कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
द्वितीयकाण्डे पञ्चमः प्रश्नः

कांड २ प्रश्न ५
इष्टिविधानं

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
वि॒श्वरू॑प॒ इति॑ वि॒श्व—रू॒पः॒⁠। वै⁠। त्वा॒ष्ट्रः⁠। पु॒रोहि॑त॒ इति॑ पु॒रः—हि॒तः॒⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। आ॒सी॒त्⁠। स्व॒स्रीयः॑⁠। असु॑राणाम्⁠। तस्य॑⁠। त्रीणि॑⁠। शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। आ॒स॒न्न्⁠। सो॒म॒पान॒मिति॑ सोम—पान᳚म्⁠। सु॒रा॒पान॒मिति॑ सुरा—पान᳚म्⁠। अ॒न्नाद॑न॒मित्य॑न्न—अद॑नम्⁠। सः⁠। प्र॒त्यख्‍ष॒मिति॑ प्रति—अख्‍ष᳚म्⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। भा॒गम्⁠। अ॒व॒द॒त्⁠। प॒रोख्‍ष॒मिति॑ परः—अख्‍ष᳚म्⁠। असु॑रेभ्यः⁠। सर्व॑स्मै⁠। वै⁠। प्र॒त्यख्‍ष॒मिति॑ प्रति—अख्‍ष᳚म्⁠। भा॒गम्⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। यस्मै᳚⁠। ए॒व⁠। प॒रोख्‍ष॒मिति॑ परः—अख्‍ष᳚म्⁠। वद॑न्ति⁠। तस्य॑⁠। भा॒गः⁠। उ॒दि॒तः⁠। तस्मा᳚त्⁠। इन्द्रः॑⁠। अ॒बि॒भे॒त्⁠। ई॒दृङ्⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। वीति॑⁠। प॒र्याव॑र्तय॒तीति॑ परि—आव॑र्तयति⁠। इति॑⁠। तस्य॑⁠। वज्र᳚म्⁠। आ॒दायेत्या᳚—दाय॑⁠। शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। अ॒च्छि॒न॒त्⁠। यत्⁠। सो॒म॒पान॒मिति॑ सोम—पान᳚म्⁠। १ (५०) [१] आसी᳚त्⁠। सः⁠। क॒पिञ्ज॑लः⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। यत्⁠। सु॒रा॒पान॒मिति॑ सुरा—पान᳚म्⁠। सः⁠। क॒ल॒विङ्कः॑⁠। यत्⁠। अ॒न्नाद॑न॒मित्य॑न्न—अद॑नम्⁠। सः⁠। ति॒त्ति॒रिः⁠। तस्य॑⁠। अ॒ञ्ज॒लिना᳚⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्यामिति॑ ब्रह्म—ह॒त्याम्⁠। उपेति॑⁠। अ॒गृ॒ह्णा॒त्⁠। ताम्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। अ॒बि॒भः॒⁠। तम्⁠। भू॒तानि॑⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒क्रो॒श॒न्न्⁠। ब्रह्म॑ह॒न्निति॒ ब्रह्म॑—ह॒न्न्⁠। इति॑⁠। सः⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। उपेति॑⁠। अ॒सी॒द॒त्⁠। अ॒स्यै⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। तृती॑यम्⁠। प्रतीति॑⁠। गृ॒हा॒ण॒⁠। इति॑⁠। सा⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। वर᳚म्⁠। वृ॒णै॒⁠। खा॒तात्⁠। प॒रा॒भ॒वि॒ष्यन्तीति॑ परा—भ॒वि॒ष्यन्ती᳚⁠। म॒न्ये॒⁠। ततः॑⁠। मा⁠। परेति॑⁠। भू॒व॒म्⁠। इति॑⁠। पु॒रा⁠। ते॒⁠। २ (५०) [२] स॒व्ँव॒थ्स॒रादिति॑ सं—व॒थ्स॒रात्⁠। अपीति॑⁠। रो॒हा॒त्⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। पु॒रा⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रादिति॑ सं—व॒थ्स॒रात्⁠। पृ॒थि॒व्यै⁠। खा॒तम्⁠। अपीति॑⁠। रो॒ह॒ति॒⁠। वारे॑वृत॒मिति॒ वारे᳚—वृ॒त॒म्⁠। हि⁠। अ॒स्यै॒⁠। तृती॑यम्⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। प्रतीति॑⁠। अ॒गृ॒ह्णा॒त्⁠। तत्⁠। स्वकृ॑त॒मिति॒ स्व—कृ॒त॒म्⁠। इरि॑णम्⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। आहि॑ताग्नि॒रित्याहि॑त—अ॒ग्निः॒⁠। श्र॒द्धादे॑व॒ इति॑ श्र॒द्धा—दे॒वः॒⁠। स्वकृ॑त॒ इति॒ स्व—कृ॒ते॒⁠। इरि॑णे⁠। न⁠। अवेति॑⁠। स्ये॒त्⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। वर्णः॑⁠। सः⁠। वन॒स्पती॑न्⁠। उपेति॑⁠। अ॒सी॒द॒त्⁠। अ॒स्यै⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। तृती॑यम्⁠। प्रतीति॑⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। इति॑⁠। ते⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। वर᳚म्⁠। वृ॒णा॒म॒है॒⁠। वृ॒क्णात्⁠। ३ (५०) [३] प॒रा॒भ॒वि॒ष्यन्त॒ इति॑ परा—भ॒वि॒ष्यन्तः॑⁠। म॒न्या॒म॒हे॒⁠। ततः॑⁠। मा⁠। परेति॑⁠। भू॒म॒⁠। इति॑⁠। आ॒व्रश्च॑ना॒दित्या᳚—व्रश्च॑नात्⁠। वः॒⁠। भूया॑ꣳसः⁠। उदिति॑⁠। ति॒ष्ठा॒न्⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। आ॒व्रश्च॑ना॒दित्या᳚—व्रश्च॑नात्⁠। वृ॒ख्‍षाणा᳚म्⁠। भूया॑ꣳसः⁠। उदिति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। वारे॑वृत॒मिति॒ वारे᳚—वृ॒त॒म्⁠। हि⁠। ए॒षा॒म्⁠। तृती॑यम्⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। प्रतीति॑⁠। अ॒गृ॒ह्ण॒न्न्⁠। सः⁠। नि॒र्या॒स इति॑ निः—या॒सः⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। नि॒र्या॒सस्येति॑ निः—या॒सस्य॑⁠। न⁠। आ॒श्य᳚म्⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। वर्णः॑⁠। अथो॒ इति॑⁠। खलु॑⁠। यः⁠। ए॒व⁠। लोहि॑तः⁠। यः⁠। वा॒⁠। आ॒व्रश्च॑ना॒दित्या᳚—व्रश्च॑नात्⁠। नि॒र्येष॒तीति॑ निः—येष॑ति⁠। तस्य॑⁠। न⁠। आ॒श्य᳚म्⁠। ४ (५०) [४] काम᳚म्⁠। अ॒न्यस्य॑⁠। सः⁠। स्त्री॒ष॒ꣳ॒सा॒दमिति॑ स्त्री—स॒ꣳ॒सा॒दम्⁠। उपेति॑⁠। अ॒सी॒द॒त्⁠। अ॒स्यै⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। तृती॑यम्⁠। प्रतीति॑⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। इति॑⁠। ताः⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। वर᳚म्⁠। वृ॒णा॒म॒है॒⁠। ऋत्वि॑यात्⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। वि॒न्दा॒म॒है॒⁠। काम᳚म्⁠। एति॑⁠। विज॑नितो॒रिति॒ वि—ज॒नि॒तोः॒⁠। समिति॑⁠। भ॒वा॒म॒⁠। इति॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। ऋत्वि॑यात्⁠। स्त्रियः॑⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। वि॒न्द॒न्ते॒⁠। काम᳚म्⁠। एति॑⁠। विज॑नितो॒रिति॒ वि—ज॒नि॒तोः॒⁠। समिति॑⁠। भ॒व॒न्ति॒⁠। वारे॑वृत॒मिति॒ वारे᳚—वृ॒त॒म्⁠। हि⁠। आ॒सा॒म्⁠। तृती॑यम्⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। प्रतीति॑⁠। अ॒गृ॒ह्ण॒न्न्⁠। सा⁠। मल॑वद्वासा॒ इति॒ मल॑वत्—वा॒साः॒⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। मल॑वद्वास॒सेति॒ मल॑वत्—वा॒स॒सा॒⁠। न⁠। समिति॑⁠। व॒दे॒त॒⁠। ५ (५०) [५] न⁠। स॒ह⁠। आ॒सी॒त॒⁠। न⁠। अ॒स्याः॒⁠। अन्न᳚म्⁠। अ॒द्या॒त्⁠। ब्र॒ह्म॒ह॒त्याया॒ इति॑ ब्रह्म—ह॒त्यायै᳚⁠। हि⁠। ए॒षा⁠। वर्ण᳚म्⁠। प्र॒ति॒मुच्येति॑ प्रति—मुच्य॑⁠। आस्ते᳚⁠। अथो॒ इति॑⁠। खलु॑⁠। आ॒हुः॒⁠। अ॒भ्यञ्ज॑न॒मित्य॑भि—अञ्ज॑नम्⁠। वाव⁠। स्त्रि॒याः⁠। अन्न᳚म्⁠। अ॒भ्यञ्ज॑न॒मित्य॑भि—अञ्ज॑नम्⁠। ए॒व⁠। न⁠। प्र॒ति॒गृह्य॒मिति॑ प्रति—गृह्य᳚म्⁠। काम᳚म्⁠। अ॒न्यत्⁠। इति॑⁠। याम्⁠। मल॑वद्वासस॒मिति॒ मल॑वत्—वा॒स॒स॒म्⁠। स॒म्भव॒न्तीति॑ सं—भव॑न्ति⁠। यः⁠। ततः॑⁠। जाय॑ते⁠। सः⁠। अ॒भि॒श॒स्त इत्य॑भि—श॒स्तः⁠। याम्⁠। अर॑ण्ये⁠। तस्यै᳚⁠। स्ते॒नः⁠। याम्⁠। परा॑चीम्⁠। तस्यै᳚⁠। ह्री॒त॒मु॒खीति॑ ह्रीत—मु॒खी⁠। अ॒प॒ग॒ल्भ इत्य॑प—ग॒ल्भः⁠। या⁠। स्नाति॑⁠। तस्याः᳚⁠। अ॒फ्सित्य॑प्—सु⁠। मारु॑कः⁠। या⁠। ६ (५०) [६] अ॒भ्य॒ङ्क्त इत्य॑भि—अ॒ङ्क्ते⁠। तस्यै᳚⁠। दु॒श्चर्मेति॑ दुः—चर्मा᳚⁠। या⁠। प्र॒लि॒खत॒ इति॑ प्र—लि॒खते᳚⁠। तस्यै᳚⁠। ख॒ल॒तिः⁠। अ॒प॒मा॒रीत्य॑प—मा॒री⁠। या⁠। आ॒ङ्क्त इत्या᳚—अ॒ङ्क्ते⁠। तस्यै᳚⁠। का॒णः⁠। या⁠। द॒तः⁠। धाव॑ते⁠। तस्यै᳚⁠। श्या॒वद॒न्निति॑ श्या॒व—द॒न्न्⁠। या⁠। न॒खानि॑⁠। नि॒कृ॒न्तत॒ इति॑ नि—कृ॒न्तते᳚⁠। तस्यै᳚⁠। कु॒न॒खी⁠। या⁠। कृ॒णत्ति॑⁠। तस्यै᳚⁠। क्ली॒बः⁠। या⁠। रज्जु᳚म्⁠। सृ॒जति॑⁠। तस्याः᳚⁠। उ॒द्बन्धु॑क॒ इत्यु॑त्—बन्धु॑कः⁠। या⁠। प॒र्णेन॑⁠। पिब॑ति⁠। तस्याः᳚⁠। उ॒न्मादु॑क॒ इत्यु॑त्—मादु॑कः⁠। या⁠। ख॒र्वेण॑⁠। पिब॑ति⁠। तस्यै᳚⁠। ख॒र्वः⁠। ति॒स्रः⁠। रात्रीः᳚⁠। व्र॒तम्⁠। च॒रे॒त्⁠। अ॒ञ्ज॒लिना᳚⁠। वा॒⁠। पिबे᳚त्⁠। अख॑र्वेण⁠। वा॒⁠। पात्रे॑ण⁠। प्र॒जाया॒ इति॑ प्र—जायै᳚⁠। गो॒पी॒थाय॑ [७] (यथ् सो॑म॒पानं॑ ते वृ॒क्णात् तस्य॒ नाश्यं॑ वदेत॒ मारु॑को॒ या ऽख॑र्वेण वा॒ त्रीणि॑ च) ॥१॥
त्वष्टा᳚⁠। ह॒तपु॑त्र॒ इति॑ ह॒त—पु॒त्रः॒⁠। वीन्द्र॒मिति॒ वि—इ॒न्द्र॒म्⁠। सोम᳚म्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तस्मि॑न्न्⁠। इन्द्रः॑⁠। उ॒प॒ह॒वमित्यु॑प—ह॒वम्⁠। ऐ॒च्छ॒त॒⁠। तम्⁠। न⁠। उपेति॑⁠। अ॒ह्व॒य॒त॒⁠। पु॒त्रम्⁠। मे॒⁠। अ॒व॒धीः॒⁠। इति॑⁠। सः⁠। य॒ज्ञ॒वे॒श॒समिति॑ यज्ञ—वे॒श॒सम्⁠। कृ॒त्वा⁠। प्रा॒सहेति॑ प्र—सहा᳚⁠। सोम᳚म्⁠। अ॒पि॒ब॒त्⁠। तस्य॑⁠। यत्⁠। अ॒त्यशि॑ष्य॒तेत्य॑ति—अशि॑ष्यत⁠। तत्⁠। त्वष्टा᳚⁠। आ॒ह॒व॒नीय॒मित्या᳚—ह॒व॒नीय᳚म्⁠। उप॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒व॒र्त॒य॒त्⁠। स्वाहा᳚⁠। इन्द्र॑शत्रु॒रितीन्द्र॑—श॒त्रुः॒⁠। व॒र्द्ध॒स्व॒⁠। इति॑⁠। यत्⁠। अव॑र्तयत्⁠। तत्⁠। वृ॒त्रस्य॑⁠। वृ॒त्र॒त्वमिति॑ वृत्र—त्वम्⁠। यत्⁠। अब्र॑वीत्⁠। स्वाहा᳚⁠। इन्द्र॑शत्रु॒रितीन्द्र॑—श॒त्रुः॒⁠। व॒र्द्ध॒स्व॒⁠। इति॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒स्य॒⁠। ८ (५०) [८] इन्द्रः॑⁠। शत्रुः॑⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। सः⁠। स॒म्भव॒न्निति॑ सं—भव॑न्न्⁠। अ॒ग्नीषोमा॒वित्य॒ग्नी—सोमौ᳚⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। सः⁠। इ॒षु॒मा॒त्रमि॑षुमात्र॒मिती॑षुमा॒त्रं—इ॒षु॒मा॒त्र॒म्⁠। विष्व॑ङ्⁠। अ॒व॒र्द्ध॒त॒⁠। सः⁠। इ॒मान्⁠। लो॒कान्⁠। अ॒वृ॒णो॒त्⁠। यत्⁠। इ॒मान्⁠। लो॒कान्⁠। अवृ॑णोत्⁠। तत्⁠। वृ॒त्रस्य॑⁠। वृ॒त्र॒त्वमिति॑ वृत्र—त्वम्⁠। तस्मा᳚त्⁠। इन्द्रः॑⁠। अ॒बि॒भे॒त्⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। उपेति॑⁠। अ॒धा॒व॒त्⁠। शत्रुः॑⁠। मे॒⁠। अ॒ज॒नि॒⁠। इति॑⁠। तस्मै᳚⁠। वज्र᳚म्⁠। सि॒क्त्वा⁠। प्रेति॑⁠। अ॒य॒च्छ॒त्⁠। ए॒तेन॑⁠। ज॒हि॒⁠। इति॑⁠। तेन॑⁠। अ॒भीति॑⁠। आ॒य॒त॒⁠। तौ⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। अ॒ग्नीषोमा॒वित्य॒ग्नी—सोमौ᳚⁠। मा⁠। ९ (५०) [९] प्रेति॑⁠। हाः॒⁠। आ॒वम्⁠। अ॒न्तः⁠। स्वः॒⁠। इति॑⁠। मम॑⁠। वै⁠। यु॒वम्⁠। स्थः॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। माम्⁠। अ॒भि⁠। एति॑⁠। इ॒त॒म्⁠। इति॑⁠। तौ⁠। भा॒ग॒धेय॒मिति॑ भाग—धेय᳚म्⁠। ऐ॒च्छे॒ता॒म्⁠। ताभ्या᳚म्⁠। ए॒तम्⁠। अ॒ग्नी॒षो॒मीय॒मित्य॑ग्नी—सो॒मीय᳚म्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। प्रेति॑⁠। अ॒य॒च्छ॒त्⁠। तौ⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। अ॒भीति॑⁠। सन्द॑ष्टा॒विति॒ सं—द॒ष्टौ॒⁠। वै⁠। स्वः॒⁠। न⁠। श॒क्नु॒वः॒⁠। ऐतु॒मित्या—ए॒तु॒म्⁠। इति॑⁠। सः⁠। इन्द्रः॑⁠। आ॒त्मनः॑⁠। शी॒त॒रू॒राविति॑ शीत—रू॒रौ⁠। अ॒ज॒न॒य॒त्⁠। तत्⁠। शी॒त॒रू॒रयो॒रिति॑ शीत—रू॒रयोः᳚⁠। जन्म॑⁠। यः⁠। ए॒वं⁠। शी॒त॒रू॒रयो॒रिति॑ शीत—रू॒रयोः᳚⁠। जन्म॑⁠। वेद॑⁠। १० (५०) [१०] न⁠। ए॒न॒म्⁠। शी॒त॒रू॒राविति॑ शीत—रू॒रौ⁠। ह॒तः॒⁠। ताभ्या᳚म्⁠। ए॒न॒म्⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒न॒य॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। ज॒ञ्ज॒भ्यमा॑नात्⁠। अ॒ग्नीषोमा॒वित्य॒ग्नी—सोमौ᳚⁠। निरिति॑⁠। अ॒क्रा॒म॒ता॒म्⁠। प्रा॒णा॒पा॒नाविति॑ प्राण—अ॒पा॒नौ⁠। वै⁠। ए॒न॒म्⁠। तत्⁠। अ॒ज॒हि॒ता॒म्⁠। प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। वै⁠। दख्‍षः॑⁠। अ॒पा॒न इत्य॑प—अ॒नः⁠। क्रतुः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। ज॒ञ्ज॒भ्यमा॑नः⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। मयि॑⁠। द॒ख्‍ष॒क्र॒तू इति॑ दख्‍ष—क्र॒तू⁠। इति॑⁠। प्रा॒णा॒पा॒नाविति॑ प्राण—अ॒पा॒नौ⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। सर्व᳚म्⁠। आयुः॑⁠। ए॒ति॒⁠। सः⁠। दे॒वताः᳚⁠। वृ॒त्रात्⁠। नि॒र्॒‌हूयेति॑ निः—हूय॑⁠। वार्त्र॑घ्न॒मिति॒ वार्त्र॑—घ्न॒म्⁠। ह॒विः⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। निरिति॑⁠। अ॒व॒प॒त्⁠। घ्नन्ति॑⁠। वै⁠। ए॒न॒म्⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। एति॑⁠। ११ (५०) [११] अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। प्या॒य॒य॒न्ति॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। वार्त्र॑घ्नी॒ इति॒ वार्त्र॑—घ्नी॒⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। अन्विति॑⁠। उ॒च्ये॒ते॒ इति॑⁠। वृध॑न्वती॒ इति॒ वृध॑न्न्—व॒ती॒⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। तत्⁠। स॒ꣴ॒स्थाप्येति॑ सं—स्थाप्य॑⁠। वार्त्र॑घ्न॒मिति॒ वार्त्र॑—घ्न॒म्⁠। ह॒विः⁠। वज्र᳚म्⁠। आ॒दायेत्या᳚—दाय॑⁠। पुनः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। आ॒य॒त॒⁠। ते इति॑⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। मा⁠। प्रेति॑⁠। हाः॒⁠। आ॒वयोः᳚⁠। वै⁠। श्रि॒तः⁠। इति॑⁠। ते इति॑⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। वर᳚म्⁠। वृ॒णा॒व॒है॒⁠। नख्‍ष॑त्रविहि॒तेति॒ नख्‍ष॑त्र—वि॒हि॒ता॒⁠। अ॒हम्⁠। असा॑नि⁠। इति॑⁠। अ॒सौ⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। चि॒त्रवि॑हि॒तेति॑ चि॒त्र—वि॒हि॒ता॒⁠। अ॒हम्⁠। इति॑⁠। इ॒यम्⁠। तस्मा᳚त्⁠। नख्‍ष॑त्रविहि॒तेति॒ नख्‍ष॑त्र—वि॒हि॒ता॒⁠। अ॒सौ⁠। चि॒त्रवि॑हि॒तेति॑ चि॒त्र—वि॒हि॒ता॒⁠। इ॒यम्⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। द्यावा॑पृथि॒व्योरिति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒व्योः⁠। १२ (५०) [१२] वर᳚म्⁠। वेद॑⁠। एति॑⁠। ए॒न॒म्⁠। वरः॑⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। सः⁠। आ॒भ्याम्⁠। ए॒व⁠। प्रसू॑त॒ इति॒ प्र—सू॒तः॒⁠। इन्द्रः॑⁠। वृ॒त्रम्⁠। अ॒ह॒न्न्⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। वृ॒त्रम्⁠। ह॒त्वा⁠। अ॒ग्नीषोमा॒वित्य॒ग्नी—सोमौ᳚⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। ह॒व्यम्⁠। नः॒⁠। व॒ह॒त॒म्⁠। इति॑⁠। तौ⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। अप॑तेजसा॒वित्यप॑—ते॒ज॒सौ॒⁠। वै⁠। त्यौ⁠। वृ॒त्रे⁠। वै⁠। त्ययोः᳚⁠। तेजः॑⁠। इति॑⁠। ते⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। कः⁠। इ॒दम्⁠। अच्छ॑⁠। ए॒ति॒⁠। इति॑⁠। गौः⁠। इति॑⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। गौः⁠। वाव⁠। सर्व॑स्य⁠। मि॒त्रम्⁠। इति॑⁠। सा⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। १३ (५०) [१३] वर᳚म्⁠। वृ॒णै॒⁠। मयि॑⁠। ए॒व⁠। स॒ता⁠। उ॒भये॑न⁠। भु॒न॒जा॒द्ध्वै॒⁠। इति॑⁠। तत्⁠। गौः⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। गवि॑⁠। स॒ता⁠। उ॒भये॑न⁠। भु॒ञ्ज॒ते॒⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। तेजः॑⁠। यत्⁠। घृ॒तम्⁠। ए॒तत्⁠। सोम॑स्य⁠। यत्⁠। पयः॑⁠। यः⁠। ए॒वं⁠। अ॒ग्नीषोम॑यो॒रित्य॒ग्नी—सोम॑योः⁠। तेजः॑⁠। वेद॑⁠। ते॒ज॒स्वी⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। कि॒न्दे॒व॒त्य॑मिति॑ किं—दे॒व॒त्य᳚म्⁠। पौ॒र्ण॒मा॒समिति॑ पौर्ण—मा॒सम्⁠। इति॑⁠। प्रा॒जा॒प॒त्यमिति॑ प्राजा—प॒त्यम्⁠। इति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। तेन॑⁠। इन्द्र᳚म्⁠। ज्ये॒ष्ठम्⁠। पु॒त्रम्⁠। नि॒रवा॑सायय॒दिति॑ निः—अवा॑साययत्⁠। इति॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। ज्ये॒ष्ठम्⁠। पु॒त्रम्⁠। धने॑न⁠। नि॒रव॑सायय॒न्तीति॑ निः—अव॑साययन्ति [१४] (अ॒स्य॒ मा वेदा द्यावा॑पृथि॒व्यो र॑ब्रवी॒ दिति॒ तस्मा᳚ च्च॒त्वारि॑ च) ॥२॥
इन्द्र᳚म्⁠। वृ॒त्रम्⁠। ज॒घ्नि॒वाꣳस᳚म्⁠। मृधः॑⁠। अ॒भि⁠। प्रेति॑⁠। अ॒वे॒प॒न्त॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। वै॒मृ॒धम्⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। अ॒नु॒नि॒र्वा॒प्य॑मित्य॑नु—नि॒र्वा॒प्य᳚म्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। तम्⁠। निरिति॑⁠। अ॒व॒प॒त्⁠। तेन॑⁠। वै⁠। सः⁠। मृधः॑⁠। अपेति॑⁠। अ॒ह॒त॒⁠। यत्⁠। वै॒मृ॒धः⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। अ॒नु॒नि॒र्वा॒प्य॑ इत्य॑नु—नि॒र्वा॒प्यः॑⁠। भव॑ति⁠। मृधः॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। यज॑मानः⁠। अपेति॑⁠। ह॒ते॒⁠। इन्द्रः॑⁠। वृ॒त्रम्⁠। ह॒त्वा⁠। दे॒वता॑भिः⁠। च॒⁠। इ॒न्द्रि॒येण॑⁠। च॒⁠। वीति॑⁠। आ॒र्द्ध्य॒त॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। दधि॑⁠। १५ (५०) [१५] तम्⁠। निरिति॑⁠। अ॒व॒प॒त्⁠। तेन॑⁠। वै⁠। सः⁠। दे॒वताः᳚⁠। च॒⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। च॒⁠। अवेति॑⁠। अ॒रु॒न्ध॒⁠। यत्⁠। आ॒ग्ने॒यः⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒ इत्य॒ष्टा—क॒पा॒लः॒⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। भव॑ति⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। दधि॑⁠। दे॒वताः᳚⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। च॒⁠। यज॑मानः⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। इन्द्र॑स्य⁠। वृ॒त्रम्⁠। ज॒घ्नुषः॑⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। वी॒र्य᳚म्⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। अनु॑⁠। वीति॑⁠। आ॒र्च्छ॒त्⁠। तत्⁠। ओष॑धयः⁠। वी॒रुधः॑⁠। अ॒भ॒व॒न्न्⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। उपेति॑⁠। अ॒धा॒व॒त्⁠। वृ॒त्रं⁠। मे॒⁠। ज॒घ्नुषः॑⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। वी॒र्य᳚म्⁠। १६ (५०) [१६] पृ॒थि॒वीम्⁠। अनु॑⁠। वीति॑⁠। आ॒र॒त्⁠। तत्⁠। ओष॑धयः⁠। वी॒रुधः॑⁠। अ॒भू॒व॒न्न्⁠। इति॑⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प॒शून्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। ए॒तत्⁠। अ॒स्मै॒⁠। समिति॑⁠। न॒य॒त॒⁠। इति॑⁠। तत्⁠। प॒शवः॑⁠। ओष॑धीभ्य॒ इत्योष॑धि—भ्यः॒⁠। अधीति॑⁠। आ॒त्मन्न्⁠। समिति॑⁠। अ॒न॒य॒न्न्⁠। तत्⁠। प्रतीति॑⁠। अ॒दु॒ह॒न्न्⁠। यत्⁠। स॒मन॑य॒न्निति॑ सं—अन॑यन्न्⁠। तत्⁠। सा॒न्ना॒य्यस्येति॑ सां—ना॒य्यस्य॑⁠। सा॒न्ना॒य्य॒त्वमिति॑ सान्नाय्य—त्वम्⁠। यत्⁠। प्र॒त्यदु॑ह॒न्निति॑ प्रति—अदु॑हन्न्⁠। तत्⁠। प्र॒ति॒धुष॒ इति॑ प्रति—धुषः॑⁠। प्र॒ति॒धु॒क्त्वमिति॑ प्रतिधुक्—त्वम्⁠। समिति॑⁠। अ॒नै॒षुः॒⁠। प्रतीति॑⁠। अ॒धु॒ख्‍ष॒न्न्⁠। न⁠। तु⁠। मयि॑⁠। श्र॒य॒ते॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। ए॒तत्⁠। अ॒स्मै॒⁠। १७ (५०) [१७] शृ॒तम्⁠। कु॒रु॒त॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तत्⁠। अ॒स्मै॒⁠। शृ॒तम्⁠। अ॒कु॒र्व॒न्न्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। वाव⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। वी॒र्य᳚म्⁠। तत्⁠। अ॒श्र॒य॒न्न्⁠। तत्⁠। शृ॒तस्य॑⁠। शृ॒त॒त्वमिति॑ शृत—त्वम्⁠। समिति॑⁠। अ॒नै॒षुः॒⁠। प्रतीति॑⁠। अ॒धु॒ख्‍ष॒न्न्⁠। शृ॒तम्⁠। अ॒क्र॒न्न्⁠। न⁠। तु⁠। मा॒⁠। धि॒नो॒ति॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। ए॒तत्⁠। अ॒स्मै॒⁠। दधि॑⁠। कु॒रु॒त॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तत्⁠। अ॒स्मै॒⁠। दधि॑⁠। अ॒कु॒र्व॒न्न्⁠। तत्⁠। ए॒न॒म्⁠। अ॒धि॒नो॒त्⁠। तत्⁠। द॒द्ध्नः⁠। द॒धि॒त्वमिति॑ दधि—त्वम्⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। द॒द्ध्नः⁠। पूर्व॑स्य⁠। अ॒व॒देय॒मित्य॑व—देय᳚म्⁠। १८ (५०) [१८] दधि॑⁠। हि⁠। पूर्व᳚म्⁠। क्रि॒यते᳚⁠। इति॑⁠। अना॑दृ॒त्येत्यना᳚—दृ॒त्य॒⁠। तत्⁠। शृ॒तस्य॑⁠। ए॒व⁠। पूर्व॑स्य⁠। अवेति॑⁠। द्ये॒त्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। वी॒र्य᳚म्⁠। श्रि॒त्वा⁠। द॒द्ध्ना⁠। उ॒परि॑ष्टात्⁠। धि॒नो॒ति॒⁠। य॒था॒पू॒र्वमिति॑ यथा—पू॒र्वम्⁠। उपेति॑⁠। ए॒ति॒⁠। यत्⁠। पू॒तीकैः᳚⁠। वा॒⁠। प॒र्ण॒व॒ल्कैरिति॑ पर्ण—व॒ल्कैः⁠। वा॒⁠। आ॒त॒ञ्च्यादित्या᳚—त॒ञ्च्यात्⁠। सौ॒म्यम्⁠। तत्⁠। यत्⁠। क्व॑लैः⁠। रा॒ख्‍ष॒सम्⁠। तत्⁠। यत्⁠। त॒ण्डु॒लैः⁠। वै॒श्व॒दे॒वमिति॑ वैश्व—दे॒वम्⁠। तत्⁠। यत्⁠। आ॒तञ्च॑ने॒नेत्या᳚—तञ्च॑नेन⁠। मा॒नु॒षम्⁠। तत्⁠। यत्⁠। द॒द्ध्ना⁠। तत्⁠। सेन्द्र॒मिति॒ स—इ॒न्द्र॒म्⁠। द॒द्ध्ना⁠। एति॑⁠। त॒न॒क्ति॒⁠। १९ (५०) [१९] से॒न्द्र॒त्वायेति॑ सेन्द्र—त्वाय॑⁠। अ॒ग्नि॒हो॒त्रो॒च्छे॒ष॒णमित्य॑ग्निहोत्र—उ॒च्छे॒ष॒णम्⁠। अ॒भ्यात॑न॒क्तीत्य॑भि—आत॑नक्ति⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। सन्त॑त्या॒ इति॒ सं—त॒त्यै॒⁠। इन्द्रः॑⁠। वृ॒त्रम्⁠। ह॒त्वा⁠। परा᳚म्⁠। प॒रा॒वत॒मिति॑ परा—वत᳚म्⁠। अ॒ग॒च्छ॒त्⁠। अपेति॑⁠। अ॒रा॒ध॒म्⁠। इति॑⁠। मन्य॑मानः⁠। तम्⁠। दे॒वताः᳚⁠। प्रैष॒मिति॑ प्र—एष᳚म्⁠। ऐ॒च्छ॒न्न्⁠। सः⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। यः⁠। प्र॒थ॒मः⁠। अ॒नु॒वि॒न्दतीत्य॑नु—वि॒न्दति॑⁠। तस्य॑⁠। प्र॒थ॒मम्⁠। भा॒ग॒धेय॒मिति॑ भाग—धेय᳚म्⁠। इति॑⁠। तम्⁠। पि॒तरः॑⁠। अन्विति॑⁠। अ॒वि॒न्द॒न्न्⁠। तस्मा᳚त्⁠। पि॒तृभ्य॒ इति॑ पि॒तृ—भ्यः॒⁠। पू॒र्वे॒द्युः⁠। क्रि॒य॒ते॒⁠। सः⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑मित्य॑मा—वा॒स्या᳚म्⁠। प्रति॑⁠। एति॑⁠। अ॒ग॒च्छ॒त्⁠। तम्⁠। दे॒वाः⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। अ॒ग॒च्छ॒न्त॒⁠। अ॒मा⁠। वै⁠। नः॒⁠। २० (५०) [२०] अ॒द्य⁠। वसु॑⁠। व॒स॒ति॒⁠। इति॑⁠। इन्द्रः॑⁠। हि⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। वसु॑⁠। तत्⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒ इत्य॑मा—वा॒स्या॑याः⁠। अ॒मा॒वा॒स्य॒त्वमित्य॑मावास्य—त्वम्⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। कि॒न्दे॒व॒त्य॑मिति॑ किं—दे॒व॒त्य᳚म्⁠। सा॒न्ना॒य्यमिति॑ सां—ना॒य्यम्⁠। इति॑⁠। वै॒श्व॒दे॒वमिति॑ वैश्व—दे॒वम्⁠। इति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। विश्वे᳚⁠। हि⁠। तत्⁠। दे॒वाः⁠। भा॒ग॒धेय॒मिति॑ भाग—धेय᳚म्⁠। अ॒भीति॑⁠। स॒मग॑च्छ॒न्तेति॑ सं—अग॑च्छन्त⁠। इति॑⁠। अथो॒ इति॑⁠। खलु॑⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। इति॑⁠। ए॒व⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। इन्द्र᳚म्⁠। वाव⁠। ते⁠। तत्⁠। भि॒ष॒ज्यन्तः॑⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। अ॒ग॒च्छ॒न्त॒⁠। इति॑ [२१] (दधि॑ मे ज॒घ्नुष॑ इन्द्रि॒यव्ँवी॒र्य॑ मित्य॑ब्रवीदे॒तद॑स्मा अव॒देयं॑ तनक्ति नो॒ द्विच॑त्वारिꣳशच्च) ॥३॥
ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। सः⁠। तु⁠। वै⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। य॒जे॒त॒⁠। यः⁠। ए॒नौ॒⁠। सेन्द्रा॒विति॒ स—इ॒न्द्रौ॒⁠। यजे॑त⁠। इति॑⁠। वै॒मृ॒धः⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। अ॒नु॒नि॒र्वा॒प्य॑ इत्य॑नु—नि॒र्वा॒प्यः॑⁠। भ॒व॒ति॒⁠। तेन॑⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒सः॒⁠। सेन्द्र॒ इति॒ स—इ॒न्द्रः॒⁠। ऐ॒न्द्रम्⁠। दधि॑⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। तेन॑⁠। अ॒मा॒वा॒स्येत्य॑मा—वा॒स्या᳚⁠। सेन्द्रेति॒ स—इ॒न्द्रा॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। सेन्द्रा॒विति॒ स—इ॒न्द्रौ॒⁠। ए॒व⁠। ए॒नौ॒⁠। य॒ज॒ते॒⁠। श्वः‌श्व॒ इति॒ श्वः—श्वः॒⁠। अ॒स्मै॒⁠। ई॒जा॒नाय॑⁠। वसी॑यः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। दे॒वाः⁠। वै⁠। यत्⁠। य॒ज्ञे⁠। अकु॑र्वत⁠। तत्⁠। असु॑राः⁠। अ॒कु॒र्व॒त॒⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। ए॒ताम्⁠। २२ (५०) [२२] इष्टि᳚म्⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। आ॒ग्ना॒वै॒ष्ण॒वमित्या᳚ग्ना—वै॒ष्ण॒वम्⁠। एका॑दशकपाल॒मित्येका॑दश—क॒पा॒ल॒म्⁠। सर॑स्वत्यै⁠। च॒रुम्⁠। सर॑स्वते⁠। च॒रुम्⁠। ताम्⁠। पौ॒र्ण॒मा॒समिति॑ पौर्ण—मा॒सम्⁠। स॒ꣴ॒स्थाप्येति॑ सं—स्थाप्य॑⁠। अनु॑⁠। निरिति॑⁠। अ॒व॒प॒न्न्⁠। ततः॑⁠। दे॒वाः⁠। अभ॑वन्न्⁠। परेति॑⁠। असु॑राः⁠। यः⁠। भ्रातृ॑व्यवा॒निति॒ भ्रातृ॑व्य—वा॒न्⁠। स्यात्⁠। सः⁠। पौ॒र्ण॒मा॒समिति॑ पौर्ण—मा॒सम्⁠। स॒ꣴ॒स्थाप्येति॑ सं—स्थाप्य॑⁠। ए॒ताम्⁠। इष्टि᳚म्⁠। अनु॑⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। पौ॒र्ण॒मा॒सेनेति॑ पौर्ण—मा॒सेन॑⁠। ए॒व⁠। वज्र᳚म्⁠। भ्रातृ॑व्याय⁠। प्र॒हृत्येति॑ प्र—हृत्य॑⁠। आ॒ग्ना॒वै॒ष्ण॒वेनेत्या᳚ग्ना—वै॒ष्ण॒वेन॑⁠। दे॒वताः᳚⁠। च॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। च॒⁠। भ्रातृ॑व्यस्य⁠। वृ॒ङ्क्ते॒⁠। मि॒थु॒नान्⁠। प॒शून्⁠। सा॒र॒स्व॒ताभ्या᳚म्⁠। याव॑त्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। अस्ति॑⁠। तत्⁠। २३ (५०) [२३] सर्व᳚म्⁠। वृ॒ङ्क्ते॒⁠। पौ॒र्ण॒मा॒सीमिति॑ पौर्ण—मा॒सीम्⁠। ए॒व⁠। य॒जे॒त॒⁠। भ्रातृ॑व्यवा॒निति॒ भ्रातृ॑व्य—वा॒न्⁠। न⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑मित्य॑मा—वा॒स्या᳚म्⁠। ह॒त्वा⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। न⁠। एति॑⁠। प्या॒य॒य॒ति॒⁠। सा॒कं॒प्र॒स्था॒यीये॒नेति॑ साकं—प्र॒स्था॒यीये॑न⁠। य॒जे॒त॒⁠। प॒शुका॑म॒ इति॑ प॒शु—का॒मः॒⁠। यस्मै᳚⁠। वै⁠। अल्पे॑न⁠। आ॒हर॒न्तीत्या᳚—हर॑न्ति⁠। न⁠। आ॒त्मना᳚⁠। तृप्य॑ति⁠। न⁠। अ॒न्यस्मै᳚⁠। द॒दा॒ति॒⁠। यस्मै᳚⁠। म॒ह॒ता⁠। तृप्य॑ति⁠। आ॒त्मना᳚⁠। ददा॑ति⁠। अ॒न्यस्मै᳚⁠। म॒ह॒ता⁠। पू॒र्णम्⁠। हो॒त॒व्य᳚म्⁠। तृ॒प्तः⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। इन्द्रः॑⁠। प्र॒जयेति॑ प्र—जया᳚⁠। प॒शुभि॒रिति॑ प॒शु—भिः॒⁠। त॒र्प॒य॒ति॒⁠। दा॒रु॒पा॒त्रेणेति॑ दारु—पा॒त्रेण॑⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। न⁠। हि⁠। मृ॒न्मय॒मिति॑ मृत्—मय᳚म्⁠। आहु॑ति॒मित्या—हु॒ति॒म्⁠। आ॒न॒शे⁠। औदुं॑बरम्⁠। २४ (५०) [२४] भ॒व॒ति॒⁠। ऊर्क्⁠। वै⁠। उ॒दुं॒बरः॑⁠। ऊर्क्⁠। प॒शवः॑⁠। ऊ॒र्जा⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। ऊर्ज᳚म्⁠। प॒शून्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। न⁠। अग॑तश्री॒रित्यग॑त—श्रीः॒⁠। म॒हे॒न्द्रमिति॑ महा—इ॒न्द्रम्⁠। य॒जे॒त॒⁠। त्रयः॑⁠। वै⁠। ग॒तश्रि॑य॒ इति॑ ग॒त—श्रि॒यः॒⁠। शु॒श्रु॒वान्⁠। ग्रा॒म॒णीरिति॑ ग्राम—नीः⁠। रा॒ज॒न्यः॑⁠। तेषा᳚म्⁠। म॒हे॒न्द्र इति॑ महा—इ॒न्द्रः⁠। दे॒वता᳚⁠। यः⁠। वै⁠। स्वाम्⁠। दे॒वता᳚म्⁠। अ॒ति॒यज॑त॒ इत्य॑ति—यज॑ते⁠। प्रेति॑⁠। स्वायै᳚⁠। दे॒वता॑यै⁠। च्य॒व॒ते॒⁠। न⁠। परा᳚म्⁠। प्रेति॑⁠। आ॒प्नो॒ति॒⁠। पापी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। इन्द्र᳚म्⁠। य॒जे॒त॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। हि⁠। व्र॒तम्⁠। न⁠। अतीति॑⁠। स्वा⁠। २५ (५०) [२५] ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। दे॒वता᳚⁠। इ॒ज्यमा॑ना⁠। भूत्यै᳚⁠। इ॒न्धे॒⁠। वसी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। प॒रस्ता᳚त्⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। व्र॒तप॑तय॒ इति॑ व्र॒त—प॒त॒ये॒⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। वृ॒त्रम्⁠। ज॒घ्नि॒वाꣳस᳚म्⁠। अ॒ग्निः⁠। व्र॒तप॑ति॒रिति॑ व्र॒त—प॒तिः॒⁠। व्र॒तम्⁠। एति॑⁠। लं॒भ॒य॒ति॒⁠। ततः॑⁠। अधीति॑⁠। काम᳚म्⁠। य॒जे॒त॒ [२६] (ए॒तां त दौदु॑म्बर॒ꣴ॒ स्वा त्रि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥४॥
न⁠। असो॑मया॒जीत्यसो॑म—या॒जी॒⁠। समिति॑⁠। न॒ये॒त्⁠। अना॑गत॒मित्यना᳚—ग॒त॒म्⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। पयः॑⁠। यः⁠। असो॑मया॒जीत्यसो॑म—या॒जी॒⁠। यत्⁠। असो॑मया॒जीत्यसो॑म—या॒जी॒⁠। स॒न्नये॒दिति॑ सं—नये᳚त्⁠। प॒रि॒मो॒ष इति॑ परि—मो॒षः⁠। ए॒व⁠। सः⁠। अनृ॑तम्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। परेति॑⁠। ए॒व⁠। सि॒च्य॒ते॒⁠। सो॒म॒या॒जीति॑ सोम—या॒जी⁠। ए॒व⁠। समिति॑⁠। न॒ये॒त्⁠। पयः॑⁠। वै⁠। सोमः॑⁠। पयः॑⁠। सा॒न्ना॒य्यमिति॑ सां—ना॒य्यम्⁠। पय॑सा⁠। ए॒व⁠। पयः॑⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। वीति॑⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। प्र॒जयेति॑ प्र—जया᳚⁠। प॒शुभि॒रिति॑ प॒शु—भिः॒⁠। अ॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। व॒र्द्धय॑ति⁠। अ॒स्य॒⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। यस्य॑⁠। ह॒विः⁠। निरु॑प्त॒मिति॒ निः—उ॒प्त॒म्⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। च॒न्द्रमाः᳚⁠। २७ (५०) [२७] अ॒भीति॑⁠। उ॒देतीत्यु॑त्—एति॑⁠। त्रे॒धा⁠। त॒ण्डु॒लान्⁠। वीति॑⁠। भ॒जे॒त्⁠। ये⁠। म॒द्ध्य॒माः⁠। स्युः⁠। तान्⁠। अ॒ग्नये᳚⁠। दा॒त्रे⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। ये⁠। स्थवि॑ष्ठाः⁠। तान्⁠। इन्द्रा॑य⁠। प्र॒दा॒त्र इति॑ प्र—दा॒त्रे⁠। द॒धन्न्⁠। च॒रुम्⁠। ये⁠। अणि॑ष्ठाः⁠। तान्⁠। विष्ण॑वे⁠। शि॒पि॒वि॒ष्टायेति॑ शिपि—वि॒ष्टाय॑⁠। शृ॒ते⁠। च॒रुम्⁠। अ॒ग्निः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। प्र॒ज॒नय॒तीति॑ प्र—ज॒नय॑ति⁠। वृ॒द्धाम्⁠। इन्द्रः॑⁠। प्रेति॑⁠। य॒च्छ॒ति॒⁠। य॒ज्ञः⁠। वै⁠। विष्णुः॑⁠। प॒शवः॑⁠। शिपिः॑⁠। य॒ज्ञे⁠। ए॒व⁠। प॒शुषु॑⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒ति॒⁠। न⁠। द्वे इति॑⁠। २८ (५०) [२८] य॒जे॒त॒⁠। यत्⁠। पूर्व॑या⁠। सं॒प्र॒तीति॑ सं—प्र॒ति⁠। यजे॑त⁠। उत्त॑र॒येत्युत्—त॒र॒या॒⁠। छं॒बट्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। यत्⁠। उत्त॑र॒येत्युत्—त॒र॒या॒⁠। सं॒प्र॒तीति॑ सं—प्र॒ति⁠। यजे॑त⁠। पूर्व॑या⁠। छं॒बट्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। न⁠। इष्टिः॑⁠। भव॑ति⁠। न⁠। य॒ज्ञः⁠। तत्⁠। अन्विति॑⁠। ह्री॒त॒मु॒खीति॑ ह्रीत—मु॒खी⁠। अ॒प॒ग॒ल्भ इत्य॑प—ग॒ल्भः⁠। जा॒य॒ते॒⁠। एका᳚म्⁠। ए॒व⁠। य॒जे॒त॒⁠। प्र॒ग॒ल्भ इति॑ प्र—ग॒ल्भः⁠। अ॒स्य॒⁠। जा॒य॒ते॒⁠। अना॑दृ॒त्येत्यना᳚—दृ॒त्य॒⁠। तत्⁠। द्वे इति॑⁠। ए॒व⁠। य॒जे॒त॒⁠। य॒ज्ञ॒मु॒खमिति॑ यज्ञ—मु॒खम्⁠। ए॒व⁠। पूर्व॑या⁠। आ॒लभ॑त॒ इत्या᳚—लभ॑ते⁠। यज॑ते⁠। उत्त॑र॒येत्युत्—त॒र॒या॒⁠। दे॒वताः᳚⁠। ए॒व⁠। पूर्व॑या⁠। अ॒व॒रु॒न्ध इत्य॑व—रु॒न्धे⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। उत्त॑र॒येत्युत्—त॒र॒या॒⁠। दे॒व॒लो॒कमिति॑ देव—लो॒कम्⁠। ए॒व⁠। २९ (५०) [२९] पूर्व॑या⁠। अ॒भि॒जय॒तीत्य॑भि—जय॑ति⁠। म॒नु॒ष्य॒लो॒कमिति॑ मनुष्य—लो॒कम्⁠। उत्त॑र॒येत्युत्—त॒र॒या॒⁠। भूय॑सः⁠। य॒ज्ञ॒क्र॒तूनिति॑ यज्ञ—क्र॒तून्⁠। उपेति॑⁠। ए॒ति॒⁠। ए॒षा⁠। वै⁠। सु॒मना॒ इति॑ सु—मनाः᳚⁠। नाम॑⁠। इष्टिः॑⁠। यम्⁠। अ॒द्य⁠। ई॒जा॒नम्⁠। प॒श्चात्⁠। च॒न्द्रमाः᳚⁠। अ॒भीति॑⁠। उ॒देतीत्यु॑त्—एति॑⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। लो॒के⁠। अर्द्धु॑कम्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। दा॒ख्‍षा॒य॒ण॒य॒ज्ञेनेति॑ दाख्‍षायण—य॒ज्ञेन॑⁠। सु॒व॒र्गका॑म॒ इति॑ सुव॒र्ग—का॒मः॒⁠। य॒जे॒त॒⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। समिति॑⁠। न॒ये॒त्⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒ण्येति॑ मैत्रा—व॒रु॒ण्या⁠। आ॒मिख्‍ष॑या⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। य॒जे॒त॒⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒से॒⁠। वै⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। सु॒तः⁠। तेषा᳚म्⁠। ए॒तम्⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒समित्य॑र्द्ध—मा॒सम्⁠। प्रसु॑त॒ इति॒ प्र—सु॒तः॒⁠। तेषा᳚म्⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒णीति॑ मैत्रा—व॒रु॒णी⁠। व॒शा⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। अ॒नू॒ब॒न्ध्येत्य॑नु—ब॒न्ध्या᳚⁠। यत्⁠। ३० (५०) [३०] पू॒र्वे॒द्युः⁠। यज॑ते⁠। वेदि᳚म्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। यत्⁠। व॒थ्सान्⁠। अ॒पा॒क॒रोतीत्य॑प—आ॒क॒रोति॑⁠। स॒दो॒ह॒वि॒र्द्धा॒ने इति॑ सदः—ह॒वि॒र्द्धा॒ने⁠। ए॒व⁠। समिति॑⁠। मि॒नो॒ति॒⁠। यत्⁠। यज॑ते⁠। दे॒वैः⁠। ए॒व⁠। सु॒त्याम्⁠। समिति॑⁠। पा॒द॒य॒ति॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒समित्य॑र्द्ध—मा॒सम्⁠। स॒ध॒माद॒मिति॑ सध—माद᳚म्⁠। दे॒वैः⁠। सोम᳚म्⁠। पि॒ब॒ति॒⁠। यत्⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒ण्येति॑ मैत्रा—व॒रु॒ण्या⁠। आ॒मिख्‍ष॑या⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। यज॑ते⁠। या⁠। ए॒व⁠। अ॒सौ⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। व॒शा⁠। अ॒नू॒ब॒न्ध्येत्य॑नु—ब॒न्ध्या᳚⁠। सो इति॑⁠। ए॒व⁠। ए॒षा⁠। ए॒तस्य॑⁠। सा॒ख्‍षादिति॑ स—अ॒ख्‍षात्⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। दे॒वान्⁠। अ॒भ्यारो॑ह॒तीत्य॑भि—आरो॑हति⁠। यः⁠। ए॒षा॒म्⁠। य॒ज्ञम्⁠। ३१ (५०) [३१] अ॒भ्या॒रोह॒तीत्य॑भि—आ॒रोह॑ति⁠। यथा᳚⁠। खलु॑⁠। वै⁠। श्रेया॑न्⁠। अ॒भ्यारू॑ढ॒ इत्य॑भि—आरू॑ढः⁠। का॒मय॑ते⁠। तथा᳚⁠। क॒रो॒ति॒⁠। यदि॑⁠। अ॒व॒विद्ध्य॒तीत्य॑व—विद्ध्य॑ति⁠। पापी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यदि॑⁠। न⁠। अ॒व॒विद्ध्य॒तीत्य॑व—विद्ध्य॑ति⁠। स॒दृङ्ङिति॑ स—दृङ्⁠। व्या॒वृत्का॑म॒ इति॑ व्या॒वृत्—का॒मः॒⁠। ए॒तेन॑⁠। य॒ज्ञेन॑⁠। य॒जे॒त॒⁠। ख्‍षु॒रप॑वि॒रिति॑ ख्‍षु॒र—प॒विः॒⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। य॒ज्ञः⁠। ता॒जक्⁠। पुण्यः॑⁠। वा॒⁠। भव॑ति⁠। प्रेति॑⁠। वा॒⁠। मी॒य॒ते॒⁠। तस्य॑⁠। ए॒तत्⁠। व्र॒तम्⁠। न⁠। अनृ॑तम्⁠। व॒दे॒त्⁠। न⁠। मा॒ꣳ॒सम्⁠। अ॒श्ञी॒या॒त्⁠। न⁠। स्त्रिय᳚म्⁠। उपेति॑⁠। इ॒या॒त्⁠। न⁠। अ॒स्य॒⁠। पल्पू॑लनेन⁠। वासः॑⁠। प॒ल्पू॒ल॒ये॒युः॒⁠। ए॒तत्⁠। हि⁠। दे॒वाः⁠। सर्व᳚म्⁠। न⁠। कु॒र्वन्ति॑ [३२] (च॒न्द्रमा॒ द्वे दे॑वलो॒कमे॒व यद् य॒ज्ञं प॑ल्पूलयेयुः॒ षट् च॑) ॥५॥
ए॒षः⁠। वै⁠। दे॒व॒र॒थ इति॑ देव—र॒थः⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। इ॒ष्ट्वा⁠। सोमे॑न⁠। यज॑ते⁠। रथ॑स्पष्ट॒ इति॒ रथ॑—स्प॒ष्टे॒⁠। ए॒व⁠। अ॒व॒सान॒ इत्य॑व—साने᳚⁠। वरे᳚⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। अवेति॑⁠। स्य॒ति॒⁠। ए॒तानि॑⁠। वै⁠। अङ्गा॒परू॒ꣳ॒षीत्यङ्गा᳚—परू॑ꣳषि⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। अङ्गा॒परू॒ꣳ॒षीत्यङ्गा᳚—परू॑ꣳषि⁠। ए॒व⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। प्रतीति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒ते इति॑⁠। वै⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। चख्‍षु॑षी॒ इति॑⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। ताभ्या᳚म्⁠। ए॒व⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। अन्विति॑⁠। प॒श्य॒ति॒⁠। ३३ (५०) [३३] ए॒षा⁠। वै⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। विक्रा᳚न्ति॒रिति॒ वि—क्रा॒न्तिः॒⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। ए॒व⁠। विक्रा᳚न्ति॒मिति॒ वि—क्रा॒न्ति॒म्⁠। अनु॑⁠। वीति॑⁠। क्र॒म॒ते॒⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। दे॒व॒यान॒ इति॑ देव—यानः॑⁠। पन्थाः᳚⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। यः⁠। ए॒व⁠। दे॒व॒यान॒ इति॑ देव—यानः॑⁠। पन्थाः᳚⁠। तम्⁠। स॒मारो॑ह॒तीति॑ सं—आरो॑हति⁠। ए॒तौ⁠। वै⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। हरी॒ इति॑⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। यौ⁠। ए॒व⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। हरी॒ इति॑⁠। ताभ्या᳚म्⁠। ३४ (५०) [३४] ए॒व⁠। ए॒भ्यः॒⁠। ह॒व्यम्⁠। व॒ह॒ति॒⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। आ॒स्य᳚म्⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। सा॒ख्‍षादिति॑ स—अ॒ख्‍षात्⁠। ए॒व⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। आ॒स्ये᳚⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। ह॒वि॒र्द्धा॒नीति॑ हविः—धा॒नी⁠। यः⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒स॒या॒जीति॑ दर्‌शपूर्णमास—या॒जी⁠। सा॒यंप्रा॑त॒रिति॑ सा॒यं—प्रा॒तः॒⁠। अ॒ग्नि॒हो॒त्रमित्य॑ग्नि—हो॒त्रम्⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। यज॑ते⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। अह॑रह॒रित्यहः॑—अ॒हः॒⁠। ह॒वि॒र्द्धा॒निना॒मिति॑ हविः—धा॒निना᳚म्⁠। सु॒तः⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। ह॒वि॒र्द्धा॒नीति॑ हविः—धा॒नी⁠। अ॒स्मि॒⁠। इति॑⁠। सर्व᳚म्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। ब॒र्॒‌हि॒ष्य᳚म्⁠। द॒त्तम्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। दे॒वाः⁠। वै⁠। अहः॑⁠। ३५ (५०) [३५] य॒ज्ञिय᳚म्⁠। न⁠। अ॒वि॒न्द॒न्न्⁠। ते⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। अ॒पु॒न॒न्न्⁠। तौ⁠। वै⁠। ए॒तौ⁠। पू॒तौ⁠। मेद्ध्यौ᳚⁠। यत्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒र्॒‌श॒पू॒र्ण॒मा॒साविति॑ दर्‌श—पू॒र्ण॒मा॒सौ⁠। यज॑ते⁠। पू॒तौ⁠। ए॒व⁠। ए॒नौ॒⁠। मेद्ध्यौ᳚⁠। य॒ज॒ते॒⁠। न⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। च॒⁠। पौ॒र्ण॒मा॒स्यामिति॑ पौर्ण—मा॒स्याम्⁠। च॒⁠। स्त्रिय᳚म्⁠। उपेति॑⁠। इ॒या॒त्⁠। यत्⁠। उ॒पे॒यादित्यु॑प—इ॒यात्⁠। निरि॑न्द्रिय॒ इति॒ निः—इ॒न्द्रि॒यः॒⁠। स्या॒त्⁠। सोम॑स्य⁠। वै⁠। राज्ञः॑⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒सस्येत्य॑र्द्ध—मा॒सस्य॑⁠। रात्र॑यः⁠। पत्न॑यः⁠। आ॒स॒न्न्⁠। तासा᳚म्⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑मित्य॑मा—वा॒स्या᳚म्⁠। च॒⁠। पौ॒र्ण॒मा॒सीमिति॑ पौर्ण—मा॒सीम्⁠। च॒⁠। न⁠। उपेति॑⁠। ऐ॒त्⁠। ३६ (५०) [३६] ते इति॑⁠। ए॒न॒म्⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। अ॒न॒ह्ये॒ता॒म्⁠। तम्⁠। यख्‍ष्मः॑⁠। आ॒र्च्छ॒त्⁠। राजा॑नम्⁠। यख्‍ष्मः॑⁠। आ॒र॒त्⁠। इति॑⁠। तत्⁠। रा॒ज॒य॒ख्‍ष्मस्येति॑ राज—य॒ख्‍ष्मस्य॑⁠। जन्म॑⁠। यत्⁠। पापी॑यान्⁠। अभ॑वत्⁠। तत्⁠। पा॒प॒य॒ख्‍ष्मस्येति॑ पाप—य॒ख्‍ष्मस्य॑⁠। यत्⁠। जा॒याभ्या᳚म्⁠। अवि॑न्दत्⁠। तत्⁠। जा॒येन्य॑स्य⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। ए॒तेषा᳚म्⁠। यख्‍ष्मा॑णाम्⁠। जन्म॑⁠। वेद॑⁠। न⁠। ए॒न॒म्⁠। ए॒ते⁠। यख्‍ष्माः᳚⁠। वि॒न्द॒न्ति॒⁠। सः⁠। ए॒ते इति॑⁠। ए॒व⁠। न॒म॒स्यन्न्⁠। उपेति॑⁠। अ॒धा॒व॒त्⁠। ते इति॑⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। वर᳚म्⁠। वृ॒णा॒व॒है॒⁠। आ॒वम्⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। भा॒ग॒धे इति॑ भाग—धे⁠। अ॒सा॒व॒⁠। ३७ (५०) [३७] आ॒वत्⁠। अधीति॑⁠। दे॒वाः⁠। इ॒ज्या॒न्तै॒⁠। इति॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। स॒दृशी॑नाम्⁠। रात्री॑णाम्⁠। अ॒मा॒वा॒स्या॑या॒मित्य॑मा—वा॒स्या॑याम्⁠। च॒⁠। पौ॒र्ण॒मा॒स्यामिति॑ पौर्ण—मा॒स्याम्⁠। च॒⁠। दे॒वाः⁠। इ॒ज्य॒न्ते॒⁠। ए॒ते इति॑⁠। हि⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। भा॒ग॒धे इति॑ भाग—धे⁠। भा॒ग॒धा इति॑ भाग—धाः⁠। अ॒स्मै॒⁠। म॒नु॒ष्याः᳚⁠। भ॒व॒न्ति॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। भू॒तानि॑⁠। ख्‍षुध᳚म्⁠। अ॒घ्न॒न्न्⁠। स॒द्यः⁠। म॒नु॒ष्याः᳚⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒स इत्य॑र्द्ध—मा॒से⁠। दे॒वाः⁠। मा॒सि⁠। पि॒तरः॑⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रे⁠। वन॒स्पत॑यः⁠। तस्मा᳚त्⁠। अह॑रह॒रित्यहः॑—अ॒हः॒⁠। म॒नु॒ष्याः᳚⁠। अश॑नम्⁠। इ॒च्छ॒न्ते॒⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒स इत्य॑र्द्ध—मा॒से⁠। दे॒वाः⁠। इ॒ज्य॒न्ते॒⁠। मा॒सि⁠। पि॒तृभ्य॒ इति॑ पि॒तृ—भ्यः॒⁠। क्रि॒य॒ते॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रे⁠। वन॒स्पत॑यः⁠। फल᳚म्⁠। गृ॒ह्ण॒न्ति॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। हन्ति॑⁠। ख्‍षुध᳚म्⁠। भ्रातृ॑व्यम् [३८] (प॒श्य॒ति॒ ताभ्या॒ मह॑ रै दसाव॒ फल॑ꣳ स॒प्त च॑) ॥६॥
दे॒वाः⁠। वै⁠। न⁠। ऋ॒चि⁠। न⁠। यजु॑षि⁠। अ॒श्र॒य॒न्त॒⁠। ते⁠। साम॑न्न्⁠। ए॒व⁠। अ॒श्र॒य॒न्त॒⁠। हिम्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। साम॑⁠। ए॒व⁠। अ॒कः॒⁠। हिम्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। यत्र॑⁠। ए॒व⁠। दे॒वाः⁠। अश्र॑यन्त⁠। ततः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒न्⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ङ्क्ते॒⁠। हिम्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। वा॒चः⁠। ए॒व⁠। ए॒षः⁠। योगः॑⁠। हिम्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। यज॑मानः⁠। सृ॒ज॒ते॒⁠। त्रिः⁠। प्र॒थ॒माम्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। त्रिः⁠। उ॒त्त॒मामित्यु॑त्—त॒माम्⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। ब॒र्॒‌सम्⁠। ३९ (५०) [३९] न॒ह्य॒ति॒⁠। अप्र॑स्रꣳसा॒येत्यप्र॑—स्र॒ꣳ॒सा॒य॒⁠। सन्त॑त॒मिति॒ सं—त॒त॒म्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। प्रा॒णाना॒मिति॑ प्र—अ॒नाना᳚म्⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। सन्त॑त्या॒ इति॒ सं—त॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। रख्‍ष॑साम्⁠। अप॑हत्या॒ इत्यप॑—ह॒त्यै॒⁠। राथ॑न्तरी॒मिति॒ राथं᳚—त॒री॒म्⁠। प्र॒थ॒माम्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। राथ॑न्तर॒ इति॒ राथं᳚—त॒रः॒⁠। वै⁠। अ॒यम्⁠। लो॒कः⁠। इ॒मम्⁠। ए॒व⁠। लो॒कम्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। त्रिः⁠। वीति॑⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। त्रयः॑⁠। इ॒मे⁠। लो॒काः⁠। इ॒मान्⁠। ए॒व⁠। लो॒कान्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। बार्‌ह॑तीम्⁠। उ॒त्त॒मामित्यु॑त्—त॒माम्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। बार्‌ह॑तः⁠। वै⁠। अ॒सौ⁠। लो॒कः⁠। अ॒मुम्⁠। ए॒व⁠। लो॒कम्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। प्रेति॑⁠। वः॒⁠। ४० (५०) [४०] वाजाः᳚⁠। इति॑⁠। अनि॑रुक्ता॒मित्यनिः॑—उ॒क्ता॒म्⁠। प्रा॒जा॒प॒त्यामिति॑ प्राजा—प॒त्याम्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। य॒ज्ञः⁠। वै⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। ए॒व⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। एति॑⁠। र॒भ॒ते॒⁠। प्रेति॑⁠। वः॒⁠। वाजाः᳚⁠। इति॑⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। अन्न᳚म्⁠। वै⁠। वाजः॑⁠। अन्न᳚म्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। प्रेति॑⁠। वः॒⁠। वाजाः᳚⁠। इति॑⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। प्रा॒चीन᳚म्⁠। रेतः॑⁠। धी॒य॒ते॒⁠। अग्ने᳚⁠। एति॑⁠। या॒हि॒⁠। वी॒तये᳚⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। प्र॒तीचीः᳚⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। जा॒य॒न्ते॒⁠। प्रेति॑⁠। वः॒⁠। वाजाः᳚⁠। ४१ (५०) [४१] इति॑⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। मासाः᳚⁠। वै⁠। वाजाः᳚⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒सा इत्य॑र्द्ध—मा॒साः⁠। अ॒भिद्य॑व॒ इत्य॒भि—द्य॒वः॒⁠। दे॒वाः⁠। ह॒विष्म॑न्तः⁠। गौः⁠। घृ॒ताची᳚⁠। य॒ज्ञः⁠। दे॒वान्⁠। जि॒गा॒ति॒⁠। यज॑मानः⁠। सु॒म्न॒युरिति॑ सुम्न—युः⁠। इ॒दम्⁠। अ॒सि॒⁠। इ॒दम्⁠। अ॒सि॒⁠। इति॑⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। प्रि॒यम्⁠। धाम॑⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। यम्⁠। का॒मये॑त⁠। सर्व᳚म्⁠। आयुः॑⁠। इ॒या॒त्⁠। इति॑⁠। प्रेति॑⁠। वः॒⁠। वाजाः᳚⁠। इति॑⁠। तस्य॑⁠। अ॒नूच्येत्य॑नु—उच्य॑⁠। अग्ने᳚⁠। एति॑⁠। या॒हि॒⁠। वी॒तये᳚⁠। इति॑⁠। सन्त॑त॒मिति॒ सं—त॒त॒म्⁠। उत्त॑र॒मित्युत्—त॒र॒म्⁠। अ॒र्द्ध॒र्चमित्य॑र्द्ध—ऋ॒चम्⁠। एति॑⁠। ल॒भे॒त॒⁠। ४२ (५०) [४२] प्रा॒णेनेति॑ प्र—अ॒नेन॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। अ॒पा॒नमित्य॑प—अ॒नम्⁠। दा॒धा॒र॒⁠। सर्व᳚म्⁠। आयुः॑⁠। ए॒ति॒⁠। यः⁠। वै⁠। अ॒र॒त्निम्⁠। सा॒मि॒धे॒नीना॒मिति॑ सां—इ॒धे॒नीना᳚म्⁠। वेद॑⁠। अ॒र॒त्नौ⁠। ए॒व⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। कु॒रु॒ते॒⁠। अ॒र्द्ध॒र्चावित्य॑र्द्ध—ऋ॒चौ⁠। समिति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। अ॒र॒त्निः⁠। सा॒मि॒धे॒नीना॒मिति॑ सां—इ॒धे॒नीना᳚म्⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। अ॒र॒त्नौ⁠। ए॒व⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। कु॒रु॒ते॒⁠। ऋषे॑र्‌ऋषे॒रित्यृषेः᳚—ऋ॒षेः॒⁠। वै⁠। ए॒ताः⁠। निर्मि॑ता॒ इति॒ निः—मि॒ताः॒⁠। यत्⁠। सा॒मि॒धे॒न्य॑ इति॑ सां—इ॒धे॒न्यः॑⁠। ताः⁠। यत्⁠। अस॑य्ँयुक्ता॒ इत्यसं᳚—यु॒क्ताः॒⁠। स्युः⁠। प्र॒जयेति॑ प्र—जया᳚⁠। प॒शुभि॒रिति॑ प॒शु—भिः॒⁠। यज॑मानस्य⁠। वीति॑⁠। ति॒ष्ठे॒र॒न्न्⁠। अ॒र्द्ध॒र्चावित्य॑र्द्ध—ऋ॒चौ⁠। समिति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। समिति॑⁠। यु॒न॒क्ति॒⁠। ए॒व⁠। ए॒नाः॒⁠। ताः⁠। अ॒स्मै॒⁠। सय्ँयु॑क्ता॒ इति॒ सं—यु॒क्ताः॒⁠। अव॑रुद्धा॒ इत्यव॑—रु॒द्धाः॒⁠। सर्वा᳚म्⁠। आ॒शिष॒मित्या᳚—शिष᳚म्⁠। दु॒ह्रे॒ [४३] (ब॒र्‌सं वो॑ जायन्ते॒ प्रवो॒ वाजा॑ लभेत दधाति॒ सं दश॑ च) ॥७॥
अय॑ज्ञः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यः⁠। अ॒सा॒मा⁠। अग्ने᳚⁠। एति॑⁠। या॒हि॒⁠। वी॒तये᳚⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। र॒थ॒न्त॒रस्येति॑ रथं—त॒रस्य॑⁠। ए॒षः⁠। वर्णः॑⁠। तम्⁠। त्वा॒⁠। स॒मिद्भि॒रिति॑ स॒मित्—भिः॒⁠। अ॒ङ्गि॒रः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। वा॒म॒दे॒व्यस्येति॑ वाम—दे॒व्यस्य॑⁠। ए॒षः⁠। वर्णः॑⁠। बृ॒हत्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। सु॒वीर्य॒मिति॑ सु—वीर्य᳚म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। बृ॒ह॒तः⁠। ए॒षः⁠। वर्णः॑⁠। यत्⁠। ए॒तम्⁠। तृ॒चम्⁠। अ॒न्वाहेत्य॑नु—आह॑⁠। य॒ज्ञम्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। साम॑न्वन्त॒मिति॒ साम॑न्न्—व॒न्त॒म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। अ॒ग्निः⁠। अ॒मुष्मि॑न्न्⁠। लो॒के⁠। आसी᳚त्⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। तौ⁠। इ॒मौ⁠। लो॒कौ⁠। अशा᳚न्तौ⁠। ४४ (५०) [४४] आ॒स्ता॒म्⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। एति॑⁠। इ॒त॒⁠। इ॒मौ⁠। वि⁠। परीति॑⁠। ऊ॒हा॒म॒⁠। इति॑⁠। अग्ने᳚⁠। एति॑⁠। या॒हि॒⁠। वी॒तये᳚⁠। इति॑⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। लो॒के⁠। अ॒ग्निम्⁠। अ॒द॒धुः॒⁠। बृ॒हत्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। सु॒वीर्य॒मिति॑ सु—वीर्य᳚म्⁠। इति॑⁠। अ॒मुष्मि॑न्न्⁠। लो॒के⁠। आ॒दि॒त्यम्⁠। ततः॑⁠। वै⁠। इ॒मौ⁠। लो॒कौ⁠। अ॒शा॒म्य॒ता॒म्⁠। यत्⁠। ए॒वम्⁠। अ॒न्वाहेत्य॑नु—आह॑⁠। अ॒नयोः᳚⁠। लो॒कयोः᳚⁠। शान्त्यै᳚⁠। शाम्य॑तः⁠। अ॒स्मै॒⁠। इ॒मौ⁠। लो॒कौ⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। पञ्च॑द॒शेति॒ पञ्च॑—द॒श॒⁠। सा॒मि॒धे॒नीरिति॑ सां—इ॒धे॒नीः⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। पञ्च॑द॒शेति॒ पञ्च॑—द॒श॒⁠। ४५ (५०) [४५] वै⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒सस्येत्य॑र्द्ध—मा॒सस्य॑⁠। रात्र॑यः⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒स॒श इत्य॑र्द्धमास—शः⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। आ॒प्य॒ते॒⁠। तासा᳚म्⁠। त्रीणि॑⁠। च॒⁠। श॒तानि॑⁠। ष॒ष्टिः⁠। च॒⁠। अ॒ख्‍षरा॑णि⁠। ताव॑तीः⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। रात्र॑यः⁠। अ॒ख्‍ष॒र॒श इत्य॑ख्‍षर—शः⁠। ए॒व⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। आ॒प्नो॒ति॒⁠। नृ॒मेध॒ इति॑ नृ—मेधः॑⁠। च॒⁠। परु॑च्छेपः⁠। च॒⁠। ब्र॒ह्म॒वाद्य॒मिति॑ ब्रह्म—वाद्य᳚म्⁠। अ॒व॒दे॒ता॒म्⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। दारौ᳚⁠। आ॒र्द्रे⁠। अ॒ग्निम्⁠। ज॒न॒या॒व॒⁠। य॒त॒रः⁠। नौ॒⁠। ब्रह्मी॑यान्⁠। इति॑⁠। नृ॒मेध॒ इति॑ नृ—मेधः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒व॒द॒त्⁠। सः⁠। धू॒मम्⁠। अ॒ज॒न॒य॒त्⁠। परु॑च्छेपः⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒व॒द॒त्⁠। सः⁠। अ॒ग्निम्⁠। अ॒ज॒न॒य॒त्⁠। ऋषे᳚⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। ४६ (५०) [४६] यत्⁠। स॒माव॑त्⁠। वि॒द्व⁠। क॒था⁠। त्वम्⁠। अ॒ग्निम्⁠। अजी॑जनः⁠। न⁠। अ॒हम्⁠। इति॑⁠। सा॒मि॒धे॒नीना॒मिति॑ सां—इ॒धे॒नीना᳚म्⁠। ए॒व⁠। अ॒हम्⁠। वर्ण᳚म्⁠। वे॒द॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। यत्⁠। घृ॒तव॒दिति॑ घृ॒त—व॒त्⁠। प॒दम्⁠। अ॒नू॒च्यत॒ इत्य॑नु—उ॒च्यते᳚⁠। सः⁠। आ॒सा॒म्⁠। वर्णः॑⁠। तम्⁠। त्वा॒⁠। स॒मिद्भि॒रिति॑ स॒मित्—भिः॒⁠। अ॒ङ्गि॒रः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। सा॒मि॒धे॒नीष्विति॑ सां—इ॒धे॒नीषु॑⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। ज्योतिः॑⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। स्त्रियः॑⁠। तेन॑⁠। यत्⁠। ऋचः॑⁠। स्त्रियः॑⁠। तेन॑⁠। यत्⁠। गा॒य॒त्रियः॑⁠। स्त्रियः॑⁠। तेन॑⁠। यत्⁠। सा॒मि॒धे॒न्य॑ इति॑ सां—इ॒धे॒न्यः॑⁠। वृष॑ण्वती॒मिति॒ वृष॑ण्—व॒ती॒म्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ४७ (५०) [४७] तेन॑⁠। पुꣴस्व॑तीः⁠। तेन॑⁠। सेन्द्रा॒ इति॒ स—इ॒न्द्राः॒⁠। तेन॑⁠। मि॒थु॒नाः⁠। अ॒ग्निः⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। दू॒तः⁠। आसी᳚त्⁠। उ॒शना᳚⁠। का॒व्यः⁠। असु॑राणाम्⁠। तौ⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। प्र॒श्ञम्⁠। ऐ॒ता॒म्⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒ग्निम्⁠। दू॒तम्⁠। वृ॒णी॒म॒हे॒⁠। इति॑⁠। अ॒भीति॑⁠। प॒र्याव॑र्त॒तेति॑ परि—आव॑र्तत⁠। ततः॑⁠। दे॒वाः⁠। अभ॑वन्न्⁠। परेति॑⁠। असु॑राः⁠। यस्य॑⁠। ए॒वम्⁠। वि॒दुषः॑⁠। अ॒ग्निम्⁠। दू॒तम्⁠। वृ॒णी॒म॒हे॒⁠। इति॑⁠। अ॒न्वाहेत्य॑नु—आह॑⁠। भव॑ति⁠। आ॒त्मना᳚⁠। परेति॑⁠। अ॒स्य॒⁠। भ्रातृ॑व्यः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒द्ध्व॒रव॑ती॒मित्य॑द्ध्व॒र—व॒ती॒म्⁠। अन्वति॑⁠। आ॒ह॒⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। ए॒व⁠। ए॒तया᳚⁠। ४८ (५०) [४८] ध्व॒र॒ति॒⁠। शो॒चिष्के॑श॒ इति॑ शो॒चिः—के॒शः॒⁠। तम्⁠। ई॒म॒हे॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। प॒वित्र᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒तत्⁠। यज॑मानम्⁠। ए॒व⁠। ए॒तया᳚⁠। प॒व॒य॒ति॒⁠। समि॑द्ध॒ इति॒ सं—इ॒द्धः॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। आ॒हु॒तेत्या᳚—हु॒त॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। प॒रि॒धिमिति॑ परि—धिम्⁠। ए॒व⁠। ए॒तम्⁠। परीति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। अस्क॑न्दाय⁠। यत्⁠। अतः॑⁠। ऊ॒र्द्ध्वम्⁠। अ॒भ्या॒द॒द्ध्यादित्य॑भि—आ॒द॒द्ध्यात्⁠। यथा᳚⁠। ब॒हिः॒प॒रि॒धीति॑ बहिः—प॒रि॒धि⁠। स्कन्द॑ति⁠। ता॒दृक्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। त्रयः॑⁠। वै⁠। अ॒ग्नयः॑⁠। ह॒व्य॒वाह॑न॒ इति॑ हव्य—वाह॑नः⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। क॒व्य॒वाह॑न॒ इति॑ कव्य—वाह॑नः⁠। पि॒तृ॒णाम्⁠। स॒हर॑ख्‍षा॒ इति॑ स॒ह—र॒ख्‍षाः॒⁠। असु॑राणाम्⁠। ते⁠। ए॒तर्‌हि॑⁠। एति॑⁠। श॒ꣳ॒स॒न्ते॒⁠। माम्⁠। व॒रि॒ष्य॒ते॒⁠। माम्⁠। ४९ (५०) [४९] इति॑⁠। वृ॒णी॒द्ध्वम्⁠। ह॒व्य॒वाह॑न॒मिति॑ हव्य—वाह॑नम्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। यः⁠। ए॒व⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। तम्⁠। वृ॒णी॒ते॒⁠। आ॒र॒षे॒यम्⁠। वृ॒णी॒ते॒⁠। बन्धोः᳚⁠। ए॒व⁠। न⁠। ए॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। सन्त॑त्या॒ इति॒ सं—त॒त्यै॒⁠। प॒रस्ता᳚त्⁠। अ॒र्वाचः॑⁠। वृ॒णी॒ते॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। प॒रस्ता᳚त्⁠। अ॒र्वाञ्चः॑⁠। म॒नु॒ष्या॑न्⁠। पि॒तरः॑⁠। अनु॑⁠। प्रेति॑⁠। पि॒प॒ते॒ [५०] (अशा᳚न्ता वाह॒ पञ्च॑दशा ब्रवी॒ दन्वा॑है॒ तया॑ वरिष्यते॒ मा मेका॒न्नत्रि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥८॥
अग्ने᳚⁠। म॒हान्⁠। अ॒सि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। म॒हान्⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। ब्रा॒ह्म॒ण॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ब्रा॒ह्म॒णः⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। भा॒र॒त॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ए॒षः⁠। हि⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। ह॒व्यम्⁠। भर॑ति⁠। दे॒वेद्ध॒ इति॑ दे॒व—इ॒द्धः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। दे॒वाः⁠। हि⁠। ए॒तम्⁠। ऐन्ध॑त⁠। मन्वि॑द्ध॒ इति॒ मनु॑—इ॒द्धः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। मनुः॑⁠। हि⁠। ए॒तम्⁠। उत्त॑र॒ इत्युत्—त॒रः॒⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। ऐन्ध॑⁠। ऋषि॑ष्टुत॒ इत्यृषि॑—स्तु॒तः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ऋष॑यः⁠। हि⁠। ए॒तम्⁠। अस्तु॑वन्न्⁠। विप्रा॑नुमदित॒ इति॒ विप्र॑—अ॒नु॒म॒दि॒तः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ५१ (५०) [५१] विप्राः᳚⁠। हि⁠। ए॒ते⁠। यत्⁠। शु॒श्रु॒वाꣳसः॑⁠। क॒वि॒श॒स्त इति॑ कवि—श॒स्तः⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। क॒वयः॑⁠। हि⁠। ए॒ते⁠। यत्⁠। शु॒श्रु॒वाꣳसः॑⁠। ब्रह्म॑सꣳशित॒ इति॒ ब्रह्म॑—स॒ꣳ॒शि॒तः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ब्रह्म॑सꣳशित॒ इति॒ ब्रह्म॑—स॒ꣳ॒शि॒तः॒⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। घृ॒ताह॑वन॒ इति॑ घृ॒त—आ॒ह॒व॒नः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। घृ॒ता॒हु॒तिरिति॑ घृत—आ॒हु॒तिः⁠। हि⁠। अ॒स्य॒⁠। प्रि॒यत॒मेति॑ प्रि॒य—त॒मा॒⁠। प्र॒णीरिति॑ प्र—नीः⁠। य॒ज्ञाना᳚म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। प्र॒णीरिति॑ प्र—नीः⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। य॒ज्ञाना᳚म्⁠। र॒थीः⁠। अ॒द्ध्व॒राणा᳚म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ए॒षः⁠। हि⁠। दे॒व॒र॒थ इति॑ देव—र॒थः⁠। अ॒तूर्तः॑⁠। होता᳚⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। न⁠। हि⁠। ए॒तम्⁠। कः⁠। च॒न⁠। ५२ (५०) [५२] तर॑ति⁠। तूर्णिः॑⁠। ह॒व्य॒वाडिति॑ हव्य—वाट्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। सर्व᳚म्⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। तर॑ति⁠। आस्पात्र᳚म्⁠। जु॒हूः⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। जु॒हूः⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। च॒म॒सः⁠। दे॒व॒पान॒ इति॑ देव—पानः॑⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। च॒म॒सः⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। दे॒व॒पान॒ इति॑ देव—पानः॑⁠। अ॒रान्⁠। इ॒व॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। ने॒मिः⁠। दे॒वान्⁠। त्वम्⁠। प॒रि॒भूरिति॑ परि—भूः⁠। अ॒सि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। दे॒वान्⁠। हि⁠। ए॒षः⁠। प॒रि॒भूरिति॑ परि—भूः⁠। यत्⁠। ब्रू॒यात्⁠। एति॑⁠। व॒ह॒⁠। दे॒वान्⁠। दे॒व॒य॒त इति॑ देव—य॒ते⁠। यज॑मानाय⁠। इति॑⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। अ॒स्मै॒⁠। ५३ (५०) [५३] ज॒न॒ये॒त्⁠। एति॑⁠। व॒ह॒⁠। दे॒वान्⁠। यज॑मानाय⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। यज॑मानम्⁠। ए॒व⁠। ए॒तेन॑⁠। व॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। अ॒ग्निम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। एति॑⁠। व॒ह॒⁠। सोम᳚म्⁠। एति॑⁠। व॒ह॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। दे॒वताः᳚⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। य॒था॒पू॒र्वमिति॑ यथा—पू॒र्वम्⁠। उपेति॑⁠। ह्व॒य॒ते॒⁠। एति॑⁠। च॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। दे॒वान्⁠। वह॑⁠। सु॒यजेति॑ सु—यजा᳚⁠। च॒⁠। य॒ज॒⁠। जा॒त॒वे॒द॒ इति॑ जात—वे॒दः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। अ॒ग्निम्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। समिति॑⁠। श्य॒ति॒⁠। सः⁠। अ॒स्य॒⁠। सꣳशि॑त॒ इति॒ सं—शि॒तः॒⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। ह॒व्यम्⁠। व॒ह॒ति॒⁠। अ॒ग्निः⁠। होता᳚⁠। ५४ (५०) [५४] इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। अ॒ग्निः⁠। वै⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। होता᳚⁠। यः⁠। ए॒व⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। होता᳚⁠। तम्⁠। वृ॒णी॒ते॒⁠। स्मः⁠। व॒यम्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। आ॒त्मान᳚म्⁠। ए॒व⁠। स॒त्त्वमिति॑ सत्—त्वम्⁠। ग॒म॒य॒ति॒⁠। सा॒धु⁠। ते॒⁠। य॒ज॒मा॒न॒⁠। दे॒वता᳚⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। आ॒शिष॒मित्या᳚—शिष᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒ताम्⁠। एति॑⁠। शा॒स्ते॒⁠। यत्⁠। ब्रू॒यात्⁠। यः⁠। अ॒ग्निम्⁠। होता॑रम्⁠। अवृ॑थाः⁠। इति॑⁠। अ॒ग्निना᳚⁠। उ॒भ॒यतः॑⁠। यज॑मानम्⁠। परीति॑⁠। गृ॒ह्णी॒या॒त्⁠। प्र॒मायु॑क॒ इति॑ प्र—मायु॑कः⁠। स्या॒त्⁠। य॒ज॒मा॒न॒दे॒व॒त्येति॑ यजमान—दे॒व॒त्या᳚⁠। वै⁠। जु॒हूः⁠। भ्रा॒तृ॒व्य॒दे॒व॒त्येति॑ भ्रातृव्य—दे॒व॒त्या᳚⁠। उ॒प॒भृदित्यु॑प—भृत्⁠। ५५ (५०) [५५] यत्⁠। द्वे इति॑⁠। इ॒व॒⁠। ब्रू॒यात्⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। अ॒स्मै॒⁠। ज॒न॒ये॒त्⁠। घृ॒तव॑ती॒मिति॑ घृ॒त—व॒ती॒म्⁠। अ॒द्ध्व॒र्यो॒ इति॑⁠। स्रुच᳚म्⁠। एति॑⁠। अ॒स्य॒स्व॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। यज॑मानम्⁠। ए॒व⁠। ए॒तेन॑⁠। व॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। दे॒वा॒युव॒मिति॑ देव—युव᳚म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। दे॒वान्⁠। हि⁠। ए॒षा⁠। अव॑ति⁠। वि॒श्ववा॑रा॒मिति॑ वि॒श्व—वा॒रा॒म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। विश्व᳚म्⁠। हि⁠। ए॒षा⁠। अव॑ति⁠। ईडा॑महै⁠। दे॒वान्⁠। ई॒डेन्या॑न्⁠। न॒म॒स्याम॑⁠। न॒म॒स्या॑न्⁠। यजा॑म⁠। य॒ज्ञिया॑न्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। म॒नु॒ष्याः᳚⁠। वै⁠। ई॒डेन्याः᳚⁠। पि॒तरः॑⁠। न॒म॒स्याः᳚⁠। दे॒वाः⁠। य॒ज्ञियाः᳚⁠। दे॒वताः᳚⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। य॒था॒भा॒गमिति॑ यथा—भा॒गम्⁠। य॒ज॒ति॒ [५६] (विप्रा॑नुमदित॒ इत्या॑ह च॒ना ऽस्मै॒ होतो॑ प॒भृद् दे॒वता॑ ए॒व त्रीणि॑ च) ॥९॥
त्रीन्⁠। तृ॒चान्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। रा॒ज॒न्य॑स्य⁠। त्रयः॑⁠। वै⁠। अ॒न्ये⁠। रा॒ज॒न्या᳚त्⁠। पुरु॑षाः⁠। ब्रा॒ह्म॒णः⁠। वैश्यः॑⁠। शू॒द्रः⁠। तान्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। अनु॑का॒नित्यनु॑—का॒न्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। पञ्च॑द॒शेति॒ पञ्च॑—द॒श॒⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। रा॒ज॒न्य॑स्य⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। वै⁠। रा॒ज॒न्यः॑⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। स्तोमे᳚⁠। प्रतीति॑⁠। स्था॒प॒य॒ति॒⁠। त्रि॒ष्टुभा᳚⁠। परीति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। वै⁠। त्रि॒ष्टुक्⁠। इ॒न्द्रि॒यका॑म॒ इती᳚न्द्रि॒य—का॒मः॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। रा॒ज॒न्यः॑⁠। य॒ज॒ते॒⁠। त्रि॒ष्टुभा᳚⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। परीति॑⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। यदि॑⁠। का॒मये॑त⁠। ५७ (५०) [५७] ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। अ॒स्तु॒⁠। इति॑⁠। गा॒य॒त्रि॒या⁠। परीति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। वै⁠। गा॒य॒त्री⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। स॒प्तद॒शेति॑ स॒प्त—द॒श॒⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। वैश्य॑स्य⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। वै⁠। वैश्यः॑⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। स्तोमे᳚⁠। प्रतीति॑⁠। स्था॒प॒य॒ति॒⁠। जग॑त्या⁠। परीति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। जाग॑ताः⁠। वै⁠। प॒शवः॑⁠। प॒शुका॑म॒ इति॑ प॒शु—का॒मः॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। वैश्यः॑⁠। य॒ज॒ते॒⁠। जग॑त्या⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प॒शून्⁠। परीति॑⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। एक॑विꣳशति॒मित्येक॑—वि॒ꣳ॒श॒ति॒म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। प्र॒ति॒ष्ठाका॑म॒स्येति॑ प्रति॒ष्ठा—का॒म॒स्य॒⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। स्तोमा॑नाम्⁠। प्र॒ति॒ष्ठेति॑ प्रति—स्था⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। ५८ (५०) [५८] चतु॑र्विꣳशति॒मिति॒ चतुः॑—वि॒ꣳ॒श॒ति॒म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒सका॑म॒स्येति॑ ब्रह्मवर्च॒स—का॒म॒स्य॒⁠। चतु॑र्विꣳशत्यख्‍ष॒रेति॒ चतु॑र्विꣳशति—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। गा॒य॒त्री⁠। गा॒य॒त्री⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। गा॒य॒त्रि॒या⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। त्रि॒ꣳ॒शत᳚म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। अन्न॑काम॒स्येत्यन्न॑—का॒म॒स्य॒⁠। त्रि॒ꣳ॒शद॑ख्‍ष॒रेति॑ त्रि॒ꣳ॒शत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। वि॒राडिति॑ वि—राट्⁠। अन्न᳚म्⁠। वि॒राडिति॑ वि—राट्⁠। वि॒राजेति॑ वि—राजा᳚⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। द्वात्रि॑ꣳशतम्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। प्र॒ति॒ष्ठाका॑म॒स्येति॑ प्रति॒ष्ठा—का॒म॒स्य॒⁠। द्वात्रि॑ꣳशदख्‍ष॒रेति॒ द्वात्रि॑ꣳशत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। अ॒नु॒ष्टुगित्य॑नु—स्तुक्⁠। अ॒नु॒ष्टुबित्य॑नु—स्तुप्⁠। छन्द॑साम्⁠। प्र॒ति॒ष्ठेति॑ प्रति—स्था⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। षट्त्रि॑ꣳशत॒मिति॒ षट्—त्रि॒ꣳ॒श॒त॒म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। प॒शुका॑म॒स्येति॑ प॒शु—का॒म॒स्य॒⁠। षट्त्रि॑ꣳशदख्‍ष॒रेति॒ षट्त्रि॑ꣳशत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। बृ॒ह॒ती⁠। बार्‌ह॑ताः⁠। प॒शवः॑⁠। बृ॒ह॒त्या⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प॒शून्⁠। ५९ (५०) [५९] अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। चतु॑श्चत्वारिꣳशत॒मिति॒ चतुः॑—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श॒त॒म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। इ॒न्द्रि॒यका॑म॒स्येती᳚न्द्रि॒य—का॒म॒स्य॒⁠। चतु॑श्चत्वारिꣳशदख्‍ष॒रेति॒ चतु॑श्चत्वारिꣳशत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। त्रि॒ष्टुक्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। त्रि॒ष्टुप्⁠। त्रि॒ष्टुभा᳚⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अ॒ष्टाच॑त्वारिꣳशत॒मित्य॒ष्टा—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श॒त॒म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। प॒शुका॑म॒स्येति॑ प॒शु—का॒म॒स्य॒⁠। अ॒ष्टाच॑त्वारिꣳशदख्‍ष॒रेत्य॒ष्टाच॑त्वारिꣳशत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। जग॑ती⁠। जाग॑ताः⁠। प॒शवः॑⁠। जग॑त्या⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प॒शून्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। सर्वा॑णि⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। ब॒हु॒या॒जिन॒ इति॑ बहु—या॒जिनः॑⁠। सर्वा॑णि⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। अव॑रुद्धा॒नीत्यव॑—रु॒द्धा॒नि॒⁠। यः⁠। ब॒हु॒या॒जीति॑ बहु—या॒जी⁠। अप॑रिमित॒मित्यप॑रि—मि॒त॒म्⁠। अन्विति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। अप॑रिमित॒स्येत्यप॑रि—मि॒त॒स्य॒⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒ [६०] (का॒मये॑त॒ प्रति॑ष्ठित्यै प॒शून्थ् स॒प्तच॑त्वारिꣳशच्च) ॥१०॥
निवी॑त॒मिति॒ नि—वी॒त॒म्⁠। म॒नु॒ष्या॑णाम्⁠। प्रा॒ची॒ना॒वी॒तमिति॑ प्राचीन—आ॒वी॒तम्⁠। पि॒तृ॒णाम्⁠। उप॑वीत॒मित्युप॑—वी॒त॒म्⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। उपेति॑⁠। व्य॒य॒ते॒⁠। दे॒व॒ल॒ख्‍ष्ममिति॑ देव—ल॒ख्‍ष्मम्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। कु॒रु॒ते॒⁠। तिष्ठ॑न्न्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। तिष्ठ॑न्न्⁠। हि⁠। आश्रु॑ततर॒मित्याश्रु॑त—त॒र॒म्⁠। वद॑ति⁠। तिष्ठ॑न्न्⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। अ॒भिजि॑त्या॒ इत्य॒भि—जि॒त्यै॒⁠। आसी॑नः⁠। य॒ज॒ति॒⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। ए॒व⁠। लो॒के⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒ति॒⁠। यत्⁠। क्रौ॒ञ्चम्⁠। अ॒न्वाहेत्य॑नु—आह॑⁠। आ॒सु॒रम्⁠। तत्⁠। यत्⁠। म॒न्द्रम्⁠। मा॒नु॒षम्⁠। तत्⁠। यत्⁠। अ॒न्त॒रा⁠। तत्⁠। सदे॑व॒मिति॒ स—दे॒व॒म्⁠। अ॒न्त॒रा⁠। अ॒नूच्य॒मित्य॑नु—उच्य᳚म्⁠। स॒दे॒व॒त्वायेति॑ सदेव—त्वाय॑⁠। वि॒द्वाꣳसः॑⁠। वै⁠। ६१ (५०) [६१] पु॒रा⁠। होता॑रः⁠। अ॒भू॒व॒न्न्⁠। तस्मा᳚त्⁠। विधृ॑ता॒ इति॒ वि—धृ॒ताः॒⁠। अद्ध्वा॑नः⁠। अभू॑वन्न्⁠। न⁠। पन्था॑नः⁠। समिति॑⁠। अ॒रु॒ख्‍ष॒न्न्⁠। अ॒न्त॒र्वे॒दीत्य॑न्तः—वे॒दि⁠। अ॒न्यः⁠। पादः॑⁠। भव॑ति⁠। ब॒हि॒र्वे॒दीति॑ बहिः—वे॒दि⁠। अ॒न्यः⁠। अथ॑⁠। अन्विति॑⁠। आ॒ह॒⁠। अद्ध्व॑नाम्⁠। विधृ॑त्या॒ इति॒ वि—धृ॒त्यै॒⁠। प॒थाम्⁠। अस॑ꣳरोहा॒येत्यसं᳚—रो॒हा॒य॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। भू॒तम्⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। भ॒वि॒ष्यत्⁠। च॒⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। परि॑मित॒मिति॒ परि॑—मि॒त॒म्⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। अप॑रिमित॒मित्यप॑रि—मि॒त॒म्⁠। च॒⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। ग्रा॒म्यान्⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। प॒शून्⁠। आ॒र॒ण्यान्⁠। च॒⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। ६२ (५०) [६२] दे॒व॒लो॒कमिति॑ देव—लो॒कम्⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। म॒नु॒ष्य॒लो॒कमिति॑ मनुष्य—लो॒कम्⁠। च॒⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। दे॒वाः⁠। वै⁠। सा॒मि॒धे॒नीरिति॑ सां—इ॒धे॒नीः⁠। अ॒नूच्येत्य॑नु—उच्य॑⁠। य॒ज्ञम्⁠। न⁠। अन्विति॑⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। तू॒ष्णीम्⁠। आ॒घा॒रमित्या᳚—घा॒रम्⁠। एति॑⁠। अ॒घा॒र॒य॒त्⁠। ततः॑⁠। वै⁠। दे॒वाः⁠। य॒ज्ञम्⁠। अन्विति॑⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। यत्⁠। तू॒ष्णीम्⁠। आ॒घा॒रमित्या᳚—घा॒रम्⁠। आ॒घा॒रय॒तीत्या᳚—घा॒रय॑ति⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। अनु॑ख्यात्या॒ इत्यनु॑—ख्या॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। सा॒मि॒धे॒नीरिति॑ सां—इ॒धे॒नीः⁠। ए॒व⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒न॒क्ति॒⁠। अलू᳚ख्‍षः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। अथो॒ इति॑⁠। त॒र्पय॑ति⁠। ए॒व⁠। ए॒नाः॒⁠। तृप्य॑ति⁠। प्र॒जयेति॑ प्र—जया᳚⁠। प॒शुभि॒रिति॑ प॒शु—भिः॒⁠। ६३ (५०) [६३] यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। यत्⁠। एक॑या⁠। आ॒घा॒रये॒दित्या᳚—घा॒रये᳚त्⁠। एका᳚म्⁠। प्री॒णी॒या॒त्⁠। यत्⁠। द्वाभ्या᳚म्⁠। द्वे इति॑⁠। प्री॒णी॒या॒त्⁠। यत्⁠। ति॒सृभि॒रिति॑ ति॒सृ—भिः॒⁠। अतीति॑⁠। तत्⁠। रे॒च॒ये॒त्⁠। मन॑सा⁠। एति॑⁠। घा॒र॒य॒ति॒⁠। मन॑सा⁠। हि⁠। अना᳚प्तम्⁠। आ॒प्यते᳚⁠। ति॒र्यञ्च᳚म्⁠। एति॑⁠। घा॒र॒य॒ति॒⁠। अछं॑बट्कार॒मित्यछं॑बट्—का॒र॒म्⁠। वाक्⁠। च॒⁠। मनः॑⁠। च॒⁠। आ॒र्ती॒ये॒ता॒म्⁠। अ॒हम्⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। ह॒व्यम्⁠। व॒हा॒मि॒⁠। इति॑⁠। वाक्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। अ॒हम्⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। इति॑⁠। मनः॑⁠। तौ⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। प्र॒श्ञम्⁠। ऐ॒ता॒म्⁠। सः⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। ६४ (५०) [६४] प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। दू॒तीः⁠। ए॒व⁠। त्वम्⁠। मन॑सः⁠। अ॒सि॒⁠। यत्⁠। हि⁠। मन॑सा⁠। ध्याय॑ति⁠। तत्⁠। वा॒चा⁠। वद॑ति⁠। इति॑⁠। तत्⁠। खलु॑⁠। तुभ्य᳚म्⁠। न⁠। वा॒चा⁠। जु॒ह॒व॒न्न्⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। मन॑सा⁠। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जा—प॒त॒ये॒⁠। जु॒ह्व॒ति॒⁠। मनः॑⁠। इ॒व॒⁠। हि⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। आप्त्यै᳚⁠। प॒रि॒धीनिति॑ परि—धीन्⁠। समिति॑⁠। मा॒र्ष्टि॒⁠। पु॒नाति॑⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒न्⁠। त्रिः⁠। म॒द्ध्य॒मम्⁠। त्रयः॑⁠। वै⁠। प्रा॒णा इति॑ प्र—अ॒नाः⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। ए॒व⁠। अ॒भिति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। त्रिः⁠। द॒ख्‍षि॒णा॒र्द्ध्य॑मिति॑ दख्‍षिण—अ॒र्द्ध्य᳚म्⁠। त्रयः॑⁠। ६५ (५०) [६५] इ॒मे⁠। लो॒काः⁠। इ॒मान्⁠। ए॒व⁠। लो॒कान्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। त्रिः⁠। उ॒त्त॒रा॒र्द्ध्य॑मित्यु॑त्तर—अ॒र्द्ध्य᳚म्⁠। त्रयः॑⁠। वै⁠। दे॒व॒याना॒ इति॑ देव—यानाः᳚⁠। पन्था॑नः⁠। तान्⁠। ए॒व⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। त्रिः⁠। उपेति॑⁠। वा॒ज॒य॒ति॒⁠। त्रयः॑⁠। वै⁠। दे॒व॒लो॒का इति॑ देव—लो॒काः⁠। दे॒व॒लो॒कानिति॑ देव—लो॒कान्⁠। ए॒व⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। द्वाद॑श⁠। समिति॑⁠। प॒द्य॒न्ते॒⁠। द्वाद॑श⁠। मासाः᳚⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। ए॒व⁠। प्री॒णा॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। सम॑ष्ट्या॒ इति॒ सं—अ॒ष्ट्यै॒⁠। आ॒घा॒रमित्या᳚—घा॒रम्⁠। एति॑⁠। घा॒र॒य॒ति॒⁠। ति॒रः⁠। इ॒व॒⁠। ६६ (५०) [६६] वै⁠। सु॒व॒र्ग इति॑ सुवः—गः⁠। लो॒कः⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। लो॒कम्⁠। प्रेति॑⁠। रो॒च॒य॒ति॒⁠। ऋ॒जुम्⁠। एति॑⁠। घा॒र॒य॒ति॒⁠। ऋ॒जुः⁠। इ॒व॒⁠। हि⁠। प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। सन्त॑त॒मिति॒ सं—त॒त॒म्⁠। एति॑⁠। घा॒र॒य॒ति॒⁠। प्रा॒णाना॒मिति॑ प्र—अ॒नाना᳚म्⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। सन्त॑त्या॒ इति॒ सं—त॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। रख्‍ष॑साम्⁠। अप॑हत्या॒ इत्यप॑—ह॒त्यै॒⁠। यम्⁠। का॒मये॑त⁠। प्र॒मायु॑क॒ इति॑ प्र—मायु॑कः⁠। स्या॒त्⁠। इति॑⁠। जि॒ह्मम्⁠। तस्य॑⁠। एति॑⁠। घा॒र॒ये॒त्⁠। प्रा॒णमिति॑ प्र—अ॒नम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मा॒त्⁠। जि॒ह्मम्⁠। न॒य॒ति॒⁠। ता॒जक्⁠। प्रेति॑⁠। मी॒य॒ते॒⁠। शिरः॑⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। यत्⁠। आ॒घा॒र इत्या᳚—घा॒रः⁠। आ॒त्मा⁠। ध्रु॒वा⁠। ६७ (५०) [६७] आ॒घा॒रमित्या᳚—घा॒रम्⁠। आ॒घार्येत्या᳚—घार्य॑⁠। ध्रु॒वाम्⁠। समिति॑⁠। अ॒न॒क्ति॒⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। शिरः॑⁠। प्रतीति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। अ॒ग्निः⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। दू॒तः⁠। आसी᳚त्⁠। दैव्यः॑⁠। असु॑राणाम्⁠। तौ⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। प्र॒श्ञम्⁠। ऐ॒ता॒म्⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। ब्रा॒ह्म॒णम्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। ए॒तत्⁠। वीति॑⁠। ब्रू॒हि॒⁠। इति॑⁠। एति॑⁠। श्रा॒व॒य॒⁠। इति॑⁠। इ॒दम्⁠। दे॒वाः॒⁠। शृ॒णु॒त॒⁠। इति॑⁠। वाव⁠। तत्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। अ॒ग्निः⁠। दे॒वः⁠। होता᳚⁠। इति॑⁠। यः⁠। ए॒व⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। तम्⁠। अ॒वृ॒णी॒त॒⁠। ततः॑⁠। दे॒वाः⁠। ६८ (५०) [६८] अभ॑वन्न्⁠। परेति॑⁠। असु॑राः⁠। यस्य॑⁠। ए॒वम्⁠। वि॒दुषः॑⁠। प्र॒व॒रमिति॑ प्र—व॒रम्⁠। प्र॒वृ॒णत॒ इति॑ प्र—वृ॒णते᳚⁠। भव॑ति⁠। आ॒त्मना᳚⁠। परेति॑⁠। अ॒स्य॒⁠। भ्रातृ॑व्यः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यत्⁠। ब्रा॒ह्म॒णः⁠। च॒⁠। अब्रा᳚ह्मणः⁠। च॒⁠। प्र॒श्ञम्⁠। ए॒याता॒मित्या᳚—इ॒याता᳚म्⁠। ब्रा॒ह्म॒णाय॑⁠। अधीति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। यत्⁠। ब्रा॒ह्म॒णाय॑⁠। अ॒द्ध्याहेत्य॑धि—आह॑⁠। आ॒त्मने᳚⁠। अधीति॑⁠। आ॒ह॒⁠। यत्⁠। ब्रा॒ह्म॒णम्⁠। प॒राहेति॑ परा—आह॑⁠। आ॒त्मान᳚म्⁠। परेति॑⁠। आ॒ह॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। ब्रा॒ह्म॒णः⁠। न⁠। प॒रोच्य॒ इति॑ परा—उच्यः॑ [६९] (वा आ॑र॒ण्याꣴश्चाव॑ रु॒न्धेऽथो॑ प॒शुभिः॒ सो᳚ऽब्रवीद् दख्‍षिणा॒र्ध्यं॑ त्रय॑ इव ध्रु॒वा दे॒वा श्च॑त्वारि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥११॥
आयुः॑⁠। ते॒⁠। आ॒यु॒र्दा इत्या॑युः—दाः⁠। अ॒ग्ने॒⁠। एति॑⁠। प्या॒य॒स्व॒⁠। समिति॑⁠। ते॒⁠। अवेति॑⁠। ते॒⁠। हेडः॑⁠। उदिति॑⁠। उ॒त्त॒ममित्यु॑त्—त॒मम्⁠। प्रेति॑⁠। नः॒⁠। दे॒वी⁠। एति॑⁠। नः॒⁠। दि॒वः⁠। अग्ना॑विष्णू॒ इत्यग्ना᳚—वि॒ष्णू॒⁠। अग्ना॑विष्णू॒ इत्यग्ना᳚—वि॒ष्णू॒⁠। इ॒मम्⁠। मे॒⁠। व॒रु॒ण॒⁠। तत्⁠। त्वा॒⁠। या॒मि॒⁠। उदिति॑⁠। उ॒⁠। त्यम्⁠। चि॒त्रम्⁠॥ अ॒पाम्⁠। नपा᳚त्⁠। एति॑⁠। हि⁠। अस्था᳚त्⁠। उ॒पस्थ॒मित्यु॒प—स्थ॒म्⁠। जि॒ह्माना᳚म्⁠। ऊ॒र्द्ध्वः⁠। वि॒द्युत॒मिति॑ वि—द्युत᳚म्⁠। वसा॑नः⁠॥ तस्य॑⁠। ज्येष्ठ᳚म्⁠। म॒हि॒मान᳚म्⁠। वह॑न्तीः⁠। हिर॑ण्यवर्णा॒ इति॒ हिर॑ण्य—व॒र्णाः॒⁠। परीति॑⁠। य॒न्ति॒⁠। य॒ह्वीः⁠॥ समिति॑⁠। ७० (५०) [७०] अ॒न्याः⁠। यन्ति॑⁠। उपेति॑⁠। य॒न्ति॒⁠। अ॒न्याः⁠। स॒मा॒नम्⁠। ऊ॒र्वम्⁠। न॒द्यः॑⁠। पृ॒ण॒न्ति॒⁠॥ तम्⁠। उ॒⁠। शुचि᳚म्⁠। शुच॑यः⁠। दी॒दि॒वाꣳस᳚म्⁠। अ॒पाम्⁠। नपा॑तम्⁠। परीति॑⁠। त॒स्थुः॒⁠। आपः॑⁠॥ तम्⁠। अस्मे॑राः⁠। यु॒व॒तयः॑⁠। युवा॑नम्⁠। म॒र्मृ॒ज्यमा॑नाः⁠। परीति॑⁠। य॒न्ति॒⁠। आपः॑⁠॥ सः⁠। शु॒क्रेण॑⁠। शिक्व॑ना⁠। रे॒वत्⁠। अ॒ग्निः⁠। दी॒दाय॑⁠। अ॒नि॒द्ध्मः⁠। घृ॒तनि॑र्णि॒गिति॑ घृ॒त—नि॒र्णि॒क्⁠। अ॒फ्स्वित्य॑प्—सु⁠॥ इन्द्रा॒वरु॑णयो॒रितीन्द्रा᳚—वरु॑णयोः⁠। अ॒हम्⁠। स॒म्राजो॒रिति॑ सं—राजोः᳚⁠। अवः॑⁠। एति॑⁠। वृ॒णे॒⁠॥ ता⁠। नः॒⁠। मृ॒डा॒तः॒⁠। ई॒दृशे᳚⁠॥ इन्द्रा॑वरु॒णेतीन्द्रा᳚—व॒रु॒णा॒⁠। यु॒वम्⁠। अ॒द्ध्व॒राय॑⁠। नः॒⁠। ७१ (५०) [७१] वि॒शे⁠। जना॑य⁠। महि॑⁠। शर्म॑⁠। य॒च्छ॒त॒म्⁠॥ दी॒र्घप्र॑यज्यु॒मिति॑ दी॒र्घ—प्र॒य॒ज्यु॒म्⁠। अतीति॑⁠। यः⁠। व॒नु॒ष्यति॑⁠। व॒यम्⁠। ज॒ये॒म॒⁠। पृत॑नासु⁠। दू॒ढ्यः॑⁠॥ एति॑⁠। नः॒⁠। मि॒त्रा॒व॒रु॒णेति॑ मित्रा—व॒रु॒णा॒⁠। प्रेति॑⁠। बा॒हवा᳚⁠॥ त्वम्⁠। नः॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। वरु॑णस्य⁠। वि॒द्वान्⁠। दे॒वस्य॑⁠। हेडः॑⁠। अवेति॑⁠। या॒सि॒सी॒ष्ठाः॒⁠॥ यजि॑ष्ठः⁠। वह्नि॑तम॒ इति॒ वह्नि॑—त॒मः॒⁠। शोशु॑चानः⁠। विश्वा᳚⁠। द्वेषा॑ꣳसि⁠। प्रेति॑⁠। मु॒मु॒ग्धि॒⁠। अ॒स्मत्⁠॥ सः⁠। त्वम्⁠। नः॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। अ॒व॒मः⁠। भ॒व॒⁠। ऊ॒ती⁠। नेदि॑ष्ठः⁠। अ॒स्याः⁠। उ॒षसः॑⁠। व्यु॑ष्टा॒विति॒ वि—उ॒ष्टौ॒⁠॥ अवेति॑⁠। य॒ख्‍ष्व॒⁠। नः॒⁠। वरु॑णम्⁠। ७२ (५०) [७२] ररा॑णः⁠। वी॒हि⁠। मृ॒डी॒कम्⁠। सु॒हव॒ इति॑ सु—हवः॑⁠। नः॒⁠। ए॒धि॒⁠॥ प्रप्रेति॒ प्र—प्र॒⁠। अ॒यम्⁠। अ॒ग्निः⁠। भ॒र॒तस्य॑⁠। शृ॒ण्वे॒⁠। वीति॑⁠। यत्⁠। सूर्यः॑⁠। न⁠। रोच॑ते⁠। बृ॒हत्⁠। भाः⁠॥ अ॒भीति॑⁠। यः⁠। पू॒रुम्⁠। पृत॑नासु⁠। त॒स्थौ⁠। दी॒दाय॑⁠। दैव्यः॑⁠। अति॑थिः⁠। शि॒वः⁠। नः॒⁠॥ प्रेति॑⁠। ते॒⁠। य॒ख्‍षि॒⁠। प्रेति॑⁠। ते॒⁠। इ॒य॒र्मि॒⁠। मन्म॑⁠। भुवः॑⁠। यथा᳚⁠। वन्द्यः॑⁠। नः॒⁠। हवे॑षु⁠॥ धन्व॑न्न्⁠। इ॒व॒⁠। प्र॒पेति॑ प्र—पा⁠। अ॒सि॒⁠। त्वम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। इ॒य॒ख्‍षवे᳚⁠। पू॒रवे᳚⁠। प्र॒त्न॒⁠। रा॒ज॒न्न् [७३] वीति॑⁠। पाज॑सा⁠। वीति॑⁠। ज्योति॑षा⁠॥ सः⁠। त्वम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। प्रती॑केन⁠। प्रतीति॑⁠। ओ॒ष॒⁠। या॒तु॒धा॒न्य॑ इति॑ यातु—धा॒न्यः॑⁠॥ उ॒रु॒ख्‍षये॒ष्वित्यु॑रु—ख्‍षये॑षु⁠। दीद्य॑त्⁠॥ तम्⁠। सु॒प्रती॑क॒मिति॑ सु—प्रती॑कम्⁠। सु॒दृश॒मिति॑ सु—दृश᳚म्⁠। स्वञ्च᳚म्⁠। अवि॑द्वाꣳसः⁠। वि॒दुष्ट॑र॒मिति॑ वि॒दुः—त॒र॒म्⁠। स॒पे॒म॒⁠॥ सः⁠। य॒ख्‍ष॒त्⁠। विश्वा᳚⁠। व॒युना॑नि⁠। वि॒द्वान्⁠। प्रेति॑⁠। ह॒व्यम्⁠। अ॒ग्निः⁠। अ॒मृते॑षु⁠। वो॒च॒त्⁠॥ अ॒ꣳ॒हो॒मुच॒ इत्य॑ꣳहः—मुचे᳚⁠। वि॒वेष॑⁠। यत्⁠। मा॒⁠। वीति॑⁠। नः॒⁠। इ॒न्द्र॒⁠। इन्द्र॑⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। इ॒न्द्रि॒याणि॑⁠। श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शत—क्र॒तो॒⁠। अन्विति॑⁠। ते॒⁠। दा॒यि॒ [७४] (य॒ह्वीः स म॑ध्व॒राय॑ नो॒ वरु॑णꣳ राज॒ꣴ॒ श्चतु॑श्चत्वारिꣳशच्च) ॥१२॥
अनुवाकाः पञ्चशती
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