ते॒⁠। ग्रहः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। त्यम्⁠। दे॒वम्⁠। स॒वि॒तार᳚म्⁠। ऊ॒ण्योः᳚⁠। क॒विक्र॑तु॒मिति॑ क॒वि—क्र॒तु॒म्⁠। अर्चा॑मि⁠। स॒त्यस॑वस॒मिति॑ स॒त्य—स॒व॒स॒म्⁠। र॒त्न॒धामिति॑ रत्न—धाम्⁠। अ॒भीति॑⁠। प्रि॒यम्⁠। म॒तिम्⁠। ऊ॒र्द्ध्वा⁠। यस्य॑⁠। अ॒मतिः॑⁠। भाः⁠। अदि॑द्युतत्⁠। सवी॑मनि⁠। हिर॑ण्यपाणि॒रिति॒ हिर॑ण्य—पा॒णिः॒⁠। अ॒मि॒मी॒त॒⁠। सु॒क्रतु॒रिति॑ सु—क्रतुः॑⁠। कृ॒पा⁠। सुवः॑⁠॥ प्र॒जाभ्य॒ इति॑ प्र—जाभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। प्रा॒णायेति॑ प्र—अ॒नाय॑⁠। त्वा॒⁠। व्या॒नायेति॑ वि—अ॒नाय॑⁠। त्वा॒⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। त्वम्⁠। अनु॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒नि॒हि॒⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। त्वाम्⁠। अनु॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒न॒न्तु॒ [१३] (अनु॑ स॒प्त च॑) ॥६॥
सोम᳚म्⁠। ते॒⁠। क्री॒णा॒मि॒⁠। ऊर्ज॑स्वन्तम्⁠। पय॑स्वन्तम्⁠। वी॒र्या॑वन्त॒मिति॑ वी॒र्य॑—व॒न्त॒म्⁠। अ॒भि॒मा॒ति॒षाह॒मित्य॑भिमाति—साह᳚म्⁠। शु॒क्रम्⁠। ते॒⁠। शु॒क्रेण॑⁠। क्री॒णा॒मि॒⁠। च॒न्द्रम्⁠। च॒न्द्रेण॑⁠। अ॒मृत᳚म्⁠। अ॒मृते॑न⁠। स॒म्यत्⁠। ते॒⁠। गोः⁠। अ॒स्मे इति॑⁠। च॒न्द्राणि॑⁠। तप॑सः⁠। त॒नूः⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। वर्णः॑⁠। तस्याः᳚⁠। ते॒⁠। स॒ह॒स्र॒पो॒षमिति॑ सहस्र—पो॒षम्⁠। पुष्य॑न्त्याः⁠। च॒र॒मेण॑⁠। प॒शुना᳚⁠। क्री॒णा॒मि॒⁠। अ॒स्मे इति॑⁠। ते॒⁠। बन्धुः॑⁠। मयि॑⁠। ते॒⁠। रायः॑⁠। श्र॒य॒न्ता॒म्⁠। अ॒स्मे इति॑⁠। ज्योतिः॑⁠। सो॒म॒वि॒क्र॒यिणीति॑ सोम—वि॒क्र॒यिणि॑⁠। तमः॑⁠। मि॒त्रः⁠। नः॒⁠। एति॑⁠। इ॒हि॒⁠। सुमि॑त्रधा॒ इति॒ सुमि॑त्र—धाः॒⁠। इन्द्र॑स्य⁠। ऊ॒रुम्⁠। एति॑⁠। वि॒श॒⁠। दख्‍षि॑णम्⁠। उ॒शन्न्⁠। उ॒शन्त᳚म्⁠। स्यो॒नः⁠। स्यो॒नम्⁠। स्वान॑⁠। भ्राज॑⁠। अङ्घा॑रे⁠। बंभा॑रे⁠। हस्त॑⁠। सुह॒स्तेति॒ सु—ह॒स्त॒⁠। कृशा॑न॒विति॒ कृश॑—अ॒नो॒⁠। ए॒ते⁠। वः॒⁠। सो॒म॒क्रय॑णा॒ इति॑ सोम—क्रय॑णाः⁠। तान्⁠। र॒ख्‍ष॒द्ध्व॒म्⁠। मा⁠। वः॒⁠। द॒भ॒न्न् [१४] (ऊ॒रुंद्वावि॑ꣳशतिश्च) ॥७॥
उदिति॑⁠। आयु॑षा⁠। स्वा॒युषेति॑ सु—आ॒युषा᳚⁠। उदिति॑⁠। ओष॑धीनाम्⁠। रसे॑न⁠। उदिति॑⁠। प॒र्जन्य॑स्य⁠। शुष्मे॑ण⁠। उदिति॑⁠। अ॒स्था॒म्⁠। अ॒मृता॑न्⁠। अनु॑⁠॥ उ॒रु⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। अन्विति॑⁠। इ॒हि॒⁠। अदि॑त्याः⁠। सदः॑⁠। अ॒सि॒⁠। अदि॑त्याः⁠। सदः॑⁠। एति॑⁠। सी॒द॒⁠। अस्त॑भ्नात्⁠। द्याम्⁠। ऋ॒ष॒भः⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। अमि॑मीत⁠। व॒रि॒माण᳚म्⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। एति॑⁠। अ॒सी॒द॒त्⁠। विश्वा᳚⁠। भुव॑नानि⁠। स॒म्राडिति॑ सं—राट्⁠। विश्वा᳚⁠। इत्⁠। तानि॑⁠। वरु॑णस्य⁠। व्र॒तानि॑⁠। वने॑षु⁠। वीति॑⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। त॒ता॒न॒⁠। वाज᳚म्⁠। अर्व॒थ्स्वित्यर्व॑त्—सु॒⁠। पयः॑⁠। अ॒घ्नि॒यासु॑⁠। हृ॒थ्स्विति॑ हृत्—सु⁠। १५ (५०) [१५] क्रतु᳚म्⁠। वरु॑णः⁠। वि॒ख्‍षु⁠। अ॒ग्निम्⁠। दि॒वि⁠। सूर्य᳚म्⁠। अ॒द॒धा॒त्⁠। सोम᳚म्⁠। अद्रौ᳚⁠। उदिति॑⁠। उ॒⁠। त्यम्⁠। जा॒तवे॑दस॒मिति॑ जा॒त—वे॒द॒स॒म्⁠। दे॒वम्⁠। व॒ह॒न्ति॒⁠। के॒तवः॑⁠॥ दृ॒शे⁠। विश्वा॑य⁠। सूर्य᳚म्⁠॥ उस्रौ᳚⁠। एति॑⁠। इ॒त॒म्⁠। धू॒र्॒‌षा॒हा॒विति॑ धूः—सा॒हौ॒⁠। अ॒न॒श्रू इति॑⁠। अवी॑रहणा॒वित्यवी॑र—ह॒नौ॒⁠। ब्र॒ह्म॒चोद॑ना॒विति॑ ब्रह्म—चोद॑नौ⁠। वरु॑णस्य⁠। स्कंभ॑नम्⁠। अ॒सि॒⁠। वरु॑णस्य⁠। स्कं॒भ॒सर्ज॑न॒मिति॑ स्कंभ—सर्ज॑नम्⁠। अ॒सि॒⁠। प्रत्य॑स्त॒ इति॒ प्रति॑—अ॒स्तः॒⁠। वरु॑णस्य⁠। पाशः॑ [१६] (हृ॒थ्सुपञ्च॑त्रिꣳशच्च) ॥८॥
प्रेति॑⁠। च्य॒व॒स्व॒⁠। भु॒वः॒⁠। प॒ते॒⁠। विश्वा॑नि⁠। अ॒भीति॑⁠। धामा॑नि⁠। मा⁠। त्वा॒⁠। प॒रि॒प॒रीति॑ परि—प॒री⁠। वि॒द॒त्⁠। मा⁠। त्वा॒⁠। प॒रि॒प॒न्थिन॒ इति॑ परि—प॒न्थिनः॑⁠। वि॒द॒न्न्⁠। मा⁠। त्वा॒⁠। वृकाः᳚⁠। अ॒घा॒यव॒ इत्य॑घ—यवः॑⁠। मा⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। वि॒श्वाव॑सु॒रिति॑ वि॒श्व—व॒सुः॒⁠। एति॑⁠। द॒घ॒त्⁠। श्ये॒नः⁠। भू॒त्वा⁠। परेति॑⁠। प॒त॒⁠। यज॑मानस्य⁠। नः॒⁠। गृ॒हे⁠। दे॒वैः⁠। स॒ꣴ॒स्कृ॒तम्⁠। यज॑मानस्य⁠। स्व॒स्त्यय॒नीति॑ स्वस्ति—अय॑नी⁠। अ॒सि॒⁠। अपीति॑⁠। पन्था᳚म्⁠। अ॒ग॒स्म॒हि॒⁠। स्व॒स्ति॒गामिति॑ स्वस्ति—गाम्⁠। अ॒ने॒हस᳚म्⁠। येन॑⁠। विश्वाः᳚⁠। परीति॑⁠। द्विषः॑⁠। वृ॒णक्ति॑⁠। वि॒न्दते᳚⁠। वसु॑⁠। नमः॑⁠। मि॒त्रस्य॑⁠। वरु॑णस्य⁠। चख्‍ष॑से⁠। म॒हः⁠। दे॒वाय॑⁠। तत्⁠। ऋ॒तम्⁠। स॒प॒र्य॒त॒⁠। दू॒रे॒दृश॒ इति॑ दूरे—दृशे᳚⁠। दे॒वजा॑ता॒येति॑ दे॒व—जा॒ता॒य॒⁠। के॒तवे᳚⁠। दि॒वः⁠। पु॒त्राय॑⁠। सूर्या॑य⁠। श॒ꣳ॒स॒त॒⁠। वरु॑णस्य⁠। स्कंभ॑नम्⁠। अ॒सि॒⁠। वरु॑णस्य⁠। स्कं॒भ॒सर्ज॑न॒मिति॑ स्कंभ—सर्ज॑नम्⁠। अ॒सि॒⁠। उन्मु॑क्त॒ इत्युत्—मु॒क्तः॒⁠। वरु॑णस्य⁠। पाशः॑ [१७] (मि॒त्रस्य॒त्रयो॑विꣳशतिश्च) ॥९॥
अ॒ग्नेः⁠। आ॒ति॒थ्यम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्ण॑वे⁠। त्वा॒⁠। सोम॑स्य⁠। आ॒ति॒थ्यम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्ण॑वे⁠। त्वा॒⁠। अति॑थेः⁠। आ॒ति॒थ्यम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्ण॑वे⁠। त्वा॒⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। त्वा॒⁠। रा॒य॒स्पो॒ष॒दाव्‌न्न॒ इति॑ रायस्पोष—दाव्‌न्ने᳚⁠। विष्ण॑वे⁠। त्वा॒⁠। श्ये॒नाय॑⁠। त्वा॒⁠। सो॒म॒भृत॒ इति॑ सोम—भृते᳚⁠। विष्ण॑वे⁠। त्वा॒⁠। या⁠। ते॒⁠। धामा॑नि⁠। ह॒विषा᳚⁠। यज॑न्ति⁠। ता⁠। ते॒⁠। विश्वा᳚⁠। प॒रि॒भूरिति॑ परि—भूः⁠। अ॒स्तु॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। ग॒य॒स्फान॒ इति॑ गय—स्फानः॑⁠। प्र॒तर॑ण॒ इति॑ प्र—तर॑णः⁠। सु॒वीर॒ इति॑ सु—वीरः॑⁠। अवी॑र॒हेत्यवी॑र—हा॒⁠। प्रेति॑⁠। च॒र॒⁠। सो॒म॒⁠। दुर्या॑न्⁠। अदि॑त्याः⁠। सदः॑⁠। अ॒सि॒⁠। अदि॑त्याः⁠। सदः॑⁠। एति॑⁠। १८ (५०) [१८] सी॒द॒⁠। वरु॑णः⁠। अ॒सि॒⁠। धृ॒तव्र॑त॒ इति॑ धृ॒त—व्र॒तः॒⁠। वा॒रु॒णम्⁠। अ॒सि॒⁠। श॒य्ँयोरिति॑ शं—योः⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। स॒ख्यात्⁠। मा⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। अ॒पसः॑⁠। छि॒थ्स्म॒हि॒⁠। आप॑तय॒ इत्या—प॒त॒ये॒⁠। त्वा॒⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। परि॑पतय॒ इति॒ परि॑—प॒त॒ये॒⁠। त्वा॒⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। तनू॒नप्त्र॒ इति॒ तनू᳚—नप्त्रे᳚⁠। त्वा॒⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। शा॒क्व॒राय॑⁠। त्वा॒⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। शक्म॑न्न्⁠। ओजि॑ष्ठाय⁠। त्वा॒⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। अना॑धृष्ट॒मित्यना᳚—धृ॒ष्ट॒म्⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒ना॒धृ॒ष्यमित्य॑ना—धृ॒ष्यम्⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। ओजः॑⁠। अ॒भि॒श॒स्ति॒पा इत्य॑भिशस्ति—पाः⁠। अ॒न॒भि॒श॒स्ते॒न्यमित्य॑नभि—श॒स्ते॒न्यम्⁠। अन्विति॑⁠। मे॒⁠। दी॒ख्‍षाम्⁠। दी॒ख्‍षाप॑ति॒रिति॑ दी॒ख्‍षा—प॒तिः॒⁠। म॒न्य॒ता॒म्⁠। अन्विति॑⁠। तपः॑⁠। तप॑स्पति॒रिति॒ तपः॑—प॒तिः॒⁠। अञ्ज॑सा⁠। स॒त्यम्⁠। उपेति॑⁠। गे॒ष॒म्⁠। सु॒वि॒ते⁠। मा॒⁠। धाः॒ [१९] (आ मैक॑म्च) ॥१०॥
अ॒ꣳ॒शुर॑ꣳशु॒रित्य॒ꣳ॒शुः—अ॒ꣳ॒शुः॒⁠। ते॒⁠। दे॒व॒⁠। सो॒म॒⁠। एति॑⁠। प्या॒य॒ता॒म्⁠। इन्द्रा॑य⁠। ए॒क॒ध॒न॒विद॒ इत्ये॑कधन—विदे᳚⁠। एति॑⁠। तुभ्य᳚म्⁠। इन्द्रः॑⁠। प्या॒य॒ता॒म्⁠। एति॑⁠। त्वम्⁠। इन्द्रा॑य⁠। प्या॒य॒स्व॒⁠। एति॑⁠। प्या॒य॒य॒⁠। सखी॑न्⁠। स॒न्या⁠। मे॒धया᳚⁠। स्व॒स्ति⁠। ते॒⁠। दे॒व॒⁠। सो॒म॒⁠। सु॒त्याम्⁠। अ॒शी॒य॒⁠। एष्टः॑⁠। रायः॑⁠। प्रेति॑⁠। इ॒षे⁠। भगा॑य⁠। ऋ॒तम्⁠। ऋ॒त॒वा॒दिभ्य॒ इत्यृ॑तवा॒दि—भ्यः॒⁠। नमः॑⁠। दि॒वे⁠। नमः॑⁠। पृ॒थि॒व्यै⁠। अग्ने᳚⁠। व्र॒त॒प॒त॒ इति॑ व्रत—प॒ते॒⁠। त्वम्⁠। व्र॒ताना᳚म्⁠। व्र॒तप॑ति॒रिति॑ व्र॒त—प॒तिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। या⁠। मम॑⁠। त॒नूः⁠। ए॒षा⁠। सा⁠। त्वयि॑⁠। २० (५०) [२०] या⁠। तव॑⁠। त॒नूः⁠। इ॒यम्⁠। सा⁠। मयि॑⁠। स॒ह⁠। नौ॒⁠। व्र॒त॒प॒त॒ इति॑ व्रत—प॒ते॒⁠। व्र॒तिनोः᳚⁠। व्र॒तानि॑⁠। या⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। रुद्रि॑या⁠। त॒नूः⁠। तया᳚⁠। नः॒⁠। पा॒हि॒⁠। तस्याः᳚⁠। ते॒⁠। स्वाहा᳚⁠। या⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। अ॒या॒श॒येत्य॑या—श॒या⁠। र॒जा॒श॒येति॑ रजा—श॒या⁠। ह॒रा॒श॒येति॑ हरा—श॒या⁠। त॒नूः⁠। वर्‌षि॑ष्ठा⁠। ग॒ह्व॒रे॒ष्ठेति॑ गह्वरे—स्था⁠। उ॒ग्रम्⁠। वचः॑⁠। अपेति॑⁠। अ॒व॒धी॒म्⁠। त्वे॒षम्⁠। वचः॑⁠। अपेति॑⁠। अ॒व॒धी॒म्⁠। स्वाहा᳚ [२१] (त्वयि॑चत्वारि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥११॥
वि॒त्ताय॒नीति॑ वित्त—अय॑नी⁠। मे॒⁠। अ॒सि॒⁠। ति॒क्ताय॒नीति॑ तिक्त—अय॑नी⁠। मे॒⁠। अ॒सि॒⁠। अव॑तात्⁠। मा॒⁠। ना॒थि॒तम्⁠। अव॑तात्⁠। मा॒⁠। व्य॒थि॒तम्⁠। वि॒देः⁠। अ॒ग्निः⁠। नभः॑⁠। नाम॑⁠। अग्ने᳚⁠। अ॒ङ्गि॒रः॒⁠। यः⁠। अ॒स्याम्⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। असि॑⁠। आयु॑षा⁠। नाम्ना᳚⁠। एति॑⁠। इ॒हि॒⁠। यत्⁠। ते॒⁠। अना॑धृष्ट॒मित्यना᳚—धृ॒ष्ट॒म्⁠। नाम॑⁠। य॒ज्ञिय᳚म्⁠। तेन॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। द॒धे॒⁠। अग्ने᳚⁠। अ॒ङ्गि॒रः॒⁠। यः⁠। द्वि॒तीय॑स्याम्⁠। तृ॒तीय॑स्याम्⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। असि॑⁠। आयु॑षा⁠। नाम्ना᳚⁠। एति॑⁠। इ॒हि॒⁠। यत्⁠। ते॒⁠। अना॑धृष्ट॒मित्यना᳚—धृ॒ष्ट॒म्⁠। नाम॑⁠। २२ (५०) [२२] य॒ज्ञिय᳚म्⁠। तेन॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। द॒धे॒⁠। सि॒ꣳ॒हीः⁠। अ॒सि॒⁠। म॒हि॒षीः⁠। अ॒सि॒⁠। उ॒रु⁠। प्र॒थ॒स्व॒⁠। उ॒रु⁠। ते॒⁠। य॒ज्ञप॑ति॒रिति॑ य॒ज्ञ—प॒तिः॒⁠। प्र॒थ॒ता॒म्⁠। ध्रु॒वा⁠। अ॒सि॒⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। शु॒न्ध॒स्व॒⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। शुं॒भ॒स्व॒⁠। इ॒न्द्र॒घो॒ष इती᳚न्द्र—घो॒षः⁠। त्वा॒⁠। वसु॑भि॒रिति॒ वसु॑—भिः॒⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। पा॒तु॒⁠। मनो॑जवा॒ इति॒ मनः॑—ज॒वाः॒⁠। त्वा॒⁠। पि॒तृभि॒रिति॑ पि॒तृ—भिः॒⁠। द॒ख्‍षि॒ण॒तः⁠। पा॒तु॒⁠। प्रचे॑ता॒ इति॒ प्र—चे॒ताः॒⁠। त्वा॒⁠। रु॒द्रैः⁠। प॒श्चात्⁠। पा॒तु॒⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। त्वा॒⁠। आ॒दि॒त्यैः⁠। उ॒त्त॒र॒त इत्यु॑त्—त॒र॒तः⁠। पा॒तु॒⁠। सि॒ꣳ॒हीः⁠। अ॒सि॒⁠। स॒प॒त्न॒सा॒हीति॑ सपत्न—सा॒ही⁠। स्वाहा᳚⁠। सि॒ꣳ॒हीः⁠। अ॒सि॒⁠। सु॒प्र॒जा॒वनि॒रिति॑ सुप्रजा—वनिः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सि॒ꣳ॒हीः⁠। २३ (५०) [२३] अ॒सि॒⁠। रा॒य॒स्पो॒ष॒वनि॒रिति॑ रायस्पोष—वनिः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सि॒ꣳ॒हीः⁠। अ॒सि॒⁠। आ॒दि॒त्य॒वनि॒रित्या॑दित्य—वनिः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सि॒ꣳ॒हीः⁠। अ॒सि॒⁠। एति॑⁠। व॒ह॒⁠। दे॒वान्⁠। दे॒व॒य॒त इति॑ देव—य॒ते⁠। यज॑मानाय⁠। स्वाहा᳚⁠। भू॒तेभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। वि॒श्वायु॒रिति॑ वि॒श्व—आ॒युः॒⁠। अ॒सि॒⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। दृ॒ꣳ॒ह॒⁠। ध्रु॒व॒ख्‍षिदिति॑ ध्रुव—ख्‍षित्⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। दृ॒ꣳ॒ह॒⁠। अ॒च्यु॒त॒ख्‍षिदित्य॑च्युत—ख्‍षित्⁠। अ॒सि॒⁠। दिव᳚म्⁠। दृ॒ꣳ॒ह॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। भस्म॑⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। पुरी॑षम्⁠। अ॒सि॒ [२४] (नाम॑सुप्रजा॒वनिः॒ स्वाहा॑ सि॒म्ꣳ॒हीःपञ्च॑त्रिꣳ शच्च) ॥१२॥
यु॒ञ्जते᳚⁠। मनः॑⁠। उ॒त⁠। यु॒ञ्ज॒ते॒⁠। धियः॑⁠। विप्राः᳚⁠। विप्र॑स्य⁠। बृ॒ह॒तः⁠। वि॒प॒श्चितः॑⁠॥ वीति॑⁠। होत्राः᳚⁠। द॒धे॒⁠। व॒यु॒ना॒विदिति॑ वयुन—वित्⁠। एकः॑⁠। इत्⁠। म॒ही⁠। दे॒वस्य॑⁠। स॒वि॒तुः⁠। परि॑ष्टुति॒रिति॒ परि॑—स्तु॒तिः॒⁠॥ सु॒वागिति॑ सु—वाक्⁠। दे॒व॒⁠। दुर्या॑न्⁠। एति॑⁠। व॒द॒⁠। दे॒व॒श्रुता॒विति॑ देव—श्रुतौ᳚⁠। दे॒वेषु॑⁠। एति॑⁠। घो॒षे॒था॒म्⁠। एति॑⁠। नः॒⁠। वी॒रः⁠। जा॒य॒ता॒म्⁠। क॒र्म॒ण्यः॑⁠। यम्⁠। सर्वे᳚⁠। अ॒नु॒जीवा॒मेत्य॑नु—जीवा॑म⁠। यः⁠। ब॒हू॒नाम्⁠। अस॑त्⁠। व॒शी⁠॥ इ॒दम्⁠। विष्णुः॑⁠। वीति॑⁠। च॒क्र॒मे॒⁠। त्रे॒धा⁠। नीति॑⁠। द॒धे॒⁠। प॒दम्⁠॥ समू॑ढ॒मिति॒ सम्—ऊ॒ढ॒म्⁠। अ॒स्य॒⁠। २५ (५०) [२५] पा॒ꣳ॒सु॒रे⁠। इरा॑वती॒ इतीरा᳚—व॒ती॒⁠। धे॒नु॒मती॒ इति॑ धेनु—मती᳚⁠। हि⁠। भू॒तम्⁠। सू॒य॒व॒सिनी॒ इति॑ सु—य॒व॒सिनी᳚⁠। मन॑वे⁠। य॒श॒स्ये॑ इति॑⁠॥ वीति॑⁠। अ॒स्क॒भ्ना॒त्⁠। रोद॑सी॒ इति॑⁠। विष्णुः॑⁠। ए॒ते इति॑⁠। दा॒धार॑⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। अ॒भितः॑⁠। म॒यूखैः᳚⁠॥ प्राची॒ इति॑⁠। प्रेति॑⁠। इ॒त॒म्⁠। अ॒द्ध्व॒रम्⁠। क॒ल्पय॑न्ती॒ इति॑⁠। ऊ॒र्द्ध्वम्⁠। य॒ज्ञम्⁠। न॒य॒त॒म्⁠। मा⁠। जी॒ह्व॒र॒त॒म्⁠। अत्र॑⁠। र॒मे॒था॒म्⁠। वर्‌ष्म॑न्न्⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। दि॒वः⁠। वा॒⁠। वि॒ष्णो॒⁠। उ॒त⁠। वा॒⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। म॒हः⁠। वा॒⁠। वि॒ष्णो॒⁠। उ॒त⁠। वा॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षात्⁠। हस्तौ᳚⁠। पृ॒ण॒स्व॒⁠। ब॒हुभि॒रिति॑ ब॒हु—भिः॒⁠। व॒स॒व्यैः᳚⁠। आ*⁠। प्रेति॑⁠। य॒च्छ॒⁠। २६ (५०) [२६] दख्‍षि॑णात्⁠। एति॑⁠। उ॒त⁠। स॒व्यात्⁠॥ विष्णोः᳚⁠। नुक᳚म्⁠। वी॒र्या॑णि⁠। प्रेति॑⁠। वो॒च॒म्⁠। यः⁠। पार्थि॑वानि⁠। वि॒म॒म इति॑ वि—म॒मे⁠। रजा॑ꣳसि⁠। यः⁠। अस्क॑भायत्⁠। उत्त॑र॒मित्युत्—त॒र॒म्⁠। स॒धस्थ॒मिति॑ स॒ध—स्थ॒म्⁠। वि॒च॒क्र॒मा॒ण इति॑ वि—च॒क्र॒मा॒णः⁠। त्रे॒धा⁠। उ॒रु॒गा॒य इत्यु॑रु—गा॒यः⁠। विष्णोः᳚⁠। र॒राट᳚म्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। पृ॒ष्ठम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। श्ञप्त्रे॒ इति॑⁠। स्थः॒⁠। विष्णोः᳚⁠। स्यूः⁠। अ॒सि॒⁠। विष्णोः᳚⁠। ध्रु॒वम्⁠। अ॒सि॒⁠। वै॒ष्ण॒वम्⁠। अ॒सि॒⁠। विष्ण॑वे⁠। त्वा॒ [२७] (अ॒स्य॒य॒च्छै का॒न्न च॑त्वारि॒ꣳ॒ शच्च॑) ॥१३॥
कृ॒णु॒ष्व⁠। पाजः॑⁠। प्रसि॑ति॒मिति॒ प्र—सि॒ति॒म्⁠। न⁠। पृ॒थ्वीम्⁠। या॒हि⁠। राजा᳚⁠। इ॒व॒⁠। अम॑वा॒नित्यम॑—वा॒न्⁠। इभे॑न⁠॥ तृ॒ष्वीम्⁠। अन्विति॑⁠। प्रसि॑ति॒मिति॒ प्र—सि॒ति॒म्⁠। द्रू॒णा॒नः⁠। अस्ता᳚⁠। अ॒सि॒⁠। विद्ध्य॑⁠। र॒ख्‍षसः॑⁠। तपि॑ष्ठैः⁠॥ तव॑⁠। भ्र॒मासः॑⁠। आ॒शु॒या⁠। प॒त॒न्ति॒⁠। अन्विति॑⁠। स्पृ॒श॒⁠। धृ॒ष॒ता⁠। शोशु॑चानः⁠॥ तपू॑ꣳषि⁠। अ॒ग्ने॒⁠। जु॒ह्वा᳚⁠। प॒त॒ङ्गान्⁠। अस॑न्दित॒ इत्यसं᳚—दि॒तः॒⁠। वीति॑⁠। सृ॒ज॒⁠। विष्व॑क्⁠। उ॒ल्काः⁠॥ प्रतीति॑⁠। स्पशः॑⁠। वीति॑⁠। सृ॒ज॒⁠। तूर्णि॑तम॒ इति॒ तूर्णि॑—त॒मः॒⁠। भव॑⁠। पा॒युः⁠। वि॒शः⁠। अ॒स्याः⁠। अद॑ब्धः⁠॥ यः⁠। नः॒⁠। दू॒रे⁠। अ॒घश॑ꣳस॒ इत्य॒घ—श॒ꣳ॒सः॒⁠। २८ (५०) [२८] यः⁠। अन्ति॑⁠। अग्ने᳚⁠। माकिः॑⁠। ते॒⁠। व्यथिः॑⁠। एति॑⁠। द॒ध॒र्॒‌षी॒त्⁠॥ उदिति॑⁠। अ॒ग्ने॒⁠। ति॒ष्ठ॒⁠। प्रति॑⁠। एति॑⁠। त॒नु॒ष्व॒⁠। नीति॑⁠। अ॒मित्रा॑न्⁠। ओ॒ष॒ता॒त्⁠। ति॒ग्म॒हे॒त॒ इति॑ तिग्म—हे॒ते॒⁠॥ यः⁠। नः॒⁠। अरा॑तिम्⁠। स॒मि॒धा॒नेति॑ सम्—इ॒धा॒न॒⁠। च॒क्रे⁠। नी॒चा⁠। तम्⁠। ध॒ख्‍षि॒⁠। अ॒त॒सम्⁠। न⁠। शुष्क᳚म्⁠॥ ऊ॒र्द्ध्वः⁠। भ॒व॒⁠। प्रतीति॑⁠। वि॒द्ध्य॒⁠। अधीति॑⁠। अ॒स्मत्⁠। आ॒विः⁠। कृ॒णु॒ष्व॒⁠। दैव्या॑नि⁠। अ॒ग्ने॒⁠॥ अवेति॑⁠। स्थि॒रा⁠। त॒नु॒हि॒⁠। या॒तु॒जूना᳚म्⁠। जा॒मिम्⁠। अजा॑मिम्⁠। प्रेति॑⁠। मृ॒णी॒हि॒⁠। शत्रू॑न्⁠॥ सः⁠। ते॒⁠। २९ (५०) [२९] जा॒ना॒ति॒⁠। सु॒म॒तिमिति॑ सु—म॒तिम्⁠। य॒वि॒ष्ठ॒⁠। यः⁠। ईव॑ते⁠। ब्रह्म॑णे⁠। गा॒तुम्⁠। ऐर॑त्⁠॥ विश्वा॑नि⁠। अ॒स्मै॒⁠। सु॒दिना॒नीति॑ सु—दिना॑नि⁠। रा॒यः⁠। द्यु॒म्नानि॑⁠। अ॒र्यः⁠। वीति॑⁠। दुरः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। द्यौ॒त्⁠॥ सः⁠। इत्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। अ॒स्तु॒⁠। सु॒भग॒ इति॑ सु—भगः॑⁠। सु॒दानु॒रिति॑ सु—दानुः॑⁠। यः⁠। त्वा॒⁠। नित्ये॑न⁠। ह॒विषा᳚⁠। यः⁠। उ॒क्थैः⁠॥ पिप्री॑षति⁠। स्वे⁠। आयु॑षि⁠। दु॒रो॒ण इति॑ दुः—ओ॒ने⁠। विश्वा᳚⁠। इत्⁠। अ॒स्मै॒⁠। सु॒दिनेति॑ सु—दिना᳚⁠। सा⁠। अस॑त्⁠। इ॒ष्टिः⁠॥ अर्चा॑मि⁠। ते॒⁠। सु॒म॒तिमिति॑ सु—म॒तिम्⁠। घोषि॑⁠। अ॒र्वाक्⁠। समिति॑⁠। ते॒⁠। वा॒वाता᳚⁠। ज॒र॒तां॒⁠। ३० (५०) [३०] इ॒यम्⁠। गीः⁠॥ स्वश्वा॒ इति॑ सु—अश्वाः᳚⁠। त्वा॒⁠। सु॒रथा॒ इति॑ सु—रथाः᳚⁠। म॒र्ज॒ये॒म॒⁠। अ॒स्मे इति॑⁠। ख्‍ष॒त्राणि॑⁠। धा॒र॒येः॒⁠। अन्विति॑⁠। द्यून्⁠॥ इ॒ह⁠। त्वा॒⁠। भूरि॑⁠। एति॑⁠। च॒रे॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्मन्न्⁠। दोषा॑वस्त॒रिति॒ दोषा᳚—व॒स्तः॒⁠। दी॒दि॒वाꣳस᳚म्⁠। अन्विति॑⁠। द्यून्⁠॥ क्रीड॑न्तः⁠। त्वा॒⁠। सु॒मन॑स॒ इति॑ सु—मन॑सः⁠। स॒पे॒म॒⁠। अ॒भीति॑⁠। द्यु॒म्ना⁠। त॒स्थि॒वाꣳसः॑⁠। जना॑नाम्⁠॥ यः⁠। त्वा॒⁠। स्वश्व॒ इति॑ सु—अश्वः॑⁠। सु॒हि॒र॒ण्य इति॑ सु—हि॒र॒ण्यः⁠। अ॒ग्ने॒⁠। उ॒प॒यातीत्यु॑प—याति॑⁠। वसु॑म॒तेति॒ वसु॑—म॒ता॒⁠। रथे॑न⁠॥ तस्य॑⁠। त्रा॒ता⁠। भ॒व॒सि॒⁠। तस्य॑⁠। सखा᳚⁠। यः⁠। ते॒⁠। आ॒ति॒थ्यम्⁠। आ॒नु॒षक्⁠। जुजो॑षत्⁠॥ म॒हः⁠। रु॒जा॒मि॒⁠। ३१ (५०) [३१] ब॒न्धुता᳚⁠। वचो॑भि॒रिति॒ वचः॑—भिः॒⁠। तत्⁠। मा॒⁠। पि॒तुः⁠। गोत॑मात्⁠। अन्विति॑⁠। इ॒या॒य॒⁠॥ त्वम्⁠। नः॒⁠। अ॒स्य⁠। वच॑सः⁠। चि॒कि॒द्धि॒⁠। होतः॑⁠। य॒वि॒ष्ठ॒⁠। सु॒क्र॒तो॒ इति॑ सु—क्र॒तो॒⁠। दमू॑नाः⁠॥ अस्व॑प्नज॒ इत्यस्व॑प्न—जः॒⁠। त॒रण॑यः⁠। सु॒शेवा॒ इति॑ सु—शेवाः᳚⁠। अत॑न्द्रासः⁠। अ॒वृ॒काः⁠। अश्र॑मिष्ठाः⁠॥ ते⁠। पा॒यवः॑⁠। स॒द्ध्रिय॑ञ्चः⁠। नि॒षद्येति॑ नि—सद्य॑⁠। अग्ने᳚⁠। तव॑⁠। नः॒⁠। पा॒न्तु॒⁠। अ॒मू॒र॒⁠॥ ये⁠। पा॒यवः॑⁠। मा॒म॒ते॒यम्⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। पश्य॑न्तः⁠। अ॒न्धम्⁠। दु॒रि॒तादिति॑ दुः—इ॒तात्⁠। अर॑ख्‍षन्न्⁠॥ र॒रख्‍ष॑⁠। तान्⁠। सु॒कृत॒ इति॑ सु—कृतः॑⁠। वि॒श्ववे॑दा॒ इति॑ वि॒श्व—वे॒दाः॒⁠। दिफ्स॑न्तः⁠। इत्⁠। रि॒पवः॑⁠। न⁠। ह॒⁠। ३२ (५०) [३२] दे॒भुः॒⁠॥ त्वया᳚⁠। व॒यम्⁠। स॒ध॒न्य॑ इति॑ सध—न्यः॑⁠। त्वोताः᳚⁠। तव॑⁠। प्रणी॒तीति॒ प्र—नी॒ती॒⁠। अ॒श्या॒म॒⁠। वाजा॑न्⁠॥ उ॒भा⁠। शꣳसा᳚⁠। सू॒द॒य॒⁠। स॒त्य॒ता॒त॒ इति॑ सत्य—ता॒ते॒⁠। अ॒नु॒ष्ठु॒या⁠। कृ॒णु॒हि॒⁠। अ॒ह्र॒या॒ण॒⁠॥ अ॒या⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। स॒मिधेति॑ सं—इधा᳚⁠। वि॒धे॒म॒⁠। प्रतीति॑⁠। स्तोम᳚म्⁠। श॒स्यमा॑नम्⁠। गृ॒भा॒य॒⁠॥ दह॑⁠। अ॒शसः॑⁠। र॒ख्‍षसः॑⁠। पा॒हि⁠। अ॒स्मान्⁠। द्रु॒हः⁠। नि॒दः⁠। मि॒त्र॒म॒ह॒ इति॑ मित्र—म॒हः॒⁠। अ॒व॒द्यात्⁠॥ र॒ख्‍षो॒हण॒मिति॑ रख्‍षः—हन᳚म्⁠। वा॒जिन᳚म्⁠। एति॑⁠। जि॒घ॒र्मि॒⁠। मि॒त्रम्⁠। प्रथि॑ष्ठम्⁠। उपेति॑⁠। या॒मि॒⁠। शर्म॑⁠॥ शिशा॑नः⁠। अ॒ग्निः⁠। क्रतु॑भि॒रिति॒ क्रतु॑—भिः॒⁠। समि॑द्ध॒ इति॒ सं—इ॒द्धः॒⁠। सः⁠। नः॒⁠। दिवा᳚⁠। ३३ (५०) [३३] सः⁠। रि॒षः⁠। पा॒तु॒⁠। नक्त᳚म्⁠॥ वीति॑⁠। ज्योति॑षा⁠। बृ॒ह॒ता⁠। भा॒ति॒⁠। अ॒ग्निः⁠। आ॒विः⁠। विश्वा॑नि⁠। कृ॒णु॒ते॒⁠। म॒हि॒त्वेति॑ महि—त्वा⁠॥ प्रेति॑⁠। अदे॑वीः⁠। मा॒याः⁠। स॒ह॒ते॒⁠। दु॒रेवा॒ इति॑ दुः—एवाः᳚⁠। शिशी॑ते⁠। शृङ्गे॒ इति॑⁠। रख्‍ष॑से⁠। वि॒निख्‍ष॒ इति॑ वि—निख्‍षे᳚⁠॥ उ॒त⁠। स्वा॒नासः॑⁠। दि॒वि⁠। स॒न्तु॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। ति॒ग्मायु॑धा॒ इति॑ ति॒ग्म—आ॒यु॒धाः॒⁠। रख्‍ष॑से⁠। हन्त॒वै⁠। उ॒⁠॥ मदे᳚⁠। चि॒त्⁠। अ॒स्य॒⁠। प्रेति॑⁠। रु॒ज॒न्ति॒⁠। भामाः᳚⁠। न⁠। व॒र॒न्ते॒⁠। प॒रि॒बाध॒ इति॑ परि—बाधः॑⁠। अदे॑वीः [३४] (अ॒घश॑(ग्म्)सः॒स ते॑जरताꣳ रुजामिह॒ दिवैक॑चत्वारिꣳशच्च)⁠।) ॥१४॥
अनुवाकाः पञ्चशती
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