कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
पञ्चमकाण्डे सप्तमः प्रश्नः

कांड ५ प्रश्न ७
उपानुवाक्यावशिष्ट कर्मनिरूपणं

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
यः⁠। वै⁠। अय॑थादेवत॒मित्यय॑था—दे॒व॒त॒म्⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒ते⁠। एति॑⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। वृ॒श्च्य॒ते॒⁠। पापी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यः⁠। य॒था॒दे॒व॒तमिति॑ यथा—दे॒व॒तम्⁠। न⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। एति॑⁠। वृ॒श्च्य॒ते॒⁠। वसी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। आ॒ग्ने॒य्या⁠। गा॒य॒त्रि॒या⁠। प्र॒थ॒माम्⁠। चिति᳚म्⁠। अ॒भीति॑⁠। मृ॒शे॒त्⁠। त्रि॒ष्टुभाः᳚⁠। द्वि॒तीया᳚म्⁠। जग॑त्या⁠। तृ॒तीया᳚म्⁠। अ॒नु॒ष्टुभेत्य॑नु—स्तुभा᳚⁠। च॒तु॒र्थीम्⁠। प॒ङ्क्त्या⁠। प॒ञ्च॒मीम्⁠। य॒था॒दे॒व॒तमिति॑ यथा—दे॒व॒तम्⁠। ए॒व⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒ते॒⁠। न⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। एति॑⁠। वृ॒श्च्य॒ते॒⁠। वसी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। इडा॑यै⁠। वै⁠। ए॒षा⁠। विभ॑क्ति॒रिति॒ वि—भ॒क्तिः॒⁠। प॒शवः॑⁠। इडा᳚⁠। प॒शुभि॒रिति॑ प॒शु—भिः॒⁠। ए॒न॒म्⁠। १ (५०) [१] चि॒नु॒ते॒⁠। यः⁠। वै⁠। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जा—प॒त॒ये॒⁠। प्र॒ति॒प्रोच्येति॑ प्रति—प्रोच्य॑⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नोति॑⁠। न⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। अश्वौ᳚⁠। अ॒भितः॑⁠। ति॒ष्ठे॒ता॒म्⁠। कृ॒ष्णः⁠। उ॒त्त॒र॒त इत्यु॑त्—त॒र॒तः⁠। श्वे॒तः⁠। दख्‍षि॑णः⁠। तौ⁠। आ॒लभ्येत्या᳚—लभ्य॑⁠। इष्ट॑काः⁠। उपेति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। रू॒पम्⁠। प्रा॒जा॒प॒त्य इति॑ प्राजा—प॒त्यः⁠। अश्वः॑⁠। सा॒ख्‍षादिति॑ स—अ॒ख्‍षात्⁠। ए॒व⁠। प्र॒जाप॑तय॒ इति॑ प्र॒जा—प॒त॒ये॒⁠। प्र॒ति॒प्रोच्येति॑ प्रति—प्रोच्य॑⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नो॒ति॒⁠। न⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। अह्नः॑⁠। रू॒पम्⁠। यत्⁠। श्वे॒तः⁠। अश्वः॑⁠। रात्रि॑यै⁠। कृ॒ष्णः⁠। ए॒तत्⁠। अह्नः॑⁠। २ (५०) [२] रू॒पम्⁠। यत्⁠। इष्ट॑काः⁠। रात्रि॑यै⁠। पुरी॑षम्⁠। इष्ट॑काः⁠। उ॒प॒धा॒स्यन्नित्यु॑प—धा॒स्यन्न्⁠। श्वे॒तम्⁠। अश्व᳚म्⁠। अ॒भीति॑⁠। मृ॒शे॒त्⁠। पुरी॑षम्⁠। उ॒प॒धा॒स्यन्नित्यु॑प—धा॒स्यन्न्⁠। कृ॒ष्णम्⁠। अ॒हो॒रा॒त्राभ्या॒मित्य॑हः—रा॒त्राभ्या᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। चि॒नु॒ते॒⁠। हि॒र॒ण्य॒पा॒त्रमिति॑ हिरण्य—पा॒त्रम्⁠। मधोः᳚⁠। पू॒र्णम्⁠। द॒दा॒ति॒⁠। म॒ध॒व्यः॑⁠। अ॒सा॒नि॒⁠। इति॑⁠। सौ॒र्या⁠। चि॒त्रव॒त्येति॑ चि॒त्र—व॒त्या॒⁠। अवेति॑⁠। ई॒ख्‍ष॒ते॒⁠। चि॒त्रम्⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। म॒द्ध्यन्दि॑ने⁠। अश्व᳚म्⁠। अवेति॑⁠। घ्रा॒प॒य॒ति॒⁠। अ॒सौ⁠। वै⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। इन्द्रः॑⁠। ए॒षः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प्रा॒जा॒प॒त्य इति॑ प्राजा—प॒त्यः⁠। अश्वः॑⁠। तम्⁠। ए॒व⁠। सा॒ख्‍षादिति॑ स—अ॒ख्‍षात्⁠। ऋ॒द्ध्नो॒ति॒ [३] (ए॒न॒ मे॒तदह्नो॒ ऽष्टाच॑त्वारिꣳशच्च) ॥१॥
त्वाम्⁠। अ॒ग्ने॒⁠। वृ॒ष॒भम्⁠। चेकि॑तानम्⁠। पुनः॑⁠। युवा॑नम्⁠। ज॒नय॑न्न्⁠। उ॒पागा॒मित्यु॑प—आगा᳚म्⁠॥ अ॒स्थू॒रि⁠। नः॒⁠। गार्‌ह॑पत्या॒नीति॒ गार्‌ह॑—प॒त्या॒नि॒⁠। स॒न्तु॒⁠। ति॒ग्मेन॑⁠। नः॒⁠। ब्रह्म॑णा⁠। समिति॑⁠। शि॒शा॒धि॒⁠॥ प॒शवः॑⁠। वै⁠। ए॒ते⁠। यत्⁠। इष्ट॑काः⁠। चित्यां᳚चित्या॒मिति॒ चित्यां᳚—चि॒त्या॒म्⁠। ऋ॒ष॒भम्⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। मि॒थु॒नम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। तत्⁠। य॒ज्ञे⁠। क॒रो॒ति॒⁠। प्र॒जन॑ना॒येति॑ प्र—जन॑नाय⁠। तस्मा᳚त्⁠। यू॒थेयू॑थ॒ इति॑ यू॒थे—यू॒थे॒⁠। ऋ॒ष॒भः⁠॥ स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। प्र॒ति॒मामिति॑ प्रति—माम्⁠। याम्⁠। त्वा॒⁠। रा॒त्रि॒⁠। उ॒पास॑त॒ इत्यु॑प—आस॑ते⁠॥ प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। सु॒वीरा॒मिति॑ सु—वीरा᳚म्⁠। कृ॒त्वा⁠। विश्व᳚म्⁠। आयुः॑⁠। वीति॑⁠। अ॒श्ञ॒व॒त्⁠॥ प्रा॒जा॒प॒त्यामिति॑ प्राजा—प॒त्याम्⁠। ४ (५०) [४] ए॒ताम्⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। इ॒यम्⁠। वाव⁠। ए॒षा⁠। ए॒का॒ष्ट॒केत्ये॑क—अ॒ष्ट॒का⁠। यत्⁠। ए॒व⁠। ए॒का॒ष्ट॒काया॒मित्ये॑क—अ॒ष्ट॒काया᳚म्⁠। अन्न᳚म्⁠। क्रि॒यते᳚⁠। तत्⁠। ए॒व⁠। ए॒तया᳚⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। ए॒षा⁠। वै⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। का॒म॒दुघेति॑ काम—दुघा᳚⁠। तया᳚⁠। ए॒व⁠। यज॑मानः⁠। अ॒मुष्मि॑न्न्⁠। लो॒के⁠। अ॒ग्निम्⁠। दु॒हे॒⁠। येन॑⁠। दे॒वाः⁠। ज्योति॑षा⁠। ऊ॒र्द्ध्वाः⁠। उ॒दाय॒न्नित्यु॑त्—आय॑न्न्⁠। येन॑⁠। आ॒दि॒त्याः⁠। वस॑वः⁠। येन॑⁠। रु॒द्राः⁠॥ येन॑⁠। अङ्गि॑रसः⁠। म॒हि॒मान᳚म्⁠। आ॒न॒शुः⁠। तेन॑⁠। ए॒तु॒⁠। यज॑मानः⁠। स्व॒स्ति⁠॥ सु॒व॒र्गायेति॑ सुवः—गाय॑⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। लो॒काय॑⁠। ५ (५०) [५] ची॒य॒ते॒⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। येन॑⁠। दे॒वाः⁠। ज्योति॑षा⁠। ऊ॒र्द्ध्वाः⁠। उ॒दाय॒न्नित्यु॑त्—आय॑न्न्⁠। इति॑⁠। उख्य᳚म्⁠। समिति॑⁠। इ॒न्धे॒⁠। इष्ट॑काः⁠। ए॒व⁠। ए॒ताः⁠। उपेति॑⁠। ध॒त्ते॒⁠। वा॒न॒स्प॒त्याः⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। सम॑ष्ट्या॒ इति॒ सं—अ॒ष्ट्यै॒⁠। श॒तायु॑धा॒येति॑ श॒त—आ॒यु॒धा॒य॒⁠। श॒तवी᳚र्या॒येति॑ श॒त—वी॒र्या॒य॒⁠। श॒तोत॑य॒ इति॑ श॒त—ऊ॒त॒ये॒⁠। अ॒भि॒मा॒ति॒षाह॒ इत्य॑भिमाति—साहे᳚⁠॥ श॒तम्⁠। यः⁠। नः॒⁠। श॒रदः॑⁠। अजी॑तान्⁠। इन्द्रः॑⁠। ने॒ष॒त्⁠। अतीति॑⁠। दु॒रि॒तानीति॑ दुः—इ॒तानि॑⁠। विश्वा᳚⁠॥ ये⁠। च॒त्वारः॑⁠। प॒थयः॑⁠। दे॒व॒याना॒ इति॑ देव—यानाः᳚⁠। अ॒न्त॒रा⁠। द्यावा॑पृथि॒वी इति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒वी⁠। वि॒यन्तीति॑ वि—यन्ति॑⁠॥ तेषा᳚म्⁠। यः⁠। अज्या॑निम्⁠। अजी॑तिम्⁠। आ॒वहा॒दित्या᳚—वहा᳚त्⁠। तस्मै᳚⁠। नः॒⁠। दे॒वाः॒⁠। ६ (५०) [६] परीति॑⁠। द॒त्त॒⁠। इ॒ह⁠। सर्वे᳚⁠॥ ग्री॒ष्मः⁠। हे॒म॒न्तः⁠। उ॒त⁠। नः॒⁠। व॒स॒न्तः⁠। श॒रत्⁠। व॒र्॒‌षाः⁠। सु॒वि॒तम्⁠। नः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠॥ तेषा᳚म्⁠। ऋ॒तू॒नाम्⁠। श॒तशा॑रदाना॒मिति॑ श॒त—शा॒र॒दा॒ना॒म्⁠। नि॒वा॒त इति॑ नि—वा॒ते⁠। ए॒षा॒म्⁠। अभ॑ये⁠। स्या॒म॒⁠॥ इ॒दु॒व॒थ्स॒रायेती॑दु—व॒थ्स॒राय॑⁠। प॒रि॒व॒थ्स॒रायेति॑ परि—व॒थ्स॒राय॑⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रायेति॑ सं—व॒थ्स॒राय॑⁠। कृ॒णु॒त॒⁠। बृ॒हत्⁠। नमः॑⁠॥ तेषा᳚म्⁠। व॒यम्⁠। सु॒म॒ताविति॑ सु—म॒तौ⁠। य॒ज्ञिया॑नाम्⁠। ज्योक्⁠। अजी॑ताः⁠। अह॑ताः⁠। स्या॒म॒⁠॥ भ॒द्रात्⁠। नः॒⁠। श्रेयः॑⁠। समिति॑⁠। अ॒नै॒ष्ट॒⁠। दे॒वाः॒⁠। त्वया᳚⁠। अ॒व॒सेन॑⁠। समिति॑⁠। अ॒शी॒म॒हि॒⁠। त्वा॒⁠॥ सः⁠। नः॒⁠। म॒यो॒भूरिति॑ मयः—भूः⁠। पि॒तो॒ इति॑⁠। ७ (५०) [७] एति॑⁠। वि॒श॒स्व॒⁠। शम्⁠। तो॒काय॑⁠। त॒नुवे᳚⁠। स्यो॒नः⁠॥ अज्या॑नीः⁠। ए॒ताः⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒ताः⁠। वै⁠। दे॒वताः᳚⁠। अप॑राजिता॒ इत्यप॑रा—जि॒ताः॒⁠। ताः⁠। ए॒व⁠। प्रेति॑⁠। वि॒श॒ति॒⁠। न⁠। ए॒व⁠। जी॒य॒ते॒⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। यत्⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒सा इत्य॑र्द्ध—मा॒साः⁠। मासाः᳚⁠। ऋ॒तवः॑⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। ओष॑धीः⁠। पच॑न्ति⁠। अथ॑⁠। कस्मा᳚त्⁠। अ॒न्याभ्यः॑⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। आ॒ग्र॒य॒णम्⁠। निरिति॑⁠। उ॒प्य॒ते॒⁠। इति॑⁠। ए॒ताः⁠। हि⁠। तत्⁠। दे॒वताः᳚⁠। उ॒दज॑य॒न्नित्यु॑त्—अज॑यन्न्⁠। यत्⁠। ऋ॒तुभ्य॒ इत्यृ॒तु—भ्यः॒⁠। नि॒र्वपे॒दिति॑ निः—वपे᳚त्⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। स॒मद॒मिति॑ स—मद᳚म्⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। आ॒ग्र॒य॒णम्⁠। नि॒रुप्येति॑ निः—उप्य॑⁠। ए॒ताः⁠। आहु॑ती॒रित्या—हु॒तीः॒⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒सानित्य॑र्ध—मा॒सान्⁠। ए॒व⁠। मासा॑न्⁠। ऋ॒तून्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। प्री॒णा॒ति॒⁠। न⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। स॒मद॒मिति॑ स—मद᳚म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। भ॒द्रात्⁠। नः॒⁠। श्रेयः॑⁠। समिति॑⁠। अ॒नै॒ष्ट॒⁠। दे॒वाः॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। हु॒ताद्या॒येति॑ हुत—अद्या॑य⁠। यज॑मानस्य⁠। अप॑राभावा॒येत्यप॑रा—भा॒वा॒य॒ [८] (प्रा॒जा॒प॒त्यां लो॒काय॑ देवाः पितो दध्यादाग्रय॒णं पञ्च॑विꣳशतिश्च) ॥२॥
इन्द्र॑स्य⁠। वज्रः॑⁠। अ॒सि॒⁠। वार्त्र॑घ्न॒ इति॒ वार्त्र॑—घ्नः॒⁠। त॒नू॒पा इति॑ तनू—पाः⁠। नः॒⁠। प्र॒ति॒स्प॒श इति॑ प्रति—स्प॒शः⁠॥ यः⁠। नः॒⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। द॒ख्‍षि॒ण॒तः⁠। प॒श्चात्⁠। उ॒त्त॒र॒त इत्यु॑त्—त॒र॒तः⁠। अ॒घा॒युरित्य॑घ—युः⁠। अ॒भि॒दास॒तीत्य॑भि—दास॑ति⁠। ए॒तम्⁠। सः⁠। अश्मा॑नम्⁠। ऋ॒च्छ॒तु॒⁠॥ दे॒वा॒सु॒रा इति॑ देव—अ॒सु॒राः⁠। सय्ँय॑त्ता॒ इति॒ सं—य॒त्ताः॒⁠। आ॒स॒न्न्⁠। ते⁠। असु॑राः⁠। दि॒ग्भ्य इति॑ दिक्—भ्यः⁠। एति॑⁠। अ॒बा॒ध॒न्त॒⁠। तान्⁠। दे॒वाः⁠। इष्वा᳚⁠। च॒⁠। वज्रे॑ण⁠। च॒⁠। अपेति॑⁠। अ॒नु॒द॒न्त॒⁠। यत्⁠। व॒ज्रिणीः᳚⁠। उ॒प॒दधा॒तीत्यु॑प—दधा॑ति⁠। इष्वा᳚⁠। च॒⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। वज्रे॑ण⁠। च॒⁠। यज॑मानः⁠। भ्रातृ॑व्यान्⁠। अपेति॑⁠। नु॒द॒ते॒⁠। दि॒ख्‍षु⁠। उपेति॑⁠। ९ (५०) [९] द॒धा॒ति॒⁠। दे॒व॒पु॒रा इति॑ देव—पु॒राः⁠। ए॒व⁠। ए॒ताः⁠। त॒नू॒पानी॒रिति॑ तनू—पानीः᳚⁠। परीति॑⁠। ऊ॒ह॒ते॒⁠। अग्ना॑विष्णू॒ इत्यग्ना᳚—वि॒ष्णू॒⁠। स॒जोष॒सेति॑ स—जोष॑सा⁠। इ॒माः⁠। व॒र्द्ध॒न्तु॒⁠। वा॒म्⁠। गिरः॑⁠॥ द्यु॒म्नैः⁠। वाजे॑भिः⁠। एति॑⁠। ग॒त॒म्⁠॥ ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। यत्⁠। न⁠। दे॒वता॑यै⁠। जुह्व॑ति⁠। अथ॑⁠। कि॒न्दे॒व॒त्येति॑ किं—दे॒व॒त्या᳚⁠। वसोः᳚⁠। धारा᳚⁠। इति॑⁠। अ॒ग्निः⁠। वसुः॑⁠। तस्य॑⁠। ए॒षा⁠। धारा᳚⁠। विष्णुः॑⁠। वसुः॑⁠। तस्य॑⁠। ए॒षा⁠। धारा᳚⁠। आ॒ग्ना॒वै॒ष्ण॒व्येत्या᳚ग्ना—वै॒ष्ण॒व्या⁠। ऋ॒चा⁠। वसोः᳚⁠। धारा᳚म्⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। भा॒ग॒धेये॒नेति॑ भाग—धेये॑न⁠। ए॒व⁠। ए॒नौ॒⁠। समिति॑⁠। अ॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। ए॒ताम्⁠। १० (५०) [१०] ए॒व⁠। आहु॑ति॒मित्या—हु॒ति॒म्⁠। आ॒यत॑नवती॒मित्या॒यत॑न—व॒ती॒म्⁠। क॒रो॒ति॒⁠। यत्का॑म॒ इति॒ यत्—का॒मः॒⁠। ए॒ना॒म्⁠। जु॒होति॑⁠। तत्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। रु॒द्रः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। तस्य॑⁠। ए॒ते इति॑⁠। त॒नुवौ᳚⁠। घो॒रा⁠। अ॒न्या⁠। शि॒वा⁠। अ॒न्या⁠। यत्⁠। श॒त॒रु॒द्रीय॒मिति॑ शत—रु॒द्रीय᳚म्⁠। जु॒होति॑⁠। या⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। घो॒रा⁠। त॒नूः⁠। ताम्⁠। तेन॑⁠। श॒म॒य॒ति॒⁠। यत्⁠। वसोः᳚⁠। धारा᳚म्⁠। जु॒होति॑⁠। या⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। शि॒वा⁠। त॒नूः⁠। ताम्⁠। तेन॑⁠। प्री॒णा॒ति॒⁠। यः⁠। वै⁠। वसोः᳚⁠। धारा॑यै⁠। ११ (५०) [११] प्र॒ति॒ष्ठामिति॑ प्रति—स्थाम्⁠। वेद॑⁠। प्रतीति॑⁠। ए॒व⁠। ति॒ष्ठ॒ति॒⁠। यत्⁠। आज्य᳚म्⁠। उ॒च्छिष्ये॒तेत्यु॑त्—शिष्ये॑त⁠। तस्मि॑न्न्⁠। ब्र॒ह्मौ॒द॒नमिति॑ ब्रह्म—ओ॒द॒नम्⁠। प॒चे॒त्⁠। तम्⁠। ब्रा॒ह्म॒णाः⁠। च॒त्वारः॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒श्ञी॒युः॒⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। वै॒श्वा॒न॒रः⁠। यत्⁠। ब्रा॒ह्म॒णः⁠। ए॒षा⁠। खलु॑⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। प्रि॒या⁠। त॒नूः⁠। यत्⁠। वै॒श्वा॒न॒रः⁠। प्रि॒याया᳚म्⁠। ए॒व⁠। ए॒ना॒म्⁠। त॒नुवा᳚म्⁠। प्रतीति॑⁠। स्था॒प॒य॒ति॒⁠। चत॑स्रः⁠। धे॒नूः⁠। द॒द्या॒त्⁠। ताभिः॑⁠। ए॒व⁠। यज॑मानः⁠। अ॒मुष्मि॑न्न्⁠। लो॒के⁠। अ॒ग्निम्⁠। दु॒हे॒ [१२] (उपै॒ तां धारा॑यै॒ षट्च॑त्वारिꣳशच्च) ॥३॥
चित्ति᳚म्⁠। जु॒हो॒मि॒⁠। मन॑सा⁠। घृ॒तेन॑⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। अदा᳚भ्या⁠। वै⁠। नाम॑⁠। ए॒षा⁠। आहु॑ति॒रित्या—हु॒तिः॒⁠। वै॒श्व॒क॒र्म॒णीति॑ वैश्व—क॒र्म॒णी⁠। न⁠। ए॒न॒म्⁠। चि॒क्या॒नम्⁠। भ्रातृ॑व्यः⁠। द॒भ्नो॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। दे॒वताः᳚⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अग्ने᳚⁠। तम्⁠। अ॒द्य⁠। इति॑⁠। प॒ङ्क्त्या⁠। जु॒हो॒ति॒⁠। प॒ङ्क्त्या⁠। आहु॒त्येत्या—हु॒त्या॒⁠। य॒ज्ञ॒मु॒खमिति॑ यज्ञ—मु॒खम्⁠। एति॑⁠। र॒भ॒ते॒⁠। स॒प्त⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। स॒मिध॒ इति॑ सं—इधः॑⁠। स॒प्त⁠। जि॒ह्वाः⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। होत्राः᳚⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अ॒ग्निः⁠। दे॒वेभ्यः॑⁠। अपेति॑⁠। अ॒क्रा॒म॒त्⁠। भा॒ग॒धेय॒मिति॑ भाग—धेय᳚म्⁠। १३ (५०) [१३] इ॒च्छमा॑नः⁠। तस्मै᳚⁠। ए॒तत्⁠। भा॒ग॒धेय॒मिति॑ भाग—धेय᳚म्⁠। प्रेति॑⁠। अ॒य॒च्छ॒न्न्⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। अ॒ग्नि॒हो॒त्रमित्य॑ग्नि—हो॒त्रम्⁠। ए॒तर्‌हि॑⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। जा॒तः⁠। यर्‌हि॑⁠। सर्वः॑⁠। चि॒तः⁠। जा॒ताय॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। अन्न᳚म्⁠। अपीति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। सः⁠। ए॒न॒म्⁠। प्री॒तः⁠। प्री॒णा॒ति॒⁠। वसी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। यत्⁠। ए॒षः⁠। गार्‌ह॑पत्य॒ इति॒ गार्‌ह॑—प॒त्यः॒⁠। ची॒यते᳚⁠। अथ॑⁠। क्व॑⁠। अ॒स्य॒⁠। आ॒ह॒व॒नीय॒ इत्या᳚—ह॒व॒नीयः॑⁠। इति॑⁠। अ॒सौ⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। इति॑⁠। ब्रू॒या॒त्⁠। ए॒तस्मि॑न्न्⁠। हि⁠। सर्वा᳚भ्यः⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। जुह्व॑ति⁠। १४ (५०) [१४] यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒ते⁠। सा॒ख्‍षादिति॑ स—अ॒ख्‍षात्⁠। ए॒व⁠। दे॒वताः᳚⁠। ऋ॒द्ध्नो॒ति॒⁠। अग्ने᳚⁠। य॒श॒स्वि॒न्न्⁠। यश॑सा⁠। इ॒मम्⁠। अ॒र्प॒य॒⁠। इन्द्रा॑वती॒मितीन्द्र॑—व॒ती॒म्⁠। अप॑चिती॒मित्यप॑—चि॒ती॒म्⁠। इ॒ह⁠। एति॑⁠। व॒ह॒⁠॥ अ॒यम्⁠। मू॒र्द्धा⁠। प॒र॒मे॒ष्ठी⁠। सु॒वर्चा॒ इति॑ सु—वर्चाः᳚⁠। स॒मा॒नाना᳚म्⁠। उ॒त्त॒मश्लो॑क॒ इत्यु॑त्त॒म—श्लो॒कः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠॥ भ॒द्रम्⁠। पश्य॑न्तः⁠। उपेति॑⁠। से॒दुः॒⁠। अग्रे᳚⁠। तपः॑⁠। दी॒ख्‍षाम्⁠। ऋष॑यः⁠। सु॒व॒र्विद॒ इति॑ सुवः—विदः॑⁠॥ ततः॑⁠। ख्‍ष॒त्रम्⁠। बल᳚म्⁠। ओजः॑⁠। च॒⁠। जा॒तम्⁠। तत्⁠। अ॒स्मै⁠। दे॒वाः⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। न॒म॒न्तु॒⁠॥ धा॒ता⁠। वि॒धा॒तेति॑ वि—धा॒ता⁠। प॒र॒मा⁠। १५ (५०) [१५] उ॒त⁠। स॒न्दृगिति॑ सं—दृक्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प॒र॒मे॒ष्ठी⁠। वि॒राजेति॑ वि—राजा᳚⁠॥ स्तोमाः᳚⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। नि॒विद॒ इति॑ नि—विदः॑⁠। मे॒⁠। आ॒हुः॒⁠। ए॒तस्मै᳚⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। अ॒भि⁠। समिति॑⁠। न॒मा॒म॒⁠॥ अ॒भ्याव॑र्तद्ध्व॒मित्य॑भि—आव॑र्तद्ध्वम्⁠। उपेति॑⁠। मा॒⁠। एति॑⁠। इ॒त॒⁠। सा॒कम्⁠। अ॒यम्⁠। शा॒स्ता⁠। अधि॑पति॒रित्यधि॑—प॒तिः॒⁠। वः॒⁠। अ॒स्तु॒⁠॥ अ॒स्य⁠। वि॒ज्ञान॒मिति॑ वि—ज्ञान᳚म्⁠। अनु॑⁠। समिति॑⁠। र॒भ॒द्ध्व॒म्⁠। इ॒मम्⁠। प॒श्चात्⁠। अन्विति॑⁠। जी॒वा॒थ॒⁠। सर्वे᳚⁠॥ रा॒ष्ट्र॒भृत॒ इति॑ राष्ट्र—भृतः॑⁠। ए॒ताः⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒षा⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। चितिः॑⁠। रा॒ष्ट्र॒भृदिति॑ राष्ट्र—भृत्⁠। तया᳚⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। न⁠। अ॒स्मा॒त्⁠। रा॒ष्ट्रम्⁠। भ्र॒ꣳ॒श॒ते॒ [१६] (भा॒ग॒धेयं॒ जुह्व॑ति पर॒मा रा॒ष्ट्रं द॑धाति स॒प्त च॑) ॥४॥
यथा᳚⁠। वै⁠। पु॒त्रः⁠। जा॒तः⁠। म्रि॒यते᳚⁠। ए॒वम्⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। म्रि॒य॒ते॒⁠। यस्य॑⁠। अ॒ग्निः⁠। उख्यः॑⁠। उ॒द्वाय॒तीयु॑त्—वाय॑ति⁠। यत्⁠। नि॒र्म॒न्थ्य॑मिति॑ निः—म॒न्थ्य᳚म्⁠। कु॒र्यात्⁠। वीति॑⁠। छि॒न्द्या॒त्⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। अ॒स्मै॒⁠। ज॒न॒ये॒त्⁠। सः⁠। ए॒व⁠। पुनः॑⁠। प॒रीद्ध्य॒ इति॑ परि—इद्ध्यः॑⁠। स्वात्⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। योनेः᳚⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। न⁠। अ॒स्मै॒⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। ज॒न॒य॒ति॒⁠। तमः॑⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। यस्य॑⁠। अ॒ग्निः⁠। उख्यः॑⁠। उ॒द्वाय॒तीत्यु॑त्—वाय॑ति⁠। मृ॒त्युः⁠। तमः॑⁠। कृ॒ष्णम्⁠। वासः॑⁠। कृ॒ष्णा⁠। धे॒नुः⁠। दख्‍षि॑णा⁠। तम॑सा⁠। १७ (५०) [१७] ए॒व⁠। तमः॑⁠। मृ॒त्युम्⁠। अपेति॑⁠। ह॒ते॒⁠। हिर॑ण्यम्⁠। द॒दा॒ति॒⁠। ज्योतिः॑⁠। वै⁠। हिर॑ण्यम्⁠। ज्योति॑षा⁠। ए॒व⁠। तमः॑⁠। अपेति॑⁠। ह॒ते॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। तेजः॑⁠। वै⁠। हिर॑ण्यम्⁠। तेजः॑⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। सुवः॑⁠। न⁠। घ॒र्मः⁠। स्वाहा᳚⁠। सुवः॑⁠। न⁠। अ॒र्कः⁠। स्वाहा᳚⁠। सुवः॑⁠। न⁠। शु॒क्रः⁠। स्वाहा᳚⁠। सुवः॑⁠। न⁠। ज्योतिः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सुवः॑⁠। न⁠। सूर्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒र्कः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। अ॒सौ⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। १८ (५०) [१८] अ॒श्व॒मे॒ध इत्य॑श्व—मे॒धः⁠। यत्⁠। ए॒ताः⁠। आहु॑ती॒रित्या—हु॒तीः॒⁠। जु॒होति॑⁠। अ॒र्का॒श्व॒मे॒धयो॒रित्य॑र्क—अ॒श्व॒मे॒धयोः᳚⁠। ए॒व⁠। ज्योती॑ꣳषि⁠। समिति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ए॒षः⁠। ह॒⁠। तु⁠। वै⁠। अ॒र्का॒श्व॒मे॒धीत्य॑र्क—अ॒श्व॒मे॒धी⁠। यस्य॑⁠। ए॒तत्⁠। अ॒ग्नौ⁠। क्रि॒यते᳚⁠। आपः॑⁠। वै⁠। इ॒दम्⁠। अग्रे᳚⁠। स॒लि॒लम्⁠। आ॒सी॒त्⁠। सः⁠। ए॒ताम्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प्र॒थ॒माम्⁠। चिति᳚म्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। ताम्⁠। उपेति॑⁠। अ॒ध॒त्त॒⁠। तत्⁠। इ॒यम्⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। तम्⁠। वि॒श्वक॒र्मेति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। न⁠। इ॒ह⁠। लो॒कः⁠। अ॒स्ति॒⁠। इति॑⁠। १९ (५०) [१९] अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। सः⁠। ए॒ताम्⁠। द्वि॒तीया᳚म्⁠। चिति᳚म्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। ताम्⁠। उपेति॑⁠। अ॒ध॒त्त॒⁠। तत्⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। सः⁠। य॒ज्ञः⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। न⁠। इ॒ह⁠। लो॒कः⁠। अ॒स्ति॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। सः⁠। वि॒श्वक॑र्माण॒मिति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒ण॒म्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। केन॑⁠। मा॒⁠। उ॒पैष्य॒सीत्यु॑प—ऐष्य॑सि⁠। इति॑⁠। दिश्या॑भिः⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तम्⁠। दिश्या॑भिः⁠। उ॒पैदित्यु॑प—ऐत्⁠। ताः⁠। उपेति॑⁠। अ॒ध॒त्त॒⁠। ताः⁠। दिशः॑⁠। २० (५०) [२०] अ॒भ॒व॒न्न्⁠। सः⁠। प॒र॒मे॒ष्ठी⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। न⁠। इ॒ह⁠। लो॒कः⁠। अ॒स्ति॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। सः⁠। वि॒श्वक॑र्माण॒मिति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒ण॒म्⁠। च॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। च॒⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। वा॒म्⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। न⁠। इ॒ह⁠। लो॒कः⁠। अ॒स्ति॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। सः⁠। ए॒ताम्⁠। तृ॒तीया᳚म्⁠। चिति᳚म्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। ताम्⁠। उपेति॑⁠। अ॒ध॒त्त॒⁠। तत्⁠। अ॒सौ⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। सः⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्वा॒⁠। २१ (५०) [२१] एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। न⁠। इ॒ह⁠। लो॒कः⁠। अ॒स्ति॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। सः⁠। वि॒श्वक॑र्माण॒मिति॑ वि॒श्व—क॒र्मा॒ण॒म्⁠। च॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। च॒⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। वा॒म्⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। न⁠। इ॒ह⁠। लो॒कः⁠। अ॒स्ति॒⁠। इति॑⁠। अ॒ब्रू॒ता॒म्⁠। सः⁠। प॒र॒मे॒ष्ठिन᳚म्⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। उपेति॑⁠। त्वा॒⁠। एति॑⁠। अ॒या॒नि॒⁠। इति॑⁠। केन॑⁠। मा॒⁠। उ॒पैष्य॒सीत्यु॑प—ऐष्य॑सि⁠। इति॑⁠। लो॒कं॒पृ॒णयेति॑ लोकं—पृ॒णया᳚⁠। इति॑⁠। अ॒ब्र॒वी॒त्⁠। तम्⁠। लो॒कं॒पृ॒णयेति॑ लोकं—पृ॒णया᳚⁠। उ॒पैदित्यु॑प—ऐत्⁠। तस्मा᳚त्⁠। अया॑तया॒म्नीत्यया॑त—या॒म्नी॒⁠। लो॒कं॒पृ॒णेति॑ लोकं—पृ॒णा⁠। अया॑तया॒मेत्यया॑त—या॒मा॒⁠। हि⁠। अ॒सौ⁠। २२ (५०) [२२] आ॒दि॒त्यः⁠। तान्⁠। ऋष॑यः⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। उपेति॑⁠। वः॒⁠। एति॑⁠। अ॒या॒म॒⁠। इति॑⁠। केन॑⁠। नः॒⁠। उ॒पैष्य॒थेत्यु॑प—ऐष्य॑थ⁠। इति॑⁠। भू॒म्ना⁠। इति॑⁠। अ॒ब्रु॒व॒न्न्⁠। तान्⁠। द्वाभ्या᳚म्⁠। चिती᳚भ्या॒मिति॒ चिति॑—भ्या॒म्⁠। उ॒पाय॒न्नित्यु॑प—आय॑न्न्⁠। सः⁠। पञ्च॑चितीक॒ इति॒ पञ्च॑—चि॒ती॒कः॒⁠। समिति॑⁠। अ॒प॒द्य॒त॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒ते⁠। भूया॑न्⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒भीति॑⁠। इ॒मान्⁠। लो॒कान्⁠। ज॒य॒ति॒⁠। वि॒दुः⁠। ए॒न॒म्⁠। दे॒वाः⁠। अथो॒ इति॑⁠। ए॒तासा᳚म्⁠। ए॒व⁠। दे॒वता॑नाम्⁠। सायु॑ज्यम्⁠। ग॒च्छ॒ति॒ [२३] (तम॑सा ऽऽदि॒त्यो᳚ ऽस्तीति॒ दिश॑ आदि॒त्यः प्र॒जाप॑तिमब्रवी॒दुप॑ त्वा॒ ऽसौ पञ्च॑चत्वारिꣳशच्च) ॥५॥
वयः॑⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। यत्⁠। अ॒ग्नि॒चिदित्य॑ग्नि—चित्⁠। प॒ख्‍षिणः॑⁠। अ॒श्ञी॒यात्⁠। तम्⁠। ए॒व⁠। अ॒ग्निम्⁠। अ॒द्या॒त्⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छे॒त्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। व्र॒तम्⁠। च॒रे॒त्⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। हि⁠। व्र॒तम्⁠। न⁠। अतीति॑⁠। प॒शुः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। हि॒नस्ति॑⁠। खलु॑⁠। वै⁠। तम्⁠। प॒शुः⁠। यः⁠। ए॒न॒म्⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। प्र॒त्यञ्च᳚म्⁠। उ॒प॒चर॒तीत्यु॑प—चर॑ति⁠। तस्मा᳚त्⁠। प॒श्चात्⁠। प्राङ्⁠। उ॒प॒चर्य॒ इत्यु॑प—चर्यः॑⁠। आ॒त्मनः॑⁠। अहि॑ꣳसायै⁠। तेजः॑⁠। अ॒सि॒⁠। तेजः॑⁠। मे॒⁠। य॒च्छ॒⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। य॒च्छ॒⁠। २४ (५०) [२४] पृ॒थि॒व्यै⁠। मा॒⁠। पा॒हि॒⁠। ज्योतिः॑⁠। अ॒सि॒⁠। ज्योतिः॑⁠। मे॒⁠। य॒च्छ॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। य॒च्छ॒⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षात्⁠। मा॒⁠। पा॒हि॒⁠। सुवः॑⁠। अ॒सि॒⁠। सुवः॑⁠। मे॒⁠। य॒च्छ॒⁠। दिव᳚म्⁠। य॒च्छ॒⁠। दि॒वः⁠। मा॒⁠। पा॒हि॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ए॒ताभिः॑⁠। वै⁠। इ॒मे⁠। लो॒काः⁠। विधृ॑ता॒ इति॒ वि—धृ॒ताः॒⁠। यत्⁠। ए॒ताः⁠। उ॒प॒दधा॒तीत्यु॑प—दधा॑ति⁠। ए॒षाम्⁠। लो॒काना᳚म्⁠। विधृ॑त्या॒ इति॒ वि—धृ॒त्यै॒⁠। स्व॒य॒मा॒तृ॒ण्णा इति॑ स्वयं—आ॒तृ॒ण्णाः⁠। उ॒प॒धायेत्यु॑प—धाय॑⁠। हि॒र॒ण्ये॒ष्ट॒का इति॑ हिरण्य—इ॒ष्ट॒काः⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। इ॒मे⁠। वै⁠। लो॒काः⁠। स्व॒य॒मा॒तृ॒ण्णा इति॑ स्वयं—आ॒तृ॒ण्णाः⁠। ज्योतिः॑⁠। हिर॑ण्यम्⁠। यत्⁠। स्व॒य॒मा॒तृ॒ण्णा इति॑ स्वयं—आ॒तृ॒ण्णाः⁠। उ॒प॒धायेत्यु॑प—धाय॑⁠। २५ (५०) [२५] हि॒र॒ण्ये॒ष्ट॒का इति॑ हिरण्य—इ॒ष्ट॒काः⁠। उ॒प॒दधा॒तीत्यु॑प—दधा॑ति⁠। इ॒मान्⁠। ए॒व⁠। ए॒ताभिः॑⁠। लो॒कान्⁠। ज्योति॑ष्मतः⁠। कु॒रु॒ते॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। ए॒ताभिः॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। इ॒मे⁠। लो॒काः⁠। प्रेति॑⁠। भा॒न्ति॒⁠। याः⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। सूर्ये᳚⁠। रुचः॑⁠। उ॒द्य॒त इत्यु॑त्—य॒तः⁠। दिव᳚म्⁠। आ॒त॒न्वन्तीत्या᳚—त॒न्वन्ति॑⁠। र॒श्मिभि॒रिति॑ र॒श्मि—भिः॒⁠॥ ताभिः॑⁠। सर्वा॑भिः⁠। रु॒चे⁠। जना॑य⁠। नः॒⁠। कृ॒धि॒⁠॥ याः⁠। वः॒⁠। दे॒वाः॒⁠। सूर्ये᳚⁠। रुचः॑⁠। गोषु॑⁠। अश्वे॑षु⁠। याः⁠। रुचः॑⁠॥ इन्द्रा᳚ग्नी॒ इतीन्द्र॑—अ॒ग्नी॒⁠। ताभिः॑⁠। सर्वा॑भिः⁠। रुच᳚म्⁠। नः॒⁠। ध॒त्त॒⁠। बृ॒ह॒स्प॒ते॒⁠॥ रुच᳚म्⁠। नः॒⁠। धे॒हि॒⁠। २६ (५०) [२६] ब्रा॒ह्म॒णेषु॑⁠। रुच᳚म्⁠। राज॒स्विति॒ राज॑—सु॒⁠। नः॒⁠। कृ॒धि॒⁠॥ रुच᳚म्⁠। वि॒श्ये॑षु⁠। शू॒द्रेषु॑⁠। मयि॑⁠। धे॒हि॒⁠। रु॒चा⁠। रुच᳚म्⁠॥ द्वे॒धा⁠। वै⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒क्या॒नस्य॑⁠। यशः॑⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। अ॒ग्निम्⁠। वा॒⁠। चि॒तम्⁠। ई॒जा॒नम्⁠। वा॒⁠। यत्⁠। ए॒ताः⁠। आहु॑ती॒रित्या—हु॒तीः॒⁠। जु॒होति॑⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ए॒व⁠। यशः॑⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ध॒त्ते॒⁠। ई॒श्व॒रः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। आर्ति᳚म्⁠। आर्तो॒रित्या—अ॒र्तोः॒⁠। यः⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒न्वन्न्⁠। अ॒धि॒क्राम॒तीत्य॑धि—क्राम॑ति⁠। तत्⁠। त्वा॒⁠। या॒मि॒⁠। ब्रह्म॑णा⁠। वन्द॑मानः⁠। इति॑⁠। वा॒रु॒ण्या⁠। ऋ॒चा⁠। २७ (५०) [२७] जु॒हु॒या॒त्⁠। शान्तिः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒षा⁠। अ॒ग्नेः⁠। गुप्तिः॑⁠। आ॒त्मनः॑⁠। ह॒विष्कृ॑त॒ इति॑ ह॒विः—कृ॒तः॒⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यः⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒ते⁠। यथा᳚⁠। वै⁠। ह॒विः⁠। स्कन्द॑ति⁠। ए॒वम्⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। स्क॒न्द॒ति॒⁠। यः⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒त्वा⁠। स्त्रिय᳚म्⁠। उ॒पैतीत्यु॑प—एति॑⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒ण्येति॑ मैत्रा—व॒रु॒ण्या⁠। आ॒मिख्‍ष॑या⁠। य॒जे॒त॒⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒णता॒मिति॑ मैत्रा—व॒रु॒णता᳚म्⁠। ए॒व⁠। उपेति॑⁠। ए॒ति॒⁠। आ॒त्मनः॑⁠। अस्क॑न्दाय⁠। यः⁠। वै⁠। अ॒ग्निम्⁠। ऋ॒तु॒स्थामित्यृ॑तु—स्थाम्⁠। वेद॑⁠। ऋ॒तुर्‌ऋ॑तु॒रित्यृ॒तुः—ऋ॒तुः॒⁠। अ॒स्मै॒⁠। कल्प॑मानः⁠। ए॒ति॒⁠। प्रतीति॑⁠। ए॒व⁠। ति॒ष्ठ॒ति॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। २८ (५०) [२८] ऋ॒तु॒स्था इत्यृ॑तु—स्थाः⁠। तस्य॑⁠। व॒स॒न्तः⁠। शिरः॑⁠। ग्री॒ष्मः⁠। दख्‍षि॑णः⁠। प॒ख्‍षः⁠। व॒र्॒‌षाः⁠। पुच्छ᳚म्⁠। श॒रत्⁠। उत्त॑र॒ इत्युत्—त॒रः॒⁠। प॒ख्‍षः⁠। हे॒म॒न्तः⁠। मद्ध्य᳚म्⁠। पू॒र्व॒प॒ख्‍षा इति॑ पूर्व—प॒ख्‍षाः⁠। चित॑यः⁠। अ॒प॒र॒प॒ख्‍षा इत्य॑पर—प॒ख्‍षाः⁠। पुरी॑षम्⁠। अ॒हो॒रा॒त्राणीत्य॑हः—रा॒त्राणि॑⁠। इष्ट॑काः⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। ऋ॒तु॒स्था इत्यृ॑तु—स्थाः⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। ऋ॒तुर्‌ऋ॑तु॒रित्यृ॒तुः—ऋ॒तुः॒⁠। अ॒स्मै॒⁠। कल्प॑मानः⁠। ए॒ति॒⁠। प्रतीति॑⁠। ए॒व⁠। ति॒ष्ठ॒ति॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वै⁠। ए॒तम्⁠। ज्यैष्ठ्य॑काम॒ इति॒ ज्यैष्ठ्य॑—का॒मः॒⁠। नीति॑⁠। अ॒ध॒त्त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। सः⁠। ज्यैष्ठ्य᳚म्⁠। अ॒ग॒च्छ॒त्⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒ते⁠। ज्यैष्ठ्य᳚म्⁠। ए॒व⁠। ग॒च्छ॒ति॒ [२९] (पृ॒थि॒वीय्ँय॑च्छ॒ यथ् स्व॑यमातृ॒ण्णा उ॑प॒धाय॑ धेह्यृ॒ चा ऽग्नि श्चि॑नु॒ते त्रीणि॑ च) ॥६॥
यत्⁠। आकू॑ता॒दित्या—कू॒ता॒त्⁠। स॒मसु॑स्रो॒दिति॑ सं—असु॑स्रोत्⁠। हृ॒दः⁠। वा॒⁠। मन॑सः⁠। वा॒⁠। संभृ॑त॒मिति॒ सं—भृ॒त॒म्⁠। चख्‍षु॑षः⁠। वा॒⁠॥ तम्⁠। अनु॑⁠। प्रेति॑⁠। इ॒हि॒⁠। सु॒कृ॒तस्येति॑ सु—कृ॒तस्य॑⁠। लो॒कम्⁠। यत्र॑⁠। ऋष॑यः⁠। प्र॒थ॒म॒जा इति॑ प्रथम—जाः⁠। ये⁠। पु॒रा॒णाः⁠॥ ए॒तम्⁠। स॒ध॒स्थेति॑ सध—स्थ॒⁠। परीति॑⁠। ते॒⁠। द॒दा॒मि॒⁠। यम्⁠। आ॒वहा॒दित्या᳚—वहा᳚त्⁠। शे॒व॒धिमिति॑ शेव—धिम्⁠। जा॒तवे॑दा॒ इति॑ जा॒त—वे॒दाः॒⁠॥ अ॒न्वा॒ग॒न्तेत्य॑नु—आ॒ग॒न्ता⁠। य॒ज्ञप॑ति॒रिति॑ य॒ज्ञ—प॒तिः॒⁠। वः॒⁠। अत्र॑⁠। तम्⁠। स्म॒⁠। जा॒नी॒त॒⁠। प॒र॒मे⁠। व्यो॑म॒न्निति॒ वि—ओ॒म॒न्न्⁠॥ जा॒नी॒तात्⁠। ए॒न॒म्⁠। प॒र॒मे⁠। व्यो॑म॒न्निति॒ वि—ओ॒म॒न्न्⁠। देवाः᳚⁠। स॒ध॒स्था॒ इति॑ सध—स्थाः॒⁠। वि॒द⁠। रू॒पम्⁠। अ॒स्य॒⁠॥ यत्⁠। आ॒गच्छा॒दित्या᳚—गच्छा᳚त्⁠। ३० (५०) [३०] प॒थिभि॒रिति॑ प॒थि—भिः॒⁠। दे॒व॒यानै॒रिति॑ देव—यानैः᳚⁠। इ॒ष्टा॒पू॒र्ते इती᳚ष्टा—पू॒र्ते⁠। कृ॒णु॒ता॒त्⁠। आ॒विः⁠। अ॒स्मै॒⁠॥ सम्⁠। प्रेति॑⁠। च्य॒व॒द्ध्व॒म्⁠। अन्विति॑⁠। सम्⁠। प्रेति॑⁠। या॒त॒⁠। अग्ने᳚⁠। प॒थः⁠। दे॒व॒याना॒निति॑ देव—याना॑न्⁠। कृ॒णु॒द्ध्व॒म्⁠॥ अ॒स्मिन्न्⁠। स॒धस्थ॒ इति॑ स॒ध—स्थे॒⁠। अधीति॑⁠। उत्त॑रस्मि॒न्नित्युत्—त॒र॒स्मि॒न्न्⁠। विश्वे᳚⁠। दे॒वाः॒⁠। यज॑मानः⁠। च॒⁠। सी॒द॒त॒⁠॥ प्र॒स्त॒रेणेति॑ प्र—स्त॒रेण॑⁠। प॒रि॒धिनेति॑ परि—धिना᳚⁠। स्रु॒चा⁠। वेद्या᳚⁠। च॒⁠। ब॒र्॒‌हिषा᳚⁠॥ ऋ॒चा⁠। इ॒मम्⁠। य॒ज्ञम्⁠। नः॒⁠। व॒ह॒⁠। सुवः॑⁠। दे॒वेषु॑⁠। गन्त॑वे⁠॥ यत्⁠। इ॒ष्टम्⁠। यत्⁠। प॒रा॒दान॒मिति॑ परा—दान᳚म्⁠। यत्⁠। द॒त्तम्⁠। या⁠। च॒⁠। दख्‍षि॑णा⁠॥ तत्⁠। ३१ (५०) [३१] अ॒ग्निः⁠। वै॒श्व॒क॒र्म॒ण इति॑ वैश्व—क॒र्म॒णः⁠। सुवः॑⁠। दे॒वेषु॑⁠। नः॒⁠। द॒ध॒त्⁠॥ येन॑⁠। स॒हस्र᳚म्⁠। वह॑सि⁠। येन॑⁠। अ॒ग्ने॒⁠। स॒र्व॒वे॒द॒समिति॑ सर्व—वे॒द॒सम्⁠॥ तेन॑⁠। इ॒मम्⁠। य॒ज्ञम्⁠। नः॒⁠। व॒ह॒⁠। सुवः॑⁠। दे॒वेषु॑⁠। गन्त॑वे⁠॥ येन॑⁠। अ॒ग्ने॒⁠। दख्‍षि॑णाः⁠। यु॒क्ताः⁠। य॒ज्ञम्⁠। वह॑न्ति⁠। ऋ॒त्विजः॑⁠॥ तेन॑⁠। इ॒मम्⁠। य॒ज्ञम्⁠। नः॒⁠। व॒ह॒⁠। सुवः॑⁠। दे॒वेषु॑⁠। गन्त॑वे⁠॥ येन॑⁠। अ॒ग्ने॒⁠। सु॒कृत॒ इति॑ सु—कृतः॑⁠। प॒था⁠। मधोः᳚⁠। धाराः᳚⁠। व्या॒न॒शुरिति॑ वि—आ॒न॒शुः⁠॥ तेन॑⁠। इ॒मम्⁠। य॒ज्ञम्⁠। नः॒⁠। व॒ह॒⁠। सुवः॑⁠। दे॒वेषु॑⁠। गन्त॑वे⁠॥ यत्र॑⁠। धाराः᳚⁠। अन॑पेता॒ इत्यन॑प—इ॒ताः॒⁠। मधोः᳚⁠। घृ॒तस्य॑⁠। च॒⁠। याः⁠॥ तत्⁠। अ॒ग्निः⁠। वै॒श्व॒क॒र्म॒ण इति॑ वैश्व—क॒र्म॒णः⁠। सुवः॑⁠। दे॒वेषु॑⁠। नः॒⁠। द॒ध॒त् [३२] (आ॒गच्छा॒त् तद् व्या॑न॒शु स्तेने॒मय्ँय॒ज्ञं नो॑ वह॒ सुव॑र्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे॒ चतु॑र्दश च) ॥७॥
याः⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। स॒मिध॒ इति॑ सं—इधः॑⁠। यानि॑⁠। धाम॑⁠। या⁠। जि॒ह्वा⁠। जा॒त॒वे॒द॒ इति॑ जात—वे॒दः॒⁠। यः⁠। अ॒र्चिः⁠॥ ये⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। मे॒डयः॑⁠। ये⁠। इन्द॑वः⁠। तेभिः॑⁠। आ॒त्मान᳚म्⁠। चि॒नु॒हि॒⁠। प्र॒जा॒नन्निति॑ प्र—जा॒नन्न्⁠॥ उ॒थ्स॒न्न॒य॒ज्ञ इत्यु॑थ्सन्न—य॒ज्ञः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। किम्⁠। वा॒⁠। अह॑⁠। ए॒तस्य॑⁠। क्रि॒यते᳚⁠। किम्⁠। वा॒⁠। न⁠। यत्⁠। वै⁠। अ॒द्ध्व॒र्युः⁠। अ॒ग्नेः⁠। चि॒न्वन्न्⁠। अ॒न्त॒रेतीत्य॑न्तः—एति॑⁠। आ॒त्मनः॑⁠। वै⁠। तत्⁠। अ॒न्तः⁠। ए॒ति॒⁠। याः⁠। ते॒⁠। अ॒ग्ने॒⁠। स॒मिध॒ इति॑ सं—इधः॑⁠। यानि॑⁠। ३३ (५०) [३३] धाम॑⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ए॒षा⁠। वै⁠। अ॒ग्नेः⁠। स्व॒यं॒चि॒तिरिति॑ स्वयं—चि॒तिः⁠। अ॒ग्निः⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नो॒ति॒⁠। न⁠। अ॒द्ध्व॒र्युः⁠। आ॒त्मनः॑⁠। अ॒न्तः⁠। ए॒ति॒⁠। चत॑स्रः⁠। आशाः᳚⁠। प्रेति॑⁠। च॒र॒न्तु॒⁠। अ॒ग्नयः॑⁠। इ॒मम्⁠। नः॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। न॒य॒तु॒⁠। प्र॒जा॒नन्निति॑ प्र—जा॒नन्न्⁠॥ घृ॒तम्⁠। पिन्व॑न्न्⁠। अ॒जर᳚म्⁠। सु॒वीर॒मिति॑ सु—वीर᳚म्⁠। ब्रह्म॑⁠। स॒मिदिति॑ सं—इत्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। आहु॑तीना॒मित्या—हु॒ती॒ना॒म्⁠॥ सु॒व॒र्गायेति॑ सुवः—गाय॑⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। लो॒काय॑⁠। उपेति॑⁠। धी॒य॒ते॒⁠। यत्⁠। कू॒र्मः⁠। चत॑स्रः⁠। आशाः᳚⁠। प्रेति॑⁠। च॒र॒न्तु॒⁠। अ॒ग्नयः॑⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ३४ (५०) [३४] दिशः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒तेन॑⁠। प्रेति॑⁠। जा॒ना॒ति॒⁠। इ॒मम्⁠। नः॒⁠। य॒ज्ञम्⁠। न॒य॒तु॒⁠। प्र॒जा॒नन्निति॑ प्र—जा॒नन्न्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। अ॒भिनी᳚त्या॒ इत्य॒भि—नी॒त्यै॒⁠। ब्रह्म॑⁠। स॒मिदिति॑ सं—इत्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। आहु॑तीना॒मित्या—हु॒ती॒ना॒म्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। ब्रह्म॑णा⁠। वै⁠। दे॒वाः⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। आ॒य॒न्न्⁠। यत्⁠। ब्रह्म॑ण्व॒त्येति॒ ब्रह्म॑ण्—व॒त्या॒⁠। उ॒प॒दधा॒तीत्यु॑प—दधा॑ति⁠। ब्रह्म॑णा⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। यज॑मानः⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। ए॒ति॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। तस्य॑⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। प॒शवः॑⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। रू॒पम्⁠। सर्वा॑न्⁠। वर्णा॑न्⁠। इष्ट॑कानाम्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। रू॒पेण॑⁠। ए॒व⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। प॒शून्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। प्र॒जाभ्य॒ इति॑ प्र—जाभ्यः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। प॒शुभ्य॒ इति॑ प॒शु—भ्यः॒⁠। छन्दो᳚भ्य॒ इति॒ छन्दः॑—भ्यः॒⁠। अ॒व॒रुद्ध्येत्य॑व—रुद्ध्य॑⁠। चि॒नु॒ते॒ [३५] (यान्य॒ ग्नय॒ इत्या॒हे ष्ट॑काना॒ꣳ॒ षोड॑श च) ॥८॥
मयि॑⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। अग्रे᳚⁠। अ॒ग्निम्⁠। रा॒यः⁠। पोषा॑य⁠। सु॒प्र॒जा॒स्त्वायेति॑ सुप्रजाः—त्वाय॑⁠। सु॒वीर्या॒येति॑ सु—वीर्या॑य⁠॥ मयि॑⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। मयि॑⁠। वर्चः॑⁠। द॒धा॒मि॒⁠। अरि॑ष्टाः⁠। स्या॒म॒⁠। त॒नुवा᳚⁠। सु॒वीरा॒ इति॑ सु—वीराः᳚⁠॥ यः⁠। नः॒⁠। अ॒ग्निः⁠। पि॒त॒रः॒⁠। हृ॒थ्स्विति॑ हृत्—सु⁠। अ॒न्तः⁠। अम॑र्त्यः⁠। मर्त्या॑न्⁠। आ॒वि॒वेशेत्या᳚—वि॒वेश॑⁠॥ तम्⁠। आ॒त्मन्न्⁠। परीति॑⁠। गृ॒ह्णी॒म॒हे॒⁠। व॒यम्⁠। मा⁠। सः⁠। अ॒स्मान्⁠। अ॒व॒हायेत्य॑व—हाय॑⁠। परेति॑⁠। गा॒त्⁠॥ यत्⁠। अ॒द्ध्व॒र्युः⁠। आ॒त्मन्न्⁠। अ॒ग्निम्⁠। अगृ॑हीत्वा⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नु॒यात्⁠। यः⁠। अ॒स्य॒⁠। स्वः⁠। अ॒ग्निः⁠। तम्⁠। अपीति॑⁠। ३६ (५०) [३६] यज॑मानाय⁠। चि॒नु॒या॒त्⁠। अ॒ग्निम्⁠। खलु॑⁠। वै⁠। प॒शवः॑⁠। अनु॑⁠। उपेति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ते॒⁠। अ॒प॒क्रामु॑का॒ इत्य॑प—क्रामु॑काः⁠। अ॒स्मा॒त्⁠। प॒शवः॑⁠। स्युः॒⁠। मयि॑⁠। गृ॒ह्णा॒मि॒⁠। अग्रे᳚⁠। अ॒ग्निम्⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ए॒व⁠। स्वम्⁠। अ॒ग्निम्⁠। दा॒धा॒र॒⁠। न⁠। अ॒स्मा॒त्⁠। प॒शवः॑⁠। अपेति॑⁠। क्रा॒म॒न्ति॒⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। यत्⁠। मृत्⁠। च॒⁠। आपः॑⁠। च॒⁠। अ॒ग्नेः⁠। अ॒ना॒द्यम्⁠। अथ॑⁠। कस्मा᳚त्⁠। मृ॒दा⁠। च॒⁠। अ॒द्भिरित्य॑त्—भिः⁠। च॒⁠। अ॒ग्निः⁠। ची॒य॒ते॒⁠। इति॑⁠। यत्⁠। अ॒द्भिरित्य॑त्—भिः⁠। स॒य्ँयौतीति॑ सं—यौति॑⁠। ३७ (५०) [३७] आपः॑⁠। वै⁠। सर्वाः᳚⁠। दे॒वताः᳚⁠। दे॒वता॑भिः⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। समिति॑⁠। सृ॒ज॒ति॒⁠। यत्⁠। मृ॒दा⁠। चि॒नोति॑⁠। इ॒यम्⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। वै॒श्वा॒न॒रः⁠। अ॒ग्निना᳚⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। अ॒ग्निम्⁠। चि॒नो॒ति॒⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। यत्⁠। मृ॒दा⁠। च॒⁠। अ॒द्भिरित्य॑त्—भिः⁠। च॒⁠। अ॒ग्निः⁠। ची॒यते᳚⁠। अथ॑⁠। कस्मा᳚त्⁠। अ॒ग्निः⁠। उ॒च्य॒ते॒⁠। इति॑⁠। यत्⁠। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑—भिः॒⁠। चि॒नोति॑⁠। अ॒ग्नयः॑⁠। वै⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒ग्निः⁠। उ॒च्य॒ते॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। इ॒यम्⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। वै॒श्वा॒न॒रः⁠। यत्⁠। ३८ (५०) [३८] मृ॒दा⁠। चि॒नोति॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒ग्निः⁠। उ॒च्य॒ते॒⁠। हि॒र॒ण्ये॒ष्ट॒का इति॑ हिरण्य—इ॒ष्ट॒काः⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। ज्योतिः॑⁠। वै⁠। हिर॑ण्यम्⁠। ज्योतिः॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। तेजः॑⁠। वै⁠। हिर॑ण्यम्⁠। तेजः॑⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। यः⁠। वै⁠। अ॒ग्निम्⁠। स॒र्वतो॑मुख॒मिति॑ स॒र्वतः॑—मु॒ख॒म्⁠। चि॒नु॒ते⁠। सर्वा॑सु⁠। प्र॒जास्विति॑ प्र—जासु॑⁠। अन्न᳚म्⁠। अ॒त्ति॒⁠। सर्वाः᳚⁠। दिशः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। गा॒य॒त्रीम्⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। त्रि॒ष्टुभ᳚म्⁠। द॒ख्‍षि॒ण॒तः⁠। जग॑तीम्⁠। प॒श्चात्⁠। अ॒नु॒ष्टुभ॒मित्य॑नु—स्तुभ᳚म्⁠। उ॒त्त॒र॒त इत्यु॑त्—त॒र॒तः⁠। प॒ङ्क्तिम्⁠। मद्ध्ये᳚⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। स॒र्वतो॑मुख॒ इति॑ स॒र्वतः॑—मु॒खः॒⁠। तम्⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। चि॒नु॒ते⁠। सर्वा॑सु⁠। प्र॒जास्विति॑ प्र—जासु॑⁠। अन्न᳚म्⁠। अ॒त्ति॒⁠। सर्वाः᳚⁠। दिशः॑⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। दि॒शि⁠। ए॒व⁠। दिश᳚म्⁠। प्रेति॑⁠। व॒य॒ति॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। दि॒शि⁠। दिक्⁠। प्रोतेति॒ प्र—उ॒ता॒ [३९] (अपि॑स॒य्ँयौति॑वैश्वान॒रो यदे॒ष वैपञ्च॑विꣳशतिश्च) ॥९॥
प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒ग्निम्⁠। अ॒सृ॒ज॒त॒⁠। सः⁠। अ॒स्मा॒त्⁠। सृ॒ष्टः⁠। प्राङ्⁠। प्रेति॑⁠। अ॒द्र॒व॒त्⁠। तस्मै᳚⁠। अश्व᳚म्⁠। प्रतीति॑⁠। आ॒स्य॒त्⁠। सः⁠। द॒ख्‍षि॒णा⁠। एति॑⁠। अ॒व॒र्त॒त॒⁠। तस्मै᳚⁠। वृ॒ष्णिम्⁠। प्रतीति॑⁠। आ॒स्य॒त्⁠। सः⁠। प्र॒त्यङ्⁠। एति॑⁠। अ॒व॒र्त॒त॒⁠। तस्मै᳚⁠। ऋ॒ष॒भम्⁠। प्रतीति॑⁠। आ॒स्य॒त्⁠। सः⁠। उद॑ङ्⁠। एति॑⁠। अ॒व॒र्त॒त॒⁠। तस्मै᳚⁠। ब॒स्तम्⁠। प्रतीति॑⁠। आ॒स्य॒त्⁠। सः⁠। ऊ॒र्द्ध्वः⁠। अ॒द्र॒व॒त्⁠। तस्मै᳚⁠। पुरु॑षम्⁠। प्रतीति॑⁠। आ॒स्य॒त्⁠। यत्⁠। प॒शु॒शी॒र्॒‌षाणीति॑ पशु—शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। उ॒प॒दधा॒तीत्यु॑प—दधा॑ति⁠। स॒र्वतः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। ४० (५०) [४०] अ॒व॒रुद्ध्येत्य॑व—रुद्ध्य॑⁠। चि॒नु॒ते॒⁠। ए॒ताः⁠। वै⁠। प्रा॒ण॒भृत॒ इति॑ प्राण—भृतः॑⁠। चख्‍षु॑ष्मतीः⁠। इष्ट॑काः⁠। यत्⁠। प॒शु॒शी॒र्॒‌षाणीति॑ पशु—शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। यत्⁠। प॒शु॒शी॒र्॒‌षाणीति॑ पशु—शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। उ॒प॒दधा॒तीत्यु॑प—दधा॑ति⁠। ताभिः॑⁠। ए॒व⁠। यज॑मानः⁠। अ॒मुष्मि॑न्न्⁠। लो॒के⁠। प्रेति॑⁠। अ॒नि॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। ताभिः॑⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। इ॒मे⁠। लो॒काः⁠। प्रेति॑⁠। भा॒न्ति॒⁠। मृ॒दा⁠। अ॒भि॒लिप्येत्य॑भि—लिप्य॑⁠। उपेति॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। मे॒द्ध्य॒त्वायेति॑ मेद्ध्य—त्वाय॑⁠। प॒शुः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। यत्⁠। अ॒ग्निः⁠। अन्न᳚म्⁠। प॒शवः॑⁠। ए॒षः⁠। खलु॑⁠। वै⁠। अ॒ग्निः⁠। यत्⁠। प॒शु॒शी॒र्॒‌षाणीति॑ पशु—शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। यम्⁠। का॒मये॑त⁠। कनी॑यः⁠। अ॒स्य॒⁠। अन्न᳚म्⁠। ४१ (५०) [४१] स्या॒त्⁠। इति॑⁠। स॒न्त॒रामिति॑ सं—त॒राम्⁠। तस्य॑⁠। प॒शु॒शी॒र्॒‌षाणीति॑ पशु—शी॒र्॒‌षाणि॑⁠। उपेति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। कनी॑यः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। अन्न᳚म्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यम्⁠। का॒मये॑त⁠। स॒माव॑त्⁠। अ॒स्य॒⁠। अन्न᳚म्⁠। स्या॒त्⁠। इति॑⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। तस्य॑⁠। उपेति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। स॒माव॑त्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। अन्न᳚म्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यम्⁠। का॒मये॑त⁠। भूयः॑⁠। अ॒स्य॒⁠। अन्न᳚म्⁠। स्या॒त्⁠। इति॑⁠। अन्ते॑षु⁠। तस्य॑⁠। व्यु॒दूह्येति॑ वि—उ॒दूह्य॑⁠। उपेति॑⁠। द॒द्ध्या॒त्⁠। अ॒न्त॒तः⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मै॒⁠। अन्न᳚म्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। भूयः॑⁠। अ॒स्य॒⁠। अन्न᳚म्⁠। भ॒व॒ति॒ [४२] (ए॒न॒ म॒स्यान्नं॒ भूयो॒ऽस्याऽन्नं॑ भवति) ॥१०॥
स्ते॒गान्⁠। दꣴष्ट्रा᳚भ्याम्⁠। म॒ण्डूका॑न्⁠। जंभ्ये॑भिः⁠। आद॑काम्⁠। खा॒देन॑⁠। ऊर्ज᳚म्⁠। स॒ꣳ॒सू॒देनेति॑ सं—सू॒देन॑⁠। अर॑ण्यम्⁠। जांबी॑लेन⁠। मृद᳚म्⁠। ब॒र्स्वे॑भिः⁠। शर्क॑राभिः⁠। अव॑काम्⁠। अव॑काभिः⁠। शर्क॑राम्⁠। उ॒थ्सा॒देनेत्यु॑त्—सा॒देन॑⁠। जि॒ह्वाम्⁠। अ॒व॒क्र॒न्देनेत्य॑व—क्र॒न्देन॑⁠। तालु᳚म्⁠। सर॑स्वतीम्⁠। जि॒ह्वा॒ग्रेणेति॑ जिह्वा—अ॒ग्रेण॑ [४३] (स्ते॒गान् द्वावि॑ꣳशतिः) ॥११॥
वाज᳚म्⁠। हनू᳚भ्या॒मिति॒ हनु॑—भ्या॒म्⁠। अ॒पः⁠। आ॒स्ये॑न⁠। आ॒दि॒त्यान्⁠। श्मश्रु॑भि॒रिति॒ श्मश्रु॑—भिः॒⁠। उ॒प॒या॒ममित्यु॑प—या॒मम्⁠। अध॑रेण⁠। ओष्ठे॑न⁠। सत्⁠। उत्त॑रे॒णेत्युत्—त॒रे॒ण॒⁠। अन्त॑रेण⁠। अ॒नू॒का॒शमित्य॑नु—का॒शम्⁠। प्र॒का॒शेनेति॑ प्र—का॒शेन॑⁠। बाह्य᳚म्⁠। स्त॒न॒यि॒त्नुम्⁠। नि॒र्बा॒धेनेति॑ निः—बा॒धेन॑⁠। सू॒र्या॒ग्नी इति॑ सूर्य—अ॒ग्नी⁠। चख्‍षु॑र्भ्या॒मिति॒ चख्‍षुः॑—भ्या॒म्⁠। वि॒द्युता॒विति॑ वि—द्युतौ᳚⁠। क॒नान॑काभ्याम्⁠। अ॒शनि᳚म्⁠। म॒स्तिष्के॑ण⁠। बल᳚म्⁠। म॒ज्जभि॒रिति॑ म॒ज्ज—भिः॒ [४४] (वाजं॒ पञ्च॑विꣳशतिः) ॥१२॥
कू॒र्मान्⁠। श॒फैः⁠। अ॒च्छला॑भिः⁠। क॒पिञ्ज॑लान्⁠। साम॑⁠। कुष्ठि॑काभिः⁠। ज॒वम्⁠। जङ्घा॑भिः⁠। अ॒ग॒दम्⁠। जानु॑भ्या॒मिति॒ जानु॑—भ्या॒म्⁠। वी॒र्य᳚म्⁠। कु॒हाभ्या᳚म्⁠। भ॒यम्⁠। प्र॒चा॒लाभ्या॒मिति॑ प्र—चा॒लाभ्या᳚म्⁠। गुहा᳚⁠। उ॒प॒प॒ख्‍षाभ्या॒मित्यु॑प—प॒ख्‍षाभ्या᳚म्⁠। अ॒श्विनौ᳚⁠। अꣳसा᳚भ्याम्⁠। अदि॑तिम्⁠। शी॒र्ष्णा⁠। निर्‌ऋ॑ति॒मिति॒ निः—ऋ॒ति॒म्⁠। निर्जा᳚ल्मके॒नेति॒ निः—जा॒ल्म॒के॒न॒⁠। शी॒र्ष्णा [४५] (कू॒र्मान्त्रयो॑विꣳशतिः) ॥१३॥
योक्त्र᳚म्⁠। गृद्ध्रा॑भिः⁠। यु॒गम्⁠। आन॑ते॒नेत्या—न॒ते॒न॒⁠। चि॒त्तम्⁠। मन्या॑भिः⁠। स॒ङ्क्रो॒शानिति॑ सं—क्रो॒शान्⁠। प्रा॒णैरिति॑ प्र—अ॒नैः⁠। प्र॒का॒शेनेति॑ प्र—का॒शेन॑⁠। त्वच᳚म्⁠। प॒रा॒का॒शेनेति॑ परा—का॒शेन॑⁠। अन्त॑राम्⁠। म॒शका॑न्⁠। केशैः᳚⁠। इन्द्र᳚म्⁠। स्वप॒सेति॑ सु—अप॑सा⁠। वहे॑न⁠। बृह॒स्पति᳚म्⁠। श॒कु॒नि॒सा॒देनेति॑ शकुनि—सा॒देन॑⁠। रथ᳚म्⁠। उ॒ष्णिहा॑भिः [४६] (योक्त्र॒ मेक॑विꣳशतिः) ॥१४॥
मि॒त्रावरु॑णा॒विति॑ मि॒त्रा—वरु॑णौ⁠। श्रोणी᳚भ्या॒मिति॒ श्रोणि॑—भ्या॒म्⁠। इ॒न्द्रा॒ग्नी इती᳚न्द्र—अ॒ग्नी⁠। शि॒ख॒ण्डाभ्या᳚म्⁠। इन्द्रा॒बृह॒स्पती॒ इतीन्द्रा᳚—बृह॒स्पती᳚⁠। ऊ॒रुभ्या॒मित्यू॒रु—भ्या॒म्⁠। इन्द्रा॒विष्णू॒ इतीन्द्रा᳚—विष्णू᳚⁠। अ॒ष्ठी॒वद्भ्या॒मित्य॑ष्ठी॒वत्—भ्या॒म्⁠। स॒वि॒तार᳚म्⁠। पुच्छे॑न⁠। ग॒न्ध॒र्वान्⁠। शेपे॑न⁠। अ॒फ्स॒रसः॑⁠। मु॒ष्काभ्या᳚म्⁠। पव॑मानम्⁠। पा॒युना᳚⁠। प॒वित्र᳚म्⁠। पोत्रा᳚भ्याम्⁠। आ॒क्रम॑ण॒मित्या᳚—क्रम॑णम्⁠। स्थू॒राभ्या᳚म्⁠। प्र॒ति॒क्रम॑ण॒मिति॑ प्रति—क्रम॑णम्⁠। कुष्ठा᳚भ्याम् [४७] (मि॒त्रावरु॑णौ॒ द्वावि॑ꣳशतिः) ॥१५॥
इन्द्र॑स्य⁠। क्रो॒डः⁠। अदि॑त्यै⁠। पा॒ज॒स्य᳚म्⁠। दि॒शाम्⁠। ज॒त्रवः॑⁠। जी॒मूता॑न्⁠। हृ॒द॒यौ॒प॒शाभ्या॒मिति॑ हृदय—औ॒प॒शाभ्या᳚म्⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। पु॒रि॒तता᳚⁠। नभः॑⁠। उ॒द॒र्ये॑ण⁠। इ॒न्द्रा॒णीम्⁠। प्ली॒ह्ना⁠। व॒ल्मीका॑न्⁠। क्लो॒म्ना⁠। गि॒रीन्⁠। प्ला॒शिभि॒रिति॑ प्ला॒शि—भिः॒⁠। स॒मु॒द्रम्⁠। उ॒दरे॑ण⁠। वै॒श्वा॒न॒रम्⁠। भस्म॑ना [४८] (इन्द्र॑स्य॒ द्वावि॑शतिः॒) ॥१६॥
पू॒ष्णः⁠। व॒नि॒ष्ठुः⁠। अ॒न्धा॒हेरित्य॑न्ध—अ॒हेः⁠। स्थू॒र॒गु॒देति॑ स्थूर—गु॒दा⁠। स॒र्पान्⁠। गुदा॑भिः⁠। ऋ॒तून्⁠। पृ॒ष्टीभि॒रिति॑ पृ॒ष्टि—भिः॒⁠। दिव᳚म्⁠। पृ॒ष्ठेन॑⁠। वसू॑नाम्⁠। प्र॒थ॒मा⁠। कीक॑सा⁠। रु॒द्राणा᳚म्⁠। द्वि॒तीया᳚⁠। आ॒दि॒त्याना᳚म्⁠। तृ॒तीया᳚⁠। अङ्गि॑रसाम्⁠। च॒तु॒र्थी⁠। सा॒द्ध्याना᳚म्⁠। प॒ञ्च॒मी⁠। विश्वे॑षाम्⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। ष॒ष्ठी [४९] (पू॒ष्ण श्चतु॑र्विꣳशतिः) ॥१७॥
ओजः॑⁠। ग्री॒वाभिः॑⁠। निर्‌ऋ॑ति॒मिति॒ निः—ऋ॒ति॒म्⁠। अ॒स्थभि॒रित्य॒स्थ—भिः॒⁠। इन्द्र᳚म्⁠। स्वप॒सेति॑ सु—अप॑सा⁠। वहे॑न⁠। रु॒द्रस्य॑⁠। वि॒च॒ल इति॑ वि—च॒लः⁠। स्क॒न्धः⁠। अ॒हो॒रा॒त्रयो॒रित्य॑हः—रा॒त्रयोः᳚⁠। द्वि॒तीयः॑⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒साना॒मित्य॑र्द्ध—मा॒साना᳚म्⁠। तृ॒तीयः॑⁠। मा॒साम्⁠। च॒तु॒र्थः⁠। ऋ॒तू॒नाम्⁠। प॒ञ्च॒मः⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। ष॒ष्ठः [५०] (ओजो॑ विꣳश॒तिः) ॥१८॥
आ॒न॒न्दमित्या᳚—न॒न्दम्⁠। न॒न्दथु॑ना⁠। काम᳚म्⁠। प्र॒त्या॒साभ्या॒मिति॑ प्रति—आ॒साभ्या᳚म्⁠। भ॒यम्⁠। शि॒ती॒मभ्या॒मिति॑ शिती॒म—भ्या॒म्⁠। प्र॒शिष॒मिति॑ प्र—शिष᳚म्⁠। प्र॒शा॒साभ्या॒मिति॑ प्र—शा॒साभ्या᳚म्⁠। सू॒र्या॒च॒न्द्र॒मसा॒विति॑ सूर्या—च॒न्द्र॒मसौ᳚⁠। वृक्या᳚भ्याम्⁠। श्या॒म॒श॒ब॒लाविति॑ श्याम—श॒ब॒लौ⁠। मत॑स्नाभ्याम्⁠। व्यु॑ष्टि॒मिति॒ वि—उ॒ष्टि॒म्⁠। रू॒पेण॑⁠। निम्रु॑क्ति॒मिति॒ नि—म्रु॒क्ति॒म्⁠। अरू॑पेण [५१] (आ॒न॒न्दꣳ षोड॑श) ॥१९॥
अहः॑⁠। मा॒ꣳ॒सेन॑⁠। रात्रि᳚म्⁠। पीव॑सा⁠। अ॒पः⁠। यू॒षेण॑⁠। घृ॒तम्⁠। रसे॑न⁠। श्याम्⁠। वस॑या⁠। दू॒षीका॑भिः⁠। ह्रा॒दुनि᳚म्⁠। अश्रु॑भि॒रित्यश्रु॑—भिः॒⁠। पृष्वा᳚म्⁠। दिव᳚म्⁠। रू॒पेण॑⁠। नख्‍ष॑त्राणि⁠। प्रति॑रूपे॒णेति॒ प्रति॑—रू॒पे॒ण॒⁠। पृ॒थि॒वीम्⁠। चर्म॑णा⁠। छ॒वीम्⁠। छ॒व्या᳚⁠। उ॒पाकृ॑ता॒येत्यु॑प—आकृ॑ताय⁠। स्वाहा᳚⁠। आल॑ब्धा॒येत्या—ल॒ब्धा॒य॒⁠। स्वाहा᳚⁠। हु॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚ [५२] (अह॑र॒ ष्टावि॑ꣳशतिः) ॥२०॥
अ॒ग्नेः⁠। प॒ख्‍ष॒तिः⁠। सर॑स्वत्यै⁠। निप॑ख्‍षति॒रिति॒ नि—प॒ख्‍ष॒तिः॒⁠। सोम॑स्य⁠। तृ॒तीया᳚⁠। अ॒पाम्⁠। च॒तु॒र्थी⁠। ओष॑धीनाम्⁠। प॒ञ्च॒मी⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रस्येति॑ सं—व॒थ्स॒रस्य॑⁠। ष॒ष्ठी⁠। म॒रुता᳚म्⁠। स॒प्त॒मी⁠। बृह॒स्पतेः᳚⁠। अ॒ष्ट॒मी⁠। मि॒त्रस्य॑⁠। न॒व॒मी⁠। वरु॑णस्य⁠। द॒श॒मी⁠। इन्द्र॑स्य⁠। ए॒का॒द॒शी⁠। विश्वे॑षाम्⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। द्वा॒द॒शी⁠। द्यावा॑पृथि॒व्योरिति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒व्योः⁠। पा॒र्श्वम्⁠। य॒मस्य॑⁠। पा॒टू॒रः [५३] (अ॒ग्नेरेका॒न्नत्रि॒ꣳ॒शत्) ॥२१॥
वा॒योः⁠। प॒ख्‍ष॒तिः⁠। सर॑स्वतः⁠। निप॑ख्‍षति॒रिति॒ नि—प॒ख्‍ष॒तिः॒⁠। च॒न्द्रम॑सः⁠। तृ॒तीया᳚⁠। नख्‍ष॑त्राणाम्⁠। च॒तु॒र्थी⁠। स॒वि॒तुः⁠। प॒ञ्च॒मी⁠। रु॒द्रस्य॑⁠। ष॒ष्ठी⁠। स॒र्पाणा᳚म्⁠। स॒प्त॒मी⁠। अ॒र्य॒म्णः⁠। अ॒ष्ट॒मी⁠। त्वष्टुः॑⁠। न॒व॒मी⁠। धा॒तुः⁠। द॒श॒मी⁠। इ॒न्द्रा॒ण्याः⁠। ए॒का॒द॒शी⁠। अदि॑त्यै⁠। द्वा॒द॒शी⁠। द्यावा॑पृथि॒व्योरिति॒ द्यावा᳚—पृ॒थि॒व्योः⁠। पा॒र्श्वम्⁠। य॒म्यै᳚⁠। पा॒टू॒रः [५४] (वा॒यो र॒ष्टावि॑ꣳशतिः) ॥२२॥
पन्था᳚म्⁠। अ॒नू॒वृग्भ्या॒मित्य॑नू॒वृक्—भ्या॒म्⁠। सन्त॑ति॒मिति॒ सं—त॒ति॒म्⁠। स्ना॒व॒न्या᳚भ्याम्⁠। शुका॑न्⁠। पि॒त्तेन॑⁠। ह॒रि॒माण᳚म्⁠। य॒क्ना⁠। हली᳚ख्‍ष्णान्⁠। पा॒प॒वा॒तेनेति॑ पाप—वा॒तेन॑⁠। कू॒श्मान्⁠। शक॑भि॒रिति॒ शक॑—भिः॒⁠। श॒व॒र्तान्⁠। ऊव॑द्ध्येन⁠। शुनः॑⁠। वि॒शस॑ने॒नेति॑ वि—शस॑नेन⁠। स॒र्पान्⁠। लो॒हि॒त॒ग॒न्धेनेति॑ लोहित—ग॒न्धेन॑⁠। वया॑ꣳसि⁠। प॒क्व॒ग॒न्धेनेति॑ पक्व—ग॒न्धेन॑⁠। पि॒पीलि॑काः⁠। प्र॒शा॒देनेति॑ प्र—शा॒देन॑ [५५] (पन्थां॒ द्वावि॑ꣳशतिः) ॥२३॥
क्रमैः᳚⁠। अतीति॑⁠। अ॒क्र॒मी॒त्⁠। वा॒जी⁠। विश्वैः᳚⁠। दे॒वैः⁠। य॒ज्ञियैः᳚⁠। स॒व्ँवि॒दा॒न इति॑ सं—वि॒दा॒नः⁠॥ सः⁠। नः॒⁠। न॒य॒⁠। सु॒कृ॒तस्येति॑ सु—कृ॒तस्य॑⁠। लो॒कम्⁠। तस्य॑⁠। ते॒⁠। व॒यम्⁠। स्व॒धयेति॑ स्व—धया᳚⁠। म॒दे॒म॒ [५६] (क्रमै॑ र॒ष्टाद॑श) ॥२४॥
द्यौः⁠। ते॒⁠। पृ॒ष्ठम्⁠। पृ॒थि॒वी⁠। स॒धस्थ॒मिति॑ स॒ध—स्थ॒म्⁠। आ॒त्मा⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। स॒मु॒द्रः⁠। योनिः॑⁠। सूर्यः॑⁠। ते॒⁠। चख्‍षुः॑⁠। वातः॑⁠। प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। च॒न्द्रमाः᳚⁠। श्रोत्र᳚म्⁠। मासाः᳚⁠। च॒⁠। अ॒र्द्ध॒मा॒सा इत्य॑र्द्ध—मा॒साः⁠। च॒⁠। पर्वा॑णि⁠। ऋ॒तवः॑⁠। अङ्गा॑नि⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। म॒हि॒मा [५७] (द्यौः पञ्च॑विꣳशतिः) ॥२५॥
अ॒ग्निः⁠। प॒शुः⁠। आ॒सी॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒न्त॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। लो॒कम्⁠। अ॒ज॒य॒त्⁠। यस्मि॑न्न्⁠। अ॒ग्निः⁠। सः⁠। ते॒⁠। लो॒कः⁠। तम्⁠। जे॒ष्य॒सि॒⁠। अथ॑⁠। अवेति॑⁠। जि॒घ्र॒⁠। वा॒युः⁠। प॒शुः⁠। आ॒सी॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒न्त॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। लो॒कम्⁠। अ॒ज॒य॒त्⁠। यस्मि॑न्न्⁠। वा॒युः⁠। सः⁠। ते॒⁠। लो॒कः⁠। तस्मा᳚त्⁠। त्वा॒⁠। अ॒न्तः⁠। ए॒ष्या॒मि॒⁠। यदि॑⁠। न⁠। अ॒व॒जिघ्र॒सीत्य॑व—जिघ्र॑सि⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। प॒शुः⁠। आ॒सी॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒न्त॒⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। लो॒कम्⁠। अ॒ज॒य॒त्⁠। यस्मि॑न्न्⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। सः⁠। ते॒⁠। लो॒कः⁠। तम्⁠। जे॒ष्य॒सि॒⁠। यदि॑⁠। अ॒व॒जिघ्र॒सीत्य॑व—जिघ्र॑सि [५८] (यस्मि॑ न्न॒ष्टौ च॑) ॥२६॥
अनुवाकाः पञ्चशती
२६ ५८