कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता पद पाठः
सप्तमकाण्डे द्वितीयः प्रश्नः

कांड ७ प्रश्न २
षड् रात्राद्यानां निरूपणं

ओं नमः परमात्मने, श्री महागणपतये नमः

श्री गुरुभ्यो नमः, ह॒रिः॒ ओं

ॐ
सा॒द्ध्याः⁠। वै⁠। दे॒वाः⁠। सु॒व॒र्गका॑मा॒ इति॑ सुव॒र्ग—का॒माः॒⁠। ए॒तम्⁠। ष॒ड्रा॒त्रमिति॑ षट्—रा॒त्रम्⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। तम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒न्न्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒न्त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। ते⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। आ॒य॒न्न्⁠। ये⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वाꣳसः॑⁠। ष॒ड्रा॒त्रमिति॑ षट्—रा॒त्रम्⁠। आस॑ते⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। ए॒व⁠। लो॒कम्⁠। य॒न्ति॒⁠। दे॒व॒स॒त्रमिति॑ देव—स॒त्रम्⁠। वै⁠। ष॒ड्रा॒त्र इति॑ षट्—रा॒त्रः⁠। प्र॒त्यख्‍ष॒मिति॑ प्रति—अख्‍ष᳚म्⁠। हि⁠। ए॒तानि॑⁠। पृ॒ष्ठानि॑⁠। ये⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वाꣳसः॑⁠। ष॒ड्रा॒त्रमिति॑ षट्—रा॒त्रम्⁠। आस॑ते⁠। सा॒ख्‍षादिति॑ स—अ॒ख्‍षात्⁠। ए॒व⁠। दे॒वताः᳚⁠। अ॒भ्यारो॑ह॒न्तीत्य॑भि—आरो॑हन्ति⁠। ष॒ड्रा॒त्र इति॑ षट्—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। षट्⁠। वै⁠। ऋ॒तवः॑⁠। षट्⁠। पृ॒ष्ठानि॑⁠। १ (५०) [१] पृ॒ष्ठैः⁠। ए॒व⁠। ऋ॒तून्⁠। अ॒न्वारो॑ह॒न्तीत्य॑नु—आरो॑हन्ति⁠। ऋ॒तुभि॒रित्यृ॒तु—भिः॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। ते⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रे⁠। ए॒व⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। बृ॒ह॒द्र॒थ॒न्त॒राभ्या॒मिति॑ बृहत्—र॒थ॒न्त॒राभ्या᳚म्⁠। य॒न्ति॒⁠। इ॒यम्⁠। वाव⁠। र॒थ॒न्त॒रमिति॑ रथं—त॒रम्⁠। अ॒सौ⁠। बृ॒हत्⁠। आ॒भ्याम्⁠। ए॒व⁠। य॒न्ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। अ॒नयोः᳚⁠। ए॒व⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। ए॒ते इति॑⁠। वै⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। अ॒ञ्ज॒साय॑नी॒ इत्य॑ञ्जसा—अय॑नी⁠। स्रु॒ती इति॑⁠। ताभ्या᳚म्⁠। ए॒व⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। य॒न्ति॒⁠। त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। तेजः॑⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्ध॒ते॒⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्ध॒ते॒⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। २ (५०) [२] भ॒व॒ति॒⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। जा॒य॒न्ते॒⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। रुच᳚म्⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। द॒ध॒ते॒⁠। त्रि॒ण॒व इति॑ त्रि—न॒वः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। विजि॑त्या॒ इति॒ वि—जि॒त्यै॒⁠। त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒श इति॑ त्रयः—त्रि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। स॒दो॒ह॒वि॒र्द्धा॒निन॒ इति॑ सदः—ह॒वि॒र्द्धा॒निनः॑⁠। ए॒तेन॑⁠। ष॒ड्रा॒त्रेणेति॑ षट्—रा॒त्रेण॑⁠। य॒जे॒र॒न्न्⁠। आश्व॑त्थी॒ इति॑⁠। ह॒वि॒र्द्धान॒मिति॑ हविः—धान᳚म्⁠। च॒⁠। आग्नी᳚द्ध्र॒मित्याग्नि॑—इ॒द्ध्र॒म्⁠। च॒⁠। भ॒व॒तः॒⁠। तत्⁠। हि⁠। सु॒व॒र्ग्य॑मिति॑ सुवः—ग्य᳚म्⁠। च॒क्रीव॑ती॒ इति॑⁠। भ॒व॒तः॒⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। सम॑ष्ट्या॒ इति॒ सं—अ॒ष्ट्यै॒⁠। उ॒लूख॑लबुद्ध्न॒ इत्यु॒लूख॑ल—बु॒द्ध्नः॒⁠। यूपः॑⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। प्राञ्चः॑⁠। या॒न्ति॒⁠। प्राङ्⁠। इ॒व॒⁠। हि⁠। सु॒व॒र्ग इति॑ सुवः—गः⁠। ३ (५०) [३] लो॒कः⁠। सर॑स्वत्या⁠। या॒न्ति॒⁠। ए॒षः⁠। वै⁠। दे॒व॒यान॒ इति॑ देव—यानः॑⁠। पन्थाः᳚⁠। तम्⁠। ए॒व⁠। अ॒न्वारो॑ह॒न्तीत्य॑नु—आरो॑हन्ति⁠। आ॒क्रोश॑न्त॒ इत्या᳚—क्रोश॑न्तः⁠। या॒न्ति॒⁠। अव॑र्तिम्⁠। ए॒व⁠। अ॒न्यस्मि॑न्न्⁠। प्र॒ति॒षज्येति॑ प्रति—सज्य॑⁠। प्र॒ति॒ष्ठामिति॑ प्रति—स्थाम्⁠। ग॒च्छ॒न्ति॒⁠। य॒दा⁠। दश॑⁠। श॒तम्⁠। कु॒र्वन्ति॑⁠। अथ॑⁠। एक᳚म्⁠। उ॒त्थान॒मित्यु॑त्—स्थान᳚म्⁠। श॒तायु॒रिति॑ श॒त—आ॒युः॒⁠। पुरु॑षः⁠। श॒तेन्द्रि॑य॒ इति॑ श॒त—इ॒न्द्रि॒यः॒⁠। आयु॑षि⁠। ए॒व⁠। इ॒न्द्रि॒ये⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। य॒दा⁠। श॒तम्⁠। स॒हस्र᳚म्⁠। कु॒र्वन्ति॑⁠। अथ॑⁠। एक᳚म्⁠। उ॒त्थान॒मित्यु॑त्—स्थान᳚म्⁠। स॒हस्र॑सम्मित॒ इति॑ स॒हस्र॑—स॒म्मि॒तः॒⁠। वै⁠। अ॒सौ⁠। लो॒कः⁠। अ॒मुम्⁠। ए॒व⁠। लो॒कम्⁠। अ॒भीति॑⁠। ज॒य॒न्ति॒⁠। य॒दा⁠। ए॒षा॒म्⁠। प्र॒मीये॒तेति॑ प्र—मीये॑त⁠। य॒दा⁠। वा॒⁠। जीये॑रन्न्⁠। अथ॑⁠। एक᳚म्⁠। उ॒त्थान॒मित्यु॑त्—स्थान᳚म्⁠। तत्⁠। हि⁠। ती॒र्थम् [४] (पृ॒ष्ठानि॑सप्तद॒शःसु॑व॒र्गोज॑यन्ति य॒दै का॑दश च) ॥१॥
कु॒सु॒रु॒बिन्दः॑⁠। औद्दा॑लकि॒रित्यौत्—दा॒ल॒किः॒⁠। अ॒का॒म॒य॒त॒⁠। प॒शु॒मानिति॑ पशु—मान्⁠। स्या॒म्⁠। इति॑⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। स॒प्त॒रा॒त्रमिति॑ सप्त—रा॒त्रम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒त॒⁠। तेन॑⁠। वै⁠। सः⁠। याव॑न्तः⁠। ग्रा॒म्याः⁠। प॒शवः॑⁠। तान्⁠। अवेति॑⁠। अ॒रु॒न्ध॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। स॒प्त॒रा॒त्रेणेति॑ सप्त—रा॒त्रेण॑⁠। यज॑ते⁠। याव॑न्तः⁠। ए॒व⁠। ग्रा॒म्याः⁠। प॒शवः॑⁠। तान्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। स॒प्त॒रा॒त्र इति॑ सप्त—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। स॒प्त⁠। ग्रा॒म्याः⁠। प॒शवः॑⁠। स॒प्त⁠। आ॒र॒ण्याः⁠। स॒प्त⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। उ॒भय॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। तेजः॑⁠। ५ (५०) [५] ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। जा॒य॒ते॒⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। रुच᳚म्⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। त्रि॒ण॒व इति॑ त्रि—न॒वः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। विजि॑त्या॒ इति॒ वि—जि॒त्यै॒⁠। प॒ञ्च॒वि॒ꣳ॒श इति॑ पञ्च—वि॒ꣳ॒शः⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। आप्त्यै᳚⁠। म॒हा॒व्र॒तवा॒निति॑ महाव्र॒त—वा॒न्⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। वि॒श्व॒जिदिति॑ विश्व—जित्⁠। सर्व॑पृष्ठ॒ इति॒ सर्व॑—पृ॒ष्ठः॒⁠। अ॒ति॒रा॒त्र इत्य॑ति—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। सर्व॑स्य⁠। अ॒भिजि॑त्या॒ इत्य॒भि—जि॒त्यै॒⁠। यत्⁠। प्र॒त्यख्‍ष॒मिति॑ प्रति—अख्‍ष᳚म्⁠। पूर्वे॑षु⁠। अह॒स्स्वित्यहः॑—सु॒⁠। पृ॒ष्ठानि॑⁠। उ॒पे॒युरित्यु॑प—इ॒युः⁠। प्र॒त्यख्‍ष॒मिति॑ प्रति—अख्‍ष᳚म्⁠। ६ (५०) [६] वि॒श्व॒जितीति॑ विश्व—जिति॑⁠। यथा᳚⁠। दु॒ग्धाम्⁠। उ॒प॒सीद॒तीत्यु॑प—सीद॑ति⁠। ए॒वम्⁠। उ॒त्त॒ममित्यु॑त्—त॒मम्⁠। अहः॑⁠। स्या॒त्⁠। न⁠। ए॒क॒रा॒त्र इत्ये॑क—रा॒त्रः⁠। च॒न⁠। स्या॒त्⁠। बृ॒ह॒द्र॒थ॒न्त॒रे इति॑ बृहत्—र॒थ॒न्त॒रे⁠। पूर्वे॑षु⁠। अह॒स्स्वित्यहः॑—सु॒⁠। उपेति॑⁠। य॒न्ति॒⁠। इ॒यम्⁠। वाव⁠। र॒थ॒न्त॒रमिति॑ रथं—त॒रम्⁠। अ॒सौ⁠। बृ॒हत्⁠। आ॒भ्याम्⁠। ए॒व⁠। न⁠। य॒न्ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। अ॒नयोः᳚⁠। ए॒व⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। यत्⁠। प्र॒त्यख्‍ष॒मिति॑ प्रति—अख्‍ष᳚म्⁠। वि॒श्व॒जितीति॑ विश्व—जिति॑⁠। पृ॒ष्ठानि॑⁠। उ॒प॒यन्तीत्यु॑प—यन्ति॑⁠। यथा᳚⁠। प्रत्ता᳚म्⁠। दु॒हे⁠। ता॒दृक्⁠। ए॒व⁠। तत् [७] (तेज॑ उपे॒युः प्र॒त्यख्‍षं॒ द्विच॑त्वारिꣳशच्च) ॥२॥
बृह॒स्पतिः॑⁠। अ॒का॒म॒य॒त॒⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒सीति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सी⁠। स्या॒म्⁠। इति॑⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। अ॒ष्ट॒रा॒त्रमित्य॑ष्ट—रा॒त्रम्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। तम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। सः⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒सीति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सी⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। अ॒ष्ट॒रा॒त्रेणेत्य॑ष्ट—रा॒त्रेण॑⁠। यज॑ते⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒सीति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सी⁠। ए॒व⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒ष्ट॒रा॒त्र इत्य॑ष्ट—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒ष्टाख्‍ष॒रेत्य॒ष्टा—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। गा॒य॒त्री⁠। गा॒य॒त्री⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। गा॒य॒त्रि॒या⁠। ए॒व⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। अ॒ष्ट॒रा॒त्र इत्य॑ष्ट—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। चत॑स्रः⁠। वै⁠। दिशः॑⁠। चत॑स्रः⁠। अ॒वा॒न्त॒र॒दि॒शा इत्य॑वान्तर—दि॒शाः⁠। दि॒ग्भ्य इति॑ दिक्—भ्यः⁠। ए॒व⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। ८ (५०) [८] त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। तेजः॑⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। जा॒य॒ते॒⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। रुच᳚म्⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। त्रि॒ण॒व इति॑ त्रि—न॒वः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। विजि॑त्या॒ इति॒ वि—जि॒त्यै॒⁠। त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒श इति॑ त्रयः—त्रि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। प॒ञ्च॒वि॒ꣳ॒श इति॑ पञ्च—वि॒ꣳ॒शः⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। प्र॒जाप॑ते॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तेः॒⁠। आप्त्यै᳚⁠। म॒हा॒व्र॒तवा॒निति॑ महाव्र॒त—वा॒न्⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। वि॒श्व॒जिदिति॑ विश्व—जित्⁠। सर्व॑पृष्ठ॒ इति॒ सर्व॑—पृ॒ष्ठः॒⁠। अ॒ति॒रा॒त्र इत्य॑ति—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। सर्व॑स्य⁠। अ॒भिजि॑त्या॒ इत्य॒भि—जि॒त्यै॒ [९] (दि॒ग्भ्य ए॒व ब्र॑ह्मवर्च॒समव॑ रुन्धे॒ ऽभिजि॑त्यै) ॥३॥
प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। अ॒सृ॒ज॒त॒⁠। ताः⁠। सृ॒ष्टाः⁠। ख्‍षुध᳚म्⁠। नीति॑⁠। आ॒य॒न्न्⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। न॒व॒रा॒त्रमिति॑ नव—रा॒त्रम्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। तम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। प्र॒जाभ्य॒ इति॑ प्र—जाभ्यः॑⁠। अ॒क॒ल्प॒त॒⁠। यर्‌हि॑⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। ख्‍षुध᳚म्⁠। नि॒गच्छे॑यु॒रिति॑ नि—गच्छे॑युः⁠। तर्‌हि॑⁠। न॒व॒रा॒त्रेणेति॑ नव—रा॒त्रेण॑⁠। य॒जे॒त॒⁠। इ॒मे⁠। हि⁠। वै⁠। ए॒तासा᳚म्⁠। लो॒काः⁠। अक्लृ॑प्ताः⁠। अथ॑⁠। ए॒ताः⁠। ख्‍षुध᳚म्⁠। नीति॑⁠। ग॒च्छ॒न्ति॒⁠। इ॒मान्⁠। ए॒व⁠। आ॒भ्यः॒⁠। लो॒कान्⁠। क॒ल्प॒य॒ति॒⁠। तान्⁠। कल्प॑मानान्⁠। प्र॒जाभ्य॒ इति॑ प्र—जाभ्यः॑⁠। अन्विति॑⁠। क॒ल्प॒ते॒⁠। कल्प॑न्ते⁠। १० (५०) [१०] अ॒स्मै॒⁠। इ॒मे⁠। लो॒काः⁠। ऊर्ज᳚म्⁠। प्र॒जास्विति॑ प्र—जासु॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। त्रि॒रा॒त्रेणेति॑ त्रि—रा॒त्रेण॑⁠। ए॒व⁠। इ॒मम्⁠। लो॒कम्⁠। क॒ल्प॒य॒ति॒⁠। त्रि॒रा॒त्रेणेति॑ त्रि—रा॒त्रेण॑⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। त्रि॒रा॒त्रेणेति॑ त्रि—रा॒त्रेण॑⁠। अ॒मुम्⁠। लो॒कम्⁠। यथा᳚⁠। गु॒णे⁠। गु॒णम्⁠। अ॒न्वस्य॒तीत्य॑नु—अस्य॑ति⁠। ए॒वम्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। लो॒के⁠। लो॒कम्⁠। अन्विति॑⁠। अ॒स्य॒ति॒⁠। धृत्यै᳚⁠। अशि॑थिलंभावा॒येत्यशि॑थिलं—भा॒वा॒य॒⁠। ज्योतिः॑⁠। गौः⁠। आयुः॑⁠। इति॑⁠। ज्ञा॒ताः⁠। स्तोमाः᳚⁠। भ॒व॒न्ति॒⁠। इ॒यम्⁠। वाव⁠। ज्योतिः॑⁠। अ॒न्तरि॑ख्‍षम्⁠। गौः⁠। अ॒सौ⁠। आयुः॑⁠। ए॒षु⁠। ए॒व⁠। लो॒केषु॑⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। ज्ञात्र᳚म्⁠। प्र॒जाना॒मिति॑ प्र—जाना᳚म्⁠। ११ (५०) [११] ग॒च्छ॒ति॒⁠। न॒व॒रा॒त्र इति॑ नव—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒भि॒पू॒र्वमित्य॑भि—पू॒र्वम्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। तेजः॑⁠। द॒धा॒ति॒⁠। यः⁠। ज्योगा॑मया॒वीति॒ ज्योक्—आ॒म॒या॒वी॒⁠। स्यात्⁠। सः⁠। न॒व॒रा॒त्रेणेति॑ नव—रा॒त्रेण॑⁠। य॒जे॒त॒⁠। प्रा॒णा इति॑ प्र—अ॒नाः⁠। हि⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। अधृ॑ताः⁠। अथ॑⁠। ए॒तस्य॑⁠। ज्योक्⁠। आ॒म॒य॒ति॒⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। दा॒धा॒र॒⁠। उ॒त⁠। यदि॑⁠। इ॒तासु॒रिती॒त—अ॒सुः॒⁠। भव॑ति⁠। जीव॑ति⁠। ए॒व [१२] (कल्प॑न्तेप्र॒जनां॒ त्रय॑स्त्रिꣳशच्च) ॥४॥
प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒का॒म॒य॒त॒⁠। प्रेति॑⁠। जा॒ये॒य॒⁠। इति॑⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। दश॑होतार॒मिति॒ दश॑—हो॒ता॒र॒म्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। तम्⁠। अ॒जु॒हो॒त्⁠। तेन॑⁠। द॒श॒रा॒त्रमिति॑ दश—रा॒त्रम्⁠। अ॒सृ॒ज॒त॒⁠। तेन॑⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒जा॒य॒त॒⁠। द॒श॒रा॒त्रायेति॑ दश—रा॒त्राय॑⁠। दी॒ख्‍षि॒ष्यमा॑णः⁠। दश॑होतार॒मिति॒ दश॑—हो॒ता॒र॒म्⁠। जु॒हु॒या॒त्⁠। दश॑हो॒त्रेति॒ दश॑—हो॒त्रा॒⁠। ए॒व⁠। द॒श॒रा॒त्रमिति॑ दश—रा॒त्रम्⁠। सृ॒ज॒ते॒⁠। तेन॑⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। प्रेति॑⁠। जा॒य॒ते॒⁠। वै॒रा॒जः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। य॒ज्ञः⁠। यत्⁠। द॒श॒रा॒त्र इति॑ दश—रा॒त्रः⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। यज॑ते⁠। वि॒राज॒मिति॑ वि—राज᳚म्⁠। ए॒व⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। प्रा॒जा॒प॒त्य इति॑ प्राजा—प॒त्यः⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। य॒ज्ञः⁠। यत्⁠। द॒श॒रा॒त्र इति॑ दश—रा॒त्रः⁠। १३ (५०) [१३] यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। यज॑ते⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। जा॒य॒ते॒⁠। इन्द्रः॑⁠। वै⁠। स॒दृङ्ङिति॑ स—दृङ्⁠। दे॒वता॑भिः⁠। आ॒सी॒त्⁠। सः⁠। न⁠। व्या॒वृत॒मिति॑ वि—आ॒वृत᳚म्⁠। अ॒ग॒च्छ॒त्⁠। सः⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। उपेति॑⁠। अ॒धा॒व॒त्⁠। तस्मै᳚⁠। ए॒तम्⁠। द॒श॒रा॒त्रमिति॑ दश—रा॒त्रम्⁠। प्रेति॑⁠। अ॒य॒च्छ॒त्⁠। तम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। सः⁠। अ॒न्याभिः॑⁠। दे॒वता॑भिः⁠। व्या॒वृत॒मिति॑ वि—आ॒वृत᳚म्⁠। अ॒ग॒च्छ॒त्⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। यज॑ते⁠। व्या॒वृत॒मिति॑ वि—आ॒वृत᳚म्⁠। ए॒व⁠। पा॒प्मना᳚⁠। भ्रातृ॑व्येण⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। त्रि॒क॒कुदिति॑ त्रि—क॒कुत्⁠। वै⁠। १४ (५०) [१४] ए॒षः⁠। य॒ज्ञः⁠। यत्⁠। द॒श॒रा॒त्र इति॑ दश—रा॒त्रः⁠। क॒कुत्⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। क॒कुत्⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। क॒कुत्⁠। त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒श इति॑ त्रयः—त्रि॒ꣳ॒शः⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। यज॑ते⁠। त्रि॒क॒कुदिति॑ त्रि—क॒कुत्⁠। ए॒व⁠। स॒मा॒नाना᳚म्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यज॑मानः⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। यज॑मानः⁠। ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। यज॑मानः⁠। त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒श इति॑ त्रयः—त्रि॒ꣳ॒शः⁠। पुरः॑⁠। इत॑राः⁠। अ॒भि॒च॒र्यमा॑ण॒ इत्य॑भि—च॒र्यमा॑णः⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। य॒जे॒त॒⁠। दे॒व॒पु॒रा इति॑ देव—पु॒राः⁠। ए॒व⁠। परीति॑⁠। ऊ॒ह॒ते॒⁠। तस्य॑⁠। न⁠। कुतः॑⁠। च॒न⁠। उ॒पा॒व्या॒ध इत्यु॑प—आ॒व्या॒धः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। न⁠। ए॒न॒म्⁠। अ॒भि॒चर॒न्नित्य॑भि—चर॑न्न्⁠। स्तृ॒णु॒ते॒⁠। दे॒वा॒सु॒रा इति॑ देव—अ॒सु॒राः⁠। सय्ँय॑त्ता॒ इति॒ सं—य॒त्ताः॒⁠। आ॒स॒न्न्⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। ए॒ताः⁠। १५ (५०) [१५] दे॒व॒पु॒रा इति॑ देव—पु॒राः⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। यत्⁠। द॒श॒रा॒त्र इति॑ दश—रा॒त्रः⁠। ताः⁠। परीति॑⁠। औ॒ह॒न्त॒⁠। तेषा᳚म्⁠। न⁠। कुतः॑⁠। च॒न⁠। उ॒पा॒व्या॒ध इत्यु॑प—आ॒व्या॒धः⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। ततः॑⁠। दे॒वाः⁠। अभ॑वन्न्⁠। परेति॑⁠। असु॑राः⁠। यः⁠। भ्रातृ॑व्यवा॒निति॒ भ्रातृ॑व्य—वा॒न्⁠। स्यात्⁠। सः⁠। द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ दश—रा॒त्रेण॑⁠। य॒जे॒त॒⁠। दे॒व॒पु॒रा इति॑ देव—पु॒राः⁠। ए॒व⁠। परीति॑⁠। ऊ॒ह॒ते॒⁠। तस्य॑⁠। न⁠। कुतः॑⁠। च॒न⁠। उ॒पा॒व्या॒ध इत्यु॑प—आ॒व्या॒धः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। भव॑ति⁠। आ॒त्मना᳚⁠। परेति॑⁠। अ॒स्य॒⁠। भ्रातृ॑व्यः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। स्तोमः॑⁠। स्तोम॑स्य⁠। उप॑स्तिः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। भ्रातृ॑व्यम्⁠। ए॒व⁠। उप॑स्तिम्⁠। कु॒रु॒ते॒⁠। जा॒मि⁠। वै⁠। १६ (५०) [१६] ए॒तत्⁠। कु॒र्व॒न्ति॒⁠। यत्⁠। ज्याया॑ꣳसम्⁠। स्तोम᳚म्⁠। उ॒पेत्येत्यु॑प—इत्य॑⁠। कनी॑याꣳसम्⁠। उ॒प॒यन्तीत्यु॑प—यन्ति॑⁠। यत्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म॒सा॒मानीत्य॑ग्निष्टोम—सा॒मानि॑⁠। अ॒वस्ता᳚त्⁠। च॒⁠। प॒रस्ता᳚त्⁠। च॒⁠। भव॑न्ति⁠। अजा॑मित्वा॒येत्यजा॑मि—त्वा॒य॒⁠। त्रि॒वृदिति॑ त्रि—वृत्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। अ॒ग्नि॒ष्टुदित्य॑ग्नि—स्तुत्⁠। आ॒ग्ने॒यीषु॑⁠। भ॒व॒ति॒⁠। तेजः॑⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। प॒ञ्च॒द॒श इति॑ पञ्च—द॒शः⁠। उ॒क्थ्यः॑⁠। ऐ॒न्द्रीषु॑⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। त्रि॒व॒दिति॑ त्रि—वृत्⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। वै॒श्व॒दे॒वीष्विति॑ वैश्व—दे॒वीषु॑⁠। पुष्टि᳚म्⁠। ए॒व⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धे॒⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। प्रा॒जा॒प॒त्यास्विति॑ प्राजा—प॒त्यासु॑⁠। ती॒व्र॒सो॒म इति॑ तीव्र—सो॒मः⁠। अ॒न्नाद्य॒स्येत्य॑न्न—अद्य॑स्य⁠। अव॑रुद्ध्या॒ इत्यव॑—रु॒द्ध्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। तेन॑⁠। जा॒य॒ते॒⁠। १७ (५०) [१७] ए॒क॒वि॒ꣳ॒श इत्ये॑क—वि॒ꣳ॒शः⁠। उ॒क्थ्यः॑⁠। सौ॒रीषु॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। रुच᳚म्⁠। ए॒व⁠। आ॒त्मन्न्⁠। ध॒त्ते॒⁠। स॒प्त॒द॒श इति॑ सप्त—द॒शः⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒म इत्य॑ग्नि—स्तो॒मः⁠। प्रा॒जा॒प॒त्यास्विति॑ प्राजा—प॒त्यासु॑⁠। उ॒प॒ह॒व्य॑ इत्यु॑प—ह॒व्यः॑⁠। उ॒प॒ह॒वमित्यु॑प—ह॒वम्⁠। ए॒व⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। त्रि॒ण॒वाविति॑ त्रि—न॒वौ⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒मावित्य॑ग्नि—स्तो॒मौ⁠। अ॒भितः॑⁠। ऐ॒न्द्रीषु॑⁠। विजि॑त्या॒ इति॒ वि—जि॒त्यै॒⁠। त्र॒य॒स्त्रि॒ꣳ॒श इति॑ त्रयः—त्रि॒ꣳ॒शः⁠। उ॒क्थ्यः॑⁠। वै॒श्व॒दे॒वीष्विति॑ वैश्व—दे॒वीषु॑⁠। प्रति॑ष्ठित्या॒ इति॒ प्रति॑—स्थि॒त्यै॒⁠। वि॒श्व॒जिदिति॑ विश्व—जित्⁠। सर्व॑पृष्ठ॒ इति॒ सर्व॑—पृ॒ष्ठः॒⁠। अ॒ति॒रा॒त्र इत्य॑ति—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। सर्व॑स्य⁠। अ॒भिजि॑त्या॒ इत्य॒भि—जि॒त्यै॒ [१८] (प्रा॒जा॒प॒त्यो वा ए॒ष य॒ज्ञो यद् द॑शरा॒त्र स्त्रि॑क॒कुद् वा ए॒ता वै जा॑यत॒ एक॑त्रिꣳशच्च) ॥५॥
ऋ॒तवः॑⁠। वै⁠। प्र॒जाका॑मा॒ इति॑ प्र॒जा—का॒माः॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। न⁠। अ॒वि॒न्द॒न्त॒⁠। ते⁠। अ॒का॒म॒य॒न्त॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। सृ॒जे॒म॒हि॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्धी॒म॒हि॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। वि॒न्दे॒म॒हि॒⁠। प्र॒जाव॑न्त॒ इति॑ प्र॒जा—व॒न्तः॒⁠। स्या॒म॒⁠। इति॑⁠। ते⁠। ए॒तम्⁠। ए॒का॒द॒श॒रा॒त्रमित्ये॑कादश—रा॒त्रम्⁠। अ॒प॒श्य॒न्न्⁠। तम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒न्न्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒न्त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। ते⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। अ॒सृ॒ज॒न्त॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। अवेति॑⁠। अ॒रु॒न्ध॒त॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। अ॒वि॒न्द॒न्त॒⁠। प्र॒जाव॑न्त॒ इति॑ प्र॒जा—व॒न्तः॒⁠। अ॒भ॒व॒न्न्⁠। ते⁠। ऋ॒तवः॑⁠। अ॒भ॒व॒न्न्⁠। तत्⁠। आ॒र्त॒वाना᳚म्⁠। आ॒र्त॒व॒त्वमित्या᳚र्तव—त्वम्⁠। ऋ॒तू॒नाम्⁠। वै⁠। ए॒ते⁠। पु॒त्राः⁠। तस्मा᳚त्⁠। १९ (५०) [१९] आ॒र्त॒वाः⁠। उ॒च्य॒न्ते॒⁠। ये⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वाꣳसः॑⁠। ए॒का॒द॒श॒रा॒त्रमित्ये॑कादश—रा॒त्रम्⁠। आस॑ते⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। ए॒व⁠। सृ॒ज॒न्ते॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्ध॒ते॒⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। वि॒न्द॒न्ते॒⁠। प्र॒जाव॑न्त॒ इति॑ प्र॒जा—व॒न्तः॒⁠। भ॒व॒न्ति॒⁠। ज्योतिः॑⁠। अ॒ति॒रा॒त्र इत्य॑ति—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। ज्योतिः॑⁠। ए॒व⁠। पु॒रस्ता᳚त्⁠। द॒ध॒ते॒⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। अनु॑ख्यात्या॒ इत्यनु॑—ख्या॒त्यै॒⁠। पृष्ठ्यः॑⁠। ष॒ड॒ह इति॑ षट्—अ॒हः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। षट्⁠। वै⁠। ऋ॒तवः॑⁠। षट्⁠। पृ॒ष्ठानि॑⁠। पृ॒ष्ठैः⁠। ए॒व⁠। ऋ॒तून्⁠। अ॒न्वारो॑ह॒न्तीत्य॑नु—आरो॑हन्ति⁠। ऋ॒तुभि॒रित्यृ॒तु—भिः॒⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒रमिति॑ सं—व॒थ्स॒रम्⁠। ते⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रे⁠। ए॒व⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। च॒तु॒र्वि॒ꣳ॒श इति॑ चतुः—वि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। चतु॑र्विꣳशत्यख्‍ष॒रेति॒ चतु॑विꣳशति—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। गा॒य॒त्री⁠। २० (५०) [२०] गा॒य॒त्रम्⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒समिति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒सम्⁠। गा॒य॒त्रि॒याम्⁠। ए॒व⁠। ब्र॒ह्म॒व॒र्च॒स इति॑ ब्रह्म—व॒र्च॒से⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। च॒तु॒श्च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श इति॑ चतुः—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। चतु॑श्चत्वारिꣳशदख्‍ष॒रेति॒ चतु॑श्चत्वारिꣳशत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। त्रि॒ष्टुक्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। त्रि॒ष्टुप्⁠। त्रि॒ष्टुभि॑⁠। ए॒व⁠। इ॒न्द्रि॒ये⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। अ॒ष्टा॒च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श इत्य॑ष्टा—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। अ॒ष्टाच॑त्वारिꣳशदख्‍ष॒रेत्य॒ष्टाच॑त्वारिꣳशत्—अ॒ख्‍ष॒रा॒⁠। जग॑ती⁠। जाग॑ताः⁠। प॒शवः॑⁠। जग॑त्याम्⁠। ए॒व⁠। प॒शुषु॑⁠। प्रतीति॑⁠। ति॒ष्ठ॒न्ति॒⁠। ए॒का॒द॒श॒रा॒त्र इत्ये॑कादश—रा॒त्रः⁠। भ॒व॒ति॒⁠। पञ्च॑⁠। वै⁠। ऋ॒तवः॑⁠। आ॒र्त॒वाः⁠। पञ्च॑⁠। ऋ॒तुषु॑⁠। ए॒व⁠। आ॒र्त॒वेषु॑⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रे⁠। प्र॒ति॒ष्ठायेति॑ प्रति—स्थाय॑⁠। प्र॒जामिति॑ प्र—जाम्⁠। अवेति॑⁠। रु॒न्ध॒ते॒⁠। अ॒ति॒रा॒त्रावित्य॑ति—रा॒त्रौ⁠। अ॒भितः॑⁠। भ॒व॒तः॒⁠। प्र॒जाया॒ इति॑ प्र—जायै᳚⁠। परि॑गृहीत्या॒ इति॒ परि॑—गृ॒ही॒त्यै॒ [२१] (तस्मा᳚द् गाय॒त्र्ये का॒न्नप॑ञ्चा॒शच्च॑) ॥६॥
ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒वाग्रा॒नित्यै᳚न्द्रवाय॒व—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒या॒त्⁠। यः⁠। का॒मये॑त⁠। य॒था॒पू॒र्वमिति॑ यथा—पू॒र्वम्⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। क॒ल्पे॒र॒न्न्⁠। इति॑⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। वै⁠। क्लृप्ति᳚म्⁠। अन्विति॑⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। क॒ल्प॒न्ते॒⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। अक्लृ॑प्तिम्⁠। अन्विति॑⁠। न⁠। क॒ल्प॒न्ते॒⁠। य॒था॒पू॒र्वमिति॑ यथा—पू॒र्वम्⁠। ए॒व⁠। प्र॒जा इति॑ प्र—जाः⁠। क॒ल्प॒य॒ति॒⁠। न⁠। ज्याया॑ꣳसम्⁠। कनी॑यान्⁠। अतीति॑⁠। क्रा॒म॒ति॒⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒वाग्रा॒नित्यै᳚न्द्रवाय॒व—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒या॒त्⁠। आ॒म॒या॒विनः॑⁠। प्रा॒णेनेति॑ प्र—अ॒नेन॑⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। वीति॑⁠। ऋ॒द्ध्य॒ते॒⁠। यस्य॑⁠। आ॒मय॑ति⁠। प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। प्रा॒णेनेति॑ प्र—अ॒नेन॑⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। समिति॑⁠। अ॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। मै॒त्रा॒व॒रु॒णाग्रा॒निति॑ मैत्रावरु॒ण—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒र॒न्न्⁠। येषा᳚म्⁠। दी॒ख्‍षि॒ताना᳚म्⁠। प्र॒मीये॒तेति॑ प्र—मीये॑त⁠। २२ (५०) [२२] प्रा॒णा॒पा॒नाभ्या॒मिति॑ प्राण—अ॒पा॒नाभ्या᳚म्⁠। वै⁠। ए॒ते⁠। वीति॑⁠। ऋ॒द्ध्य॒न्ते॒⁠। येषा᳚म्⁠। दी॒ख्‍षि॒ताना᳚म्⁠। प्र॒मीय॑त॒ इति॑ प्र—मीय॑ते⁠। प्रा॒णा॒पा॒नाविति॑ प्राण—अ॒पा॒नौ⁠। मि॒त्रावरु॑णा॒विति॑ मि॒त्रा—वरु॑णौ⁠। प्रा॒णा॒पा॒नाविति॑ प्राण—अ॒पा॒नौ⁠। ए॒व⁠। मु॒ख॒तः⁠। परीति॑⁠। ह॒र॒न्ते॒⁠। आ॒श्वि॒नाग्रा॒नित्या᳚श्वि॒न—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। आ॒नु॒जा॒व॒र इत्या॑नु—जा॒व॒रः⁠। अ॒श्विनौ᳚⁠। वै⁠। दे॒वाना᳚म्⁠। आ॒नु॒जा॒व॒रावित्या॑नु—जा॒व॒रौ⁠। प॒श्चा⁠। इ॒व॒⁠। अग्र᳚म्⁠। परीति॑⁠। ऐ॒ता॒म्⁠। अ॒श्विनौ᳚⁠। ए॒तस्य॑⁠। दे॒वता᳚⁠। यः⁠। आ॒नु॒जा॒व॒र इत्या॑नु—जा॒व॒रः⁠। तौ⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। अग्र᳚म्⁠। परीति॑⁠। न॒य॒तः॒⁠। शु॒क्राग्रा॒निति॑ शु॒क्र—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। ग॒तश्री॒रिति॑ ग॒त—श्रीः॒⁠। प्र॒ति॒ष्ठाका॑म॒ इति॑ प्रति॒ष्ठा—का॒मः॒⁠। अ॒सौ⁠। वै⁠। आ॒दि॒त्यः⁠। शु॒क्रः⁠। ए॒षः⁠। अन्तः॑⁠। अन्त᳚म्⁠। म॒नु॒ष्यः॑⁠। २३ (५०) [२३] श्रि॒यै⁠। ग॒त्वा⁠। नीति॑⁠। व॒र्त॒ते॒⁠। अन्ता᳚त्⁠। ए॒व⁠। अन्त᳚म्⁠। एति॑⁠। र॒भ॒ते॒⁠। न⁠। ततः॑⁠। पापी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। म॒न्थ्य॑ग्रा॒निति॑ म॒न्थि—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। अ॒भि॒चर॒न्नित्य॑भि—चर॑न्न्⁠। आ॒र्त॒पा॒त्रमित्या᳚र्त—पा॒त्रम्⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। यत्⁠। म॒न्थि॒पा॒त्रमिति॑ मन्थि—पा॒त्रम्⁠। मृ॒त्युना᳚⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। ग्रा॒ह॒य॒ति॒⁠। ता॒जक्⁠। आर्ति᳚म्⁠। एति॑⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। आ॒ग्र॒य॒णाग्रा॒नित्या᳚ग्रय॒ण—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। यस्य॑⁠। पि॒ता⁠। पि॒ता॒म॒हः⁠। पुण्यः॑⁠। स्यात्⁠। अथ॑⁠। तत्⁠। न⁠। प्रा॒प्नु॒यादिति॑ प्र—आ॒प्नु॒यात्⁠। वा॒चा⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। इ॒न्द्रि॒येण॑⁠। वीति॑⁠। ऋ॒द्ध्य॒ते॒⁠। यस्य॑⁠। पि॒ता⁠। पि॒ता॒म॒हः⁠। पुण्यः॑⁠। २४ (५०) [२४] भव॑ति⁠। अथ॑⁠। तत्⁠। न⁠। प्रा॒प्नोतीति॑ प्र—आ॒प्नोति॑⁠। उरः॑⁠। इ॒व॒⁠। ए॒तत्⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। वाक्⁠। इ॒व॒⁠। यत्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। वा॒चा⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। इ॒न्द्रि॒येण॑⁠। समिति॑⁠। अ॒र्द्ध॒य॒ति॒⁠। न⁠। ततः॑⁠। पापी॑यान्⁠। भ॒व॒ति॒⁠। उ॒क्थ्या᳚ग्रा॒नित्यु॒क्थ्य॑—अ॒ग्रा॒न्⁠। गृ॒ह्णी॒त॒⁠। अ॒भि॒च॒र्यमा॑ण॒ इत्य॑भि—च॒र्यमा॑णः⁠। सर्वे॑षाम्⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। पात्रा॑णाम्⁠। इ॒न्द्रि॒यम्⁠। यत्⁠। उ॒क्थ्य॒पा॒त्रमित्यु॑क्थ्य—पा॒त्रम्⁠। सर्वे॑ण⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। इ॒न्द्रि॒येण॑⁠। अति॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ङ्क्ते॒⁠। सर॑स्वति⁠। अ॒भीति॑⁠। नः॒⁠। ने॒षि॒⁠। वस्यः॑⁠। इति॑⁠। पु॒रो॒रुच॒मिति॑ पुरः—रुच᳚म्⁠। कु॒र्या॒त्⁠। वाक्⁠। वै⁠। २५ (५०) [२५] सर॑स्वती⁠। वा॒चा⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। अति॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ङ्क्ते॒⁠। मा⁠। त्वत्⁠। ख्‍षेत्रा॑णि⁠। अर॑णानि⁠। ग॒न्म॒⁠। इति॑⁠। आ॒ह॒⁠। मृ॒त्योः⁠। वै⁠। ख्‍षेत्रा॑णि⁠। अर॑णानि⁠। तेन॑⁠। ए॒व⁠। मृ॒त्योः⁠। ख्‍षेत्रा॑णि⁠। न⁠। ग॒च्छ॒ति॒⁠। पू॒र्णान्⁠। ग्रहा॑न्⁠। गृ॒ह्णी॒या॒त्⁠। आ॒म॒या॒विनः॑⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। वै⁠। ए॒तस्य॑⁠। शुक्⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। यस्य॑⁠। आ॒मय॑ति⁠। प्रा॒णा इति॑ प्र—अ॒नाः⁠। ग्रहाः᳚⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। ए॒व⁠। अ॒स्य॒⁠। शु॒चः⁠। मु॒ञ्च॒ति॒⁠। उ॒त⁠। यदि॑⁠। इ॒तासु॒रिती॒त—अ॒सुः॒⁠। भव॑ति⁠। जीव॑ति⁠। ए॒व⁠। पू॒र्णान्⁠। ग्रहा॑न्⁠। गृ॒ह्णी॒या॒त्⁠। यर्‌हि॑⁠। प॒र्जन्यः॑⁠। न⁠। वर्‌ष᳚त्⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। वै⁠। ए॒तर्‌हि॑⁠। प्र॒जाना॒मिति॑ प्र—जाना᳚म्⁠। शुक्⁠। ऋ॒च्छ॒ति॒⁠। यर्‌हि॑⁠। प॒र्जन्यः॑⁠। न⁠। वर्‌ष॑ति⁠। प्रा॒णा इति॑ प्र—अ॒नाः⁠। ग्रहाः᳚⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। ए॒व⁠। प्र॒जाना॒मिति॑ प्र—जाना᳚म्⁠। शु॒चः⁠। मु॒ञ्च॒ति॒⁠। ता॒जक्⁠। प्रेति॑⁠। व॒र्‌ष॒ति॒ [२६] (प्र॒मीये॑त मनु॒ष्य॑ ऋद्ध्यते॒ यस्य॑ पि॒ता पि॑ताम॒हः पुण्यो॒वाग्वाए॒व पू॒र्णान् ग्रहा॒न्पञ्च॑विꣳशतिश्च) ॥७॥
गा॒य॒त्रः⁠। वै⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गा॒य॒त्रम्⁠। प्रा॒य॒णीय॒मिति॑ प्र—अ॒य॒नीय᳚म्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। प्रा॒य॒णीय॒ इति॑ प्र—अ॒य॒नीये᳚⁠। अह॑न्न्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। त्रैष्टु॑भः⁠। वै⁠। शु॒क्रः⁠। त्रैष्टु॑भम्⁠। द्वि॒तीय᳚म्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। द्वि॒तीये᳚⁠। अह॑न्न्⁠। शु॒क्रः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। जाग॑तः⁠। वै⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। जाग॑तम्⁠। तृ॒तीय᳚म्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। तृ॒तीये᳚⁠। अह॑न्न्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। २७ (५०) [२७] य॒ज्ञम्⁠। आ॒प॒त्⁠। यत्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। आ॒प्नोति॑⁠। यत्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। श्वः⁠। गृ॒ह्यते᳚⁠। यत्र॑⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञम्⁠। अदृ॑शन्न्⁠। ततः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। पुनः॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ङ्क्ते॒⁠। जग॑न्मुख॒ इति॒ जग॑त्—मु॒खः॒⁠। वै⁠। द्वि॒तीयः॑⁠। त्रि॒रा॒त्र इति॑ त्रि—रा॒त्रः⁠। जाग॑तः⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। यत्⁠। च॒तु॒र्थे⁠। अह॑न्न्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। गृ॒ह्यते᳚⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। स्वम्⁠। ए॒व⁠। छन्दः॑⁠। अन्विति॑⁠। प॒र्याव॑र्तन्त॒ इति॑ परि—आव॑र्तन्ते⁠। राथ॑न्तर॒ इति॒ राथं᳚—त॒रः॒⁠। वै⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। राथ॑न्तर॒मिति॒ राथं᳚—त॒र॒म्⁠। प॒ञ्च॒मम्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। प॒ञ्च॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। २८ (५०) [२८] ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। बार्‌ह॑तः⁠। वै⁠। शु॒क्रः⁠। बार्‌ह॑तम्⁠। ष॒ष्ठम्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। ष॒ष्ठे⁠। अह॑न्न्⁠। शु॒क्रः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। ए॒तत्⁠। वै⁠। द्वि॒तीय᳚म्⁠। य॒ज्ञम्⁠। आ॒प॒त्⁠। यत्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। आ॒प्नोति॑⁠। यत्⁠। शु॒क्रः⁠। श्वः⁠। गृ॒ह्यते᳚⁠। यत्र॑⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञम्⁠। अदृ॑शन्न्⁠। ततः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। पुनः॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ङ्क्ते॒⁠। त्रि॒ष्टुङ्मु॑ख॒ इति॑ त्रि॒ष्टुक्—मु॒खः॒⁠। वै⁠। तृ॒तीयः॑⁠। त्रि॒रा॒त्र इति॑ त्रि—रा॒त्रः⁠। त्रैष्टु॑भः⁠। २९ (५०) [२९] शु॒क्रः⁠। यत्⁠। स॒प्त॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। शु॒क्रः⁠। गृ॒ह्यते᳚⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। स्वम्⁠। ए॒व⁠। छन्दः॑⁠। अन्विति॑⁠। प॒र्याव॑र्तन्त॒ इति॑ परि—आव॑र्तन्ते⁠। वाक्⁠। वै⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। वाक्⁠। अ॒ष्ट॒मम्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒ष्ट॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। वै⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। प्रा॒ण इति॑ प्र—अ॒नः⁠। न॒व॒मम्⁠। अहः॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। न॒व॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। स्वे⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। ए॒तत्⁠। ३० (५०) [३०] वै⁠। तृ॒तीय᳚म्⁠। य॒ज्ञम्⁠। आ॒प॒त्⁠। यत्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। आ॒प्नोति॑⁠। यत्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। श्वः⁠। गृ॒ह्यते᳚⁠। यत्र॑⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञम्⁠। अदृ॑शन्न्⁠। ततः॑⁠। ए॒व⁠। ए॒न॒म्⁠। पुनः॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ङ्क्ते॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। स्वम्⁠। ए॒व⁠। छन्दः॑⁠। अन्विति॑⁠। प॒र्याव॑र्तन्त॒ इति॑ परि—आव॑र्तन्ते⁠। प॒थः⁠। वै⁠। ए॒ते⁠। अधीति॑⁠। अप॑थेन⁠। य॒न्ति॒⁠। ये⁠। अ॒न्येन॑⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒वादित्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वात्⁠। प्र॒ति॒पद्य॑न्त॒ इति॑ प्रति—पद्य॑न्ते⁠। अन्तः॑⁠। खलु॑⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। यत्⁠। द॒श॒मम्⁠। अहः॑⁠। द॒श॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। ३१ (५०) [३१] ए॒व⁠। अन्त᳚म्⁠। ग॒त्वा⁠। अप॑थात्⁠। पन्था᳚म्⁠। अपीति॑⁠। य॒न्ति॒⁠। अथो॒ इति॑⁠। यथा᳚⁠। वही॑यसा⁠। प्र॒ति॒सार॒मिति॑ प्रति—सार᳚म्⁠। वह॑न्ति⁠। ता॒दृक्⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। अ॒न्यः⁠। अ॒न्यस्य॑⁠। लो॒कम्⁠। अ॒भीति॑⁠। अ॒द्ध्या॒य॒न्न्⁠। तानि॑⁠। ए॒तेन॑⁠। ए॒व⁠। दे॒वाः⁠। वीति॑⁠। अ॒वा॒ह॒य॒न्न्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒वस्येत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वस्य॑⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। आ॒यत॑न॒मित्या᳚—यत॑नम्⁠। यत्⁠। च॒तु॒र्थम्⁠। अहः॑⁠। तस्मि॑न्न्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। आ॒ग्र॒य॒णस्य॑⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। न॒व॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। शु॒क्रस्य॑⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। आ॒यत॑न॒मित्या᳚—यत॑नम्⁠। यत्⁠। प॒ञ्च॒मम्⁠। ३२ (५०) [३२] अहः॑⁠। तस्मि॑न्न्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒व इत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। ऐ॒न्द्र॒वा॒य॒वस्येत्यै᳚न्द्र—वा॒य॒वस्य॑⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। स॒प्त॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। शु॒क्रः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। आ॒ग्र॒य॒णस्य॑⁠। वै⁠। ए॒तत्⁠। आ॒यत॑न॒मित्या᳚—यत॑नम्⁠। यत्⁠। ष॒ष्ठम्⁠। अहः॑⁠। तस्मि॑न्न्⁠। शु॒क्रः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। शु॒क्रस्य॑⁠। आ॒यत॑न॒ इत्या᳚—यत॑ने⁠। अ॒ष्ट॒मे⁠। अह॑न्न्⁠। आ॒ग्र॒य॒णः⁠। गृ॒ह्य॒ते॒⁠। छन्दा॑ꣳसि⁠। ए॒व⁠। तत्⁠। वीति॑⁠। वा॒ह॒य॒ति॒⁠। प्रेति॑⁠। वस्य॑सः⁠। वि॒वा॒हमिति॑ वि—वा॒हम्⁠। आ॒प्नो॒ति॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। अथो॒ इति॑⁠। दे॒वता᳚भ्यः⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञे⁠। स॒व्ँविद॒मिति॑ सं—विद᳚म्⁠। द॒धा॒ति॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। इ॒दम्⁠। अ॒न्यः⁠। अ॒न्यस्मै᳚⁠। द॒दा॒ति॒ [३३] (ए॒तद्वै प॑ञ्च॒मेऽह॒न् त्रैष्टु॑भ ए॒तद् गृ॑ह्यते य॒ज्ञस्य॑ पञ्च॒म म॒न्यस्मा॒ एक॑ञ्च) ॥८॥
प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒का॒म॒य॒त॒⁠। प्रेति॑⁠। जा॒ये॒य॒⁠। इति॑⁠। सः⁠। ए॒तम्⁠। द्वा॒द॒श॒रा॒त्रमिति॑ द्वादश—रा॒त्रम्⁠। अ॒प॒श्य॒त्⁠। तम्⁠। एति॑⁠। अ॒ह॒र॒त्⁠। तेन॑⁠। अ॒य॒ज॒त॒⁠। ततः॑⁠। वै⁠। सः⁠। प्रेति॑⁠। अ॒जा॒य॒त॒⁠। यः⁠। का॒मये॑त⁠। प्रेति॑⁠। जा॒ये॒य॒⁠। इति॑⁠। सः⁠। द्वा॒द॒श॒रा॒त्रेणेति॑ द्वादश—रा॒त्रेण॑⁠। य॒जे॒त॒⁠। प्रेति॑⁠। ए॒व⁠। जा॒य॒ते॒⁠। ब्र॒ह्म॒वा॒दिन॒ इति॑ ब्रह्म—वा॒दिनः॑⁠। व॒द॒न्ति॒⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒मप्रा॑यणा॒ इत्य॑ग्निष्टो॒म—प्रा॒य॒णाः॒⁠। य॒ज्ञाः⁠। अथ॑⁠। कस्मा᳚त्⁠। अ॒ति॒रा॒त्र इत्य॑ति—रा॒त्रः⁠। पूर्वः॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ज्य॒ते॒⁠। इति॑⁠। चख्‍षु॑षी॒ इति॑⁠। वै⁠। ए॒ते इति॑⁠। य॒ज्ञस्य॑⁠। यत्⁠। अ॒ति॒रा॒त्रावित्य॑ति—रा॒त्रौ⁠। क॒नीनि॑के॒ इति॑⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒मावित्य॑ग्नि—स्तो॒मौ⁠। यत्⁠। ३४ (५०) [३४] अ॒ग्नि॒ष्टो॒ममित्य॑ग्नि—स्तो॒मम्⁠। पूर्व᳚म्⁠। प्र॒यु॒ञ्जी॒रन्निति॑ प्र—यु॒ञ्जी॒रन्न्⁠। ब॒हि॒र्द्धेति॑ बहिः—धा⁠। क॒नीनि॑के॒ इति॑⁠। द॒द्ध्युः॒⁠। तस्मा᳚त्⁠। अ॒ति॒रा॒त्र इत्य॑ति—रा॒त्रः⁠। पूर्वः॑⁠। प्रेति॑⁠। यु॒ज्य॒ते॒⁠। चख्‍षु॑षी॒ इति॑⁠। ए॒व⁠। य॒ज्ञे⁠। धि॒त्वा⁠। म॒द्ध्य॒तः⁠। क॒नीनि॑के॒ इति॑⁠। प्रतीति॑⁠। द॒ध॒ति॒⁠। यः⁠। वै⁠। गा॒य॒त्रीम्⁠। ज्योतिः॑पख्‍षा॒मिति॒ ज्योतिः॑—प॒ख्‍षा॒म्⁠। वेद॑⁠। ज्योति॑षा⁠। भा॒सा⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। ए॒ति॒⁠। यौ⁠। अ॒ग्नि॒ष्टो॒मावित्य॑ग्नि—स्तो॒मौ⁠। तौ⁠। प॒ख्‍षौ⁠। ये⁠। अन्त॑रे⁠। अ॒ष्टौ⁠। उ॒क्थ्याः᳚⁠। सः⁠। आ॒त्मा⁠। ए॒षा⁠। वै⁠। गा॒य॒त्री⁠। ज्योतिः॑प॒ख्‍षेति॒ ज्योतिः॑—प॒ख्‍षा॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑⁠। ज्योति॑षा⁠। भा॒सा⁠। सु॒व॒र्गमिति॑ सुवः—गम्⁠। लो॒कम्⁠। ३५ (५०) [३५] ए॒ति॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। द्वा॒द॒श॒धेति॑ द्वादश—धा⁠। विहि॑त॒ इति॒ वि—हि॒तः॒⁠। यत्⁠। द्वा॒द॒श॒रा॒त्र इति॑ द्वादश—रा॒त्रः⁠। यौ⁠। अ॒ति॒रा॒त्रावित्य॑ति—रा॒त्रौ⁠। तौ⁠। प॒ख्‍षौ⁠। ये⁠। अन्त॑रे⁠। अ॒ष्टौ⁠। उ॒क्थ्याः᳚⁠। सः⁠। आ॒त्मा⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वाव⁠। ए॒षः⁠। सन्न्⁠। सत्⁠। ह॒⁠। वै⁠। स॒त्रेण॑⁠। स्पृ॒णो॒ति॒⁠। प्रा॒णा इति॑ प्र—अ॒नाः⁠। वै⁠। सत्⁠। प्रा॒णानिति॑ प्र—अ॒नान्⁠। ए॒व⁠। स्पृ॒णो॒ति॒⁠। सर्वा॑साम्⁠। वै⁠। ए॒ते⁠। प्र॒जाना॒मिति॑ प्र—जाना᳚म्⁠। प्रा॒णैरिति॑ प्र—अ॒नैः⁠। आ॒स॒ते॒⁠। ये⁠। स॒त्रम्⁠। आस॑ते⁠। तस्मा᳚त्⁠। पृ॒च्छ॒न्ति॒⁠। किम्⁠। ए॒ते⁠। स॒त्रिणः॑⁠। इति॑⁠। प्रि॒यः⁠। प्र॒जाना॒मिति॑ प्र—जाना᳚म्⁠। उत्थि॑त॒ इत्युत्—स्थि॒तः॒⁠। भ॒व॒ति॒⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वेद॑ [३६] (अ॒ग्नि॒ष्टो॒मौ यथ् सु॑व॒र्गल्ँलो॒कं प्रि॒यः प्र॒जानां॒ पञ्च॑ च) ॥९॥
न⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। अ॒न्यतो॑वैश्वानर॒ इत्य॒न्यतः॑—वै॒श्वा॒न॒रः॒⁠। सु॒व॒र्गायेति॑ सुवः—गाय॑⁠। लो॒काय॑⁠। प्रेति॑⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। ऊ॒र्द्ध्वः⁠। ह॒⁠। वै⁠। ए॒षः⁠। आत॑त॒ इत्या—त॒तः॒⁠। आ॒सी॒त्⁠। ते⁠। दे॒वाः⁠। ए॒तम्⁠। वै॒श्वा॒न॒रम्⁠। परीति॑⁠। औ॒ह॒न्न्⁠। सु॒व॒र्गस्येति॑ सुवः—गस्य॑⁠। लो॒कस्य॑⁠। प्रभू᳚त्या॒ इति॒ प्र—भू॒त्यै॒⁠। ऋ॒तवः॑⁠। वै⁠। ए॒तेन॑⁠। प्र॒जाप॑ति॒मिति॑ प्र॒जा—प॒ति॒म्⁠। अ॒या॒ज॒य॒न्न्⁠। तेषु॑⁠। आ॒र्द्ध्नो॒त्⁠। अधीति॑⁠। तत्⁠। ऋ॒द्ध्नोति॑⁠। ह॒⁠। वै⁠। ऋ॒त्विख्‍षु॑⁠। यः⁠। ए॒वम्⁠। वि॒द्वान्⁠। द्वा॒द॒शा॒हेनेति॑ द्वादश—अ॒हेन॑⁠। यज॑ते⁠। ते⁠। अ॒स्मि॒न्न्⁠। ऐ॒च्छ॒न्त॒⁠। सः⁠। रस᳚म्⁠। अह॑⁠। व॒स॒न्ताय॑⁠। प्रेति॑⁠। अय॑च्छत्⁠। ३७ (५०) [३७] यव᳚म्⁠। ग्री॒ष्माय॑⁠। ओष॑धीः⁠। व॒र्॒‌षाभ्यः॑⁠। व्री॒हीन्⁠। श॒रदे᳚⁠। मा॒ष॒ति॒लाविति॑ माष—ति॒लौ⁠। हे॒म॒न्त॒शि॒शि॒राभ्या॒मिति॑ हेमन्त—शि॒शि॒राभ्या᳚म्⁠। तेन॑⁠। इन्द्र᳚म्⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। अ॒या॒ज॒य॒त्⁠। ततः॑⁠। वै⁠। इन्द्रः॑⁠। इन्द्रः॑⁠। अ॒भ॒व॒त्⁠। तस्मा᳚त्⁠। आ॒हुः॒⁠। आ॒नु॒जा॒व॒रस्येत्या॑नु—जा॒व॒रस्य॑⁠। य॒ज्ञः⁠। इति॑⁠। सः⁠। हि⁠। ए॒तेन॑⁠। अग्रे᳚⁠। अय॑जत⁠। ए॒षः⁠। ह॒⁠। वै⁠। कु॒णप᳚म्⁠। अ॒त्ति॒⁠। यः⁠। स॒त्रे⁠। प्र॒ति॒गृ॒ह्णातीति॑ प्रति—गृ॒ह्णाति॑⁠। पु॒रु॒ष॒कु॒ण॒पमिति॑ पुरुष—कु॒ण॒पम्⁠। अ॒श्व॒कु॒ण॒पमित्य॑श्व—कु॒ण॒पम्⁠। गौः⁠। वै⁠। अन्न᳚म्⁠। येन॑⁠। पात्रे॑ण⁠। अन्न᳚म्⁠। बिभ्र॑ति⁠। यत्⁠। तत्⁠। न⁠। नि॒र्णेनि॑ज॒तीति॑ निः—नेनि॑जति⁠। ततः॑⁠। अधीति॑⁠। ३८ (५०) [३८] मल᳚म्⁠। जा॒य॒ते॒⁠। एकः॑⁠। ए॒व⁠। य॒जे॒त॒⁠। एकः॑⁠। हि⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। आर्द्ध्नो᳚त्⁠। द्वाद॑श⁠। रात्रीः᳚⁠। दी॒ख्‍षि॒तः⁠। स्या॒त्⁠। द्वाद॑श⁠। मासाः᳚⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। स॒व्ँव॒थ्स॒र इति॑ सं—व॒थ्स॒रः⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। प्र॒जाप॑ति॒रिति॑ प्र॒जा—प॒तिः॒⁠। वाव⁠। ए॒षः⁠। ए॒षः⁠। ह॒⁠। तु⁠। वै⁠। जा॒य॒ते॒⁠। यः⁠। तप॑सः⁠। अधीति॑⁠। जाय॑ते⁠। च॒तु॒र्द्धेति॑ चतुः—धा⁠। वै⁠। ए॒ताः⁠। ति॒स्रस्ति॑स्र॒ इति॑ ति॒स्रः—ति॒स्रः॒⁠। रात्र॑यः⁠। यत्⁠। द्वाद॑श⁠। उ॒प॒सद॒ इत्यु॑प—सदः॑⁠। याः⁠। प्र॒थ॒माः⁠। य॒ज्ञम्⁠। ताभिः॑⁠। समिति॑⁠। भ॒र॒ति॒⁠। याः⁠। द्वि॒तीयाः᳚⁠। य॒ज्ञम्⁠। ताभिः॑⁠। एति॑⁠। र॒भ॒ते॒⁠। ३९ (५०) [३९] याः⁠। तृ॒तीयाः᳚⁠। पात्रा॑णि⁠। ताभिः॑⁠। निरिति॑⁠। ने॒नि॒क्ते॒⁠। याः⁠। च॒तु॒र्थीः⁠। अपीति॑⁠। ताभिः॑⁠। आ॒त्मान᳚म्⁠। अ॒न्त॒र॒तः⁠। शु॒न्ध॒ते॒⁠। यः⁠। वै⁠। अ॒स्य॒⁠। प॒शुम्⁠। अत्ति॑⁠। मा॒ꣳ॒सम्⁠। सः⁠। अ॒त्ति॒⁠। यः⁠। पु॒रो॒डाश᳚म्⁠। म॒स्तिष्क᳚म्⁠। सः⁠। यः⁠। प॒रि॒वा॒पमिति॑ परि—वा॒पम्⁠। पुरी॑षम्⁠। सः⁠। यः⁠। आज्य᳚म्⁠। म॒ज्जान᳚म्⁠। सः⁠। यः⁠। सोम᳚म्⁠। स्वेद᳚म्⁠। सः⁠। अपीति॑⁠। ह॒⁠। वै⁠। अ॒स्य॒⁠। शी॒र्॒‌ष॒ण्याः᳚⁠। नि॒ष्पद॒ इति॑ निः—पदः॑⁠। प्रतीति॑⁠। गृ॒ह्णा॒ति॒⁠। यः⁠। द्वा॒द॒शा॒ह इति॑ द्वादश—अ॒हे⁠। प्र॒ति॒गृ॒ह्णातीति॑ प्रति—गृ॒ह्णाति॑⁠। तस्मा᳚त्⁠। द्वा॒द॒शा॒हेनेति॑ द्वादश—अ॒हेन॑⁠। न⁠। याज्य᳚म्⁠। पा॒प्मनः॑⁠। व्यावृ॑त्त्या॒ इति॑ वि—आवृ॑त्त्यै [४०] (अय॑च्छ॒ दधि॑ रभते द्वादशा॒हेन॑ च॒त्वारि॑ च) ॥१०॥
एक॑स्मै⁠। स्वाहा᳚⁠। द्वाभ्या᳚म्⁠। स्वाहा᳚⁠। त्रि॒भ्य इति॑ त्रि—भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒तुर्भ्य॒ इति॑ च॒तुः—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्चभ्य॒ इति॑ प॒ञ्च—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। ष॒ड्भ्य इति॑ षट्—भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्तभ्य॒ इति॑ स॒प्त—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टा॒भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। न॒वभ्य॒ इति॑ न॒व—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। द॒शभ्य॒ इति॑ द॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। ए॒का॒द॒शभ्य॒ इत्ये॑काद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। द्वा॒द॒शभ्य॒ इति॑ द्वाद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। त्र॒यो॒द॒शभ्य॒ इति॑ त्रयोद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒तु॒र्द॒शभ्य॒ इति॑ चतुर्द॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्च॒द॒शभ्य॒ इति॑ पञ्चद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। षो॒ड॒शभ्य॒ इति॑ षोड॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्त॒द॒शभ्य॒ इति॑ सप्तद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टा॒द॒शभ्य॒ इत्य॑ष्टाद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑विꣳशत्या॒ इति॒ नव॑—वि॒ꣳ॒श॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑चत्वारिꣳशत॒ इति॒ नव॑—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श॒ते॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। ष॒ष्ट्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑षष्ट्या॒ इति॒ नव॑—ष॒ष्ट्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। अ॒शी॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नवा॑शीत्या॒ इति॒ नव॑—अ॒शी॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। द्वाभ्या᳚म्⁠। श॒ताभ्या᳚म्⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४१] (नव॑चत्वारिꣳशते॒ स्वाहैका॒न्नैक॑विꣳशतिश्च) ॥११॥
एक॑स्मै⁠। स्वाहा᳚⁠। त्रि॒भ्य इति॑ त्रि—भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्चभ्य॒ इति॑ प॒ञ्च—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्तभ्य॒ इति॑ स॒प्त—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। न॒वभ्य॒ इति॑ न॒व—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। ए॒का॒द॒शभ्य॒ इत्ये॑काद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। त्र॒यो॒द॒शभ्य॒ इति॑ त्रयोद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्च॒द॒शभ्य॒ इति॑ पञ्चद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्त॒द॒शभ्य॒ इति॑ सप्तद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑विꣳशत्या॒ इति॒ नव॑—वि॒ꣳ॒श॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑चत्वारिꣳशत॒ इति॒ नव॑—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श॒ते॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। ष॒ष्ट्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑षष्ट्या॒ इति॒ नव॑—ष॒ष्ट्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। अ॒शी॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नवा॑शीत्या॒ इति॒ नव॑—अ॒शी॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४२] (एक॑स्मै त्रि॒भ्यः प॑ञ्चा॒शत्) ॥१२॥
द्वाभ्या᳚म्⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒तुर्भ्य॒ इति॑ च॒तुः—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। ष॒ड्भ्य इति॑ षट्—भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टा॒भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। द॒शभ्य॒ इति॑ द॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। द्वा॒द॒शभ्य॒ इति॑ द्वाद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒तु॒र्द॒शभ्य॒ इति॑ चतुर्द॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। षो॒ड॒शभ्य॒ इति॑ षोड॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टा॒द॒शभ्य॒ इत्य॑ष्टाद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टान॑वत्या॒ इत्य॒ष्टा—न॒व॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४३] (द्वाभ्या॑म॒ष्टान॑वत्यै॒ षड्वि॑ꣳशतिः) ॥१३॥
त्रि॒भ्य इति॑ त्रि—भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्चभ्य॒ इति॑ प॒ञ्च—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्तभ्य॒ इति॑ स॒प्त—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। न॒वभ्य॒ इति॑ न॒व—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। ए॒का॒द॒शभ्य॒ इत्ये॑काद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। त्र॒यो॒द॒शभ्य॒ इति॑ त्रयोद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्च॒द॒शभ्य॒ इति॑ पञ्चद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्त॒द॒शभ्य॒ इति॑ सप्तद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑विꣳशत्या॒ इति॒ नव॑—वि॒ꣳ॒श॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑चत्वारिꣳशत॒ इति॒ नव॑—च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒श॒ते॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। ष॒ष्ट्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नव॑षष्ट्या॒ इति॒ नव॑—ष॒ष्ट्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। अ॒शी॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। नवा॑शीत्या॒ इति॒ नव॑—अ॒शी॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। एका᳚त्⁠। न⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४४] (त्रि॒भ्यो᳚ ऽष्टाचत्वारि॒ꣳ॒शत्) ॥१४॥
च॒तुर्भ्य॒ इति॑ च॒तुः—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टा॒भ्यः⁠। स्वाहा᳚⁠। द्वा॒द॒शभ्य॒ इति॑ द्वाद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। षो॒ड॒शभ्य॒ इति॑ षोड॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। षण्ण॑वत्या॒ इति॒ षट्—न॒व॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४५] (च॒तुर्भ्यः॒ षण्ण॑वत्यै॒ षोड॑श) ॥१५॥
प॒ञ्चभ्य॒ इति॑ प॒ञ्च—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। द॒शभ्य॒ इति॑ द॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्च॒द॒शभ्य॒ इति॑ पञ्चद॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। पञ्च॑नवत्या॒ इति॒ पञ्च॑—न॒व॒त्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४६] (प॒ञ्चभ्यः॒ पञ्च॑नवत्यै॒ चतु॑र्दश) ॥१६॥
द॒शभ्य॒ इति॑ द॒श—भ्यः॒⁠। स्वाहा᳚⁠। वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। त्रि॒ꣳ॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्चा॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ष॒ष्ट्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्त॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒शी॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। न॒व॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४७] (द॒शभ्यो॒ द्वावि॑ꣳशतिः) ॥१७॥
वि॒ꣳ॒श॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒त्वा॒रि॒ꣳ॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। ष॒ष्ट्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒शी॒त्यै⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४८] (वि॒ꣳ॒श॒त्यै द्वाद॑श) ॥१८॥
प॒ञ्चा॒शते᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। द्वाभ्या᳚म्⁠। श॒ताभ्या᳚म्⁠। स्वाहा᳚⁠। त्रि॒भ्य इति॑ त्रि—भ्यः⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। च॒तुर्भ्य॒ इति॑ च॒तुः—भ्यः॒⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒ञ्चभ्य॒ इति॑ प॒ञ्च—भ्यः॒⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। ष॒ड्भ्य इति॑ षट्—भ्यः⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒प्तभ्य॒ इति॑ स॒प्त—भ्यः॒⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒ष्टा॒भ्यः⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। न॒वभ्य॒ इति॑ न॒व—भ्यः॒⁠। श॒तेभ्यः॑⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒हस्रा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [४९] (प॒ञ्चा॒शते॒ द्वात्रि॑ꣳशत्) ॥१९॥
श॒ताय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒हस्रा॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। अ॒युता॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। नि॒युता॒येति॑ नि—युता॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। प्र॒युता॒येति॑ प्र—युता॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। अर्बु॑दाय⁠। स्वाहा᳚⁠। न्य॑र्बुदा॒येति॒ नि—अ॒र्बु॒दा॒य॒⁠। स्वाहा᳚⁠। स॒मु॒द्राय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। मद्ध्या॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। अन्ता॑य⁠। स्वाहा᳚⁠। प॒रा॒र्द्धायेति॑ पर—अ॒र्द्धाय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। उ॒षसे᳚⁠। स्वाहा᳚⁠। व्यु॑ष्ट्या॒ इति॒ वि—उ॒ष्ट्यै॒⁠। स्वाहा᳚⁠। उ॒दे॒ष्य॒त इत्यु॑त्—ए॒ष्य॒ते⁠। स्वाहा᳚⁠। उ॒द्य॒त इत्यु॑त्—य॒ते⁠। स्वाहा᳚⁠। उदि॑ता॒येत्युत्—इ॒ता॒य॒⁠। स्वाहा᳚⁠। सु॒व॒र्गायेति॑ सुवः—गाय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। लो॒काय॑⁠। स्वाहा᳚⁠। सर्व॑स्मै⁠। स्वाहा᳚ [५०] (श॒ताया॒ऽष्टात्रि॑ꣳशत्) ॥२०॥
अनुवाकाः पञ्चशती
२० ५०