कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
चतुर्थकाण्डे चतुर्थः प्रश्नः

कांड ४ प्रश्न ४
पञ्चमचितिशेषनिरूपणं

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
र॒श्मिः⁠। अ॒सि॒⁠। ख्‍षया॑य⁠। त्वा॒⁠। ख्‍षय᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। प्रेति॒रिति॒ प्र—इ॒तिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। धर्मा॑य⁠। त्वा॒⁠। धर्म᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। अन्वि॑ति॒रित्यनु॑—इ॒तिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। दि॒वे⁠। त्वा॒⁠। दिव᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। स॒न्धिरिति॑ सं—धिः⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षाय⁠। त्वा॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। जि॒न्व॒⁠। प्र॒ति॒धिरिति॑ प्रति—धिः⁠। अ॒सि॒⁠। पृ॒थि॒व्यै⁠। त्वा॒⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। जि॒न्व॒⁠। वि॒ष्टं॒भ इति॑ वि—स्तं॒भः⁠। अ॒सि॒⁠। वृष्ट्यै᳚⁠। त्वा॒⁠। वृष्टि᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। प्र॒वेति॑ प्र—वा⁠। अ॒सि॒⁠। अह्ने᳚⁠। त्वा॒⁠। अहः॑⁠। जि॒न्व॒⁠। अ॒नु॒वेत्य॑नु—वा⁠। अ॒सि॒⁠। रात्रि॑यै⁠। त्वा॒⁠। रात्रि᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। उ॒शिक्⁠। अ॒सि॒⁠। १ (५०) [१] वसु॑भ्य॒ इति॒ वसु॑—भ्यः॒⁠। त्वा॒⁠। वसू॑न्⁠। जि॒न्व॒⁠। प्र॒के॒त इति॑ प्र—के॒तः⁠। अ॒सि॒⁠। रु॒द्रेभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। रु॒द्रान्⁠। जि॒न्व॒⁠। सु॒दी॒तिरिति॑ सु—दी॒तिः⁠। अ॒सि॒⁠। आ॒दि॒त्येभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। आ॒दि॒त्यान्⁠। जि॒न्व॒⁠। ओजः॑⁠। अ॒सि॒⁠। पि॒तृभ्य॒ इति॑ पि॒तृ—भ्यः॒⁠। त्वा॒⁠। पि॒तॄन्⁠। जि॒न्व॒⁠। तन्तुः॑⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒जाभ्य॒ इति॑ प्र—जाभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। जि॒न्व॒⁠। पृ॒त॒ना॒षाट्⁠। अ॒सि॒⁠। प॒शुभ्य॒ इति॑ प॒शु—भ्यः॒⁠। त्वा॒⁠। प॒शून्⁠। जि॒न्व॒⁠। रे॒वत्⁠। अ॒सि॒⁠। ओष॑धीभ्य॒ इत्योष॑धि—भ्यः॒⁠। त्वा॒⁠। ओष॑धीः⁠। जि॒न्व॒⁠। अ॒भि॒जिदित्य॑भि—जित्⁠। अ॒सि॒⁠। यु॒क्तग्रा॒वेति॑ यु॒क्त—ग्रा॒वा॒⁠। इन्द्रा॑य⁠। त्वा॒⁠। इन्द्र᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। प्रा॒णायेति॑ प्र—अ॒नाय॑⁠। २ (५०) [२] त्वा॒⁠। प्रा॒णमिति॑ प्र—अ॒नम्⁠। जि॒न्व॒⁠। य॒न्ता⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒पा॒नायेत्य॑प—अ॒नाय॑⁠। त्वा॒⁠। अ॒पा॒नमित्य॑प—अ॒नम्⁠। जि॒न्व॒⁠। स॒ꣳ॒सर्प॒ इति॑ सं—सर्पः॑⁠। अ॒सि॒⁠। चख्‍षु॑षे⁠। त्वा॒⁠। चख्‍षुः॑⁠। जि॒न्व॒⁠। व॒यो॒धा इति॑ वयः—धाः⁠। अ॒सि॒⁠। श्रोत्रा॑य⁠। त्वा॒⁠। श्रोत्र᳚म्⁠। जि॒न्व॒⁠। त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒वृदिति॑ प्र—वृत्⁠। अ॒सि॒⁠। स॒व्ँवृदिति॑ सं—वृत्⁠। अ॒सि॒⁠। वि॒वृदिति॑ वि—वृत्⁠। अ॒सि॒⁠। स॒ꣳ॒रो॒ह इति॑ सं—रो॒हः⁠। अ॒सि॒⁠। नी॒रो॒ह इति॑ निः—रो॒हः⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒रो॒ह इति॑ प्र—रो॒हः⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒नु॒रो॒ह इत्य॑नु—रो॒हः⁠। अ॒सि॒⁠। व॒सु॒कः⁠। अ॒सि॒⁠। वेष॑श्रि॒रिति॒ वेष॑—श्रिः॒⁠। अ॒सि॒⁠। वस्य॑ष्टिः⁠। अ॒सि॒ [३] (उ॒शिग॑सि प्रा॒णाय॒ त्रिच॑त्वारिꣳशच्च) ॥१॥
राज्ञी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। प्राची᳚⁠। दिक्⁠। वस॑वः⁠। ते॒⁠। दे॒वाः⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। अ॒ग्निः⁠। हे॒ती॒नाम्⁠। प्र॒ति॒ध॒र्तेति॑ प्रति—ध॒र्ता⁠। त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। त्वा॒⁠। स्तोमः॑⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। श्र॒य॒तु॒⁠। आज्य᳚म्⁠। उ॒क्थम्⁠। अव्य॑थयत्⁠। स्त॒भ्ना॒तु॒⁠। र॒थ॒न्त॒रमिति॑ रथं—त॒रम्⁠। साम॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। वि॒राडिति॑ वि—राट्⁠। अ॒सि॒⁠। द॒ख्‍षि॒णा⁠। दिक्⁠। रु॒द्राः⁠। ते॒⁠। दे॒वाः⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। इन्द्रः॑⁠। हे॒ती॒नाम्⁠। प्र॒ति॒ध॒र्तेति॑ प्रति—ध॒र्ता⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। त्वा॒⁠। स्तोमः॑⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। श्र॒य॒तु॒⁠। प्र उ॑गम्⁠। उ॒क्थम्⁠। अव्य॑थयत्⁠। स्त॒भ्ना॒तु॒⁠। बृ॒हत्⁠। साम॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। स॒म्राडिति॑ सं—राट्⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒तीची᳚⁠। दिक्⁠। ४ (५०) [४] आ॒दि॒त्याः⁠। ते॒⁠। दे॒वाः⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। सोमः॑⁠। हे॒ती॒नाम्⁠। प्र॒ति॒ध॒र्तेति॑ प्रति—ध॒र्ता⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। त्वा॒⁠। स्तोमः॑⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। श्र॒य॒तु॒⁠। म॒रु॒त्व॒तीय᳚म्⁠। उ॒क्थम्⁠। अव्य॑थयत्⁠। स्त॒भ्ना॒तु॒⁠। वै॒रू॒पम्⁠। साम॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। स्व॒राडिति॑ स्व—राट्⁠। अ॒सि॒⁠। उदी॑ची⁠। दिक्⁠। विश्वे᳚⁠। ते॒⁠। दे॒वाः⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। वरु॑णः⁠। हे॒ती॒नाम्⁠। प्र॒ति॒ध॒र्तेति॑ प्रति—ध॒र्ता⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। त्वा॒⁠। स्तोमः॑⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। श्र॒य॒तु॒⁠। निष्के॑वल्यम्⁠। उ॒क्थम्⁠। अव्य॑थयत्⁠। स्त॒भ्ना॒तु॒⁠। वै॒रा॒जम्⁠। साम॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। अधि॑प॒त्नीत्यधि॑—प॒त्नी॒⁠। अ॒सि॒⁠। बृ॒ह॒ती⁠। दिक्⁠। म॒रुतः॑⁠। ते॒⁠। दे॒वाः⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। ५ (५०) [५] बृह॒स्पतिः॑⁠। हे॒ती॒नाम्⁠। प्र॒ति॒ध॒र्तेति॑ प्रति—ध॒र्ता⁠। त्रि॒ण॒व॒त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒शाविति॑ त्रिणव—त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒शौ⁠। त्वा॒⁠। स्तोमौ᳚⁠। पृ॒थि॒व्याम्⁠। श्र॒य॒ता॒म्⁠। वै॒श्व॒दे॒वा॒ग्नि॒मा॒रु॒ते इति॑ वैश्वदेव—आ॒ग्नि॒मा॒रु॒ते⁠। उ॒क्थे इति॑⁠। अव्य॑थयन्ती॒ इति॑⁠। स्त॒भ्नी॒ता॒म्⁠। शा॒क्व॒र॒रै॒व॒ते इति॑ शाक्वर—रै॒व॒ते⁠। साम॑नी॒ इति॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षाय⁠। ऋष॑यः⁠। त्वा॒⁠। प्र॒थ॒म॒जा इति॑ प्रथम—जाः⁠। दे॒वेषु॑⁠। दि॒वः⁠। मात्र॑या⁠। व॒रि॒णा⁠। प्र॒थ॒न्तु॒⁠। वि॒ध॒र्तेति॑ वि—ध॒र्ता⁠। च॒⁠। अ॒यम्⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। च॒⁠। ते⁠। त्वा॒⁠। सर्वे᳚⁠। स॒व्ँवि॒दा॒ना इति॑ सं—वि॒दा॒नाः⁠। नाक॑स्य⁠। पृ॒ष्ठे⁠। सु॒व॒र्ग इति॑ सुवः—गे⁠। लो॒के⁠। यज॑मानम्⁠। च॒⁠। सा॒द॒य॒न्तु॒ [६] (प्र॒तीची॒ दिङ् म॒रुत॑स्ते दे॒वा अधि॑पतय श्चत्वारि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥२॥
अ॒यम्⁠। पु॒रः⁠। हरि॑केश॒ इति॒ हरि॑—के॒शः॒⁠। सूर्य॑रश्मि॒रिति॒ सूर्य॑—र॒श्मिः॒⁠। तस्य॑⁠। र॒थ॒गृ॒थ्स इति॑ रथ—गृ॒थ्सः⁠। च॒⁠। रथौ॑जा॒ इति॒ रथ॑—ओ॒जाः॒⁠। च॒⁠। से॒ना॒नि॒ग्रा॒म॒ण्या॑विति॑ सेनानि—ग्रा॒म॒ण्यौ᳚⁠। पु॒ञ्जि॒क॒स्थ॒लेति॑ पुञ्जिक—स्थ॒ला⁠। च॒⁠। कृ॒त॒स्थ॒लेति॑ कृत—स्थ॒ला⁠। च॒⁠। अ॒फ्स॒रसौ᳚⁠। या॒तु॒धाना॒ इति॑ यातु—धानाः᳚⁠। हे॒तिः⁠। रख्‍षा॑ꣳसि⁠। प्रहे॑ति॒रिति॒ प्र—हे॒तिः॒⁠। अ॒यम्⁠। द॒ख्‍षि॒णा⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। तस्य॑⁠। र॒थ॒स्व॒न इति॑ रथ—स्व॒नः⁠। च॒⁠। रथे॑चित्र॒ इति॒ रथे᳚—चि॒त्रः॒⁠। च॒⁠। से॒ना॒नि॒ग्रा॒म॒ण्या॑विति॑ सेनानि—ग्रा॒म॒ण्यौ᳚⁠। मे॒न॒का⁠। च॒⁠। स॒ह॒ज॒न्येति॑ सह—ज॒न्या⁠। च॒⁠। अ॒फ्स॒रसौ᳚⁠। द॒ङ्णवः॑⁠। प॒शवः॑⁠। हे॒तिः⁠। पौरु॑षेयः⁠। व॒धः⁠। प्रहे॑ति॒रिति॒ प्र—हे॒तिः॒⁠। अ॒यम्⁠। प॒श्चात्⁠। वि॒श्वव्य॑चा॒ इति॑ वि॒श्व—व्य॒चाः॒⁠। तस्य॑⁠। रथ॑प्रोत॒ इति॒ रथ॑—प्रो॒तः॒⁠। च॒⁠। अस॑मरथ॒ इत्यस॑म—र॒थः॒⁠। च॒⁠। से॒ना॒नि॒ग्रा॒म॒ण्या॑विति॑ सेनानि—ग्रा॒म॒ण्यौ᳚⁠। प्र॒म्लोच॒न्तीति॑ प्र—म्लोच॑न्ती⁠। च॒⁠। ७ (५०) [७] अ॒नु॒म्लोच॒न्तीत्य॑नु—म्लोच॑न्ती⁠। च॒⁠। अ॒फ्स॒रसौ᳚⁠। स॒र्पाः⁠। हे॒तिः⁠। व्या॒घ्राः⁠। प्रहे॑ति॒रिति॒ प्र—हे॒तिः॒⁠। अ॒यम्⁠। उ॒त्त॒रादित्यु॑त्—त॒रात्⁠। स॒य्ँयद्व॑सु॒रिति॑ स॒य्ँयत्—व॒सुः॒⁠। तस्य॑⁠। से॒न॒जिदिति॑ सेन—जित्⁠। च॒⁠। सु॒षेण॒ इति॑ सु—सेनः॑⁠। च॒⁠। से॒ना॒नि॒ग्रा॒म॒ण्या॑विति॑ सेनानि—ग्रा॒म॒ण्यौ᳚⁠। वि॒श्वाची᳚⁠। च॒⁠। घृ॒ताची᳚⁠। च॒⁠। अ॒फ्स॒रसौ᳚⁠। आपः॑⁠। हे॒तिः⁠। वातः॑⁠। प्रहे॑ति॒रिति॒ प्र—हे॒तिः॒⁠। अ॒यम्⁠। उ॒परि॑⁠। अ॒र्वाग्व॑सु॒रित्य॒र्वाक्—व॒सुः॒⁠। तस्य॑⁠। तार्ख्‍ष्यः॑⁠। च॒⁠। अरि॑ष्टनेमि॒रित्यरि॑ष्ट—ने॒मिः॒⁠। च॒⁠। से॒ना॒नि॒ग्रा॒म॒ण्या॑विति॑ सेनानि—ग्रा॒म॒ण्यौ᳚⁠। उ॒र्वशी᳚⁠। च॒⁠। पू॒र्वचि॑त्ति॒रिति॑ पू॒र्व—चि॒त्तिः॒⁠। च॒⁠। अ॒फ्स॒रसौ᳚⁠। वि॒द्युदिति॑ वि—द्युत्⁠। हे॒तिः⁠। अ॒व॒स्फूर्ज॒न्नित्य॑व—स्फूर्ज॑न्न्⁠। प्रहे॑ति॒रिति॒ प्र—हे॒तिः॒⁠। तेभ्यः॑⁠। नमः॑⁠। ते⁠। नः॒⁠। मृ॒ड॒य॒न्तु॒⁠। ते⁠। यम्⁠। ८ (५०) [८] द्वि॒ष्मः⁠। यः⁠। च॒⁠। नः॒⁠। द्वेष्टि॑⁠। तम्⁠। वः॒⁠। जंभे᳚⁠। द॒धा॒मि॒⁠। आ॒योः⁠। त्वा॒⁠। सद॑ने⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। अव॑तः⁠। छा॒याया᳚म्⁠। नमः॑⁠। स॒मु॒द्राय॑⁠। नमः॑⁠। स॒मु॒द्रस्य॑⁠। चख्‍ष॑से⁠। प॒र॒मे॒ष्ठी⁠। त्वा॒⁠। सा॒द॒य॒तु॒⁠। दि॒वः⁠। पृ॒ष्ठे⁠। व्यच॑स्वतीम्⁠। प्रथ॑स्वतीम्⁠। वि॒भूम॑ती॒मिति॑ वि—भूम॑तीम्⁠। प्र॒भूम॑ती॒मिति॑ प्र—भूम॑तीम्⁠। प॒रि॒भूम॑ती॒मिति॑ परि—भूम॑तीम्⁠। दिव᳚म्⁠। य॒च्छ॒⁠। दिव᳚म्⁠। दृ॒ꣳ॒ह॒⁠। दिव᳚म्⁠। मा⁠। हि॒ꣳ॒सीः॒⁠। विश्व॑स्मै⁠। प्रा॒णायेति॑ प्र—अ॒नाय॑⁠। अ॒पा॒नायेत्य॑प—अ॒नाय॑⁠। व्या॒नायेति॑ वि—अ॒नाय॑⁠। उ॒दा॒नायेत्यु॑त्—अ॒नाय॑⁠। प्र॒ति॒ष्ठाया॒ इति॑ प्रति—स्थायै᳚⁠। च॒रित्रा॑य⁠। सूर्यः॑⁠। त्वा॒⁠। अ॒भीति॑⁠। पा॒तु॒⁠। म॒ह्या⁠। स्व॒स्त्या⁠। छ॒र्दिषा᳚⁠। शन्त॑मे॒नेति॒ शं—त॒मे॒न॒⁠। तया᳚⁠। दे॒वत॑या⁠। अ॒ङ्गि॒र॒स्वत्⁠। ध्रु॒वा⁠। सी॒द॒⁠॥ प्रोथ॑त्⁠। अश्वः॑⁠। न⁠। यव॑से⁠। अ॒वि॒ष्यन्न्⁠। य॒दा⁠। म॒हः⁠। स॒व्ँवर॑णा॒दिति॑ सं—वर॑णात्⁠। व्यस्था॒दिति॑ वि—अस्था᳚त्⁠॥ आत्⁠। अ॒स्य॒⁠। वातः॑⁠। अन्विति॑⁠। वा॒ति॒⁠। शो॒चिः⁠। अध॑⁠। स्म॒⁠। ते॒⁠। व्रज॑नम्⁠। कृ॒ष्णम्⁠। अ॒स्ति॒ [९] (प्र॒म्लोच॑न्ती च॒ यꣴ स्व॒स्त्या ऽष्टावि॑ꣳशतिश्च) ॥३॥
अ॒ग्निः⁠। मू॒र्द्धा⁠। दि॒वः⁠। क॒कुत्⁠। पतिः॑⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। अ॒यम्⁠॥ अ॒पाम्⁠। रेता॑ꣳसि⁠। जि॒न्व॒ति॒⁠॥ त्वाम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। पुष्क॑रात्⁠। अधीति॑⁠। अथ॑र्वा⁠। निरिति॑⁠। अ॒म॒न्थ॒त॒⁠॥ मू॒र्द्ध्नः⁠। विश्व॑स्य⁠। वा॒घतः॑⁠॥ अ॒यम्⁠। अ॒ग्निः⁠। स॒ह॒स्रिणः॑⁠। वाज॑स्य⁠। श॒तिनः॑⁠। पतिः॑⁠॥ मू॒र्द्धा⁠। क॒विः⁠। र॒यी॒णाम्⁠॥ भुवः॑⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। रज॑सः⁠। च॒⁠। ने॒ता⁠। यत्र॑⁠। नि॒युद्भि॒रिति॑ नि॒युत्—भिः॒⁠। सच॑से⁠। शि॒वाभिः॑⁠॥ दि॒वि⁠। मू॒र्द्धान᳚म्⁠। द॒धि॒षे॒⁠। सु॒व॒र्॒‌षामिति॑ सुवः—साम्⁠। जि॒ह्वाम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। च॒कृ॒षे॒⁠। ह॒व्य॒वाह॒मिति॑ हव्य—वाह᳚म्⁠॥ अबा॑धि⁠। अ॒ग्निः⁠। स॒मिधेति॑ सम्—इधा᳚⁠। जना॑नाम्⁠। १० (५०) [१०] प्रतीति॑⁠। धे॒नुम्⁠। इ॒व⁠। आ॒य॒तीमित्या᳚—य॒तीम्⁠। उ॒षास᳚म्⁠॥ य॒ह्वाः⁠। इ॒व॒⁠। प्रेति॑⁠। व॒याम्⁠। उ॒ज्जिहा॑ना॒ इत्यु॑त्—जिहा॑नाः⁠। प्रेति॑⁠। भा॒नवः॑⁠। सि॒स्र॒ते॒⁠। नाक᳚म्⁠। अच्छ॑⁠॥ अवो॑चाम⁠। क॒वये᳚⁠। मेद्ध्या॑य⁠। वचः॑⁠। व॒न्दारु॑⁠। वृ॒ष॒भाय॑⁠। वृष्णे᳚⁠॥ गवि॑ष्ठिरः⁠। नम॑सा⁠। स्तोम᳚म्⁠। अ॒ग्नौ⁠। दि॒वि⁠। इ॒व॒⁠। रु॒क्मम्⁠। उ॒र्व्यञ्च᳚म्⁠। अ॒श्रे॒त्⁠॥ जन॑स्य⁠। गो॒पा इति॑ गो—पाः⁠। अ॒ज॒नि॒ष्ट॒⁠। जागृ॑विः⁠। अ॒ग्निः⁠। सु॒दख्‍ष॒ इति॑ सु—दख्‍षः॑⁠। सु॒वि॒ताय॑⁠। नव्य॑से⁠॥ घृ॒तप्र॑तीक॒ इति॑ घृ॒त—प्र॒ती॒कः॒⁠। बृ॒ह॒ता⁠। दि॒वि॒स्पृशेति॑ दिवि—स्पृशा᳚⁠। द्यु॒मदिति॑ द्यु—मत्⁠। वीति॑⁠। भा॒ति॒⁠। भ॒र॒तेभ्यः॑⁠। शुचिः॑⁠॥ त्वाम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। अङ्गि॑रसः⁠। ११ (५०) [११] गुहा᳚⁠। हि॒तम्⁠। अन्विति॑⁠। अ॒वि॒न्द॒न्न्⁠। शि॒श्रि॒या॒णम्⁠। वने॑वन॒ इति॒ वने᳚—व॒ने॒⁠॥ सः⁠। जा॒य॒से॒⁠। म॒थ्यमा॑नः⁠। सहः॑⁠। म॒हत्⁠। त्वाम्⁠। आ॒हुः॒⁠। सह॑सः⁠। पु॒त्रम्⁠। अ॒ङ्गि॒रः॒⁠॥ य॒ज्ञस्य॑⁠। के॒तुम्⁠। प्र॒थ॒मम्⁠। पु॒रोहि॑त॒मिति॑ पु॒रः—हि॒त॒म्⁠। अ॒ग्निम्⁠। नरः॑⁠। त्रि॒ष॒ध॒स्थ इति॑ त्रि—स॒ध॒स्थे⁠। समिति॑⁠। इ॒न्ध॒ते॒⁠॥ इन्द्रे॑ण⁠। दे॒वैः⁠। स॒रथ॒मिति॑ स—रथ᳚म्⁠। सः⁠। ब॒र्॒‌हिषि॑⁠। सीद॑त्⁠। नीति॑⁠। होता᳚⁠। य॒जथा॑य⁠। सु॒क्रतु॒रिति॑ सु—क्रतुः॑⁠॥ त्वाम्⁠। चि॒त्र॒श्र॒व॒स्त॒मेति॑ चित्रश्रवः—त॒म॒⁠। हव॑न्ते⁠। वि॒ख्‍षु⁠। ज॒न्तवः॑⁠॥ शो॒चिष्के॑श॒मिति॑ शो॒चिः—के॒श॒म्⁠। पु॒रु॒प्रि॒येति॑ पुरु—प्रि॒य॒⁠। अग्ने᳚⁠। ह॒व्याय॑⁠। वोढ॑वे⁠॥ सखा॑यः⁠। समिति॑⁠। वः॒⁠। स॒म्यञ्च᳚म्⁠। इष᳚म्⁠। १२ (५०) [१२] स्तोम᳚म्⁠। च॒⁠। अ॒ग्नये᳚⁠॥ वर्‌षि॑ष्ठाय⁠। ख्‍षि॒ती॒नाम्⁠। ऊ॒र्जः⁠। नप्त्रे᳚⁠। सह॑स्वते⁠॥ सꣳस॒मिति॒ सम्—स॒म्⁠। इत्⁠। यु॒व॒से॒⁠। वृ॒ष॒न्न्⁠। अग्ने᳚⁠। विश्वा॑नि⁠। अ॒र्यः⁠। आ⁠॥ इ॒डः⁠। प॒दे⁠। समिति॑⁠। इ॒द्ध्य॒से॒⁠। सः⁠। नः॒⁠। वसू॑नि⁠। एति॑⁠। भ॒र॒⁠॥ ए॒ना⁠। वः॒⁠। अ॒ग्निम्⁠। नम॑सा⁠। ऊ॒र्जः⁠। नपा॑तम्⁠। एति॑⁠। हु॒वे॒⁠॥ प्रि॒यम्⁠। चेति॑ष्ठम्⁠। अ॒र॒तिम्⁠। स्व॒द्ध्व॒रमिति॑ सु—अ॒द्ध्व॒रम्⁠। विश्व॑स्य⁠। दू॒तम्⁠। अ॒मृत᳚म्⁠॥ सः⁠। यो॒ज॒ते॒⁠। अ॒रु॒षः⁠। वि॒श्वभो॑ज॒सेति॑ वि॒श्व—भो॒ज॒सा॒⁠। सः⁠। दु॒द्र॒व॒त्⁠। स्वा॑हुत॒ इति॒ सु—आ॒हु॒तः॒⁠॥ सु॒ब्रह्मेति॑ सु—ब्रह्मा᳚⁠। य॒ज्ञः⁠। सु॒शमीति॑ सु—शमी᳚⁠। १३ (५०) [१३] वसू॑नाम्⁠। दे॒वम्⁠। राधः॑⁠। जना॑नाम्⁠॥ उदिति॑⁠। अ॒स्य॒⁠। शो॒चिः⁠। अ॒स्था॒त्⁠। आ॒जुह्वा॑न॒स्येत्या᳚—जुह्वा॑नस्य⁠। मी॒ढुषः॑⁠॥ उदिति॑⁠। धू॒मासः॑⁠। अ॒रु॒षासः॑⁠। दि॒वि॒स्पृश॒ इति॑ दिवि—स्पृशः॑⁠। समिति॑⁠। अ॒ग्निम्⁠। इ॒न्ध॒ते॒⁠। नरः॑⁠॥ अग्ने᳚⁠। वाज॑स्य⁠। गोम॑त॒ इति॒ गो—म॒तः॒⁠। ईशा॑नः⁠। स॒ह॒सः॒⁠। य॒हो॒ इति॑⁠॥ अ॒स्मे इति॑⁠। धे॒हि॒⁠। जा॒त॒वे॒द॒ इति॑ जात—वे॒दः॒⁠। महि॑⁠। श्रवः॑⁠॥ सः⁠। इ॒धा॒नः⁠। वसुः॑⁠। क॒विः⁠। अ॒ग्निः⁠। ई॒डेन्यः॑⁠। गि॒रा⁠॥ रे॒वत्⁠। अ॒स्मभ्य॒मित्य॒स्म—भ्य॒म्⁠। पु॒र्व॒णी॒केति॑ पुरु—अ॒नी॒क॒⁠। दी॒दि॒हि॒⁠॥ ख्‍ष॒पः⁠। रा॒ज॒न्न्⁠। उ॒त⁠। त्मना᳚⁠। अग्ने᳚⁠। वस्तोः᳚⁠। उ॒त⁠। उ॒षसः॑⁠॥ सः⁠। ति॒ग्म॒जं॒भेति॑ तिग्म—जं॒भ॒⁠। १४ (५०) [१४] र॒ख्‍षसः॑⁠। द॒ह॒⁠। प्रति॑⁠॥ एति॑⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। इ॒धी॒म॒हि॒⁠। द्यु॒मन्त॒मिति॑ द्यु—मन्त᳚म्⁠। दे॒व॒⁠। अ॒जर᳚म्⁠॥ यत्⁠। ह॒⁠। स्या⁠। ते॒⁠। पनी॑यसी⁠। स॒मिदिति॑ सं—इत्⁠। दी॒दय॑ति⁠। द्यवि॑⁠। इष᳚म्⁠। स्तो॒तृभ्य॒ इति॑ स्तो॒तृ—भ्यः॒⁠। एति॑⁠। भ॒र॒⁠॥ एति॑⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। ऋ॒चा⁠। ह॒विः⁠। शु॒क्रस्य॑⁠। ज्यो॒ति॒षः॒⁠। प॒ते॒⁠॥ सुश्च॒न्द्रेति॒ सु—च॒न्द्र॒⁠। दस्म॑⁠। विश्प॑ते⁠। हव्य॑वा॒डिति॒ हव्य॑—वा॒ट्⁠। तुभ्य᳚म्⁠। हू॒य॒ते॒⁠। इष᳚म्⁠। स्तो॒तृभ्य॒ इति॑ स्तो॒तृ—भ्यः॒⁠। एति॑⁠। भ॒र॒⁠॥ उ॒भे इति॑⁠। सु॒श्च॒न्द्रेति॑ सु—च॒न्द्र॒⁠। स॒र्पिषः॑⁠। दर्वी॒ इति॑⁠। श्री॒णी॒षे॒⁠। आ॒सनि॑⁠॥ उ॒तो इति॑⁠। नः॒⁠। उदिति॑⁠। पु॒पू॒र्याः॒⁠। १५ (५०) [१५] उ॒क्थेषु॑⁠। श॒व॒सः॒⁠। प॒ते॒⁠। इष᳚म्⁠। स्तो॒तृभ्य॒ इति॑ स्तो॒तृ—भ्यः॒⁠। एति॑⁠। भ॒र॒⁠॥ अग्ने᳚⁠। तम्⁠। अ॒द्य⁠। अश्व᳚म्⁠। न⁠। स्तोमैः᳚⁠। क्रतु᳚म्⁠। न⁠। भ॒द्रम्⁠। हृ॒दि॒स्पृश॒मिति॑ हृदि—स्पृश᳚म्⁠॥ ऋ॒द्ध्याम॑⁠। ते॒⁠। ओहैः᳚⁠॥ अध॑⁠। हि⁠। अ॒ग्ने॒⁠। क्रतोः᳚⁠। भ॒द्रस्य॑⁠। दख्‍ष॑स्य⁠। सा॒धोः⁠॥ र॒थीः⁠। ऋ॒तस्य॑⁠। बृ॒ह॒तः⁠। ब॒भूथ॑⁠॥ आ॒भिः⁠। ते॒⁠। अ॒द्य⁠। गी॒र्भिः⁠। गृ॒णन्तः॑⁠। अग्ने᳚⁠। दाशे॑म⁠॥ प्रेति॑⁠। ते॒⁠। दि॒वः⁠। न⁠। स्त॒न॒य॒न्ति॒⁠। शुष्माः᳚⁠॥ ए॒भिः⁠। नः॒⁠। अ॒र्कैः⁠। भव॑⁠। नः॒⁠। अ॒र्वाङ्⁠। १६ (५०) [१६] सुवः॑⁠। न⁠। ज्योतिः॑⁠॥ अग्ने᳚⁠। विश्वे॑भिः⁠। सु॒मना॒ इति॑ सु—मनाः᳚⁠। अनी॑कैः⁠॥ अ॒ग्निम्⁠। होता॑रम्⁠। म॒न्ये॒⁠। दास्व॑न्तम्⁠। वसोः᳚⁠। सू॒नुम्⁠। सह॑सः⁠। जा॒तवे॑दस॒मिति॑ जा॒त—वे॒द॒स॒म्⁠॥ विप्र᳚म्⁠। न⁠। जा॒तवे॑दस॒मिति॑ जा॒त—वे॒द॒स॒म्⁠॥ यः⁠। ऊ॒र्द्ध्वया᳚⁠। स्व॒द्ध्व॒र इति॑ सु—अ॒द्ध्व॒रः⁠। दे॒वः⁠। दे॒वाच्या᳚⁠। कृ॒पा⁠॥ घृ॒तस्य॑⁠। विभ्रा᳚ष्टि॒मिति॒ वि—भ्रा॒ष्टि॒म्⁠। अन्विति॑⁠। शु॒क्रशो॑चिष॒ इति॑ शु॒क्र—शो॒चि॒षः॒⁠। आ॒जुह्वा॑न॒स्येत्या᳚—जुह्वा॑नस्य⁠। स॒र्पिषः॑⁠॥ अग्ने᳚⁠। त्वम्⁠। नः॒⁠। अन्त॑मः⁠॥ उ॒त⁠। त्रा॒ता⁠। शि॒वः⁠। भ॒व॒⁠। व॒रू॒थ्यः॑⁠॥ तम्⁠। त्वा॒⁠। शो॒चि॒ष्ठ॒⁠। दी॒दि॒वः॒⁠॥ सु॒म्नाय॑⁠। नू॒नम्⁠। ई॒म॒हे॒⁠। सखि॑भ्य॒ इति॒ सखि॑—भ्यः॒⁠॥ वसुः॑⁠। अ॒ग्निः⁠। वसु॑श्रवा॒ इति॒ वसु॑—श्र॒वाः॒⁠॥ अच्छ॑⁠। न॒ख्‍षि॒⁠। द्यु॒मत्त॑म॒ इति॑ द्यु॒मत्—त॒मः॒⁠। र॒यिम्⁠। दाः॒ [१७] (जना॑ना॒ मङ्गि॑रस॒ इष॑ꣳ सु॒शमी॑ तिग्मजंभ पुपूर्या अ॒र्वाङ् वसु॑श्रवाः॒ पञ्च॑ च) ॥४॥
इ॒न्द्रा॒ग्निभ्या॒मिती᳚न्द्रा॒ग्नि—भ्या॒म्⁠। त्वा॒⁠। स॒युजेति॑ स—युजा᳚⁠। यु॒जा⁠। यु॒न॒ज्मि॒⁠। आ॒घा॒राभ्या॒मित्या᳚—घा॒राभ्या᳚म्⁠। तेज॑सा⁠। वर्च॑सा⁠। उ॒क्थेभिः॑⁠। स्तोमे॑भिः⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। र॒य्यै⁠। पोषा॑य⁠। स॒जा॒ताना॒मिति॑ स—जा॒ताना᳚म्⁠। म॒द्ध्य॒म॒स्थेया॒येति॑ मद्ध्यम—स्थेया॑य⁠। मया᳚⁠। त्वा॒⁠। स॒युजेति॑ स—युजा᳚⁠। यु॒जा⁠। यु॒न॒ज्मि॒⁠। अं॒बा⁠। दु॒ला⁠। नि॒त॒त्निरिति॑ नि—त॒त्निः⁠। अ॒भ्रय॑न्ती⁠। मे॒घय॑न्ती⁠। व॒र्॒‌षय॑न्ती⁠। चु॒पु॒णीका᳚⁠। नाम॑⁠। अ॒सि॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒नेति॑ प्र॒जा—प॒ति॒ना॒⁠। त्वा॒⁠। विश्वा॑भिः⁠। धी॒भिः⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒मि॒⁠। पृ॒थि॒वी⁠। उ॒द॒पु॒रमित्यु॑द—पु॒रम्⁠। अन्ने॑न⁠। वि॒ष्टा⁠। म॒नु॒ष्याः᳚⁠। ते॒⁠। गो॒प्तारः॑⁠। अ॒ग्निः⁠। विय॑त्त॒ इति॒ वि—य॒त्तः॒⁠। अ॒स्या॒म्⁠। ताम्⁠। अ॒हम्⁠। प्रेति॑⁠। प॒द्ये॒⁠। सा⁠। १८ (५०) [१८] मे॒⁠। शर्म॑⁠। च॒⁠। वर्म॑⁠। च॒⁠। अ॒स्तु॒⁠। अधि॑द्यौ॒रित्यधि॑—द्यौः॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। ब्रह्म॑णा⁠। वि॒ष्टा⁠। म॒रुतः॑⁠। ते॒⁠। गो॒प्तारः॑⁠। वा॒युः⁠। विय॑त्त॒ इति॒ वि—य॒त्तः॒⁠। अ॒स्या॒म्⁠। ताम्⁠। अ॒हम्⁠। प्रेति॑⁠। प॒द्ये॒⁠। सा⁠। मे॒⁠। शर्म॑⁠। च॒⁠। वर्म॑⁠। च॒⁠। अ॒स्तु॒⁠। द्यौः⁠। अप॑राजि॒तेत्यप॑रा—जि॒ता॒⁠। अ॒मृते॑न⁠। वि॒ष्टा⁠। आ॒दि॒त्याः⁠। ते॒⁠। गो॒प्तारः॑⁠। सूर्यः॑⁠। विय॑त्त॒ इति॒ वि—य॒त्तः॒⁠। अ॒स्या॒म्⁠। ताम्⁠। अ॒हम्⁠। प्रेति॑⁠। प॒द्ये॒⁠। सा⁠। मे॒⁠। शर्म॑⁠। च॒⁠। वर्म॑⁠। च॒⁠। अ॒स्तु॒ [१९] (सा ऽष्टाच॑त्वारिꣳशच्च) ॥५॥
बृह॒स्पतिः॑⁠। त्वा॒⁠। सा॒द॒य॒तु॒⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। पृ॒ष्ठे⁠। ज्योति॑ष्मतीम्⁠। विश्व॑स्मै⁠। प्रा॒णायेति॑ प्र—अ॒नाय॑⁠। अ॒पा॒नायेत्य॑प—अ॒नाय॑⁠। विश्व᳚म्⁠। ज्योतिः॑⁠। य॒च्छ॒⁠। अ॒ग्निः⁠। ते॒⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। त्वा॒⁠। सा॒द॒य॒तु॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षस्य⁠। पृ॒ष्ठे⁠। ज्योति॑ष्मतीम्⁠। विश्व॑स्मै⁠। प्रा॒णायेति॑ प्र—अ॒नाय॑⁠। अ॒पा॒नायेत्य॑प—अ॒नाय॑⁠। विश्व᳚म्⁠। ज्योतिः॑⁠। य॒च्छ॒⁠। वा॒युः⁠। ते॒⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। त्वा॒⁠। सा॒द॒य॒तु॒⁠। दि॒वः⁠। पृ॒ष्ठे⁠। ज्योति॑ष्मतीम्⁠। विश्व॑स्मै⁠। प्रा॒णायेति॑ प्र—अ॒नाय॑⁠। अ॒पा॒नायेत्य॑प—अ॒नाय॑⁠। विश्व᳚म्⁠। ज्योतिः॑⁠। य॒च्छ॒⁠। प॒र॒मे॒ष्ठी⁠। ते॒⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। पु॒रो॒वा॒त॒सनि॒रिति॑ पुरोवात—सनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒भ्र॒सनि॒रित्य॑भ्र—सनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वि॒द्यु॒थ्सनि॒रिति॑ विद्युत्—सनिः॑⁠। २० (५०) [२०] अ॒सि॒⁠। स्त॒न॒यि॒त्नु॒सनि॒रिति॑ स्तनयित्नु—सनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वृ॒ष्टि॒सनि॒रिति॑ वृष्टि—सनिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। यानी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। अ॒ग्ने॒यानीत्य॑ग्ने—यानी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। वा॒योः⁠। यानी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। वा॒यो॒यानीति॑ वायो—यानी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षस्य⁠। यानी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। अ॒न्त॒रि॒ख्‍ष॒यानीत्य॑न्तरिख्‍ष—यानी᳚⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षाय⁠। त्वा॒⁠। स॒लि॒लाय॑⁠। त्वा॒⁠। सर्णी॑काय⁠। त्वा॒⁠। सती॑का॒येति॒ स—ती॒का॒य॒⁠। त्वा॒⁠। केता॑य⁠। त्वा॒⁠। प्रचे॑तस॒ इति॒ प्र—चे॒त॒से॒⁠। त्वा॒⁠। विव॑स्वते⁠। त्वा॒⁠। दि॒वः⁠। त्वा॒⁠। ज्योति॑षे⁠। आ॒दि॒त्येभ्यः॑⁠। त्वा॒⁠। ऋ॒चे⁠। त्वा॒⁠। रु॒चे⁠। त्वा॒⁠। द्यु॒ते⁠। त्वा॒⁠। भा॒से⁠। त्वा॒⁠। ज्योति॑षे⁠। त्वा॒⁠। य॒शो॒दामिति॑ यशः—दाम्⁠। त्वा॒⁠। यश॑सि⁠। ते॒जो॒दामिति॑ तेजः—दाम्⁠। त्वा॒⁠। तेज॑सि⁠। प॒यो॒दामिति॑ पयः—दाम्⁠। त्वा॒⁠। पय॑सि⁠। व॒र्चो॒दामिति॑ वर्चः—दाम्⁠। त्वा॒⁠। वर्च॑सि⁠। द्र॒वि॒णो॒दामिति॑ द्रविणः—दाम्⁠। त्वा॒⁠। द्रवि॑णे⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। तेन॑⁠। ऋषि॑णा⁠। तेन॑⁠। ब्रह्म॑णा⁠। तया᳚⁠। दे॒वत॑या⁠। अ॒ङ्गि॒र॒स्वत्⁠। ध्रु॒वा⁠। सी॒द॒ [२१] (वि॒द्यु॒थ्सनि॑ र्द्यु॒ते त्वै का॒न्न त्रि॒ꣳ॒शच्च॑) ॥६॥
भू॒य॒स्कृदिति॑ भूयः—कृत्⁠। अ॒सि॒⁠। व॒रि॒व॒स्कृदिति॑ वरिवः—कृत्⁠। अ॒सि॒⁠। प्राची᳚⁠। अ॒सि॒⁠। ऊ॒र्द्ध्वा⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्त॒रि॒ख्‍ष॒सदित्य॑न्तरिख्‍ष—सत्⁠। अ॒सि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षे⁠। सी॒द॒⁠। अ॒फ्सु॒षदित्य॑फ्सु—सत्⁠। अ॒सि॒⁠। श्ये॒न॒सदिति॑ श्येन—सत्⁠। अ॒सि॒⁠। गृ॒द्ध्र॒सदिति॑ गृद्ध्र—सत्⁠। अ॒सि॒⁠। सु॒प॒र्ण॒सदिति॑ सुपर्ण—सत्⁠। अ॒सि॒⁠। ना॒क॒सदिति॑ नाक—सत्⁠। अ॒सि॒⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। त्वा॒⁠। द्रवि॑णे⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षस्य⁠। त्वा॒⁠। द्रवि॑णे⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। दि॒वः⁠। त्वा॒⁠। द्रवि॑णे⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। दि॒शाम्⁠। त्वा॒⁠। द्रवि॑णे⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। द्र॒वि॒णो॒दामिति॑ द्रविणः—दाम्⁠। त्वा॒⁠। द्रवि॑णे⁠। सा॒द॒या॒मि॒⁠। प्रा॒णमिति॑ प्र—अ॒नम्⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। अ॒पा॒नमित्य॑प—अ॒नम्⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। व्या॒नमिति॑ वि—अ॒नम्⁠। मे॒⁠। २२ (५०) [२२] पा॒हि॒⁠। आयुः॑⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। वि॒श्वायु॒रिति॑ वि॒श्व—आ॒युः॒⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। स॒र्वायु॒रिति॑ स॒र्व—आ॒युः॒⁠। मे॒⁠। पा॒हि॒⁠। अग्ने᳚⁠। यत्⁠। ते॒⁠। पर᳚म्⁠। हृत्⁠। नाम॑⁠। तौ⁠। एति॑⁠। इ॒हि॒⁠। समिति॑⁠। र॒भा॒व॒है॒⁠। पाञ्च॑जन्ये॒ष्विति॒ पाञ्च॑—ज॒न्ये॒षु॒⁠। अपीति॑⁠। ए॒धि॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। यावाः᳚⁠। अया॑वाः⁠। एवाः᳚⁠। ऊमाः᳚⁠। सब्दः॑⁠। सग॑रः⁠। सु॒मेक॒ इति॑ सु—मेकः॑ [२३] (व्या॒नं मे॒द्वात्रि॑ꣳशच्च) ॥७॥
अ॒ग्निना᳚⁠। वि॒श्वा॒षाट्⁠। सूर्ये॑ण⁠। स्व॒राडिति॑ स्व—राट्⁠। क्रत्वा᳚⁠। शची॒पतिः॑⁠। ऋ॒ष॒भेण॑⁠। त्वष्टा᳚⁠। य॒ज्ञेन॑⁠। म॒घवा॒निति॑ म॒घ—वा॒न्⁠। दख्‍षि॑णया⁠। सु॒व॒र्ग इति॑ सुवः—गः⁠। म॒न्युना᳚⁠। वृ॒त्र॒हेति॑ वृत्र—हा⁠। सौहा᳚र्द्येन⁠। त॒नू॒धा इति॑ तनू—धाः⁠। अन्ने॑न⁠। गयः॑⁠। पृ॒थि॒व्या⁠। अ॒स॒नो॒त्⁠। ऋ॒ग्भिरित्यृ॑क्—भिः⁠। अ॒न्ना॒द इत्य॑न्न—अ॒दः⁠। व॒ष॒ट्का॒रेणेति॑ वषट्—का॒रेण॑⁠। ऋ॒द्धः⁠। साम्ना᳚⁠। त॒नू॒पा इति॑ तनू—पाः⁠। वि॒राजेति॑ वि—राजा᳚⁠। ज्योति॑ष्मान्⁠। ब्रह्म॑णा⁠। सो॒म॒पा इति॑ सोम—पाः⁠। गोभिः॑⁠। य॒ज्ञम्⁠। दा॒धा॒र॒⁠। ख्‍ष॒त्रेण॑⁠। म॒नु॒ष्या॑न्⁠। अश्वे॑न⁠। च॒⁠। रथे॑न⁠। च॒⁠। व॒ज्री⁠। ऋ॒तुभि॒रित्यृ॒तु—भिः॒⁠। प्र॒भुरिति॑ प्र—भुः⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रेणेति॑ सं—व॒थ्स॒रेण॑⁠। प॒रि॒भूरिति॑ परि—भूः⁠। तप॑सा⁠। अना॑धृष्ट॒ इत्यना᳚—धृ॒ष्टः॒⁠। सूर्यः॑⁠। सन्न्⁠। त॒नूभिः॑ [२४] (अ॒ग्नि रैका॒न्न प॑ञ्चा॒शत्) ॥८॥
प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। मन॑सा⁠। अन्धः॑⁠। अच्छे॑त॒ इत्यच्छ॑—इ॒तः॒⁠। धा॒ता⁠। दी॒ख्‍षाया᳚म्⁠। स॒वि॒ता⁠। भृ॒त्याम्⁠। पू॒षा⁠। सो॒म॒क्रय॑ण्या॒मिति॑ सोम—क्रय॑ण्याम्⁠। वरु॑णः⁠। उप॑नद्ध॒ इत्युप॑—न॒द्धः॒⁠। असु॑रः⁠। क्री॒यमा॑णः⁠। मि॒त्रः⁠। क्री॒तः⁠। शि॒पि॒वि॒ष्ट इति॑ शिपि—वि॒ष्टः⁠। आसा॑दित॒ इत्या—सा॒दि॒तः॒⁠। न॒रन्धि॑षः⁠। प्रो॒ह्यमा॑ण॒ इति॑ प्र—उ॒ह्यमा॑नः⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। आग॑त॒ इत्या—ग॒तः॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प्र॒णी॒यमा॑न॒ इति॑ प्र—नी॒यमा॑नः⁠। अ॒ग्निः⁠। आग्नी᳚द्ध्र॒ इत्याग्नि॑—इ॒द्ध्रे॒⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। आग्नी᳚द्ध्रा॒दित्याग्नि॑—इ॒द्ध्रा॒त्⁠। प्र॒णी॒यमा॑न॒ इति॑ प्र—नी॒यमा॑नः⁠। इन्द्रः॑⁠। ह॒वि॒र्द्धान॒ इति॑ हविः—धाने᳚⁠। अदि॑तिः⁠। आसा॑दित॒ इत्या—सा॒दि॒तः॒⁠। विष्णुः॑⁠। उ॒पा॒व॒ह्रि॒यमा॑ण॒ इत्यु॑प—अ॒व॒ह्रि॒यमा॑णः⁠। अथ॑र्वा⁠। उपो᳚त्त॒ इत्युप॑—उ॒त्तः॒⁠। य॒मः⁠। अ॒भिषु॑त॒ इत्य॒भि—सु॒तः॒⁠। अ॒पू॒त॒पा इत्य॑पूत—पाः⁠। आ॒धू॒यमा॑न॒ इत्या᳚—धू॒यमा॑नः⁠। वा॒युः⁠। पू॒यमा॑नः⁠। मि॒त्रः⁠। ख्‍षी॒र॒श्रीरिति॑ ख्‍षीर—श्रीः⁠। म॒न्थी⁠। स॒क्तु॒श्रीरिति॑ सक्तु—श्रीः⁠। वै॒श्व॒दे॒व इति॑ वैश्व—दे॒वः⁠। उन्नी॑त॒ इत्युत्—नी॒तः॒⁠। रु॒द्रः⁠। आहु॑त॒ इत्या—हु॒तः॒⁠। वा॒युः⁠। आवृ॑त्त॒ इत्या—वृ॒त्तः॒⁠। नृ॒चख्‍षा॒ इति॑ नृ—चख्‍षाः᳚⁠। प्रति॑ख्यात॒ इति॒ प्रति॑—ख्या॒तः॒⁠। भ॒ख्‍षः⁠। आग॑त॒ इत्या—ग॒तः॒⁠। पि॒तृ॒णाम्⁠। ना॒रा॒श॒ꣳ॒सः⁠। असुः॑⁠। आत्तः॑⁠। सिन्धुः॑⁠। अ॒व॒भृ॒थमित्य॑व—भृ॒थम्⁠। अ॒व॒प्र॒यन्नित्य॑व—प्र॒यन्न्⁠। स॒मु॒द्रः⁠। अव॑गत॒ इत्यव॑—ग॒तः॒⁠। स॒लि॒लः⁠। प्रप्लु॑त॒ इति॒ प्र—प्लु॒तः॒⁠। सुवः॑⁠। उ॒दृच॒मित्यु॑त्—ऋच᳚म्⁠। ग॒तः [२५] (रु॒द्र एक॑विꣳशतिश्च) ॥९॥
कृत्ति॑काः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। अ॒ग्निः⁠। दे॒वता᳚⁠। अ॒ग्नेः⁠। रुचः॑⁠। स्थ॒⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। धा॒तुः⁠। सोम॑स्य⁠। ऋ॒चे⁠। त्वा॒⁠। रु॒चे⁠। त्वा॒⁠। द्यु॒ते⁠। त्वा॒⁠। भा॒से⁠। त्वा॒⁠। ज्योति॑षे⁠। त्वा॒⁠। रो॒हि॒णी⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। दे॒वता᳚⁠। मृ॒ग॒शी॒र्॒‌षमिति॑ मृग—शी॒र्॒‌षम्⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। सोमः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। आ॒र्द्रा⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। रु॒द्रः⁠। दे॒वता᳚⁠। पुन॑र्वसू॒ इति॒ पुनः॑—व॒सू॒⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। अदि॑तिः⁠। दे॒वता᳚⁠। ति॒ष्यः॑⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। बृह॒स्पतिः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। आ॒श्रे॒षा इत्या᳚—श्रे॒षाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। स॒र्पाः⁠। दे॒वता᳚⁠। म॒घाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। पि॒तरः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। फल्गु॑नी॒ इति॑⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। २६ (५०) [२६] अ॒र्य॒मा⁠। दे॒वता᳚⁠। फल्गु॑नी॒ इति॑⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। भगः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। हस्तः॑⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। स॒वि॒ता⁠। दे॒वता᳚⁠। चि॒त्रा⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। इन्द्रः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। स्वा॒ती⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। वा॒युः⁠। दे॒वता᳚⁠। विशा॑खे॒ इति॒ वि—शा॒खे॒⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। इ॑००६छ्;॒द्रा॒ग्नी इती᳚न्द्र—अ॒ग्नी⁠। दे॒वता᳚⁠। अ॒नू॒रा॒धा इत्य॑नु—रा॒धाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। मि॒त्रः⁠। दे॒वता᳚⁠। रो॒हि॒णी⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। इन्द्रः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। वि॒चृता॒विति॑ वि—चृतौ᳚⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। पि॒तरः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। अ॒षा॒ढाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। आपः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। अ॒षा॒ढाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। विश्वे᳚⁠। दे॒वाः⁠। दे॒वता᳚⁠। श्रो॒णा⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। विष्णुः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। श्रवि॑ष्ठाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। वस॑वः⁠। २७ (५०) [२७] दे॒वता᳚⁠। श॒तभि॑ष॒गिति॑ श॒त—भि॒ष॒क्⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। इन्द्रः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। प्रो॒ष्ठ॒प॒दा इति॑ प्रोष्ठ—प॒दाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। अ॒जः⁠। एक॑पा॒दित्येक॑—पा॒त्⁠। दे॒वता᳚⁠। प्रो॒ष्ठ॒प॒दा इति॑ प्रोष्ठ—प॒दाः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। अहिः॑⁠। बु॒द्ध्नियः॑⁠। दे॒वता᳚⁠। रे॒वती᳚⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। पू॒षा⁠। दे॒वता᳚⁠। अ॒श्व॒युजा॒वित्य॑श्व—युजौ᳚⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। अ॒श्विनौ᳚⁠। दे॒वता᳚⁠। अ॒प॒भर॑णी॒रित्य॑प—भर॑णीः⁠। नख्‍ष॑त्रम्⁠। य॒मः⁠। दे॒वता᳚⁠। पू॒र्णा⁠। प॒श्चात्⁠। यत्⁠। ते॒⁠। दे॒वाः⁠। अद॑धुः [२८] (फल्गु॑नी॒ नख्‍ष॑त्रं॒ वस॑व॒ स्त्रय॑स्त्रिꣳशच्च) ॥१०॥
मधुः॑⁠। च॒⁠। माध॑वः⁠। च॒⁠। वास॑न्तिकौ⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। शु॒क्रः⁠। च॒⁠। शुचिः॑⁠। च॒⁠। ग्रैष्मौ᳚⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। नभः॑⁠। च॒⁠। न॒भ॒स्यः॑⁠। च॒⁠। वार्‌षि॑कौ⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। इ॒षः⁠। च॒⁠। ऊ॒र्जः⁠। च॒⁠। शा॒र॒दौ⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। सहः॑⁠। च॒⁠। स॒ह॒स्यः॑⁠। च॒⁠। हैम॑न्तिकौ⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। तपः॑⁠। च॒⁠। त॒प॒स्यः॑⁠। च॒⁠। शै॒शि॒रौ⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। अ॒ग्नेः⁠। अ॒न्तः॒श्ले॒ष इत्य॑न्तः—श्ले॒षः⁠। अ॒सि॒⁠। कल्पे॑ताम्⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। कल्प॑न्ताम्⁠। आपः॑⁠। ओष॑धीः⁠। कल्प॑न्ताम्⁠। अ॒ग्नयः॑⁠। पृथ॑क्⁠। मम॑⁠। ज्यैष्ठ्य॑य⁠। सव्र॑ता॒ इति॒ स—व्र॒ताः॒⁠। २९ (५०) [२९] ये⁠। अ॒ग्नयः॑⁠। सम॑नस॒ इति॒ स—म॒न॒सः॒⁠। अ॒न्त॒रा⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। शै॒शि॒रौ⁠। ऋ॒तू इति॑⁠। अ॒भीति॑⁠। कल्प॑मानाः⁠। इन्द्र᳚म्⁠। इ॒व॒⁠। दे॒वाः⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। वि॒श॒न्तु॒⁠। स॒य्ँयदिति॑ सं—यत्⁠। च॒⁠। प्रचे॑ता॒ इति॒ प्र—चे॒ताः॒⁠। च॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। सोम॑स्य⁠। सूर्य॑स्य⁠। उ॒ग्रा⁠। च॒⁠। भी॒मा⁠। च॒⁠। पि॒तृ॒णाम्⁠। य॒मस्य॑⁠। इन्द्र॑स्य⁠। ध्रु॒वा⁠। च॒⁠। पृ॒थि॒वी⁠। च॒⁠। दे॒वस्य॑⁠। स॒वि॒तुः⁠। म॒रुता᳚म्⁠। वरु॑णस्य⁠। ध॒र्त्री⁠। च॒⁠। धरि॑त्री⁠। च॒⁠। मि॒त्रावरु॑णयो॒रिति॑ मि॒त्रा—वरु॑णयोः⁠। मि॒त्रस्य॑⁠। धा॒तुः⁠। प्राची᳚⁠। च॒⁠। प्र॒तीची᳚⁠। च॒⁠। वसू॑नाम्⁠। रु॒द्राणां᳚⁠। ३० (५०) [३०] आ॒दि॒त्याना᳚म्⁠। ते⁠। ते॒⁠। अधि॑पतय॒ इत्यधि॑—प॒त॒यः॒⁠। तेभ्यः॑⁠। नमः॑⁠। ते⁠। नः॒⁠। मृ॒ड॒य॒न्तु॒⁠। ते⁠। यम्⁠। द्वि॒ष्मः⁠। यः⁠। च॒⁠। नः॒⁠। द्वेष्टि॑⁠। तम्⁠। वः॒⁠। जंभे᳚⁠। द॒धा॒मि॒⁠। स॒हस्र॑स्य⁠। प्र॒मेति॑ प्र—मा⁠। अ॒सि॒⁠। स॒हस्र॑स्य⁠। प्र॒ति॒मेति॑ प्रति—मा⁠। अ॒सि॒⁠। स॒हस्र॑स्य⁠। वि॒मेति॑ वि—मा⁠। अ॒सि॒⁠। स॒हस्र॑स्य⁠। उ॒न्मेत्यु॑त्—मा⁠। अ॒सि॒⁠। सा॒ह॒स्रः⁠। अ॒सि॒⁠। स॒हस्रा॑य⁠। त्वा॒⁠। इ॒माः⁠। मे॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। इष्ट॑काः⁠। धे॒नवः॑⁠। स॒न्तु॒⁠। एका᳚⁠। च॒⁠। श॒तम्⁠। च॒⁠। स॒हस्र᳚म्⁠। च॒⁠। अ॒युत᳚म्⁠। च॒⁠। ३१ (५०) [३१] नि॒युत॒मिति॑ नि—युत᳚म्⁠। च॒⁠। प्र॒युत॒मिति॑ प्र—युत᳚म्⁠। च॒⁠। अर्बु॑दम्⁠। च॒⁠। न्य॑र्बुद॒मिति॒ नि—अ॒र्बु॒द॒म्⁠। च॒⁠। स॒मु॒द्रः⁠। च॒⁠। मद्ध्य᳚म्⁠। च॒⁠। अन्तः॑⁠। च॒⁠। प॒रा॒र्द्ध इति॑ पर—अ॒र्द्धः⁠। च॒⁠। इ॒माः⁠। मे॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। इष्ट॑काः⁠। धे॒नवः॑⁠। स॒न्तु॒⁠। ष॒ष्टिः⁠। स॒हस्र᳚म्⁠। अ॒युत᳚म्⁠। अख्‍षी॑यमाणाः⁠। ऋ॒त॒स्था इत्यृ॑त—स्थाः⁠। स्थ॒⁠। ऋ॒ता॒वृध॒ इत्यृ॑त—वृधः॑⁠। घृ॒त॒श्चुत॒ इति॑ घृत—श्चुतः॑⁠। म॒धु॒श्चुत॒ इति॑ मधु—श्चुतः॑⁠। ऊर्ज॑स्वतीः⁠। स्व॒धा॒विनी॒रिति॑ स्वधा—विनीः᳚⁠। ताः⁠। मे॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। इष्ट॑काः⁠। धे॒नवः॑⁠। स॒न्तु॒⁠। वि॒राज॒ इति॑ वि—राजः॑⁠। नाम॑⁠। का॒म॒दुघा॒ इति॑ काम—दुघाः᳚⁠। अ॒मुत्र॑⁠। अ॒मुष्मि॑न्न्⁠। लो॒के [३२] (सव्र॑ता रु॒द्राणा॑ म॒युत॑ञ्च॒ पञ्च॑चत्वारिꣳशच्च) ॥११॥
स॒मिदिति॑ सम्—इत्⁠। दि॒शाम्⁠। आ॒शया᳚⁠। नः॒⁠। सु॒व॒र्विदिति॑ सुवः—वित्⁠। मधोः᳚⁠। अतः॑⁠। माध॑वः⁠। पा॒तु॒⁠। अ॒स्मान्⁠॥ अ॒ग्निः⁠। दे॒वः⁠। दु॒ष्टरी॑तुः⁠। अदा᳚भ्यः⁠। इ॒दम्⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। र॒ख्‍ष॒तु॒⁠। पातु॑⁠। अ॒स्मान्⁠॥ र॒थ॒न्त॒रमिति॑ रथं—त॒रम्⁠। साम॑भि॒रिति॒ साम॑—भिः॒⁠। पा॒तु॒⁠। अ॒स्मान्⁠। गा॒य॒त्री⁠। छन्द॑साम्⁠। वि॒श्वरू॒पेति॑ वि॒श्व—रू॒पा॒⁠॥ त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। नः॒⁠। वि॒ष्ठयेति॑ वि—स्थया᳚⁠। स्तोमः॑⁠। अह्ना᳚म्⁠। स॒मु॒द्रः⁠। वातः॑⁠। इ॒दम्⁠। ओजः॑⁠। पि॒प॒र्तु॒⁠॥ उ॒ग्रा⁠। दि॒शाम्⁠। अ॒भिभू॑ति॒रित्य॒भि—भू॒तिः॒⁠। व॒यो॒धा इति॑ वयः—धाः⁠। शुचिः॑⁠। शु॒क्रे⁠। अह॑नि⁠। ओ॒ज॒सीना᳚⁠॥ इन्द्र॑⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। पि॒पृ॒ता॒त्⁠। अतः॑⁠। नः॒⁠। महि॑⁠। ३३ (५०) [३३] ख्‍ष॒त्रम्⁠। वि॒श्वतः॑⁠। धा॒र॒य॒⁠। इ॒दम्⁠॥ बृ॒हत्⁠। साम॑⁠। ख्‍ष॒त्र॒भृदिति॑ ख्‍षत्र—भृत्⁠। वृ॒द्धवृ॑ष्णिय॒मिति॑ वृ॒द्ध—वृ॒ष्णि॒य॒म्⁠। त्रि॒ष्टुभा᳚⁠। ओजः॑⁠। शु॒भि॒तम्⁠। उ॒ग्रवी॑र॒मित्यु॒ग्र—वी॒र॒म्⁠॥ इन्द्र॑⁠। स्तोमे॑न⁠। प॒ञ्च॒द॒शेनेति॑ पञ्च—द॒शेन॑⁠। मद्ध्य᳚म्⁠। इ॒दम्⁠। वाते॑न⁠। सग॑रेण⁠। र॒ख्‍ष॒⁠॥ प्राची᳚⁠। दि॒शाम्⁠। स॒हय॑शा॒ इति॑ स॒ह—य॒शाः॒⁠। यश॑स्वती⁠। विश्वे᳚⁠। दे॒वाः॒⁠। प्रा॒वृषा᳚⁠। अह्ना᳚म्⁠। सुव॑र्व॒तीति॒ सुवः॑—व॒ती॒⁠॥ इ॒दम्⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। दु॒ष्टर᳚म्⁠। अ॒स्तु॒⁠। ओजः॑⁠। अना॑धृष्ट॒मित्यना᳚—धृ॒ष्ट॒म्⁠। स॒ह॒स्रिय᳚म्⁠। सह॑स्वत्⁠॥ वै॒रू॒पे⁠। साम॑न्न्⁠। इ॒ह⁠। तत्⁠। श॒के॒म॒⁠। जग॑त्या⁠। ए॒न॒म्⁠। वि॒ख्‍षु⁠। एति॑⁠। वे॒श॒या॒मः॒⁠॥ विश्वे᳚⁠। दे॒वाः॒⁠। स॒प्त॒द॒शेनेति॑ सप्त—द॒शेन॑⁠। ३४ (५०) [३४] वर्चः॑⁠। इ॒दम्⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। स॒लि॒लवा॑त॒मिति॑ सलि॒ल—वा॒त॒म्⁠। उ॒ग्रम्⁠॥ ध॒र्त्री⁠। दि॒शाम्⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। इ॒दम्⁠। दा॒धा॒र॒⁠। उ॒प॒स्थेत्यु॑प—स्था⁠। आशा॑नाम्⁠। मि॒त्रव॒दिति॑ मि॒त्र—व॒त्⁠। अ॒स्तु॒⁠। ओजः॑⁠॥ मित्रा॑वरु॒णेति॒ मित्रा᳚—व॒रु॒णा॒⁠। श॒रदा᳚⁠। अह्ना᳚म्⁠। चि॒कि॒त्नू॒ इति॑⁠। अ॒स्मै⁠। रा॒ष्ट्राय॑⁠। महि॑⁠। शर्म॑⁠। य॒च्छ॒त॒म्⁠॥ वै॒रा॒जे⁠। साम॑न्न्⁠। अधीति॑⁠। मे॒⁠। म॒नी॒षा⁠। अ॒नु॒ष्टुभेत्य॑नु—स्तुभा᳚⁠। संभृ॑त॒मिति॒ सं—भृ॒त॒म्⁠। वी॒र्य᳚म्⁠। सहः॑⁠॥ इ॒दम्⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। मि॒त्रव॒दिति॑ मि॒त्र—व॒त्⁠। आ॒र्द्रदा॒न्वित्या॒र्द्र—दा॒नु॒⁠। मित्रा॑वरु॒णेति॒ मित्रा᳚—व॒रु॒णा॒⁠। रख्‍ष॑तम्⁠। आधि॑पत्यै॒रित्याधि॑—प॒त्यैः॒⁠॥ स॒म्राडिति॑ सम्—राट्⁠। दि॒शाम्⁠। स॒हसा॒म्नीति॑ स॒ह—सा॒म्नी॒⁠। सह॑स्वती⁠। ऋ॒तुः⁠। हे॒म॒न्तः⁠। वि॒ष्ठयेति॑ वि—स्थया᳚⁠। नः॒⁠। पि॒प॒र्तु॒⁠॥ अ॒व॒स्युवा॑ता॒ इत्य॑व॒स्यु—वा॒ताः॒⁠। ३५ (५०) [३५] बृ॒ह॒तीः⁠। नु⁠। शक्व॑रीः⁠। इ॒मम्⁠। य॒ज्ञम्⁠। अ॒व॒न्तु॒⁠। नः॒⁠। घृ॒ताचीः᳚⁠। सुव॑र्व॒तीति॒ सुवः॑—व॒ती॒⁠। सु॒दुघेति॑ सु—दुघा᳚⁠। नः॒⁠। पय॑स्वती⁠। दि॒शाम्⁠। दे॒वी⁠। अ॒व॒तु॒⁠। नः॒⁠। घृ॒ताची᳚⁠॥ त्वम्⁠। गो॒पा इति॑ गो—पाः⁠। पु॒र॒ ए॒तेति॑ पुरः—ए॒ता⁠। उ॒त⁠। प॒श्चात्⁠। बृह॑स्पते⁠। याम्या᳚म्⁠। यु॒ङ्ग्धि॒⁠। वाच᳚म्⁠॥ ऊ॒र्द्ध्वा⁠। दि॒शाम्⁠। रन्तिः॑⁠। आशा᳚⁠। ओष॑धीनाम्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रेणेति॑ सं—व॒थ्स॒रेण॑⁠। स॒वि॒ता⁠। नः॒⁠। अह्ना᳚म्⁠॥ रे॒वत्⁠। साम॑⁠। अति॑च्छन्दा॒ इत्यति॑—छ॒न्दाः॒⁠। उ॒⁠। छन्दः॑⁠। अजा॑तशत्रु॒रित्यजा॑त—श॒त्रुः॒⁠। स्यो॒ना⁠। नः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠॥ स्तोम॑त्रयस्त्रिꣳश॒ इति॒ स्तोम॑—त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒शे॒⁠। भुव॑नस्य⁠। प॒त्नि॒⁠। विव॑स्वद्वात॒ इति॒ विव॑स्वत्—वा॒ते॒⁠। अ॒भीति॑⁠। नः॒⁠। ३६ (५०) [३६] गृ॒णा॒हि॒⁠॥ घृ॒तव॒तीति॑ घृ॒त—व॒ती॒⁠। स॒वि॒तः॒⁠। आधि॑पत्यै॒रित्याधि॑—प॒त्यैः॒⁠। पय॑स्वती⁠। रन्तिः॑⁠। आशा᳚⁠। नः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠॥ ध्रु॒वा⁠। दि॒शाम्⁠। विष्णु॑प॒त्नीति॒ विष्णु॑—प॒त्नी॒⁠। अघो॑रा⁠। अ॒स्य⁠। ईशा॑ना⁠। सह॑सः⁠। या⁠। म॒नोता᳚⁠॥ बृह॒स्पतिः॑⁠। मा॒त॒रिश्वा᳚⁠। उ॒त⁠। वा॒युः⁠। स॒न्ध॒वा॒ना इति॑ सम्—धु॒वा॒नाः⁠। वाताः᳚⁠। अ॒भीति॑⁠। नः॒⁠। गृ॒ण॒न्तु॒⁠॥ वि॒ष्टं॒भ इति॑ वि—स्तं॒भः⁠। दि॒वः⁠। ध॒रुणः॑⁠। पृ॒थि॒व्याः⁠। अ॒स्य⁠। ईशा॑ना⁠। जग॑तः⁠। विष्णु॑प॒त्नीति॒ विष्णु॑—प॒त्नी॒⁠॥ वि॒श्वव्य॑चा॒ इति॑ वि॒श्व—व्य॒चाः॒⁠। इ॒षय॑न्ती⁠। सुभू॑ति॒रिति॒ सु—भू॒तिः॒⁠। शि॒वा⁠। नः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠। अदि॑तिः⁠। उ॒पस्थ॒ इत्यु॒प—स्थे॒⁠॥ वै॒श्वा॒न॒रः⁠। नः॒⁠। ऊ॒त्या⁠। पृ॒ष्टः⁠। दि॒वि⁠। अन्विति॑⁠। नः॒⁠। अ॒द्य⁠। अनु॑मति॒रित्यनु॑—म॒तिः॒⁠। अन्विति॑⁠। इत्⁠। अ॒नु॒म॒त॒ इत्य॑नु—म॒ते॒⁠। त्वम्⁠। कया᳚⁠। नः॒⁠। चि॒त्रः⁠। एति॑⁠। भु॒व॒त्⁠। कः⁠। अ॒द्य⁠। यु॒ङ्क्ते॒ [३७] (महि॑ सप्तद॒शेना॑ ऽव॒स्युवा॑ता अ॒भि नो ऽनु॑ न॒ श्चतु॑र्दश च) ॥१२॥
अनुवाकाः पञ्चशती
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