कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
तृतीयकाण्डे चतुर्थः प्रश्नः

कांड ३ प्रश्न ४
इष्टिहोमाभिधानं

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
वीति॑⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। य॒ज्ञः⁠। ऋ॒द्ध्य॒ते॒⁠। यस्य॑⁠। ह॒विः⁠। अ॒ति॒रिच्य॑त॒ इत्य॑ति—रिच्य॑ते⁠। सूर्यः॑⁠। दे॒वः⁠। दि॒वि॒षद्भ्य॒ इति॑ दिवि॒षत्—भ्यः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। बृह॒स्पति॑ना⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒नेति॑ प्र॒जा—प॒ति॒ना॒⁠। च॒⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। व्यृ॑द्ध॒मिति॒ वि—ऋ॒द्ध॒म्⁠। अपीति॑⁠। व॒प॒ति॒⁠। रख्‍षा॑ꣳसि⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। प॒शुम्⁠। स॒च॒न्ते॒⁠। यत्⁠। ए॒क॒दे॒व॒त्य॑ इत्ये॑क—दे॒व॒त्यः॑⁠। आल॑ब्ध॒ इत्या—ल॒ब्धः॒⁠। भूया॑न्⁠। भव॑ति⁠। यस्याः᳚⁠। ते॒⁠। हरि॑तः⁠। गर्भः॑⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। दे॒व॒त्रेति॑ देव—त्रा⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। ग॒म॒य॒ति॒⁠। रख्‍ष॑साम्⁠। अप॑हत्या॒ इत्यप॑—ह॒त्यै॒⁠। एति॑⁠। व॒र्त॒न॒⁠। व॒र्त॒य॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। १ (५०) [१] ब्रह्म॑णा⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। एति॑⁠। व॒र्त॒य॒ति॒⁠। वीति॑⁠। ते॒⁠। भि॒न॒द्मि॒⁠। त॒क॒रीम्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। य॒था॒य॒जुरिति॑ यथा—य॒जुः⁠। ए॒व⁠। ए॒तत्⁠। उ॒रु॒द्र॒फ्स इत्यु॑रु—द्र॒फ्सः⁠। वि॒श्वरू॑प॒ इति॑ वि॒श्व—रू॒पः॒⁠। इन्दुः॑⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। प्र॒जेति॑ प्र—जा⁠। वै⁠। प॒शवः॑⁠। इन्दुः॑⁠। प्र॒जयेति॑ प्र—जया᳚⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। प॒शुभि॒रिति॑ प॒शु—भिः॒⁠। समिति॑⁠। अ॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। दिव᳚म्⁠। वै⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। व्यृ॑द्ध॒मिति॒ वि—ऋ॒द्ध॒म्⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। अति॑रिक्त॒मित्यति॑—रि॒क्त॒म्⁠। तत्⁠। यत्⁠। न⁠। श॒मये᳚त्⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छे॒त्⁠। यज॑मानः⁠। म॒ही⁠। द्यौः⁠। पृ॒थि॒वी⁠। च॒⁠। नः॒⁠। इति॑⁠। २ (५०) [२] आ॒ह॒⁠। द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒मिति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वीभ्या᳚म्⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। व्यृ॑द्ध॒मिति॒ वि—ऋ॒द्ध॒म्⁠। च॒⁠। अति॑रिक्त॒मित्यति॑—रि॒क्त॒म्⁠। च॒⁠। श॒म॒य॒ति॒⁠। न⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। यज॑मानः⁠। भस्म॑ना⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। ऊ॒ह॒ति॒⁠। स्व॒गाकृ॑त्या॒ इति॑ स्व॒गा—कृ॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। अ॒नयोः᳚⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। गर्भः॑⁠। अ॒नयोः᳚⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। यत्⁠। अ॒व॒द्येदित्य॑व—द्येत्⁠। अतीति॑⁠। तत्⁠। रे॒च॒ये॒त्⁠। यत्⁠। न⁠। अ॒व॒द्येदित्य॑व—द्येत्⁠। प॒शोः⁠। आल॑ब्ध॒स्येत्या—ल॒ब्ध॒स्य॒⁠। न⁠। अवेति॑⁠। द्ये॒त्⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। नाभ्याः᳚⁠। अ॒न्यत्⁠। अ॒व॒द्येदित्य॑व—द्येत्⁠। उ॒परि॑ष्टात्⁠। अ॒न्यत्⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। वै⁠। नाभ्यै᳚⁠। ३ (५०) [३] प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। उ॒परि॑ष्टात्⁠। अ॒पा॒न इत्य॑प—अ॒नः⁠। यावा॑न्⁠। ए॒व⁠। प॒शुः⁠। तस्य॑⁠। अवेति॑⁠। द्य॒ति॒⁠। विष्ण॑वे⁠। शि॒पि॒वि॒ष्टायेति॑ शिपि—वि॒ष्टाय॑⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। यत्⁠। वै⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। अ॒ति॒रिच्य॑त॒ इत्य॑ति—रिच्य॑ते⁠। यः⁠। प॒शोः⁠। भू॒मा⁠। या⁠। पुष्टिः॑⁠। तत्⁠। विष्णुः॑⁠। शि॒पि॒वि॒ष्ट इति॑ शिपि—वि॒ष्टः⁠। अति॑रिक्त॒ इत्यति॑—रि॒क्ते॒⁠। ए॒व⁠। अति॑रिक्त॒मित्यति॑—रि॒क्त॒म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। अति॑रिक्त॒स्येत्यति॑—रि॒क्त॒स्य॒⁠। शान्त्यै᳚⁠। अ॒ष्टाप्रू॒डित्य॒ष्टा—प्रू॒ट्⁠। हिर॑ण्यम्⁠। दख्‍षि॑णा⁠। अ॒ष्टाप॒दीत्य॒ष्टा—प॒दी॒⁠। हि⁠। ए॒षा⁠। आ॒त्मा⁠। न॒व॒मः⁠। प॒शोः⁠। आप्त्यै᳚⁠। अ॒न्त॒र॒को॒श इत्य॑न्तर—को॒शे⁠। उ॒ष्णीषे॑ण⁠। आवि॑ष्टित॒मित्या—वि॒ष्टि॒त॒म्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। ए॒वम्⁠। इ॒व॒⁠। हि⁠। प॒शुः⁠। उल्ब᳚म्⁠। इ॒व॒⁠। चर्म॑⁠। इ॒व॒⁠। मा॒ꣳ॒सम्⁠। इ॒व॒⁠। अस्थि॑⁠। इ॒व॒⁠। यावा॑न्⁠। ए॒व⁠। प॒शुः⁠। तम्⁠। आ॒प्त्वा⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। यस्य॑⁠। ए॒षा⁠। य॒ज्ञे⁠। प्राय॑श्चित्तिः⁠। क्रि॒यते᳚⁠। इ॒ष्ट्वा⁠। वसी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒ [४] (व॒र्त॒येत्या॑हन॒ इति॒वै नाभ्या॒उल्ब॑मि॒वैक॑विꣳशतिश्च) ॥१॥
एति॑⁠। वा॒यो॒ इति॑⁠। भू॒ष॒⁠। शु॒चि॒पा॒ इति॑ शुचि—पाः॒⁠। उपेति॑⁠। नः॒⁠। स॒हस्र᳚म्⁠। ते॒⁠। नि॒युत॒ इति॑ नि—युतः॑⁠। वि॒श्व॒वा॒रेति॑ विश्व—वा॒र॒⁠॥ उपो॒ इति॑⁠। ते॒⁠। अन्धः॑⁠। मद्य᳚म्⁠। अ॒या॒मि॒⁠। यस्य॑⁠। दे॒व॒⁠। द॒धि॒षे⁠। पू॒र्व॒पेय॒मिति॑ पूर्व—पेय᳚म्⁠॥ आकू᳚त्या॒ इत्या—कू॒त्यै॒⁠। त्वा॒⁠। कामा॑य⁠। त्वा॒⁠। स॒मृध॒ इति॑ सं—ऋधे᳚⁠। त्वा॒⁠। कि॒क्कि॒टा⁠। ते॒⁠। मनः॑⁠। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जा—प॒त॒ये॒⁠। स्वाहा᳚⁠। कि॒क्कि॒टा⁠। ते॒⁠। प्रा॒णमिति॑ प्र—अ॒नम्⁠। वा॒यवे᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। कि॒क्कि॒टा⁠। ते॒⁠। चख्‍षुः॑⁠। सूर्या॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। कि॒क्कि॒टा⁠। ते॒⁠। श्रोत्र᳚म्⁠। द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒मिति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वीभ्या᳚म्⁠। स्वाहा᳚⁠। कि॒क्कि॒टा⁠। ते॒⁠। वाच᳚म्⁠। सर॑स्वत्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। ५ (५०) [५] त्वम्⁠। तु॒रीया᳚⁠। व॒शिनी᳚⁠। व॒शा⁠। अ॒सि॒⁠। स॒कृत्⁠। यत्⁠। त्वा॒⁠। मन॑सा⁠। गर्भः॑⁠। एति॑⁠। अश॑यत्⁠॥ व॒शा⁠। त्वम्⁠। व॒शिनी᳚⁠। ग॒च्छ॒⁠। दे॒वान्⁠। स॒त्याः⁠। स॒न्तु॒⁠। यज॑मानस्य⁠। कामाः᳚⁠॥ अ॒जा⁠। अ॒सि॒⁠। र॒यि॒ष्ठेति॑ रयि—स्था⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। सी॒द॒⁠। ऊ॒र्ध्वा⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। उपेति॑⁠। ति॒ष्ठ॒स्व॒⁠। दि॒वि⁠। ते॒⁠। बृ॒हत्⁠। भाः⁠॥ तन्तु᳚म्⁠। त॒न्वन्न्⁠। रज॑सः⁠। भा॒नुम्⁠। अन्विति॑⁠। इ॒हि॒⁠। ज्योति॑ष्मतः⁠। प॒थः⁠। र॒ख्‍ष॒⁠। धि॒या⁠। कृ॒तान्⁠॥ अ॒नु॒ल्ब॒णम्⁠। व॒य॒त॒⁠। जोगु॑वाम्⁠। अपः॑⁠। मनुः॑⁠। भ॒व॒⁠। ज॒नय॑⁠। दैव्य᳚म्⁠। जन᳚म्⁠॥ मन॑सः⁠। ह॒विः⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। वर्णः॑⁠। गात्रा॑णाम्⁠। ते॒⁠। गा॒त्र॒भाज॒ इति॑ गात्र—भाजः॑⁠। भू॒या॒स्म॒ [६] (सर॑स्वत्यै॒ स्वाहा॒ मनु॒ स्त्रयो॑दश च) ॥२॥
इ॒मे इति॑⁠। वै⁠। स॒ह⁠। आ॒स्ता॒म्⁠। ते इति॑⁠। वा॒युः⁠। वीति॑⁠। अ॒वा॒त्⁠। ते इति॑⁠। गर्भ᳚म्⁠। अ॒द॒धा॒ता॒म्⁠। तम्⁠। सोमः॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒ज॒न॒य॒त्⁠। अ॒ग्निः⁠। अ॒ग्र॒स॒त॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। तम्⁠। निरिति॑⁠। अ॒व॒प॒त्⁠। तेन॑⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। अ॒ग्नेः⁠। अधि॑⁠। निरिति॑⁠। अ॒क्री॒णा॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। अपीति॑⁠। अ॒न्य॒दे॒व॒त्या॑मित्य॑न्य—दे॒व॒त्या᳚म्⁠। आ॒लभ॑मान॒ इत्या᳚—लभ॑मानः⁠। आ॒ग्ने॒यम्⁠। अ॒ष्टाक॑पाल॒मित्य॒ष्टा—क॒पा॒ल॒म्⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। अ॒ग्नेः⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। अधीति॑⁠। नि॒ष्क्रीयेति॑ निः—क्रीय॑⁠। एति॑⁠। ल॒भ॒ते॒⁠। यत्⁠। ७ (५०) [७] वा॒युः⁠। व्यवा॒दिति॑ वि—अवा᳚त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। वा॒य॒व्या᳚⁠। यत्⁠। इ॒मे इति॑⁠। गर्भ᳚म्⁠। अद॑धाताम्⁠। तस्मा᳚त्⁠। द्या॒वा॒पृ॒थि॒व्येति॑ द्यावा—पृ॒थि॒व्या᳚⁠। यत्⁠। सोमः॑⁠। प्रेति॑⁠। अज॑नयत्⁠। अ॒ग्निः⁠। अग्र॑सत⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒ग्नी॒षो॒मीयेत्य॑ग्नी—सो॒मीया᳚⁠। यत्⁠। अ॒नयोः᳚⁠। वि॒य॒त्योरिति॑ वि—य॒त्योः⁠। वाक्⁠। अव॑दत्⁠। तस्मा᳚त्⁠। सा॒र॒स्व॒ती⁠। यत्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। अधीति॑⁠। नि॒रक्री॑णा॒दिति॑ निः—अक्री॑णात्⁠। तस्मा᳚त्⁠। प्रा॒जा॒प॒त्येति॑ प्राजा—प॒त्या⁠। सा⁠। वै⁠। ए॒षा⁠। स॒र्व॒दे॒व॒त्येति॑ सर्व—दे॒व॒त्या᳚⁠। यत्⁠। अ॒जा⁠। व॒शा⁠। वा॒य॒व्या᳚म्⁠। एति॑⁠। ल॒भे॒त॒⁠। भूति॑काम॒ इति॒ भूति॑—का॒मः॒⁠। वा॒युः⁠। वै⁠। ख्‍षेपि॑ष्ठा⁠। दे॒वता᳚⁠। वा॒युम्⁠। ए॒व⁠। स्वेन॑⁠। ८ (५०) [८] भा॒ग॒धेये॒नेति॑ भाग—धेये॑न⁠। उपेति॑⁠। धा॒व॒ति॒⁠। सः⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। भूति᳚म्⁠। ग॒म॒य॒ति॒⁠। द्या॒वा॒पृ॒थि॒व्या॑मिति॑ द्यावा—पृ॒थि॒व्या᳚म्⁠। एति॑⁠। ल॒भे॒त॒⁠। कृ॒षमा॑णः⁠। प्र॒ति॒ष्ठाका॑म॒ इति॑ प्रति॒ष्ठा—का॒मः॒⁠। दि॒वः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प॒र्जन्यः॑⁠। व॒र्॒‌ष॒ति॒⁠। वीति॑⁠। अ॒स्याम्⁠। ओष॑धयः⁠। रो॒ह॒न्ति॒⁠। स॒मर्द्धु॑क॒मिति॑ सं—अर्द्धु॑कम्⁠। अ॒स्य॒⁠। स॒स्यम्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒ग्नी॒षो॒मीया॒मित्य॑ग्नी—सो॒मीया᳚म्⁠। एति॑⁠। ल॒भे॒त॒⁠। यः⁠। का॒मये॑त⁠। अन्न॑वा॒न्नित्यन्न॑—वा॒न्⁠। अ॒न्ना॒द इत्य॑न्न—अ॒दः⁠। स्या॒म्⁠। इति॑⁠। अ॒ग्निना᳚⁠। ए॒व⁠। अन्न᳚म्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। सोमे॑न⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। अन्न॑वा॒न्नित्यन्न॑—वा॒न्⁠। ए॒व⁠। अ॒न्ना॒द इत्य॑न्न—अ॒दः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। सा॒र॒स्व॒तीम्⁠। एति॑⁠। ल॒भे॒त॒⁠। यः⁠। ९ (५०) [९] ई॒श्व॒रः⁠। वा॒चः⁠। वदि॑तोः⁠। सन्न्⁠। वाच᳚म्⁠। न⁠। वदे᳚त्⁠। वाक्⁠। वै⁠। सर॑स्वती⁠। सर॑स्वतीम्⁠। ए॒व⁠। स्वेन॑⁠। भा॒ग॒धेये॒नेति॑ भाग—धेये॑न⁠। उपेति॑⁠। धा॒व॒ति॒⁠। सा⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। वाच᳚म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। प्रा॒जा॒प॒त्यामिति॑ प्राजा—प॒त्याम्⁠। एति॑⁠। ल॒भे॒त॒⁠। यः⁠। का॒मये॑त⁠। अन॑भिजित॒मित्यन॑भि—जि॒त॒म्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒ये॒य॒म्⁠। इति॑⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। सर्वाः᳚⁠। दे॒वताः᳚⁠। दे॒वता॑भिः⁠। ए॒व⁠। अन॑भिजित॒मित्यन॑भि—जि॒त॒म्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। वा॒य॒व्य॑या⁠। उ॒पाक॑रो॒तीयु॑प—आक॑रोति⁠। वा॒योः⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। अ॒व॒रुद्ध्येत्य॑व—रुद्ध्य॑⁠। एति॑⁠। ल॒भ॒ते॒⁠। आकू᳚त्या॒ इत्या—कू॒त्यै॒⁠। त्वा॒⁠। कामा॑य⁠। त्वा॒⁠। १० (५०) [१०] इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। य॒था॒य॒जुरिति॑ यथा—य॒जुः⁠। ए॒व⁠। ए॒तत्⁠। कि॒क्कि॒टा॒कार॒मिति॑ किक्किटा—कार᳚म्⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। कि॒क्कि॒टा॒का॒रेणेति॑ किक्किटा—का॒रेण॑⁠। वै⁠। ग्रा॒म्याः⁠। प॒शवः॑⁠। र॒म॒न्ते॒⁠। प्रेति॑⁠। आ॒र॒ण्याः⁠। प॒त॒न्ति॒⁠। यत्⁠। कि॒क्कि॒टा॒कार॒मिति॑ किक्किटा—कार᳚म्⁠। जु॒होति॑⁠। ग्रा॒म्याणा᳚म्⁠। प॒शू॒नाम्⁠। धृत्यै᳚⁠। पर्य॑ग्ना॒विति॒ परि॑—अ॒ग्नौ॒⁠। क्रि॒यमा॑णे⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। जीव॑न्तीम्⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। ग॒म॒य॒ति॒⁠। त्वम्⁠। तु॒रीया᳚⁠। व॒शिनी᳚⁠। व॒शा⁠। अ॒सि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। दे॒व॒त्रेति॑ देव—त्रा⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। ग॒म॒य॒ति॒⁠। स॒त्याः⁠। स॒न्तु॒⁠। यज॑मानस्य⁠। कामाः᳚⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। कामः॑⁠। ११ (५०) [११] यज॑मानस्य⁠। यत्⁠। अना᳚र्तः⁠। उ॒दृच॒मित्यु॑त्—ऋच᳚म्⁠। गच्छ॑ति⁠। तस्मा᳚त्⁠। ए॒वम्⁠। आ॒ह॒⁠। अ॒जा⁠। अ॒सि॒⁠। र॒यि॒ष्ठेति॑ रयि—स्था⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ए॒षु⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। लो॒केषु॑⁠। प्रतीति॑⁠। स्था॒प॒य॒ति॒⁠। दि॒वि⁠। ते॒⁠। बृ॒हत्⁠। भाः⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। सु॒व॒र्ग इति॑ सुवः—गे⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। लो॒के⁠। ज्योतिः॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। तन्तु᳚म्⁠। त॒न्वन्न्⁠। रज॑सः⁠। भा॒नुम्⁠। अन्विति॑⁠। इ॒हि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। इ॒मान्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। लो॒कान्⁠। ज्योति॑ष्मतः⁠। क॒रो॒ति॒⁠। अ॒नु॒ल्ब॒णम्⁠। व॒य॒त॒⁠। जोगु॑वाम्⁠। अपः॑⁠। इति॑⁠। १२ (५०) [१२] आ॒ह॒⁠। यत्⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञे⁠। उ॒ल्बण᳚म्⁠। क्रि॒यते᳚⁠। तस्य॑⁠। ए॒व⁠। ए॒षा⁠। शान्तिः॑⁠। मनुः॑⁠। भ॒व॒⁠। ज॒नय॑⁠। दैव्य᳚म्⁠। जन᳚म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। मा॒न॒व्यः॑⁠। वै⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। ताः⁠। ए॒व⁠। आ॒द्याः᳚⁠। कु॒रु॒ते॒⁠। मन॑सः⁠। ह॒विः⁠। अ॒सि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। स्व॒गाकृ॑त्या॒ इति॑ स्व॒गा—कृ॒त्यै॒⁠। गात्रा॑णाम्⁠। ते॒⁠। गा॒त्र॒भाज॒ इति॑ गात्र—भाजः॑⁠। भू॒या॒स्म॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। आ॒शिष॒मित्या᳚—शिष᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒ताम्⁠। एति॑⁠। शा॒स्ते॒⁠। तस्यै᳚⁠। वै⁠। ए॒तस्याः᳚⁠। एक᳚म्⁠। ए॒व⁠। अदे॑वयजन॒मित्यदे॑व—य॒ज॒न॒म्⁠। यत्⁠। आल॑ब्धाया॒मित्या—ल॒ब्धा॒या॒म्⁠। अ॒भ्रः⁠। १३ (५०) [१३] भव॑ति⁠। यत्⁠। आल॑ब्धाया॒मित्या—ल॒ब्धा॒या॒म्⁠। अ॒भ्रः⁠। स्यात्⁠। अ॒फ्स्वित्य॑प्—सु⁠। वा॒⁠। प्र॒वे॒शये॒दिति॑ प्र—वे॒शये᳚त्⁠। सर्वा᳚म्⁠। वा॒⁠। प्रेति॑⁠। अ॒श्ञी॒या॒त्⁠। यत्⁠। अ॒फ्स्वित्य॑प्—सु⁠। प्र॒वे॒शये॒दिति॑ प्र—वे॒शये᳚त्⁠। य॒ज्ञ॒वे॒श॒समिति॑ यज्ञ—वे॒श॒सम्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। सर्वा᳚म्⁠। ए॒व⁠। प्रेति॑⁠। अ॒श्ञी॒या॒त्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। सा⁠। वै⁠। ए॒षा⁠। त्र॒या॒णाम्⁠। ए॒व⁠। अव॑रु॒द्धेत्यव॑—रु॒द्धा॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र॒सद॒ इति॑ सव्ँवथ्सर—सदः॑⁠। स॒ह॒स्र॒या॒जिन॒ इति॑ सहस्र—या॒जिनः॑⁠। गृ॒ह॒मे॒धिन॒ इति॑ गृह—मे॒धिनः॑⁠। ते⁠। ए॒व⁠। ए॒तया᳚⁠। य॒जे॒र॒न्न्⁠। तेषा᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒षा⁠। आ॒प्ता [१४] (यथ् स्वेन॑ सारस्व॒तीमा ल॑भेत॒ यः कामा॑य त्वा॒ कामो ऽप॒ इत्य॒ भ्रो द्विच॑त्वारिꣳशच्च) ॥३॥
चि॒त्तम्⁠। च॒⁠। चित्तिः॑⁠। च॒⁠। आकू॑त॒मित्या—कू॒त॒म्⁠। च॒⁠। आकू॑ति॒रित्या—कू॒तिः॒⁠। च॒⁠। विज्ञा॑त॒मिति॒ वि—ज्ञा॒त॒म्⁠। च॒⁠। वि॒ज्ञान॒मिति॑ वि—ज्ञान᳚म्⁠। च॒⁠। मनः॑⁠। च॒⁠। शक्व॑रीः⁠। च॒⁠। दर्‌शः॑⁠। च॒⁠। पू॒र्णमा॑स॒ इति॑ पू॒र्ण—मा॒सः॒⁠। च॒⁠। बृ॒हत्⁠। च॒⁠। र॒थ॒न्त॒रमिति॑ रथं—त॒रम्⁠। च॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। जया॑न्⁠। इन्द्रा॑य⁠। वृष्णे᳚⁠। प्रेति॑⁠। अ॒य॒च्छ॒त्⁠। उ॒ग्रः⁠। पृ॒त॒नाज्ये॑षु⁠। तस्मै᳚⁠। विशः॑⁠। समिति॑⁠। अ॒न॒म॒न्त॒⁠। सर्वाः᳚⁠। सः⁠। उ॒ग्रः⁠। सः⁠। हि⁠। हव्यः॑⁠। ब॒भूव॑⁠। दे॒वा॒सु॒रा इति॑ देव—अ॒सु॒राः⁠। सय्ँय॑त्ता॒ इति॒ सं—य॒त्ताः॒⁠। आ॒स॒न्न्⁠। सः⁠। इन्द्रः॑⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। उपेति॑⁠। अ॒धा॒व॒त्⁠। तस्मै᳚⁠। ए॒तान्⁠। जया॑न्⁠। प्रेति॑⁠। अ॒य॒च्छ॒त्⁠। तान्⁠। अ॒जु॒हो॒त्⁠। ततः॑⁠। वै⁠। दे॒वाः⁠। असु॑रान्⁠। अ॒ज॒य॒न्न्⁠। यत्⁠। अज॑यन्न्⁠। तत्⁠। जया॑नाम्⁠। ज॒य॒त्वमिति॑ जय—त्वम्⁠। स्पर्द्ध॑मानेन⁠। ए॒ते⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। जय॑ति⁠। ए॒व⁠। ताम्⁠। पृत॑नाम् [१५] (उप॒ पञ्च॑विꣳशतिश्च) ॥४॥
अ॒ग्निः⁠। भू॒ताना᳚म्⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। सः⁠। मा॒⁠। अ॒व॒तु॒⁠। इन्द्रः॑⁠। ज्ये॒ष्ठाना᳚म्⁠। य॒मः⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। वा॒युः⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षस्य⁠। सूर्यः॑⁠। दि॒वः⁠। च॒न्द्रमाः᳚⁠। नख्‍ष॑त्राणाम्⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। ब्रह्म॑णः⁠। मि॒त्रः⁠। स॒त्याना᳚म्⁠। वरु॑णः⁠। अ॒पाम्⁠। स॒मु॒द्रः⁠। स्रो॒त्याना᳚म्⁠। अन्न᳚म्⁠। साम्रा᳚ज्याना॒मिति॒ सां—रा॒ज्या॒ना॒म्⁠। अधि॑प॒तीत्यधि॑—प॒ति॒⁠। तत्⁠। मा॒⁠। अ॒व॒तु॒⁠। सोमः॑⁠। ओष॑धीनाम्⁠। स॒वि॒ता⁠। प्र॒स॒वाना॒मिति॑ प्र—स॒वाना᳚म्⁠। रु॒द्रः⁠। प॒शू॒नाम्⁠। त्वष्टा᳚⁠। रू॒पाणा᳚म्⁠। विष्णुः॑⁠। पर्व॑तानाम्⁠। म॒रुतः॑⁠। ग॒णाना᳚म्⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। ते⁠। मा॒⁠। अ॒व॒न्तु॒⁠। पित॑रः⁠। पि॒ता॒म॒हाः॒⁠। प॒रे॒⁠। अ॒व॒रे॒⁠। तताः᳚⁠। त॒ता॒म॒हाः॒⁠। इ॒ह⁠। मा॒⁠। अ॒व॒त॒⁠॥ अ॒स्मिन्न्⁠। ब्रह्म॑न्न्⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। ख्‍ष॒त्रे⁠। अ॒स्याम्⁠। आ॒शिषीत्या᳚—शिषि॑⁠। अ॒स्याम्⁠। पु॒रो॒धाया॒मिति॑ पुरः—धाया᳚म्⁠। अ॒स्मिन्न्⁠। कर्म॑न्न्⁠। अ॒स्याम्⁠। दे॒वहू᳚त्या॒मिति॑ दे॒व—हू॒त्या॒म् [१६] (अ॒व॒रे॒ स॒प्तद॑श च) ॥५॥
दे॒वाः⁠। वै⁠। यत्⁠। य॒ज्ञे⁠। अकु॑र्वत⁠। तत्⁠। असु॑राः⁠। अ॒कु॒र्व॒त॒⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। ए॒तान्⁠। अ॒भ्या॒ता॒नानित्य॑भि—आ॒ता॒नान्⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। तान्⁠। अ॒भ्यात॑न्व॒तेत्य॑भि—आत॑न्वत⁠। यत्⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। कर्म॑⁠। आसी᳚त्⁠। आर्द्ध्य॑त⁠। तत्⁠। यत्⁠। असु॑राणाम्⁠। न⁠। तत्⁠। आ॒र्द्ध्य॒त॒⁠। येन॑⁠। कर्म॑णा⁠। ईर्थ्से᳚त्⁠। तत्र॑⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। ऋ॒द्ध्नोति॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। कर्म॑णा⁠। यत्⁠। विश्वे᳚⁠। दे॒वाः⁠। स॒मभ॑र॒न्निति॑ सं—अभ॑रन्न्⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒भ्या॒ता॒ना इत्य॑भि—आ॒ता॒नाः⁠। वै॒श्व॒दे॒वा इति॑ वैश्व—दे॒वाः⁠। यत्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। जया॑न्⁠। प्रेति॑⁠। अय॑च्छत्⁠। तस्मा᳚त्⁠। जयाः᳚⁠। प्रा॒जा॒प॒त्या इति॑ प्राजा—प॒त्याः⁠। १७ (५०) [१७] यत्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृद्भि॒रिति॑ राष्ट्र॒भृत्—भिः॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। एति॑⁠। अद॑दत⁠। तत्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृता॒मिति॑ राष्ट्र—भृता᳚म्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृ॒त्त्वमिति॑ राष्ट्रभृत्—त्वम्⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। अ॒भ्या॒ता॒नैरित्य॑भि—आ॒ता॒नैः⁠। असु॑रान्⁠। अ॒भ्यात॑न्व॒तेत्य॑भि—आत॑न्वत⁠। जयैः᳚⁠। अ॒ज॒य॒न्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृद्भि॒रिति॑ राष्ट्र॒भृत्—भिः॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। एति॑⁠। अ॒द॒द॒त॒⁠। यत्⁠। दे॒वाः⁠। अ॒भ्या॒ता॒नैरित्य॑भि—आ॒ता॒नैः⁠। असु॑रान्⁠। अ॒भ्यात॑न्व॒तेत्य॑भि—आत॑न्वत⁠। तत्⁠। अ॒भ्या॒ता॒नाना॒मित्य॑भि—आ॒ता॒नाना᳚म्⁠। अ॒भ्या॒ता॒न॒त्वमित्य॑भ्यातान—त्वम्⁠। यत्⁠। जयैः᳚⁠। अज॑यन्न्⁠। तत्⁠। जया॑नाम्⁠। ज॒य॒त्वमिति॑ जय—त्वम्⁠। यत्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृद्भि॒रिति॑ राष्ट्र॒भृत्—भिः॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। एति॑⁠। अद॑दत⁠। तत्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृता॒मिति॑ राष्ट्र—भृता᳚म्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृ॒त्त्वमिति॑ राष्ट्रभृत्—त्वम्⁠। ततः॑⁠। दे॒वाः⁠। अभ॑वन्न्⁠। परेति॑⁠। असु॑राः⁠। यः⁠। भ्रातृ॑व्यवा॒निति॒ भ्रातृ॑व्य—वा॒न्⁠। स्यात्⁠। सः⁠। ए॒तान्⁠। जु॒हु॒या॒त्⁠। अ॒भ्या॒ता॒नैरित्य॑भि—आ॒ता॒नैः⁠। ए॒व⁠। भ्रातृ॑व्यान्⁠। अ॒भ्यात॑नुत॒ इत्य॑भि—आत॑नुते⁠। जयैः᳚⁠। ज॒य॒ति॒⁠। रा॒ष्ट्र॒भृद्भि॒रिति॑ राष्ट्र॒भृत्—भिः॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। एति॑⁠। द॒त्ते॒⁠। भव॑ति⁠। आ॒त्मना᳚⁠। परेति॑⁠। अ॒स्य॒⁠। भ्रातृ॑व्यः⁠। भ॒व॒ति॒ [१८] (प्रा॒जा॒प॒त्याः सो᳚ऽ ष्टा द॑श च) ॥६॥
ऋ॒ता॒षाट्⁠। ऋ॒तधा॒मेत्यृ॒त—धा॒मा॒⁠। अ॒ग्निः⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। ओष॑धयः⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। ऊर्जः॑⁠। नाम॑⁠। सः⁠। इ॒दम्⁠। ब्रह्म॑⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। पा॒तु॒⁠। ताः⁠। इ॒दम्⁠। ब्रह्म॑⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। पा॒न्तु॒⁠। तस्मै᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ताभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒ꣳ॒हि॒त इति॑ सं—हि॒तः⁠। वि॒श्वसा॒मेति॑ वि॒श्व—सा॒मा॒⁠। सूर्यः॑⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। मरी॑चयः⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। आ॒युव॒ इत्या᳚—युवः॑⁠। सु॒षु॒म्न इति॑ सु—सु॒म्नः⁠। सूर्य॑रश्मि॒रिति॒ सूर्य॑—र॒श्मिः॒⁠। च॒न्द्रमाः᳚⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। नख्‍ष॑त्राणि⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। बे॒कुर॑यः⁠। भु॒ज्युः⁠। सु॒प॒र्ण इति॑ सु—प॒र्णः⁠। य॒ज्ञः⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। दख्‍षि॑णाः⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। स्त॒वाः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। मनः॑⁠। १९ (५०) [१९] ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। ऋ॒ख्सा॒मानीत्यृ॑क्—सा॒मानि॑⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। वह्न॑यः⁠। इ॒षि॒रः⁠। वि॒श्वव्य॑चा॒ इति॑ वि॒श्व—व्य॒चाः॒⁠। वातः॑⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। आपः॑⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। मु॒दाः⁠। भुव॑नस्य⁠। प॒ते॒⁠। यस्य॑⁠। ते॒⁠। उ॒परि॑⁠। गृ॒हाः⁠। इ॒ह⁠। च॒⁠॥ सः⁠। नः॒⁠। रा॒स्व॒⁠। अज्या॑निम्⁠। रा॒यः⁠। पोष᳚म्⁠। सु॒वीर्य॒मिति॑ सु—वीर्य᳚म्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रीणा॒मिति॑ सं—व॒थ्स॒रीणा᳚म्⁠। स्व॒स्तिम्⁠॥ प॒र॒मे॒ष्ठी⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। मृ॒त्युः⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। विश्व᳚म्⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। भुवः॑⁠। सु॒ख्‍षि॒तिरिति॑ सु—ख्‍षि॒तिः⁠। सुभू॑ति॒रिति॒ सु—भू॒तिः॒⁠। भ॒द्र॒कृदिति॑ भद्र—कृत्⁠। सुव॑र्वा॒निति॒ सुवः॑—वा॒न्⁠। प॒र्जन्यः॑⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। वि॒द्युत॒ इति॑ वि—द्युतः॑⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। रुचः॑⁠। दू॒रेहे॑ति॒रिति॑ दू॒रे—हे॒तिः॒⁠। अ॒मृ॒ड॒यः⁠। २० (५०) [२०] मृ॒त्युः⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। भी॒रुवः॑⁠। चारुः॑⁠। कृ॒प॒ण॒का॒शीति॑ कृपण—का॒शी⁠। कामः॑⁠। ग॒न्ध॒र्वः⁠। तस्य॑⁠। आ॒धय॒ इत्या᳚—धयः॑⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। शो॒चय॑न्तीः⁠। नाम॑⁠। सः⁠। इ॒दम्⁠। ब्रह्म॑⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। पा॒तु॒⁠। ताः⁠। इ॒दम्⁠। ब्रह्म॑⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। पा॒न्तु॒⁠। तस्मै᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ताभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सः⁠। नः॒⁠। भु॒व॒न॒स्य॒⁠। प॒ते॒⁠। यस्य॑⁠। ते॒⁠। उ॒परि॑⁠। गृ॒हाः⁠। इ॒ह⁠। च॒⁠॥ उ॒रु⁠। ब्रह्म॑णे⁠। अ॒स्मै⁠। ख्‍ष॒त्राय॑⁠। महि॑⁠। शर्म॑⁠। य॒च्छ॒ [२१] (मनो॑ ऽमृड॒यः षट्च॑त्वारिꣳशच्च) ॥७॥
रा॒ष्ट्रका॑मा॒येति॑ रा॒ष्ट्र—का॒मा॒य॒⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। रा॒ष्ट्रेण॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। आ॒त्मने᳚⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। प्र॒जेति॑ प्र—जा⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। प॒शवः॑⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। यत्⁠। श्रेष्ठः॑⁠। भव॑ति⁠। रा॒ष्ट्रेण॑⁠। ए॒व⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। वसि॑ष्ठः⁠। स॒मा॒नाना᳚म्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। ग्राम॑कामा॒येति॒ ग्राम॑—का॒मा॒य॒⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। स॒जा॒ता इति॑ स—जा॒ताः⁠। रा॒ष्ट्रेण॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। स॒जा॒तानिति॑ स—जा॒तान्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। ग्रा॒मी⁠। २२ (५०) [२२] ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒धि॒देव॑न॒ इत्य॑धि—देव॑ने⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। अ॒धि॒देव॑न॒ इत्य॑धि—देव॑ने⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। स॒जा॒तानिति॑ स—जा॒तान्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। ते⁠। ए॒न॒म्⁠। अव॑रुद्धा॒ इत्यव॑—रु॒द्धाः॒⁠। उपेति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ते॒⁠। र॒थ॒मु॒ख इति॑ रथ—मु॒खे⁠। ओज॑स्काम॒स्येत्योजः॑—का॒म॒स्य॒⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। ओजः॑⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। ओजः॑⁠। रथः॑⁠। ओज॑सा⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। ओजः॑⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। ओ॒ज॒स्वी⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यः⁠। रा॒ष्ट्रात्⁠। अप॑भूत॒ इत्यप॑—भू॒तः॒⁠। स्यात्⁠। तस्मै᳚⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। याव॑न्तः⁠। अ॒स्य॒⁠। रथाः᳚⁠। स्युः⁠। तान्⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। यु॒ङ्ध्वम्⁠। इति॑⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। यु॒न॒क्ति॒⁠। २३ (५०) [२३] आहु॑तय॒ इत्या—हु॒त॒यः॒⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। अक्लृ॑प्ताः⁠। यस्य॑⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। न⁠। कल्प॑ते⁠। स्व॒र॒थस्येति॑ स्व—र॒थस्य॑⁠। दख्‍षि॑णम्⁠। च॒क्रम्⁠। प्र॒वृह्येति॑ प्र—वृह्य॑⁠। ना॒डीम्⁠। अ॒भीति॑⁠। जु॒हु॒या॒त्⁠। आहु॑ती॒रित्या—हु॒तीः॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। क॒ल्प॒य॒ति॒⁠। ताः⁠। अ॒स्य॒⁠। कल्प॑मानाः⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। अन्विति॑⁠। क॒ल्प॒ते॒⁠। स॒ङ्ग्रा॒म इति॑ सं—ग्रा॒मे⁠। सय्ँय॑त्त॒ इति॒ सं—य॒त्ते॒⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। रा॒ष्ट्रे⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒ते⁠। व्याय॑च्छन्त॒ इति॑ वि—आय॑च्छन्ते⁠। ये⁠। स॒ङ्ग्रा॒ममिति॑ सं—ग्रा॒मम्⁠। स॒य्ँयन्तीति॑ सं—यन्ति॑⁠। यस्य॑⁠। पूर्व॑स्य⁠। जुह्व॑ति⁠। सः⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। जय॑ति⁠। तम्⁠। स॒ङ्ग्रा॒ममिति॑ सं—ग्रा॒मम्⁠। मा॒न्धु॒कः⁠। इ॒द्ध्मः⁠। २४ (५०) [२४] भ॒व॒ति॒⁠। अङ्गा॑राः⁠। ए॒व⁠। प्र॒ति॒वेष्ट॑माना॒ इति॑ प्रति—वेष्ट॑मानाः⁠। अ॒मित्रा॑णाम्⁠। अ॒स्य॒⁠। सेना᳚म्⁠। प्रतीति॑⁠। वे॒ष्ट॒य॒न्ति॒⁠। यः⁠। उ॒न्माद्ये॒दित्यु॑त्—माद्ये᳚त्⁠। तस्मै᳚⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। ग॒न्ध॒र्वा॒फ्स॒रस॒ इति॑ गन्धर्व—अ॒फ्स॒रसः॑⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। उदिति॑⁠। मा॒द॒य॒न्ति॒⁠। यः⁠। उ॒न्माद्य॒तीत्यु॑त्—माद्य॑ति⁠। ए॒ते⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ग॒न्ध॒र्वा॒फ्स॒रस॒ इति॑ गन्धर्व—अ॒फ्स॒रसः॑⁠। यत्⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। तस्मै᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ताभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। इति॑⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। तेन॑⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒न्⁠। श॒म॒य॒ति॒⁠। नैय॑ग्रोधः⁠। औदु॑म्बरः⁠। आश्व॑त्थः⁠। प्लाख्‍षः॑⁠। इति॑⁠। इ॒द्ध्मः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। ए॒ते⁠। वै⁠। ग॒न्ध॒र्वा॒फ्स॒रसा॒मिति॑ गन्धर्व—अ॒फ्स॒रसा᳚म्⁠। गृ॒हाः⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒न्⁠। २५ (५०) [२५] आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। श॒म॒य॒ति॒⁠। अ॒भि॒चर॒तेत्य॑भि—चर॑ता⁠। प्र॒ति॒लो॒ममिति॑ प्रति—लो॒मम्⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। प्र॒तीचः॑⁠। प्रतीति॑⁠। यौ॒ति॒⁠। तम्⁠। ततः॑⁠। येन॑⁠। केन॑⁠। च॒⁠। स्तृ॒णु॒ते॒⁠। स्वकृ॑त॒ इति॒ स्व—कृ॒ते॒⁠। इरि॑णे⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। प्र॒द॒र इति॑ प्र—द॒रे⁠। वा॒⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। अ॒स्यै⁠। निर्‌ऋ॑तिगृहीत॒मिति॒ निर्‌ऋ॑ति—गृ॒ही॒त॒म्⁠। निर्‌ऋ॑तिगृहीत॒ इति॒ निर्‌ऋ॑ति—गृ॒ही॒ते॒⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। निर्‌ऋ॒त्येति॒ निः—ऋ॒त्या॒⁠। ग्रा॒ह॒य॒ति॒⁠। यत्⁠। वा॒चः⁠। क्रू॒रम्⁠। तेन॑⁠। वष॑ट्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। वा॒चः⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। क्रू॒रेण॑⁠। प्रेति॑⁠। वृ॒श्च॒ति॒⁠। ता॒जक्⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। यस्य॑⁠। का॒मये॑त⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। २६ (५०) [२६] एति॑⁠। द॒दी॒य॒⁠। इति॑⁠। तस्य॑⁠। स॒भाया᳚म्⁠। उ॒त्ता॒न इत्यु॑त्—ता॒नः⁠। नि॒पद्येति॑ नि—पद्य॑⁠। भुव॑नस्य⁠। प॒ते॒⁠। इति॑⁠। तृणा॑नि⁠। समिति॑⁠। गृ॒ह्णी॒या॒त्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वै⁠। भुव॑नस्य⁠। पतिः॑⁠। प्र॒जाप॑ति॒नेति॑ प्र॒जा—प॒ति॒ना॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। एति॑⁠। द॒त्ते॒⁠। इ॒दम्⁠। अ॒हम्⁠। अ॒मुष्य॑⁠। आ॒मु॒ष्या॒य॒णस्य॑⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। ह॒रा॒मि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। ह॒र॒ति॒⁠। ष॒ड्भिरिति॑ षट्—भिः⁠। ह॒र॒ति॒⁠। षट्⁠। वै⁠। ऋ॒तवः॑⁠। प्र॒जाप॑ति॒नेति॑ प्र॒जा—प॒ति॒ना॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। अ॒न्नाद्य॒मित्य॑न्न—अद्य᳚म्⁠। आ॒दायेत्या᳚—दाय॑⁠। ऋ॒तवः॑⁠। अ॒स्मै॒⁠। अनु॑⁠। प्रेति॑⁠। य॒च्छ॒न्ति॒⁠। २७ (५०) [२७] यः⁠। ज्ये॒ष्ठब॑न्धु॒रिति॑ ज्ये॒ष्ठ—ब॒न्धुः॒⁠। अप॑भूत॒ इत्यप॑—भू॒तः॒⁠। स्यात्⁠। तम्⁠। स्थले᳚⁠। अ॒व॒साय्येत्य॑व—साय्य॑⁠। ब्र॒ह्मौ॒द॒नमिति॑ ब्रह्म—ओ॒द॒नम्⁠। चतु॑श्शराव॒मिति॒ चतुः॑—श॒रा॒व॒म्⁠। प॒क्त्वा⁠। तस्मै᳚⁠। हो॒त॒व्याः᳚⁠। वर्ष्म॑⁠। वै⁠। रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। वर्ष्म॑⁠। स्थल᳚म्⁠। वर्ष्म॑णा⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। वर्ष्म॑⁠। स॒मा॒नाना᳚म्⁠। ग॒म॒य॒ति॒⁠। चतु॑श्शराव॒ इति॒ चतुः॑—श॒रा॒वः॒⁠। भ॒व॒ति॒⁠। दि॒ख्‍षु⁠। ए॒व⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒ति॒⁠। ख्‍षी॒रे⁠। भ॒व॒ति॒⁠। रुच᳚म्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। उदिति॑⁠। ह॒र॒ति॒⁠। शृ॒त॒त्वायेति॑ शृत—त्वाय॑⁠। स॒र्पिष्वा॑न्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। मे॒द्ध्य॒त्वायेति॑ मेद्ध्य—त्वाय॑⁠। च॒त्वारः॑⁠। आ॒र्॒‌षे॒याः⁠। प्रेति॑⁠। अ॒श्ञ॒न्ति॒⁠। दि॒शाम्⁠। ए॒व⁠। ज्योति॑षि⁠। जु॒हो॒ति॒ [२८] (ग्रा॒मी यु॑नक्ती॒ ध्मः स्व ए॒वैना॑ न॒न्नाद्यं॑ यच्छ॒न्त्ये का॒न्नप॑ञ्चा॒शच्च॑) ॥८॥
देवि॑काः⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। प्र॒जाका॑म॒ इति॑ प्र॒जा—का॒मः॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। इ॒व॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। प्रेति॑⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। प्र॒थ॒मम्⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। मि॒थु॒नी⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। क॒रो॒ति॒⁠। अन्विति॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। अनु॑मति॒रित्य॑नु—म॒तिः॒⁠। म॒न्य॒ते॒⁠। रा॒ते⁠। रा॒का⁠। प्रेति॑⁠। सि॒नी॒वा॒ली⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। प्र॒जास्विति॑ प्र—जासु॑⁠। ए॒व⁠। प्रजा॑ता॒स्विति॒ प्र—जा॒ता॒सु॒⁠। कु॒ह्वा᳚⁠। वाच᳚म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। प॒शुका॑म॒ इति॑ प॒शु—का॒मः॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। २९ (५०) [२९] इ॒व॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। प॒शवः॑⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। प॒शून्⁠। प्रेति॑⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। प्र॒थ॒मम्⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। वा॒प॒य॒ति॒⁠। अन्विति॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। अनु॑मति॒रित्य॑नु—म॒तिः॒⁠। म॒न्य॒ते॒⁠। रा॒ते⁠। रा॒का⁠। प्रेति॑⁠। सि॒नी॒वा॒ली⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। प॒शून्⁠। ए॒व⁠। प्रजा॑ता॒निति॒ प्र—जा॒ता॒न्⁠। कु॒ह्वा᳚⁠। प्रतीति॑⁠। स्था॒प॒य॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। ग्राम॑काम॒ इति॒ ग्राम॑—का॒मः॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। इ॒व॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ग्रामः॑⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। ग्राम᳚म्⁠। ३० (५०) [३०] अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। ग्राम॑स्य⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। ज्योगा॑मया॒वीति॒ ज्योक्—आ॒म॒या॒वी॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। अ॒भीति॑⁠। म॒न्य॒न्ते॒⁠। यस्य॑⁠। ज्योक्⁠। आ॒मय॑ति⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। अ॒ग॒दम्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। अक्लृ॑प्तम्⁠। यस्य॑⁠। ज्योक्⁠। आ॒मय॑ति⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। तेन॑⁠। क॒ल्प॒य॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। ३१ (५०) [३१] व॒पे॒त्⁠। यम्⁠। य॒ज्ञः⁠। न⁠। उ॒प॒नमे॒दित्यु॑प—नमे᳚त्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। न⁠। उपेति॑⁠। न॒म॒न्ति॒⁠। यम्⁠। य॒ज्ञः⁠। न⁠। उ॒प॒नम॒तीत्यु॑प—नम॑ति⁠। प्र॒थ॒मम्⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। मु॒ख॒तः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। द॒धा॒ति॒⁠। उपेति॑⁠। ए॒न॒म्⁠। य॒ज्ञः⁠। न॒म॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। ई॒जा॒नः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। या॒तया॑मा॒नीति॑ या॒त—या॒मा॒नि॒⁠। इ॒व॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। यः⁠। ई॒जा॒नः⁠। उ॒त्त॒ममित्यु॑त्—त॒मम्⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। ३२ (५०) [३२] उ॒परि॑ष्टात्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। अया॑तयामा॒नीत्यया॑त—या॒मा॒नि॒⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। उपेति॑⁠। ए॒न॒म्⁠। उत्त॑र॒ इत्युत्—त॒रः॒⁠। य॒ज्ञः⁠। न॒म॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। यम्⁠। मे॒धा⁠। न⁠। उ॒प॒नमे॒दित्यु॑प—नमे᳚त्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। न⁠। उपेति॑⁠। न॒म॒न्ति॒⁠। यम्⁠। मे॒धा⁠। न⁠। उ॒प॒नम॒तीत्यु॑प—नम॑ति⁠। प्र॒थ॒मम्⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। मु॒ख॒तः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। द॒धा॒ति॒⁠। उपेति॑⁠। ए॒न॒म्⁠। मे॒धा⁠। न॒म॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। ए॒व⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। ३३ (५०) [३३] रुक्का॑म॒ इति॒ रुक्—का॒मः॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। इ॒व॒⁠। खलु॑⁠। वै⁠। रुक्⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। रुच᳚म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ख्‍षी॒रे⁠। भ॒व॒न्ति॒⁠। रुच᳚म्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। द॒ध॒ति॒⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। धा॒तार᳚म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। रु॒चः⁠। द॒धा॒ति॒⁠। गा॒य॒त्री⁠। वै⁠। अनु॑मति॒रित्य॑नु—म॒तिः॒⁠। त्रि॒ष्टुक्⁠। रा॒का⁠। जग॑ती⁠। सि॒नी॒वा॒ली⁠। अ॒नु॒ष्टुबित्य॑नु—स्तुप्⁠। कु॒हूः⁠। धा॒ता⁠। व॒ष॒ट्का॒र इति॑ वषट्—का॒रः⁠। पू॒र्व॒प॒ख्‍ष इति॑ पूर्व—प॒ख्‍षः⁠। रा॒का⁠। अ॒प॒र॒प॒ख्‍ष इत्य॑पर—प॒ख्‍षः⁠। कु॒हूः⁠। अ॒मा॒वा॒स्येत्य॑मा—वा॒स्या᳚⁠। सि॒नी॒वा॒ली⁠। पौ॒र्ण॒मा॒सीति॑ पौर्ण—मा॒सी⁠। अनु॑मति॒रित्य॑नु—म॒तिः॒⁠। च॒न्द्रमाः᳚⁠। धा॒ता⁠। अ॒ष्टौ⁠। ३४ (५०) [३४] वस॑वः⁠। अ॒ष्टाख्‍ष॒रेत्य॒ष्टा—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। गा॒य॒त्री⁠। एका॑दश⁠। रु॒द्राः⁠। एका॑दशाख्‍ष॒रेत्येका॑दश—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। त्रि॒ष्टुप्⁠। द्वाद॑श⁠। आ॒दि॒त्याः⁠। द्वाद॑शाख्‍ष॒रेति॒ द्वाद॑श—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। जग॑ती⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒नु॒ष्टुबित्य॑नु—स्तुप्⁠। धा॒ता⁠। व॒ष॒ट्का॒र इति॑ वषट्—का॒रः⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। देवि॑काः⁠। सर्वा॑णि⁠। च॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। सर्वाः᳚⁠। च॒⁠। दे॒वताः᳚⁠। व॒ष॒ट्का॒र इति॑ वषट्—का॒रः⁠। ताः⁠। यत्⁠। स॒ह⁠। सर्वाः᳚⁠। नि॒र्वपे॒दिति॑ निः—वपे᳚त्⁠। ई॒श्व॒राः⁠। ए॒न॒म्⁠। प्र॒दह॒ इति॑ प्र—दहः॑⁠। द्वे इति॑⁠। प्र॒थ॒मे इति॑⁠। नि॒रुप्येति॑ निः—उप्य॑⁠। धा॒तुः⁠। तृ॒तीय᳚म्⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। तथो॒ इति॑⁠। ए॒व⁠। उत्त॑रे॒ इत्युत्—त॒रे॒⁠। निरिति॑⁠। व॒पे॒त्⁠। तथा᳚⁠। ए॒न॒म्⁠। न⁠। प्रेति॑⁠। द॒ह॒न्ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। यस्मै᳚⁠। कामा॑य⁠। नि॒रु॒प्यन्त॒ इति॑ निः—उ॒प्यन्ते᳚⁠। तम्⁠। ए॒व⁠। आ॒भिः॒⁠। उपेति॑⁠। आ॒प्नो॒ति॒ [३५] (प॒शुका॑म॒श्छन्दा॑ꣳसि॒ वै देवि॑का॒श्छन्दा॑ꣳसि॒ग्रामं॑कल्पयत्ये॒ता ए॒व निरु॑त्त॒मन्धा॒तारं॑ करोति मे॒धा न॑मत्ये॒ता ए॒व निर्व॑पे द॒ष्टौ द॑हन्ति॒ नव॑ च) ॥९॥
वास्तोः᳚⁠। प॒ते॒⁠। प्रतीति॑⁠। जा॒नी॒हि॒⁠। अ॒स्मान्⁠। स्वा॒वे॒श इति॑ सु—आ॒वे॒शः⁠। अ॒न॒मी॒वः⁠। भ॒व॒⁠। नः॒⁠॥ यत्⁠। त्वा॒⁠। ईम॑हे⁠। प्रतीति॑⁠। तत्⁠। नः॒⁠। जु॒ष॒स्व॒⁠। शम्⁠। नः॒⁠। ए॒धि॒⁠। द्वि॒पद॒ इति॑ द्वि—पदे᳚⁠। शम्⁠। चतु॑ष्पद॒ इति॒ चतुः॑—प॒दे॒⁠॥ वास्तोः᳚⁠। प॒ते॒⁠। श॒ग्मया᳚⁠। स॒ꣳ॒सदेति॑ सं—सदा᳚⁠। ते॒⁠। स॒ख्‍षी॒महि॑⁠। र॒ण्वया᳚⁠। गा॒तु॒मत्येति॑ गातु—मत्या᳚⁠॥ आवः॑⁠। ख्‍षेमे᳚⁠। उ॒त⁠। योगे᳚⁠। वर᳚म्⁠। नः॒⁠। यू॒यम्⁠। पा॒त॒⁠। स्व॒स्तिभि॒रिति॑ स्व॒स्ति—भिः॒⁠। सदा᳚⁠। नः॒⁠॥ यत्⁠। सा॒यम्प्रा॑त॒रिति॑ सा॒यं—प्रा॒तः॒⁠। अ॒ग्नि॒हो॒त्रमित्य॑ग्नि—हो॒त्रम्⁠। जु॒होति॑⁠। आ॒हु॒ती॒ष्ट॒का इत्या॑हुति—इ॒ष्ट॒काः⁠। ए॒व⁠। ताः⁠। उपेति॑⁠। ध॒त्ते॒⁠। ३६ (५०) [३६] यज॑मानः⁠। अ॒हो॒रा॒त्राणीत्य॑हः—रा॒त्राणि॑⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। इष्ट॑काः⁠। यः⁠। आहि॑ताग्नि॒रित्याहि॑त—अ॒ग्निः॒⁠। यत्⁠। सा॒यम्प्रा॑त॒रिति॑ सा॒यं—प्रा॒तः॒⁠। जु॒होति॑⁠। अ॒हो॒रा॒त्राणीत्य॑हः—रा॒त्राणि॑⁠। ए॒व⁠। आ॒प्त्वा⁠। इष्ट॑काः⁠। कृ॒त्वा⁠। उपेति॑⁠। ध॒त्ते॒⁠। दश॑⁠। स॒मा॒नत्र॑⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। दशा᳚ख्‍ष॒रेति॒ दश॑—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। वि॒राडिति॑ वि—राट्⁠। वि॒राज॒मिति॑ वि—राज᳚म्⁠। ए॒व⁠। आ॒प्त्वा⁠। इष्ट॑काम्⁠। कृ॒त्वा⁠। उपेति॑⁠। ध॒त्ते॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। वि॒राजीति॑ वि—राजि॑⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञम्⁠। आ॒प्नो॒ति॒⁠। चित्य॑श्चित्य॒ इति॒ चित्यः॑—चि॒त्यः॒⁠। अ॒स्य॒⁠। भ॒व॒ति॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। यत्र॑⁠। दश॑⁠। उ॒षि॒त्वा⁠। प्र॒यातीति॑ प्र—याति॑⁠। तत्⁠। य॒ज्ञ॒वा॒स्त्विति॑ यज्ञ—वा॒स्तु⁠। अवा᳚स्तु⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। यत्⁠। ततः॑⁠। अ॒र्वा॒चीन᳚म्⁠। ३७ (५०) [३७] रु॒द्रः⁠। खलु॑⁠। वै⁠। वा॒स्तो॒ष्प॒तिरिति॑ वास्तोः—प॒तिः⁠। यत्⁠। अहु॑त्वा⁠। वा॒स्तो॒ष्प॒तीय॒मिति॑ वास्तोः—प॒तीय᳚म्⁠। प्र॒या॒यादिति॑ प्र—या॒यात्⁠। रु॒द्रः⁠। ए॒न॒म्⁠। भू॒त्वा⁠। अ॒ग्निः⁠। अ॒नू॒त्थायेत्य॑नु—उ॒त्थाय॑⁠। ह॒न्या॒त्⁠। वा॒स्तो॒ष्प॒तीय॒मिति॑ वास्तोः—प॒तीय᳚म्⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। भा॒ग॒धेये॒नेति॑ भाग—धेये॑न⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। श॒म॒य॒ति॒⁠। न⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। यज॑मानः⁠। यत्⁠। यु॒क्ते⁠। जु॒हु॒यात्⁠। यथा᳚⁠। प्रया॑त॒ इति॒ प्र—या॒ते॒⁠। वास्तौ᳚⁠। आहु॑ति॒मित्या—हु॒ति॒म्⁠। जु॒होति॑⁠। ता॒दृक्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। यत्⁠। अयु॑क्ते⁠। जु॒हु॒यात्⁠। यथा᳚⁠। ख्‍षेमे᳚⁠। आहु॑ति॒मित्या—हु॒ति॒म्⁠। जु॒होति॑⁠। ता॒दृक्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। अहु॑तम्⁠। अ॒स्य॒⁠। वा॒स्तो॒ष्प॒तीय॒मिति॑ वास्तोः—प॒तीय᳚म्⁠। स्या॒त्⁠। ३८ (५०) [३८] दख्‍षि॑णः⁠। यु॒क्तः⁠। भव॑ति⁠। स॒व्यः⁠। अयु॑क्तः⁠। अथ॑⁠। वा॒स्तो॒ष्प॒तीय॒मिति॑ वास्तोः—प॒तीय᳚म्⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। उ॒भय᳚म्⁠। ए॒व⁠। अ॒कः॒⁠। अप॑रिवर्ग॒मित्यप॑रि—व॒र्ग॒म्⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। श॒म॒य॒ति॒⁠। यत्⁠। एक॑या⁠। जु॒हु॒यात्⁠। द॒र्वि॒हो॒ममिति॑ दर्वि—हो॒मम्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। पु॒रो॒नु॒वा॒क्या॑मिति॑ पुरः—अ॒नु॒वा॒क्या᳚म्⁠। अ॒नूच्येत्य॑नु—उच्य॑⁠। या॒ज्य॑या⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। स॒दे॒व॒त्वायेति॑ सदेव—त्वाय॑⁠। यत्⁠। हु॒ते⁠। आ॒द॒द्ध्यादित्या᳚—द॒द्ध्यात्⁠। रु॒द्रम्⁠। गृ॒हान्⁠। अ॒न्वारो॑हये॒दित्य॑नु—आरो॑हयेत्⁠। यत्⁠। अ॒व॒ख्‍षाणा॒नीत्य॑व—ख्‍षाणा॑नि⁠। अस॑म्प्रख्‍षा॒प्येत्यसं᳚—प्र॒ख्‍षा॒प्य॒⁠। प्र॒या॒यादिति॑ प्र—या॒यात्⁠। यथा᳚⁠। य॒ज्ञ॒वे॒श॒समिति॑ यज्ञ—वे॒श॒सम्⁠। वा॒⁠। आ॒दह॑न॒मित्या᳚—दह॑नम्⁠। वा॒⁠। ता॒दृक्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। अ॒यम्⁠। ते॒⁠। योनिः॑⁠। ऋ॒त्वियः॑⁠। इति॑⁠। अ॒रण्योः᳚⁠। स॒मारो॑हय॒तीति॑ सं—आरो॑हयति⁠। ३९ (५०) [३९] ए॒षः⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। योनिः॑⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। योनौ᳚⁠। स॒मारो॑हय॒तीति॑ सं—आरो॑हयति⁠। अथो॒ इति॑⁠। खलु॑⁠। आ॒हुः॒⁠। यत्⁠। अ॒रण्योः᳚⁠। स॒मारू॑ढ॒ इति॑ सं—आरू॑ढः⁠। नश्ये᳚त्⁠। उदिति॑⁠। अ॒स्य॒⁠। अ॒ग्निः⁠। सी॒दे॒त्⁠। पु॒न॒रा॒धेय॒ इति॑ पुनः—आ॒धेयः॑⁠। स्या॒त्⁠। इति॑⁠। या⁠। ते॒⁠। अ॒ग्न॒⁠। य॒ज्ञिया᳚⁠। त॒नूः⁠। तया᳚⁠। एति॑⁠। इ॒हि॒⁠। एति॑⁠। रो॒ह॒⁠। इति॑⁠। आ॒त्मन्न्⁠। स॒मारो॑हयत॒ इति॑ सं—आरो॑हयते⁠। यज॑मानः⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। योनिः॑⁠। स्वाया᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। योन्या᳚म्⁠। स॒मारो॑हयत॒ इति॑ सं—आरो॑हयते [४०] (ध॒त्ते॒ ऽर्वा॒चीन॑ꣴ स्याथ्स॒मारो॑हयति॒ पञ्च॑चत्वारिꣳशच्च) ॥१०॥
त्वम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। बृ॒हत्⁠। वयः॑⁠। दधा॑सि⁠। दे॒व॒⁠। दा॒शुषे᳚⁠॥ क॒विः⁠। गृ॒हप॑ति॒रिति॑ गृ॒ह—प॒तिः॒⁠। युवा᳚⁠॥ ह॒व्य॒वाडिति॑ हव्य—वाट्⁠। अ॒ग्निः⁠। अ॒जरः॑⁠। पि॒ता⁠। नः॒⁠। वि॒भुरिति॑ वि—भुः⁠। वि॒भावेति॑ वि—भावा᳚⁠। सु॒दृशी॑क॒ इति॑ सु—दृशी॑कः⁠। अ॒स्मे इति॑⁠॥ सु॒गा॒र्॒‌ह॒प॒त्या इति॑ सु—गा॒र्॒‌ह॒प॒त्याः⁠। समिति॑⁠। इषः॑⁠। दि॒दी॒हि॒⁠। ॒स्म॒द्रिय॒गित्य॑स्म—द्रिय॑क्⁠। समिति॑⁠। मि॒मी॒हि॒⁠। श्रवा॑ꣳसि⁠॥ त्वम्⁠। च॒⁠। सो॒म॒⁠। नः॒⁠। वशः॑⁠। जी॒वातु᳚म्⁠। न⁠। म॒रा॒म॒हे॒⁠॥ प्रि॒यस्तो᳚त्र॒ इति॑ प्रि॒य—स्तो॒त्रः॒⁠। वन॒स्पतिः॑⁠॥ ब्र॒ह्मा⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। प॒द॒वीरिति॑ पद—वीः⁠। क॒वी॒नाम्⁠। ऋषिः॑⁠। विप्रा॑णाम्⁠। म॒हि॒षः⁠। मृ॒गाणा᳚म्⁠॥ श्ये॒नः⁠। गृद्ध्रा॑णाम्⁠। स्वधि॑ति॒रिति॒ स्व—धि॒तिः॒⁠। वना॑नाम्⁠। सोमः॑⁠। ४१ (५०) [४१] प॒वित्र᳚म्⁠। अतीति॑⁠। ए॒ति॒⁠। रेभ॑न्न्⁠॥ एति॑⁠। वि॒श्वदे॑व॒मिति॑ वि॒श्व—दे॒व॒म्⁠। सत्प॑ति॒मिति॒ सत्—प॒ति॒म्⁠। सू॒क्तैरिति॑ सु—उ॒क्तैः⁠। अ॒द्य⁠। वृ॒णी॒म॒हे॒⁠॥ स॒त्यस॑व॒मिति॑ स॒त्य—स॒व॒म्⁠। स॒वि॒तार᳚म्⁠॥ एति॑⁠। स॒त्येन॑⁠। रज॑सा⁠। वर्त॑मानः⁠। नि॒वे॒शय॒न्निति॑ नि—वे॒शय॑न्न्⁠। अ॒मृत᳚म्⁠। मर्त्य᳚म्⁠। च॒⁠॥ हि॒र॒ण्यये॑न⁠। स॒वि॒ता⁠। रथे॑न⁠। एति॑⁠। दे॒वः⁠। या॒ति॒⁠। भुव॑ना⁠। वि॒पश्य॒न्निति॑ वि—पश्य॑न्न्⁠॥ यथा᳚⁠। नः॒⁠। अदि॑तिः⁠। कर॑त्⁠। पश्वे᳚⁠। नृभ्य॒ इति॒ नृ—भ्यः॒⁠। यथा᳚⁠। गवे᳚⁠॥ यथा᳚⁠। तो॒काय॑⁠। रु॒द्रिय᳚म्⁠॥ मा⁠। नः॒⁠। तो॒के⁠। तन॑ये⁠। मा⁠। नः॒⁠। आयु॑षि⁠। मा⁠। नः॒⁠। गोषु॑⁠। मा⁠। ४२ (५०) [४२] नः॒⁠। अश्वे॑षु⁠। री॒रि॒षः॒⁠॥ वी॒रान्⁠। मा⁠। नः॒⁠। रु॒द्र॒⁠। भा॒मि॒तः⁠। व॒धीः॒⁠। ह॒विष्म॑न्तः⁠। नम॑सा⁠। वि॒धे॒म॒⁠। ते॒⁠॥ उ॒द॒प्रुत॒ इत्यु॑द—प्रुतः॑⁠। न⁠। वयः॑⁠। रख्‍ष॑माणाः⁠। वाव॑दतः⁠। अ॒भ्रिय॑स्य⁠। इ॒व॒⁠। घोषाः᳚⁠॥ गि॒रि॒भ्रज॒ इति॑ गिरि—भ्रजः॑⁠। न⁠। ऊ॒र्मयः॑⁠। मद॑न्तः⁠। बृह॒स्पति᳚म्⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒र्काः⁠। अ॒ना॒व॒न्न्⁠॥ ह॒ꣳ॒सैः⁠। इ॒व॒⁠। सखि॑भि॒रिति॒ सखि॑—भिः॒⁠। वाव॑दद्भि॒रिति॒ वाव॑दत्—भिः॒⁠। अ॒श्म॒न्मया॒नीत्य॑श्मन्न्—मया॑नि⁠। नह॑ना⁠। व्यस्य॒न्निति॑ वि—अस्य॑न्न्⁠॥ बृह॒स्पतिः॑⁠। अ॒भि॒कनि॑क्रद॒दित्य॑भि—कनि॑क्रदत्⁠। गाः⁠। उ॒त⁠। प्रेति॑⁠। अ॒स्तौ॒त्⁠। उदिति॑⁠। च॒⁠। वि॒द्वान्⁠। अ॒गा॒य॒त्⁠॥ एति॑⁠। इ॒न्द्र॒⁠। सा॒न॒सिम्⁠। र॒यिम्⁠। ४३ (५०) [४३] स॒जित्वा॑न॒मिति॑ स—जित्वा॑नम्⁠। स॒दा॒सह॒मिति॑ सदा—सह᳚म्⁠॥ वर्‌षि॑ष्ठम्⁠। ऊ॒तये᳚⁠। भ॒र॒⁠॥ प्रेति॑⁠। स॒सा॒हि॒षे॒⁠। पु॒रु॒हू॒तेति॑ पुरु—हू॒त॒⁠। शत्रू॑न्⁠। ज्येष्ठः॑⁠। ते॒⁠। शुष्मः॑⁠। इ॒ह⁠। रा॒तिः⁠। अ॒स्तु॒⁠॥ इन्द्र॑⁠। एति॑⁠। भ॒र॒⁠। दख्‍षि॑णेन⁠। वसू॑नि⁠। पतिः॑⁠। सिन्धू॑नाम्⁠। अ॒सि॒⁠। रे॒वती॑नाम्⁠॥ त्वम्⁠। सु॒तस्य॑⁠। पी॒तये᳚⁠। स॒द्यः⁠। वृ॒द्धः⁠। अ॒जा॒य॒थाः॒⁠। इन्द्र॑⁠। ज्यैष्ठ्या॑य⁠। सु॒क्र॒तो॒ इति॑ सु—क्र॒तो॒⁠॥ भुवः॑⁠। त्वम्⁠। इ॒न्द्र॒⁠। ब्रह्म॑णा⁠। म॒हान्⁠। भुवः॑⁠। विश्वे॑षु⁠। सव॑नेषु⁠। य॒ज्ञियः॑⁠॥ भुवः॑⁠। नॄन्⁠। च्यौ॒त्नः⁠। विश्व॑स्मिन्न्⁠। भरे᳚⁠। ज्येष्ठः॑⁠। च॒⁠। मन्त्रः॑⁠। ४४ (५०) [४४] वि॒श्व॒च॒र्॒‌ष॒ण॒ इति॑ विश्व—च॒र्॒‌ष॒णे॒⁠॥ मि॒त्रस्य॑⁠। च॒र्॒‌ष॒णी॒धृत॒ इति॑ चर्‌षणि—धृतः॑⁠। श्रवः॑⁠। दे॒वस्य॑⁠। सा॒न॒सिम्⁠॥ स॒त्यम्⁠। चि॒त्रश्र॑वस्तम॒मिति॑ चि॒त्रश्र॑वः—त॒म॒म्⁠॥ मि॒त्रः⁠। जना॑न्⁠। या॒त॒य॒ति॒⁠। प्र॒जा॒नन्निति॑ प्र—जा॒नन्⁠। मि॒त्रः⁠। दा॒धा॒र॒⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। उ॒त⁠। द्याम्⁠॥ मि॒त्रः⁠। कृ॒ष्टीः⁠। अनि॑मि॒षेत्यनि॑—मि॒षा॒⁠। अ॒भीति॑⁠। च॒ष्टे॒⁠। स॒त्याय॑⁠। ह॒व्यम्⁠। घृ॒तव॒दिति॑ घृ॒त—व॒त्⁠। वि॒धे॒म॒⁠॥ प्रेति॑⁠। सः⁠। मि॒त्र॒⁠। मर्तः॑⁠। अ॒स्तु॒⁠। प्रय॑स्वान्⁠। यः⁠। ते॒⁠। आ॒दि॒त्य॒⁠। शिख्‍ष॑ति⁠। व्र॒तेन॑⁠॥ न⁠। ह॒न्य॒ते॒⁠। न⁠। जी॒य॒ते॒⁠। त्वोतः॑⁠। न⁠। ए॒न॒म्⁠। अꣳहः॑⁠। अ॒श्ञो॒ति॒⁠। अन्ति॑तः⁠। न⁠। दू॒रात्⁠॥ यत्⁠। ४५ (५०) [४५] चि॒त्⁠। हि⁠। ते॒⁠। विशः॑⁠। य॒था॒⁠। प्रेति॑⁠। दे॒व॒⁠। व॒रु॒ण॒⁠। व्र॒तम्⁠॥ मि॒नी॒मसि॑⁠। द्यवि॑द्य॒वीति॒ द्यवि॑—द्य॒वि॒⁠॥ यत्⁠। किम्⁠। च॒⁠। इ॒दम्⁠। व॒रु॒ण॒⁠। दैव्ये᳚⁠। जने᳚⁠। अ॒भि॒द्रो॒हमित्य॑भि—द्रो॒हम्⁠। म॒नु॒ष्याः᳚⁠। चरा॑मसि⁠॥ अचि॑त्ती⁠। यत्⁠। तव॑⁠। धर्मा᳚⁠। यु॒यो॒पि॒म⁠। मा⁠। नः॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। एन॑सः⁠। दे॒व॒⁠। री॒रि॒षः॒⁠॥ कि॒त॒वासः॑⁠। यत्⁠। रि॒रि॒पुः⁠। न⁠। दी॒वि⁠। यत्⁠। वा॒⁠। घ॒⁠। स॒त्यम्⁠। उ॒त⁠। यत्⁠। न⁠। वि॒द्म⁠॥ सर्वा᳚⁠। ता⁠। वीति॑⁠। स्य॒⁠। शि॒थि॒रा⁠। इ॒व॒⁠। दे॒व॒⁠। अथ॑⁠। ते॒⁠। स्या॒म॒⁠। व॒रु॒ण॒⁠। प्रि॒यासः॑ [४६] (सोमो॒गोषु॒ मा र॒यिं मन्त्रो॒ य च्छि॑थि॒रा स॒प्त च॑) ॥११॥
अनुवाकाः पञ्चशती
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